समाजवादी पार्टी के अंदर चाचा भतीजे शिवपाल और अखिलेश की जंग देखी। पिता पुत्र के बीच तलखियां देखी लेकिन इस पूरे राजनीतिक शोरशराबे के बीच एक रिश्ता ऐसा था जो हमेशा खामोश लेकिन बेहद सदा हुआ रहा। अखिलेश यादव और उनके सौतेले भाई प्रतीक यादव का रिश्ता। प्रतीक यादव के निधन ने उस शख्सियत को दोबारा चर्चा में ला दिया है जिसने देश के सबसे बड़े राजनीतिक कुनबे का हिस्सा होने के बावजूद कभी भी अपने बड़े भाई के खिलाफ एक शब्द नहीं कहा और ना ही कभी उनकी राजनीतिक राह में रोड़ा बने|
अखिलेश और प्रतीक के रिश्ते को समझने के लिए मुलायम सिंह यादव के पारिवारिक ढांचे को समझना जरूरी है। मुलायम सिंह यादव की पहली पत्नी मालती देवी थी जिनके इकलौते बेटे अखिलेश यादव हैं। वहीं मुलायम सिंह की दूसरी पत्नी साधना गुप्ता थी जिनके बेटे प्रतीक यादव थे। सालों तक साधना गुप्ता और प्रतीक का अस्तित्व पब्लिक लाइफ से दूर रहा। 2003 में जब मालती देवी का निधन हुआ उसके कुछ वक्त बाद मुलायम सिंह ने पब्लिकली साधना गुप्ता को अपनी पत्नी और प्रतीक को अपना बेटा स्वीकार किया। एक सौतेली मां और सौतेले भाई की परिवार में आधिकारिक एंट्री किसी भी
युवा के लिए असहज हो सकती थी। लेकिन अखिलेश और प्रतीक ने इस जटिल पारिवारिक समीकरण को बहुत ही मैच्योरिटी से संभाला। राजनीति में उम्र से ज़्यादा कद देखा जाता है, लेकिन प्रतीक यादव ने हमेशा पारिवारिक मर्यादाओं को सबसे ऊपर रखा। अखिलेश यादव उम्र में प्रतीक से करीब 15 साल बड़े हैं। जो लोग यादव परिवार को करीब से जानते हैं उनका कहना है कि प्रतीक जब भी अखिलेश यादव से मिलते थे तो हमेशा उनके पैर छूकर आशीर्वाद लेते थे। प्रतीक यादव ने हमेशा अखिलेश को बड़े भाई का सम्मान दिया। पब्लिक प्रोग्राम्स परिवार की शादियों और मुलायम सिंह की अंतिम यात्रा के मौके पर भी प्रतीक यादव अखिलेश के पैर छूते दिखे। [संगीत] अखिलेश यादव के
चचेरे भाई आर्यन यादव की शादी 25 नवंबर 2025 को सैफई में लद्दाख की सैरिंग के साथ हुई थी। यह शादी यादव परिवार के लिए खास थी क्योंकि इसमें पूरा कुबा इकट्ठा हुआ था। अखिलेश और डिंपल भी इसमें शामिल हुए। प्रतीक यादव और उनकी पत्नी अपर्णा यादव भी आए। इसी मौके पर प्रतीक अपर्णा ने अखिलेश के पैर छुए। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। प्रतीक के मन में कभी भी यह नहीं रहा
कि वह भी मुलायम सिंह के बेटे हैं और उन्हें भी अखिलेश के बराबर का रसूख चाहिए। अखिलेश ने पब्लिकली या निजी मंचों पर कभी प्रतीक के लिए कोई भी ऐसा शब्द नहीं कहा। दोनों के बीच एक अनकहास समझौता था सम्मान का और अपनी-अपनी हदें तय करने का। फिलहाल इस वीडियो में इतना ही। आप क्या कहना चाहेंगे अखिलेश और प्रतीक के रिश्ते को लेकर? कमेंट सेक्शन में हमें लिखकर जरूर बताएं। वीडियो को लाइक करें, शेयर करें और चैनल को सब्सक्राइब करना बिल्कुल ना भूलें।