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ममता से मिले अखिलेश कुछ बड़ा होने वाला है?

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ब्रॉट टू यू बाय कैंड कैंड डस्टिंग पाउडर चार स्किन प्रॉब्लम्स का एक एक्सपर्ट सशन कैंडेड डस्टिंग पाउडर हटा खुजली लगा कैंडेड समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और सांसद अखिलेश यादव की आज मुलाकात वेस्ट बंगाल की तत्कालीन सीएम ममता बनर्जी से हुई है। हम उन्हें तत्कालीन सीएम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि चुनाव हारने के बाद भी ममता बनर्जी ने इस्तीफा नहीं दिया है। इस बारे में क्या अपडेट है? हमारे साथ शुभम बताएंगे। जी शुभम। ऋतु दो-तीन दिनों से यह पूरी की पूरी भूमिका चल रही थी। सोमवार को आप देखेंगे कि यह चुनाव परिणाम आए। ममता बनर्जी चुनाव हार गई।

मंगलवार को उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस किया और उस दिन पहली बार उन्होंने कहा कि मुझे राहुल गांधी का फोन आया, सोनिया गांधी का फोन आया। सबका उन्होंने जिक्र किया और कहा कि अखिलेश यादव मेरे से मिलने आने वाले हैं। फिर बाद में यह हुआ कि कब तो कल अखिलेश यादव ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और उस पूर्व उस प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने एक पूर्व पीठिका तय कर दी कि मैं जा रहा हूं और आज वो जब गए तो आप देखेंगे वो वीडियो आपने दिखाएंगे भी शायद आप तो उस वीडियो में आप देखेंगे कि अखिलेश यादव उतरते हैं। अभिषेक बनर्जी उनका गले मिलकर स्वागत करते हैं और फिर उसके बाद वो ममता बनर्जी से मिलते हैं। चादर उनको एक शॉल ओढ़ाते हैं। हरा चादर हरा चादर ओढ़ाते हैं। ठीक है? तो ये एक चीज है। तो ये मुलाकात हुई है जो तीन-चार दिनों से चल रही थी। अखिलेश यादव कब जाएंगे? क्या होगा नहीं होगा। तो ये मुलाकात आज एक हुई है।

उसके बाद अखिलेश यादव ने कुछ कहा भी है। जैसे उसमें वो ये कह रहे हैं कि ममता बनर्जी के से भारतीय जनता पार्टी जो है वो घबराती है। ठीक है? के दीदी इनकी आंखों में खटकती हैं क्योंकि भारतीय जनता पार्टी जो है वो एक पुरुषवादी और सामंती सोच वाले लोग हैं तो इसलिए इन्हें महिलाएं खटकती हैं तो वो इसे वो मोड़ दे रहे हैं राजनीतिक रंग दे रहे हैं। जी अखिलेश यादव ने इस मुलाकात के बाद क्या कहा सुनिए। भारतीय जनता पार्टी की आंखों में दीदी खटकती हैं। इसलिए क्योंकि वह आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करती हैं। भारतीय जनता पार्टी सामंती सोच की है। इनके संगी साथी पुरुषवादी लोग हैं। ये कभी भी नारी को और महिला को बढ़ते हुए नहीं देख सकते। इसमें तो होम मिनिस्टर जिम्मेदार हैं। उनके पीए की हत्या कैसे हो गई? यह सवाल मुझसे मत पूछिए। आप tिटर हैंडल होगा आपका। आप टैग करिए होम मिनिस्टर साहब को। पूछिए कि हत्या कैसे हो गई? सोम पपड़ी की तरह झूठ की लेयर है। सोम पपड़ी खाई कभी? एक लेयर के ऊपर दूसरी लेयर झूठ की चढ़ा देते हैं ये लोग। और आपको तो मैं ये कहता हूं ना सब वीडियोस आर्काइव में पड़े हुए हैं। रामपुर का इलेक्शन देख लो। किसी को नहीं निकलने दिया। और यह जो डाटा मैं आपको दिखा रहा हूं यह रामपुर की कास्ट का दिखा रहा हूं मैं। कुदर की कास्ट का दिखा रहा हूं मैं। यह तो डाटा आप देख सकते हो। इलेक्शन कमीशन अंधा है क्या? और ये महिलाओं की तस्वीरें क्या आप भूल गए क्या? आपके अपने चैनल पे भी चली थी तस्वीरें।

