एक तरफ देश के प्रधानमंत्री की अपील कि अगले एक साल तक सोना ना खरीदें। दूसरी तरफ जून से शुरू होने वाला शादी का सीजन। देश के बड़े हिस्से में शादी में सोना उतना ही जरूरी है जितना देश की अर्थव्यवस्था का मजबूत होना। तो फिर इस आर्थिक संकट के दौर में प्रधानमंत्री की अपील का असर क्या हुआ?
क्या लोगों ने सोने की खरीद कम कर दी? मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि पीएम की अपील के बाद सोने की खरीदारी कम होने के बजाय बढ़ गई है। सराफे पर भीड़ कम होने के बजाय ज्यादा होने लगी है। लोग में सोना चांदी की खूब खरीद कर रहे हैं। पर सवाल है क्यों? इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक ज्वेलर्स ने बताया कि कस्टमर्स जून में शुरू होने वाले और मिड अगस्त तक चलने वाले शादी के सीजन से पहले किसी भी संभावित नीतिगत बदलाव से बचने के लिए गहने खरीदने की होड़ में लगे हैं। कैसे बदलाव?
आयात शुल्क में बढ़ोतरी, गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स में बढ़ोतरी या सोने की खरीद पर और ज्यादा पाबंदियां लगने का डर। यह डर है क्योंकि पीएम की अपील करने के 2 दिन बाद ही भारत सरकार ने सोने और चांदी पर लगने वाली इंपोर्ट ड्यूटी को 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया। पहले 6% थी अब 15% हो गई। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि लोग बाहर से सोना कम मंगवाएं और देश का विदेशी मुद्रा भंडार बचा रहे।
ऐसा करने के पीछे कारण भी हैं। क्या है? इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक अव्वल तो ईरान युद्ध का असर है। जहां तनाव की वजह से भारत की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है। क्योंकि भारत एक नेट इंपोर्ट वाला देश है। हम चाहे कितनी भी डंगे हां लें। हम बहुत कम एक्सपोर्ट करते हैं और लगभग सारे क्रिटिकल सेक्टर्स में इंपोर्ट पर ही निर्भर हैं। मसलन एनर्जी, इमर्जिंग टेक्नोलॉजी, कटिंग, एज वेपनरी वगैरह-वगैरह सोना खरीदने से भी इसलिए मना किया जा रहा है क्योंकि हम सोना भी आयात ही करते हैं। इस सब में फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व के डॉलर का इस्तेमाल होता है
और जितना डॉलर हम इस्तेमाल करते हैं, उतना ही रुपया टूटता है। वैसे ईरान या सोने की खरीद महज एक छोटू सा कारण है रुपए के इतने शीघ्र हो रहे पतन का। जंग से बहुत पहले से विदेशी निवेशक लगातार अपना पैसा भारतीय बाजारों से निकाल रहे थे क्योंकि दूसरे बाजारों में बेहतर रिटर्न मिल रहा था। इतना ही नहीं मोटी जेब वाले भारतीय निवेशक भी अपना पैसा यहां से निकालकर दूसरे बाजारों में लगा रहे थे।
सरकार ने जब इसे काबू करने की कोशिश की तो मामला बैक फायर कर गया। अब यह ओपन सीक्रेट है कि बीते सालों में आरबीआई ने हर हफ्ते करोड़ों डॉलर खर्च किए हैं।
सिर्फ और सिर्फ रुपए का गिरता मूल्य संभालने के लिए। इसके बावजूद रुपया सेंचुरी मारने की कोशिश में है। जब यह खबर तैयार की जा रही थी तब ₹95.80 हो चुका था। एशिया की प्रमुख मुद्राओं में सबसे खराब प्रदर्शन रुपए का ही है। और इसके अलावा एक और कारण है बढ़ता हुआ खर्च।
भारत में पिछले 10 सालों में सोने चांदी पर होने वाला खर्च 3400 करोड़ से बढ़कर 8 लाख 5000 करोड़ तक पहुंच चुका है जो कि एक रिकॉर्ड स्तर है। सवाल है कि क्या टैक्स बढ़ जाने से सोने की खरीद कम होगी? पिछले 10 साल में सोने के दाम 443% बढ़े हैं। फिर भी भारत में इसकी मांग हर साल औसतन 718 टन बरकरार रही। भारतीय लोग सोने को केवल गहना नहीं बल्कि मुसीबत का साथी भी मानते हैं। शहरों से लेकर गांव तक में इसे इमरजेंसी फंड की तरह स्टोर किया जाता है और तो और भारत में सोने के बदले लोन लेना भी काफी आसान है।
इसलिए लोग इसे खरीदना जारी रखते हैं। दाम चाहे कितना भी बढ़े और ऐसा हो भी रहा है। आज तक की बिजनेस डेस्क ने ऑल इंडिया जेम एंड ज्वेलरी डोमेस्टिक काउंसिल के चेयरमैन राजेश रोकड़े का बयान छापा है। बकौल राजेश पीएम मोदी की अपील करते ही 2 दिनों में शादी के गहनों की बिक्री एवरेज डेली सेल के मुकाबले 15 से 20% तक बढ़ गई है। संभावनाएं जताई जा रही हैं कि बड़ी ज्वेलरी चेन की जो डेली सेल है वह करीब ₹25 लाख तक पहुंच सकती है।
जबकि मीडियम स्केल के ज्वेलर्स की डेली सेल आमतौर पर 15 से 18 लाख के बीच रहती है। आज तक से हुई बातचीत में एक ज्वेलरी ब्रांड के एमडी ने कहा कि कुछ लोग तो नवंबर दिसंबर में होने वाली शादियों के लिए अभी से ही खरीदारी कर रहे हैं क्योंकि उन्हें यह डर है कि सरकार सोने की खरीद पर रोक लगा सकती है। देश के बड़े बुलियन और ज्वेलरी हब में से एक मुंबई के बाजारों में भी व्यापारियों का अनुमान है कि अपील के बाद 2 से 3 दिन में बिक्री लगभग 20% की बढ़ोतरी से दर्ज हुई यानी बढ़ गई। कुल जमा बात यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 मई को देश से जो अपील की उसके बाद सोने की खरीद कम होने के बजाय बढ़ रही है। शादी ब्याह के दिन आ रहे हैं और यहां गोल्ड तो जरूरी है ही।
पीएम की अपील में डेडलाइन कम से कम एक साल की है तो जिन्हें गोल्ड की जरूरत महीने भर बाद है वो हाथ अपने कैसे रोक लें? उल्टे ऐसे लोग जल्दी-जल्दी में ही सोना खरीदने निकल पड़े हैं क्योंकि एक डर है कि किसी भी दिन कुछ भी बदलाव हो सकता है।