क्या आपको 60 और 70 के दशक का वह ब्लैक एंड वाइट जमाना याद है जब पर्दे पर थिरकते हुए कदम और नशीली आंखें दर्शकों के दिलों पर छुड़ियां चला देती थी। हंसता हुआ नूरानी चेहरा काली जुल्फ-रंग सुनहरा। जब भी यह अमर गीत बजता है तो एक बेहद खूबसूरत और चुलबुली डांसर का चेहरा आंखों के सामने आ जाता है।
वो एक ऐसी अदाकारा थी जिनके डांस में कोई फूहड़पन नहीं बल्कि एक रूहानी खूबसूरती और मीठा सा गोडवा हुआ करता था। लेकिन शोहरत की बुलंदियों को छूने के बाद अचानक वो कहां गायब हो गई। लोगों को लगा कि शायद समय की धुंध में वो चेहरा हमेशा के लिए खो गया। लेकिन फिर 47 साल के एक बहुत लंबे इंतजार के बाद जब वो 80 साल की उम्र पार कर चुकी थी तो इंटरनेट और सोशल मीडिया पर एक ऐसा चमत्कार हुआ जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया।
। हंसता हुआ नूरानी चेहरा, काले दिल में रंग lसुनहरा, अखियां भूल नहीं। दिल पे हुआ है हाय ये नाद पे जिस नाद पे लैला मिट जाए। उठेगी तुम्हारी नजर धीरे धीरे ये रंग तबीयत क्या कहिए जी क्या कहिए ये रंगे महफिल ये जश्न बहारा ऐसे में यूं ही रोना तड़पा ले जितना चाहे तेरा इंतजार है अभी तो है मुश्किल से दो दिन के के सैया के पहलू में कटती थी रात पूछा ना जाने क्या बात है राज की मेरी मिट्टी में मिल गई जवानी जिसे सुनकर आप भी उनके मुरीद हो जाएंगे। जीवन कला का जन्म 29 जून 1944 को पुणे शहर में हुआ था।
उनके पिता दत्तात्रेय कांबले और माता गंगूबाई दोनों ही 30 के दशक में मूक फिल्मों में जाने-माने कलाकार हुआ करते थे। जीवन कला अपने माता-पिता की इकलौती संतान थी। इसलिए उन्हें बेइंतहा लाट प्यार से पाला गया और उन्हें कभी किसी चीज के लिए संघर्ष नहीं करना पड़ा। उनके जन्म के बाद उनकी मां ने फिल्मों में काम करना छोड़ दिया और अपना पूरा ध्यान अपनी बेटी के भविष्य पर लगा दिया।
उन दिनों उनका परिवार पुणे के मशहूर मंगेशकरवाड़ा में रहा करता था। जहां उनका मंगेशकर परिवार के साथ बहुत ही गहरा और घरेलू रिश्ता बन गया था। यह बात बहुत कम लोग जानते हैं कि जब उनका नामकरण यानी बारशाह हो रहा था तो खुद स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने उनका नाम जीवन कला रखा था। लता दीदी शास्त्र की बहुत अच्छी जानकार थी और उन्होंने उसी दिन भविष्यवाणी कर दी थी कि यह लड़की बड़े होकर पूरी दुनिया में बहुत नाम कमाएगी। लता दीदी की वह भविष्यवाणी आगे चलकर एकदम सच साबित हुई। क्योंकि माता-पिता दोनों कलाकार थे।
इसलिए जीवन कला को अभिनय और नृत्य की कला घुट्टी में पिलाई गई थी। महज 3 साल की उम्र में उन्हें साने गुरुजी की लिखी एक कहानी पर आधारित फिल्म तीन मुलम में काम करने का मौका मिला। जहां उन्होंने नायिका की बेटी का किरदार निभाया। इसके बाद 7 साल की उम्र में साल 1952 में उन्होंने फिल्म अखेर जमले में अभिनेता सूर्यकांत की छोटी बहन का रोल किया। उस दौर में लोग उन्हें बेबी शकुंतला के नाम से जानने लगे थे। बचपन में जब वह पुणे में रहती थी तो वहां के मेलों और गणपति उत्सवों में खूब डांस किया करती थी।
इतनी छोटी सी उम्र में उनका अद्भुत डांस देखकर लोग दीवाने हो जाते थे। पुणे के मंडई के बड़े-बड़े व्यापारी खुशी के मारे उनके गले में असली पैसों की मालाएं पहना दिया करते थे। मानो साक्षात गणपति बप्पा ने उन्हें आशीर्वाद दे दिया हो। उन्होंने नागपुर और अकोला सहित पूरे महाराष्ट्र में अपने डांस का जलवा बिखेरा। पढ़ाई के मोर्चे पर उन्होंने हुजूर बाग के पेशवा स्कूल से छठी कक्षा तक शिक्षा ली और बहुत छोटी उम्र से ही बाला साहेब गोखले गुरु जी से कथक की विविध तालीम हासिल करनी शुरू कर दी। फिर एक दिन लता दीदी ने उन्हें पुणे से मुंबई बुला लिया।