ये तस्वीरें आप भूल गए क्या? ये तो आपके चैनल पे भी तस्वीरें चली थी। वीडियो चले थे ये। जी शुभम इस पूरी मुलाकात का पॉलिटिकल सिग्निफिकेंस क्या हो सकता है? देखिए राजनीतिक इशारे अगर आप इस मुलाकात के देखें तो कई हैं। एक तो भारतीय जनता पार्टी है वो मजाक उड़ा रही है। कह रही है कि भाई साहब आप देखें पहले तो आप गए नहीं चुनाव जब लड़ रही थी ममता बनर्जी तब तो उन्होंने आपने उनको अकेला छोड़ दिया और जब ममता बनर्जी अब चुनाव हार गई हैं तो आप झूठ-मूठ का सांत्वना दिखाने या फिर उनका साथ देने का अभिनय कर रहे हैं। तो भारतीय जनता पार्टी की तरफ से यह है। लेकिन अखिलेश यादव जो हैं वह उन्होंने कल प्रेस कॉन्फ्रेंस जो की थी उसमें ही उन्होंने अपना एक इशारा दे दिया था कि उनकी लाइन क्या है और वह क्या एक तो पहले एक तो पहले मैसेजिंग ये है कि इंडिया ब्लॉग जो है इस स्थिति में भी साथ में डटा हुआ है। हम साथ में हैं।

राहुल गांधी का भी ट्वीट है। राहुल गांधी ने भी ट्वीट किया था। ट्वीट यानी अब जो ट्वीट अब एक्स पे पोस्ट जिसे कहते हैं। Twitter अब ट्वीट तो कहना क्या ही है। तो राहुल गांधी ने उसमें ये कहा था कि हम कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को संबोधित किया था कि आप ममता बनर्जी या तृणमूल कांग्रेस की हार पर किसी भी तरह का मजाक ना उड़ाएं। भारतीय जनता पार्टी की जो हार हुई है, उसका जो दूसरे एस्पेक्ट्स हैं कि किस तरीके से वोट चोरी होती है, ये वोटों को मैनेज करते हैं। इलेक्शन कमीशन के साथ मिल जाते हैं और उसके घालमेल के साथ ये चुनाव जीतते हैं। तो उस तरफ एक इशारा है जो कि अखिलेश यादव ने कल कहा भी था कि ये मतगणना नहीं मतगणना अब हो रही है। कल अखिलेश यादव ने एक बात कही थी। तो वही मैसेजिंग वो वहां जाके ये दे रहे हैं और वहां पे जाके शायद एक स्ट्रेटजी भी बने कि आगे किस तरीके से इंडिया ब्लॉक आगे बढ़ेगा वगैरह वगैरह तमाम चीजें। एक इंटरेस्टिंग बात ये है अखिलेश यादव ने कल कही थी शायद आज उन्होंने कहा हो या फिर ममता बनर्जी से इस पर डिस्कशन किया हो। अखिलेश यादव ने कल एक प्रेस कॉन्फ्रेंस किया था क्योंकि अगले साल यूपी में भी चुनाव है तो वो जो पश्चिम बंगाल में जो कुछ भी हुआ है और वहां वहां पे जिस तरीके से तृणमूल की हार हुई है उससे एक मैसेजिंग लेना चाह रहे हैं और वो आगे की तैयारी कर रहे हैं तो उसमें अखिलेश यादव ने एक बड़ी इंटरेस्टिंग बात कही कि जो कोर्ट की प्रोसीडिंग्स हैं सुप्रीम कोर्ट हाई कोर्ट जो भी है

