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जबलपुर क्रूज़ केस: ड्राइवर फरार, 2 दिन में FIR का आदेश

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जबलपुर स्थित बरंगी डैम में हुए दर्दनाक क्रूज हादसे में जबलपुर की जिला अदालत ने एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। 30 अप्रैल की उस काली तारीख को जिसने भी देखा उसकी रूह कांप गई थी। 13 जिंदगियां पानी में समा गई लेकिन प्रशासन की खामोशी पर अब जबलपुर जिला न्यायालय ने कड़ा प्रहार किया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट डीपी सूत्रकार की अदालत ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए क्रूज चालक और अन्य सदस्यों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।

प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट डीपी सूत्रकार ने समाचार पत्रों और सोशल मीडिया पर वायरल हो रही खबरों को गंभीरता से अध्ययन किया। कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में बेहद सख्त लहजे का इस्तेमाल किया। कोर्ट ने कहा कि क्रूज चालक जो पानी की हर लहर और क्रूज की गतिविधियों से वाकिफ था, वह लोगों को मरता हुआ छोड़कर खुद सुरक्षित निकल आया। कोर्ट ने इसे केवल लापरवाही नहीं बल्कि अपराध माना है। डूबते हुए लोगों को बचाने का प्रयास ना करना चालक की गंभीर लापरवाही मानी गई है जो भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 106 और धारा 110 यानी अपराधिक मानव वध के प्रयास के दायरे में आ सकता है। कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि इस मामले में यदि

एफआईआर दर्ज या निष्पक्ष और कड़ी जांच नहीं की गई तो भविष्य में नाविक या क्रूज संचालक हादसों के दौरान लोगों को असहाय छोड़ने लगेंगे। ऐसी घटनाओं पर कार्यवाही ना होना भविष्य में और भी गंभीर व दर्दनाक हादसों को बढ़ावा देने जैसा होगा। इसलिए इस मामले में उदाहरण पेश करना बेहद जरूरी है। कोर्ट ने बरंगी थाना प्रभारी को सख्त निर्देश दिए हैं कि अगले दो दिनों के भीतर एफआईआर दर्ज की जाए और इसकी सूचना कोर्ट को दी जाए। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि इस मामले की जांच में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वहीं कोर्ट ने उन जाद लोगों की सराहना भी की जिन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर कुछ जिंदगियों को पानी से बाहर निकाला।

बता दें कि जबलपुर के पर्यटन स्थल बरंगी डैम में 30 अप्रैल को खुशियों का माहौल मातम में बदल गया था। शाम के वक्त जब पर्यटक क्रूज पर सवार होकर नर्मदा की लहरों का आनंद ले रहे थे तभी अचानक संतुलन बिगड़ने से क्रूज पलट गया। चीख पुकार के बीच 13 लोग गहरे पानी में समा गए। शुरुआती खबरों में इसे महज एक हादसा बताया जा रहा था। लेकिन जैसे-जैसे चश्मदीदों के बयान सामने आए, यह साफ हो गया

कि यह एक हादसा नहीं बल्कि निरशंस लापरवाही थी। क्रूज पर क्षमता से अधिक लोग सवार थे या नहीं और सुरक्षा मानकों जैसे लाइफ जैकेट की अनदेखी की गई थी या नहीं, यह तमाम सवाल अब जांच का मुख्य केंद्र होंगे। जबलपुर कोर्ट के इस स्वतः संज्ञान ने उन 13 परिवारों के जख्मों पर मरहम लगाने का काम किया है जिन्होंने अपनों को खोया है। यह आदेश उन रसूखदारों के लिए भी एक बड़ी सबक है जो पर्यटन के नाम पर लोगों की जान से खिलवाड़ करते हैं। अब सबकी नजरें बरंगी पुलिस पर टिकी है कि वह 2 दिन के भीतर क्या कार्यवाही करती है। इस अपडेट पर आपका क्या कहना है? कमेंट कर हमें जरूर बताएं।

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