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किस मजबूरी के चलते आशा जी ने लिया था सुसाइड का फैसला।

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उस सक्सेस की बात ही कुछ अलग है जो सक्सेस उस वक्त मिले जब आप अपनी जिंदगी के सबसे टफ दौर से गुजर रहे हो और आशा भोसले की सक्सेस ऐसी ही सक्सेस है। जिस वक्त आशा भोसले जी अपने करियर का बेस्ट काम कर रही थी। अपने करियर के सदाबहार गाने दे रही थी। उस वक्त उनकी पर्सनल लाइफ में तबाही मची हुई थी। वो एक ट्रेजडी से उभरती भगवान उनके लिए दूसरी ट्रेजडी तैयार रखता। तो आज आशा भोसले की उसी ट्रैजिक लाइफ के बारे में हम बात करेंगे कि कैसे उन्हें अपनी जिंदगी में सक्सेस और ट्रेजडी साथ-साथ देखनी पड़ी। सबसे पहली ट्रेजडी 9 साल की उम्र में पिता का गुजर जाना।

जब बच्चों के खेलने की उम्र होती है उस वक्त आशा भोसले को अपनी बड़ी बहन लता मंगेशकर के साथ काम करके घर चलाना पड़ रहा था। वो अपनी दीदी के साथ फिल्मों में काम करती और गाने गाती और उससे जो पैसा मिलता उससे घर का पेट पालती और घर चलाती। इतना ही नहीं पिता के गुजर जाने के बाद उन्हें स्कूल भी मजबूरी में छोड़ना पड़ा क्योंकि स्कूल फीस भरने के पैसे नहीं थे। लता दीदी स्कूल में आशा भोसले को अपने साथ लेकर जाती थी। लेकिन स्कूल वालों ने कह दिया कि एक फीस पर दो बच्चों को हम नहीं पढ़ने दे सकते।

यही वजह है कि जब आशा भोसले को स्कूल में नहीं पढ़ने दिया तो लता मंगेशकर ने भी स्कूल छोड़ दिया और कम उम्र में ही उन्हें पढ़ाई छोड़नी पड़ी जिसका रिग्रेट आशा भोसले को अपनी लाइफ के एंड तक रहा। उन्होंने अपने एक इंटरव्यू में कहा था कि अगर मैं पढ़ी लिखी होती मुझे अंग्रेजी आती तो मैं अंग्रेजी फिल्मों का म्यूजिक भी गाती क्योंकि मेरा स्टाइल ऐसा है इंग्लिश म्यूजिक में भी मेरा सिंगिंग स्टाइल बहुत जमता।

ट्रेजडी नंबर टू 16 साल की उम्र में एक ऐसा कदम उठाना जिससे घर वालों से दूर हो जाना और पर्सनल लाइफ में तबाह हो जाना। 16 साल की उम्र में आशा भोसले ने लता मंगेशकर के मैनेजर गणपत राव भोसले से शादी कर ली। गणपत राव आशा भोसले से 20 साल बड़े थे और इस शादी से आशा भोसले के परिवार वाले उनसे खफा हो गए। इनफैक्ट लता मंगेशकर ने आशा भोसले के इस कदम को बहुत इरिस्पांसिबल कदम ठहराया था और कहा था कि परिवार की जिम्मेदारी पूरी मेरे ऊपर डालकर आशा निकल गई। इसी वजह से दोनों बहनों के बीच भी रिश्ते बिगड़े कई सालों तक आशा भोसले और लता मंगेशकर के बीच बातचीत बंद रही। लता मंगेशकर आशा भोसले के लिए मदर फिगर थी और उनके इस कदम ने उन्हें अपनी मां जैसी बहन से ही दूर कर दिया था। ट्रेजडी नंबर थ्री घरवालों को छोड़कर जिस शख्स से शादी की उस शख्स ने ही धोखा दे दिया। गणपत राव जिससे आशा भोसले ने शादी की वो काफी अब्यूसिव हस्बैंड था। वो कई बार आशा भोसले को पीटता उनके साथ बुरा बर्ताव करता। गणपत राव के परिवार वाले भी आशा भोसले को टॉर्चर करते। आशा भोसले ने जैसेतैसे उस टाइम में अपना मन काम में लगाने की कोशिश की तो उस वक्त उन्हें म्यूजिक कंपोजर्स यह कहकर रिजेक्ट करते थे कि तुम्हारी आवाज में वो प्लेबैक सिंगिंग वाली क्वालिटी नहीं है। उस दौरान शमशाद बेगम गाने बहुत पसंद किए जाते थे और साथ ही लता मंगेशकर जी को भी भर-भर कर काम मिल रहा था। लेकिन आशा भोसले या तो रिजेक्ट हो जाती और अगर उन्हें कोई काम मिलता तो वह रिजेक्टेड काम होता या फिर कोई लो बजट फिल्म का गाना होता। यानी कि पर्सनल लाइफ और प्रोफेशनल लाइफ दोनों जगह आशा भोसले मुसीबतों का सामना कर रही थी।

