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IPS अंशिका वर्मा और के के बिश्नोई की शादी पर लोगों ने उठाए सवाल

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सोशल मीडिया पर इन दिनों एक शादी काफी चर्चा में है। आईपीएस अंशिका वर्मा और एसपी के के बिश्नोई की शादी और उनके ग्रैंड रिसेप्शंस को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। 2 करोड़ की रिफेंडर लाखों की घड़ी और चश्मा तीन-तीन ग्रैंड रिसेप्शन। अब लोग पूछ रहे हैं इतनी सैलरी में यह सब कैसे पॉसिबल है? क्या सच में कोई गड़बड़ है या फिर यह सिर्फ अधूरी जानकारी पर बना नैरेटिव है? आज इस वीडियो में चलिए हम समझते हैं आखिर क्या माजरा है। दरअसल प्रयागराज में बरेली एसपी अंशिका वर्मा और संभल एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई का रविवार को एक और रिसेप्शन हुआ। इसमें बिश्नोई नए लुक में नजर आए।

शादी में जहां उनकी मूछें चर्चा का विषय बनी। वहीं रिसेप्शन में उनका क्लीन शेव लुक देखकर लोग हैरान हो गए। उन्होंने बंद गले का ब्लैक कलर का सूट पहना। वहीं अंशिका लाल रंग के लहंगे में काफी खूबसूरत दिखी। अब इस रिसेप्शन को लेकर सोशल मीडिया पर कई पोस्ट वायरल हो रहे हैं। जिनमें दावा किया जा रहा है कि एसपी के के बिश्नोई 2017 से सेवा में हैं। आईपीएस अंशिका वर्मा 2021 से सेवा में हैं। उनकी कुल कमाई लगभग एक से ₹1.5 करोड़ के आसपास बनती है और इसी आधार पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब इतनी कमाई है तो इतनी ग्रैंड शादी कैसे? लेकिन क्या सिर्फ सैलरी से ही किसी की फाइनेंशियल कैपेसिटी तय होती है? चलिए अब देखते हैं सोशल मीडिया पर लोगों ने क्या-क्या रिएक्शन और दावे किए हैं। एक यूजर ने लिखा आज एसएसपी के के बिश्नोई और आईपीएस अंशिका वर्मा की पोल खुल गई। 2 करोड़ की रिफेंडर कार, 3 लाख का चश्मा, 4 लाख की घड़ी, तीन रिसेप्शन पार्टियां।

इन लोगों को जितने दिनों से शादी की पार्टियां चल रही हैं। अभी तक कोई आम नागरिक होता तो उसके घर पर ईडी या सीबीआई सबकी रेट पड़ जाती। दोनों ने जब से नौकरी ज्वाइन की कुल कमाई लगभग ₹1 करोड़ 30 लाख के आसपास है। केके जी 2017 से सेवा में है उनका वेतन ₹82,300 के हिसाब से लगभग ₹80 लाख बनता है। अंशिका जी 2021 से हैं। उनका वेतन ₹58,500 के हिसाब से लगभग ₹47 लाख बनता है। अगर यह लोग दिखावे के लिए लोन लेकर शादी कर रहे हैं तब तो ठीक है। नहीं तो बहुत बड़ा स्कैम चल रहा है क्योंकि इनकी सैलरी में तो इतनी ग्रैंड शादी पॉसिबल नहीं है। एक और लिखा आईपीएस अंशिका वर्मा और एसपी के बिश्नोई का कल तीसरा रिसेप्शन हुआ।

केके जी 2017 से सेवा में आए। उनका वेतन ₹82,300 के हिसाब से ₹80 लाख बना। अंशिका जी 2021 से आई। उनका वेतन 78,500 के हिसाब से 47 लाख बना। इतने पैसों में सर लाखों का चश्मा घड़ी भी पहन लेते हैं। [संगीत] डिफेंडर पर बारात ले जाते हैं। तीन-तीन ग्रैंड रिसेप्शन भी कर लेते हैं। सर का मैनेजमेंट देखकर मैं तो मुरीद हो गया हूं। इन सभी पोस्टों पर कुछ-कुछ लोगों ने अपने रिप्लाई भी दिए। एक यूजर ने लिखा अरे भैया बिश्नोई का परिवार पहले से सक्षम है, धनवान है। दूसरी बात बेसिक सैलरी जो बता रहे हो उससे ज्यादा तो पीडीजी के शिक्षक की है।