सुप्रीम कोर्ट की जो प्रोसीडिंग्स है अगर वो लाइव हो सकते हैं तो जो मतगणना हो रही है उसकी प्रोसीडिंग लाइव क्यों नहीं हो सकती है तो उनका उन्होंने ये कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट से ये मांग करेंगे या हम ये चाहेंगे चाहेंगे कि जो पश्चिम बंगाल में वोटों की काउंटिंग हुई है उसको जो है उसकी लाइव प्रोसीडिंग्स सामने जनता की रखी जाए। तो हो सकता है कि इस तरह की चीजों पे भी कोई स्ट्रेटजी, कोई रणनीति बनी हो कि वो आगे यहां से किस तरीके से बढ़ेंगे और जाहिर सी बात है एक ये तो है ही कि भाई यहां पे मिलके हम यह दिखा रहे हैं कि भाई इस विकट परिस्थिति में भी हम साथ में खड़े हैं। जी शुभम बस मैं यहां पे एक लाइन ऐड करना चाहूंगी कि जब यह चुनाव चल रहा था तब राहुल गांधी के ही एक्स से एक ऐसा पोस्ट आया था कि उन्होंने टीएमसी के टीएमसी का जो रूल है उसको गुंडा राज कहा था और वहां के कार्यकर्ताओं को टारगेट किया था। पर जब चुनाव का रिजल्ट आया तब राहुल गांधी ने एक्स पर एक पोस्ट किया और अपने ही कार्यकर्ता को बोला कि वह टीएमसी की हार का मजा ना लें और टीएमसी के साथ जो कुछ भी हुआ उसके साथ वह खड़े हैं तो यह चुनाव के पहले यह सॉलिडेरिटी क्यों नहीं देखने को मिली? एक्चुअली क्या है ना कि ये महीन राजनीति है। विपक्ष की भीतर की अंदरूनी राजनीति है।

खासकर राहुल गांधी के सिरे से जो आपने बात कही वो खासकर इसलिए है क्योंकि राहुल गांधी जो इंडिया ब्लॉक है उसका उसको उसके भीतर जो एक उहापोह की स्थिति है या उसमें जो कंट्राडिक्शंस हैं उसमें जो विरोधाभास है उसमें आप देखेंगे कि राहुल गांधी पहले कई बार एसआईआर से लेके दूसरे कई मुद्दों पर बातें उठाते रहे हैं। तो उस समय आप देखेंगे कि ममता बनर्जी या तृणमूल कांग्रेस जो है वो अपनी सुविधा अनुसार कभी आते थे, कभी समर्थन करते थे, नहीं करते थे। तो अब राहुल गांधी को ये मौका मिला है कि पहले चुनाव में उन्होंने तो पूरा जोर लगा दिया ममता बनर्जी के बारे में जो ना कहना चाहिए वो तक कहा कि भ्रष्टाचारी हैं। तमाम बातें कहीं। लेकिन, अब जब ममता बनर्जी कमजोर हो गई हैं, तो वो यह मैसेज दिखाना चाह रहे हैं कि बड़े कैनवास पे कि अपोजिशन हम साथ हैं और मैं बता रहा हूं। मैं डिसाइड कर रहा हूं।

मैं लीडिंग पोजीशन में हूं। मैं डिक्टेट कर रहा हूं ये बात कि जो आम जनता है या जो कांग्रेस के कार्यकर्ता हैं वो मिलके साथ रहे हैं। तो वो दोनों तरह की राजनीति कर रहे हैं। तृणमूल हराने को भी उन्होंने अपनी कोशिश करी और अब ये मैसेजिंग भी है कि हम साथ में हैं। विपक्ष जो है विपक्ष जो है हमारी लड़ाई भारतीय जनता पार्टी से आपस में नहीं है। तो आपने हराया भी और फिर यह भी दिखा रहे हैं। तो ये एक राजनीति है। तो आपने सुना कि इस पूरे मुलाकात का पॉलिटिकल सिग्निफिकेंस क्या है? बाकी इस बारे में जो भी अपडेट्स आएंगे हम आप तक पहुंचाते रहेंगे। देखते रहिए द लन टॉक।

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