है। क्या तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलापति विजय की कुर्सी पर कानूनी संकट मंडरा रहा है? क्या चुनाव प्रचार में चुनावी खर्च छिपाने, हलफनामे में गड़बड़ी और बच्चों का इस्तेमाल जैसे आरोप, उनकी मुश्किलें बढ़ा सकते हैं? और आखिर मद्रास हाईकोर्ट के नोटिस का मतलब क्या है? क्या इससे उनकी जीत रद्द हो सकती है?
या अभी यह सिर्फ कानूनी प्रक्रिया की शुरुआत है। सारे सवालों के जवाब आपको एक-एक करके इस वीडियो में देंगे। तो चलिए शुरू करते हैं। तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम देखने को मिल रहा है। राज्य के मुख्यमंत्री और टीबीके के संस्थापक थलापति विजय को मद्रास हाई कोर्ट से नोटिस जारी हुआ है। उनकी पैरंबुर और तिरुचरपल्ली ईस्ट विधानसभा सीटों से मिली चुनावी जीत को अदालत में चुनौती दी गई है।
इस मामले में कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि यह भी समझना जरूरी है कि फिलहाल अदालत में सिर्फ नोटिस जारी किया है। अदालत से सिर्फ नोटिस जारी किया गया है। इसका मतलब यह नहीं कि आरोप साबित हो चुके हैं या विजय की जीत रद्द हो गई है। अब पूरा मामला अदालत में सुना जाएगा। अब आपको विस्तार से बताते हैं कि पूरा मामला आखिर है क्या? दरअसल 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में थलापति विजय ने पैरंबपुर सीट से बड़ी जीत दर्ज की थी। उन्हें लगभग 120 365 वोट मिले थे।
जबकि डीएम के उम्मीदवार आरडी शेखर को 6650 वोट मिले। यानी विजय ने करीब 53715 वोटों के बड़े अंतर से जीत हासिल की थी। इसके अलावा उन्होंने तिरुचरपल्ली ईस्ट सीट से भी जीत दर्ज की और बाद में मुख्यमंत्री बने। लेकिन चुनाव परिणाम आने के बाद डीएम के उम्मीदवार आरडी शेखर ने मद्रास हाई कोर्ट में चुनाव याचिका दाखिल की।
उनके साथ दिनेश और इसी के साथ लक्ष्मी नरसिमन ने भी पैरपुर सीट को लेकर याचिकाएं दायर की। वहीं तिरुचरापल्ली ईस्ट से चुनाव हारने वाले डीएम के उम्मीदवार इन्हीं को इधर ने भी विजय की जीत को अदालत में चुनौती दी है। इन सभी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति वी लक्ष्मी नारायण ने मुख्यमंत्री विजय थलापति विजय और भारत निर्वाचन आयोग यानी कि चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है। अदालत ने दोनों पक्षों से तीन सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। कोर्ट ने यह भी कहा है कि चुनाव याचिकाओं का निपटारा 6 महीने के भीतर किया जाना चाहिए। अब सवाल है कि आखिर याचिका में लगाए गए आरोप क्या हैं? सबसे बड़ा आरोप यह है कि चुनाव प्रचार के दौरान चुनाव आयोग के दिशा निर्देशों के खिलाफ बच्चों का इस्तेमाल किया गया। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि ऐसा करना चुनाव नियमों का उल्लंघन है।
दूसरा बड़ा आरोप चुनावी हलफनामे यानी कि फॉर्म 26 से जुड़ा है। याचिका में दावा किया गया है कि पैरंबपुर और तिरुचरापल्ली सीटों के लिए दाखिल किए गए हलफनामे में दो अलग-अलग नोटरी के सत्यापन दर्ज है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इससे ऐसा प्रतीत होता है कि विजय एक ही दिन दो अलग-अलग नोटरी के सामने उपस्थित हुए। जिस पर सवाल उठ रहे हैं। इसके अलावा आरोप लगाए गए हैं कि विजय ने अपने आयकर बकाए की पूरी जानकारी हलफनामे में नहीं दी है। सोशल मीडिया प्रचार पर हुए खर्च को चुनावी खर्च में शामिल नहीं किया गया है।