मुझे समझ आ रहा है कि तीन-तीन भोज हुआ बुलाया एक में नहीं तो बुरा तो लगेगा ही। एक और ने लिखा बिना पूरी जानकारी के आरोप लगाना सही नहीं होता। सच और अफवाह में फर्क समझना जरूरी है। एक और लिखा यह भी तो हो सकता है कि इनका परिवार संपन्न हो इसलिए इतनी पार्टियां हो रही हो। दरअसल आपको बता दें कि आईपीएस और एसपी लेवल के ऑफिसर्स की सैलरी सेवंथ पे कमीशन के मुताबिक होती है। स्टार्टिंग सैलरी आईपीएस 56,000 पर मंथ एसपी एसएसपी लेवल पर सैलरी 78,000 से 1 लाख तक जा सकती है। लेकिन यह सिर्फ बेसिक सैलरीज हैं। इसके अलावा उन्हें मिलते हैं डीए यानी डियरनेस अलाउंस, एचआरए, सरकारी गाड़ी प्लस ड्राइवर, सिक्योरिटी स्टाफ, मेडिकल फैसिलिटीज, ट्रैवल अलाउसेस, फोन और इलेक्ट्रिसिटी बेनिफिट्स [संगीत] यानी टोटल पैकेज सैलरी से कहीं ज्यादा होता है।

अब सबसे जरूरी बात सरकारी अधिकारी की लाइफस्टाइल सिर्फ उतनी सैलरी से तय नहीं होती। इसके पीछे कई फैक्टर्स होते हैं। फैमिली बैकग्राउंड बहुत से ऑफिसर्स पहले से ही फाइनेंशियली स्ट्रांग फैमिली से आते हैं। सेविंग एंड इन्वेस्टमेंट्स कई सालों की सेविंग्स इन्वेस्टमेंट्स प्रॉपर्टी आदि। फैमिली कंट्रीब्यूशन इन वेडिंग। शादी में खर्च अक्सर पेरेंट्स और उनके रिलेटिव्स भी उठाते हैं। शादी में एक्सपेंसिव गिफ्ट मिलना आम बात होती है। कुछ लोग लोन या पर्सनल अरेंजमेंट्स भी करते हैं। यानी सिर्फ सैलरी वर्सेस खर्च देखकर कंक्लूजन निकालना सही नहीं है। आजकल सोशल मीडिया पर ट्रेंड है हाफ इंफॉर्मेशन और फुल ओपिनियन। लोग नंबर्स जोड़कर सीधा कंक्लूजंस निकाल रहे हैं। इतनी सैलरी इतना खर्च पॉसिबल नहीं तो उसको स्कैम बता देते हैं।

लेकिन रियलिटी इतनी सिंपल नहीं होती। देखिए सवाल उठाना गलत नहीं है। ट्रांसपेरेंसी भी जरूरी है लेकिन बिना प्रूफ के किसी पर आरोप लगाना गलत है। सोशल मीडिया ट्रायल करना गलत है। अगर कोई इर्रेगुलरिटी है तो जांच एजेंसीज हैं। लेकिन अगर नहीं है तो यह सिर्फ कैरेक्टर डैमेज है। हर दिखने वाली चीज करप्शन नहीं होती और हर ग्रैंड लाइफस्टाइल इललीगल नहीं होता। आज की बिगेस्ट प्रॉब्लम यही है कि हम पूरी कहानी जाने बिना जजमेंट पास कर देते हैं। सच यह है कि सैलरी एक फैक्टर है लेकिन पूरी कहानी नहीं। तो आप क्या सोचते हैं? कमेंट सेक्शन में हमें लिखकर जरूर बताएं। वीडियो को लाइक करें, शेयर करें और चैनल को सब्सक्राइब करना बिल्कुल ना भूलें।

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