आशा भोसले जी को याद करते हुए रिसेंटली अरुणाई ईरानी ने एक इंटरव्यू दिया था जिसमें उन्होंने कहा था कि आशा भोसले ने मुझे रोते हुए कहा था कि मैंने अपनी बहन के रिजेक्टेड गानों से अपना यह सुनहरा करियर बनाया है। ऐसा ही एक गाना था दम मारो दम जो कि हरे रामा हरे कृष्णा फिल्म का था। इस फिल्म में जीना तमान थी, देवांद थे और फिल्म 1971 में आई थी। आर डी बर्मन साहब ने इस फिल्म का म्यूजिक दिया था।
इस फिल्म की काफी कुछ शूटिंग नेपाल में हुई थी और जिस वक्त फिल्म की शूटिंग हो रही थी तब आरडी बर्मन को महसूस हुआ कि एक गाना इस फिल्म में हिप्पी कल्चर पर भी होना चाहिए क्योंकि फिल्म की थीम ही ऐसी है और वहां पर आर डी बर्मन के साथ आनंद बक्शी भी मौजूद थे और आर डी बर्मन ने आनंद बक्शी को कहा कि हिप्पी कल्चर पर एक गाना लिखो और तब उन्होंने गाना लिखा दम मारो दम मिट जाए गम बोलो सुबह शाम हरे कृष्णा हरे राम गाना बहुत शानदार लिखा गया था और यह गाना आर डी बर्मन गवाना चाहते थे लता मंगेशकर और उषा उत्तुप से।
उषा उत्तुप उस वक्त तक क्लब्स में गाना गाती थी और देवांद ने ही उन्हें रिकॉग्नाइज किया था और आरडी बर्मन से इंट्रोड्यूस करवाकर कहा था कि आप इनकी आवाज भी यूज कर सकते हैं इस फिल्म के लिए। जीना तमान ने आज एक पोस्ट की। उसमें भी उन्होंने यह कंफर्म किया कि इनिशियली लता मंगेशकर और उषा उत्तुप ही दम मारो दम गाना गाने वाली थी। लेकिन बाद में आरडी बर्मन के प्लांस में चेंज था और उन्होंने आशा भोसले से यह गाना गवाया। हालांकि जीनत अमान ने मेंशन नहीं किया कि आखिर लता मंगेशकर ने दम मारो दम गाना क्यों नहीं गाया।
जो लोग लता मंगेशकर को जानते हैं वह बखूबी समझते हैं कि लता मंगेशकर कभी भी ऐसा गाना नहीं गाएंगी जिसमें व्गैरिटी हो या जो गलत चीज सिखाता हो जो एक जो एक नेगेटिव साइड सोसाइटी की दिखाता हो। यही वजह है कि लता मंगेशकर ने दम मारो दम गाना गाया ही नहीं। और तो और देवानंद भी तैयार नहीं थे इस गाने को फिल्म में रखने के लिए क्योंकि उन्हें डर था कि यह गाना बैन हो सकता है। एक तरफ आप दम मारो दम कह रहे हो दूसरी तरफ आप कह रहे हो बोलो सुबहशाम हरे कृष्णा हरे राम तो कहीं ना कहीं यह अगेंस्ट जाएगा और यह गाना बैन हो जाएगा। तो देवानंद ने भी इस गाने को सपोर्ट नहीं किया था।
बाद में आर डी बर्मन और आशा भोसले जो उस वक्त काफी क्लोज फ्रेंड्स बन चुके थे। उन्होंने देव साहब को कन्विंस किया कि यह गाना फिल्म में होना चाहिए। देव साहब पर माने और फाइनली आर डी बर्मन ने सिर्फ आशा भोसले से यह गाना गवाया और यह गाना फिल्म का सबसे सुपरहिट गाना रहा। यंगस्टर्स में तुरंत यह गाना क्लिक हुआ और आज भी यह गाना पसंद किया जाता है।
चाहे उस पुराने क्लासिक वर्जन में हो या फिर नए रिमिक्स वर्जन में हो। यह गाना हिट है। और आशा भोसले ने अपनी जो स्टाइल इतने सालों में डेवलप की थी, वह इसी गाने से इस्टैब्लिश हुई और आशा भोसले ने लता मंगेशकर से हटकर अपनी एक पहचान बना ली थी। इसके बाद आशा भोसले की ऐसी स्थिति नहीं थी कि वह लता के रिजेक्टेड गाने गाकर जिंदगी गुजारे या करियर बनाए।