इतना ही नहीं तय सीमा से अधिक चुनावी खर्च करने का भी आरोप लगाया गया है। याचिका में यह भी कहा गया है कि चुनाव प्रचार के दौरान चर्च और मंदिर परिसरों में प्रचार किया गया जिसे जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत आचरण की श्रेणी में माना जाता है। हालांकि इन सभी आरोपों पर अभी अदालत यानी कि कोर्ट में सुनवाई बाकी हाई कोर्ट में सुनवाई होनी है और मुख्यमंत्री विजय की ओर से जवाब आना अभी भी बाकी है। सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाओं में कुछ तकनीकी खामियां भी बताई और याचिकाकर्ताओं को उन्हें दूर करने का निर्देश दिया। इसके बाद अदालत की रजिस्ट्री को नोटिस जारी करने का आदेश दिया गया। इसी सुनवाई के दौरान मद्रास हाईकोर्ट ने कुछ अन्य चुनाव याचिकाओं पर भी नोटिस जारी किया है। खेल मंत्री आधव अर्जुना की वल्लिकम सीट से जीत को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर भी जवाब मांगा गया है। इसी के साथ-साथ तिरुवनामलाई सीट से डीएमके नेता ईवी बेलू की जीत के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर भी नोटिस जारी हुआ है।
इसके अलावा पेरूदुरई से जीते एस जय कुमार और कांग्रेस विधायक थरगई के साथ-साथ कुछ अन्य मामलों में भी अदालत ने जवाब तलब किया है। अब ऐसे में अहम सवाल यह है कि क्या सिर्फ नोटिस जारी होने से मुख्यमंत्री विजय की थलापति विजय की कुर्सी खतरे में आ गई है? इसका सीधा जवाब है नहीं। नोटिस जारी होना केवल कानूनी प्रक्रिया का एक हिस्सा है। अदालत पहले दोनों पक्षों की दलीलें सुनेगा। सबूतों की जांच करेगा और उसके बाद ही कोई फैसला सामने आएगा। इसीलिए अभी यह कहना कि विजय की सदस्यता रद्द हो जाएगी या मुख्यमंत्री पद चला जाएगा पूरी तरह गलत और जल्दबाजी होगी। हालांकि राजनीतिक नजरिए से यह मामला बेहद ज्यादा अहम माना जा रहा है। क्यों? क्योंकि मुख्यमंत्री बनने के कुछ ही समय बाद उनकी चुनावी जीत अदालत में चुनौती के दायरे में आ गई है। विपक्ष इसे बड़ा मुद्दा बनाने की पूरी कोशिश कर सकता है। जबकि टीबीके की ओर से भी इन आरोपों का जवाब आने की उम्मीद जताई जा रही है। अब सबकी नजर मद्रास हाई कोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई पर है। [संगीत] अदालत के सामने मुख्यमंत्री विजय थलापति विजय और चुनाव आयोग अपना पक्ष रखेंगे। वह भी देखना है क्या कुछ होगा। उसके बाद ही इस मामले की दिशा साफ होगी। फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि तमिलनाडु की राजनीति में यह मामला आने वाले दिनों में काफी ज्यादा चर्चा का विषय बन सकता है। आपकी क्या कुछ राय है? क्या चुनावी मामलों की सुनवाई और तेजी होनी चाहिए? क्या ऐसे मामलों का फैसला तय समय सीमा के भीतर होना जरूरी है? अपनी राय कमेंट्स में जरूर दें। और बाकी देश और दुनिया की तमाम बड़ी अपडेट्स के लिए जुड़े रहिए दैनिक जागरण के साथ। नमस्कार।