जब जीवन कला मुंबई आई तो शुरुआत में वह वालकेश्वर इलाके में लता दीदी के घर पर रही। दीदी के सानिध्य में रहकर उन्होंने बहुत कुछ सीखा। उन्होंने मंगेशकर परिवार द्वारा चलाई जा रही म्यूजिक एकेडमी सुरीला कला केंद्र को ज्वाइन किया और उनके साथ कई शोज़ भी किए। लता दीदी का आशीर्वाद जीवन कला के लिए किसी बड़े चमत्कार से कम नहीं था। साल 1959 में मशहूर फिल्मकार विजय भट्ट अपनी फिल्म गूंज उठी शहनाई बना रहे थे। लता दीदी ने जीवन कला को इस फिल्म में उनका पहला बड़ा ब्रेक दिलवाया।
इस फिल्म का गाना अंखियां भूल गई है सोना बहुत बड़ा हिट साबित हुआ और बतौर डांसर जीवन कला ने हिंदी सिनेमा में एक धमाकेदार दस्तक दी। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उनका फिल्मी सफर किसी भी बड़े सुपरस्टार से कम नहीं रहा। उन्होंने अपने करियर में 500 से भी ज्यादा हिंदी, मराठी और तमिल फिल्मों में काम किया। फिल्म कल हमारा है में उन्होंने दिग्गज अभिनेता अमजद खान के पिता जयंतके सामने शीला कश्मीरी के साथ ऐसे ना देखो रसिया गाने पर डांस किया था और उसी फिल्म में महान अभिनेत्री मधुबाला भी थी।
फिल्म खानदान में उन्होंने मशहूर कैब डांसर हेलेन के साथ मिट्टी में मिल गई जवानी गाने पर अपने कदम थिरकाए। अगर उनके नायकों की बात करें तो हिंदी सिनेमा में उनके सबसे पहले हीरो फिरोज खान थे। उन्होंने अपने दौर के हर बड़े दिग्गज के साथ स्क्रीन शेयर की। किशोर कुमार, अशोक कुमार, शम्मी कपूर, मनोज कुमार, प्राण, महमूद, मुकरी, मीना कुमारी, वैजयंती माला, माला सिन्हा और गीता दत्त जैसे महान कलाकारों के साथ उनका गहरा सानिध्य रहा। वहीं मराठी सिनेमा में भी उन्होंने दुर्गा खोटे, राजा पराजपे, रमेश देव, सचिन पिलगावरकर, जयश्री गढ़कर और सूर्यकांत जैसे दिग्गजों के साथ कई यादगार फिल्में की। लेकिन उनके करियर का सबसे बड़ा और सुनहरा मील का पत्थर साबित हुई साल 1983 में आए ट्रिक मास्टर बाबूभाई मिस्त्री की फिल्म पारसमणि।
इस फिल्म में मुख्य भूमिकाओं में महिपाल और गीतांजलि थे। लेकिन फिल्म की जान था वह अमर गीत। हंसता हुआ नूरानी चेहरा। यह गीत जीवन कला और नलिनी चुनकर पर फिल्माया गया था। इस एक गाने ने जीवन कला के करियर की दिशा ही बदल दी। इस गीत के लिए उन्होंने सत्यनारायण गुरु जी के निर्देशन में पूरे 8 दिन तक कड़ी मेहनत की थी। जिसका नतीजा आज भी दुनिया सुन और देख रही है। लता दीदी ने सिर्फ उन्हें मौके नहीं दिए थे बल्कि कदम कदम पर उनका मार्गदर्शन भी किया। भालजी पेनांडकर के निर्देशन में बनी फिल्म मराठा तितुका मिलवावा के निर्माता खुद लता दीदी थी और उन्होंने आनंदघन के नाम से इसका संगीत भी दिया था। इस फिल्म का गाना हाथ नका लावो मांझ्या साड़ीला बहुत मशहूर हुआ। इस गाने की शूटिंग के दौरान लता दीदी ने जीवन कला को बड़े प्यार से समझाया था कि डांस बहुत फास्ट नहीं होना चाहिए। उस जमाने में लोग धीरे-धीरे नज़ाकत से डांस करते थे। और ध्यान रखना कि सर का पल्लू नीचे ना गिरे। जीवन कला का नृत्य को लेकर एक बहुत ही साफ और कड़क नजरिया रहा है। उनका मानना है कि डांस कोई भी हो उसमें अपने हावभाव अश्लील नहीं होने चाहिए। डांस में अगर सौंदर्य है तो वह देखने वालों की आंखों में खुद उतर जाता है। वो हमेशा कहती हैं कि डांस के नाम पर कसरत मत करो बल्कि उसमें एक मीठापन लाओ ताकि दर्शक उसका आनंद ले सके। अश्लीलता और गलिच पड़ा डांस के सबसे बड़े दुश्मन है और कलाकारों को इससे कोसों दूर रहना चाहिए। यही वजह थी कि रेशमा रेघानिनी लाल काव्या धांगानिनी जिथे सागरा धारणी मिलते अखे रचा हाथ तुला दंडवत चांदी का बदन सोने की नजर बड़ा कातिल है मेरा यार और उठेगी तुम्हारी नजर धीरे-धीरे जैसे उनके दर्जनों हिंदी और मराठी गीत आज भी लोगों के जुबान पर ताजा है। जहां एक तरफ उनका करियर आसमान छू रहा था। वहीं उनकी निजी जिंदगी में भी कई दिलचस्प मोड़ आए।
एक बार उनके लिए वेस्टइंडीज से राम नाम के एक लड़के का रिश्ता आया था। लेकिन वह अपने माता-पिता को छोड़कर इतनी दूर नहीं जाना चाहती थी। इसलिए उन्होंने मना कर दिया। फिर उनकी जिंदगी में एक बहुत ही खास इत्तेफाक हुआ। मशहूर चरित्र अभिनेत्री सुलोचना दीदी ने जीवन कला के पिता के सामने अपने दत्तक पुत्र का रिश्ता रखा। उनके दत्तक पुत्र का नाम भी राम ही था। राम केकर।
सुलोचना दीदी ने ही नासिक में जीवन कला और राम की पहले मुलाकात करवाई। राम केलकर कोई आम इंसान नहीं थे। वह उस दौर के एक बेहद मशहूर लेखक थे। जिन्होंने आगे चलकर राम लखन, हीरो, खलनायक, विश्वनाथ, कालीचरण और बेईमान जैसे अनगिनत ब्लॉकबस्टर फिल्में लिखी। शादी से पहले रामकेलकर ने जीवन कला के सामने एक शर्त रखी थी कि तुम मुझे कभी छोड़कर नहीं जाओगी। जीवन कला ने उन्हें हां कहा और अपना वह वादा हमेशा निभाया। राम केकर का नाम इंडस्ट्री में इतना बड़ा था कि विदेशी निर्माता भी उन्हें काम के लिए बाहर ले जाना चाहते थे। लेकिन राम ने कभी अपनी पत्नी और बच्चों को अकेला नहीं छोड़ा। साल 1969 में उनकी शादी हुई और उन्होंने अपने तीन बच्चों योगेश, हेमंत और मनीषा की परवरिश के लिए फिल्मों की चमक-धमक से दूरी बना ली। आज उनके बेटे हेमंत एक सफल लेखक और निर्देशक हैं और बेटी मनीषा एक जानीमानी अभिनेत्री हैं। अपने करियर में जीवन कला ने जानकी और दृष्टि जगाची आे निराली जैसी फिल्मों का निर्माण भी किया।
उन्होंने हां मांझा मार्ग एकला वैशाख वर्णवा और पुत्र ब्याहवा ऐसा जैसी फिल्मों के लिए महाराष्ट्र राज्य सरकार के कई प्रतिष्ठित पुरस्कार भी मिले। साथ ही उन्हें इसाक मुजावर के रस रंग पुरस्कार से भी नवाजा गया। शादी के बाद वो लाइमलाइट से बिल्कुल दूर हो गई थी। समय के साथ लोग इस नूरानी चेहरे को भूलने लगे थे। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। कुछ सालों पहले वो मशहूर टीवी शो डांस दीवाने में नजर आई। पूरे 47 साल बाद जब वो कैमरे के सामने आई तो दर्शक उन्हें देखकर खुशी से झूम उठे। और इसके बाद उनकी जिंदगी का एक नया और आधुनिक अध्याय शुरू हुआ।
आज जीवन कला 81 साल की उम्र में भी एकदम फिट और ऊर्जा से भरी हुई है। उन्होंने अपनी अभिनेत्री बेटी मनीषा के साथ मिलकर Instagram पर शॉर्ट वीडियो और रील्स बनाने शुरू किए और देखते ही देखते वह इंटरनेट पर छा गई। आज की नई पीढ़ी उनके उस क्यूट और एवरग्रीन अवतार को बेइंतहा प्यार दे रही है। उनके रील्स पर लाखों लाइक्स और कमेंट की बारिश होती है। 81 साल के इस अमर डांसर ने साबित कर दिया कि कला की कोई उम्र नहीं होती। लता दीदी द्वारा दिया गया उनका नाम जीवन कला यानी जीवन को जीने की कला उन्होंने सच में अपने जीवन में उतार लिया है।