लेकिन उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी थी। आशा वो अपने नाम पर खरी उतर रही थी। सबकी जिंदगी में एक पॉइंट आता है जब आप अब्यूज और वायलेंस को ना कहने का डिसीजन ले लेते हैं। आशा भोसले ने वो डिसीजन उस वक्त लिया जिस वक्त वो 27 साल की उम्र में अपने तीसरे बच्चे के साथ 4 महीने प्रेग्नेंट थी। उस टाइम उनके ससुराल वालों ने उनके ऊपर ऐसी बिताई कि उन्हें घर छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया गया। आशा भोसले के अपने परिवार से भी रिश्ते खराब थे। उन्हें पता ही नहीं था कि उन्हें कहां जाना है। यही वजह है कि उन्होंने जैसा खतरनाक कदम उठाया। उन्होंने अपने आप को खत्म करने की कोशिश की। हालांकि किस्मत उनके साइड थी। उन्हें आगे जाकर नाम रोशन करना था। एक लेजेंड बनना था। उनकी जान बची और 4 महीने प्रेग्नेंट बच्चा जो था उसे भी उन्होंने जन्म दिया आनंद भोसले के रूप में। और यही वो टाइम था जब उन्होंने अपना ससुराल छोड़ा। अपने तीनों बच्चों को लेकर वो अपने परिवार के पास लौट गई। अब आशा भोसले सिंगल थी। तीन बच्चों की जिम्मेदारी उनके ऊपर थी और काम करना था। इंडस्ट्री में जब भी वो काम करने जाती तो उनके वॉइस का कंपैरिजन उनकी बहन से होता और उन्हें हर जगह से फीडबैक यही मिलता कि जब लता जी अवेलेबल है तो हम आशा जी से क्यों गाना गवाए। तब ओपी नयर साहब से आशा भोसले की मुलाकात हुई और उन्होंने आशा भोसले को ग्रूम करना शुरू किया और कहा कि तुम्हें सिंगिंग तो आती है लेकिन अब तुम्हें अपनी अलग स्टाइल बनानी पड़ेगी। अगर तुम अपनी स्टाइल बना लोगी तो तुम अपनी अलग पहचान बना पाओगी। वरना तुम्हारा कंपैरिजन हमेशा तुम्हारी बहन लता मंगेशकर से होगा। आशा भोसले की आवाज अच्छी थी। सिंगिंग वो जानती थी लेकिन उसके बावजूद उन्हें मेहनत करनी पड़ी। उन्हें अपनी स्टाइल निखारनी पड़ी कि क्या स्टाइल मैं अपनाऊं। मैं अपनी बहन से अलग तरह का गाना गा पाऊं और लोग कह सके कि यह लता ने नहीं यह आशा ने गाया है। उस स्टाइल को डेवलप करने में सालों लग गए और वो स्टाइल जब डेवलप हुई तो लोगों ने उस स्टाइल को भी इनिशियली तो साइडलाइन करने की कोशिश की। उनसे सिर्फ बोल्ड गाने गवाए जाते। पिया तू अब तो आजा दम मारो दम। आशा भोसले ने जान फूंक दी इन गानों में। आज यह गाने बेमिसाल है। लेकिन उस दौरान इन गानों को बैन किया गया था। दम मारो दम को तो रेडियो और दूरदर्शन पर बैन किया गया था। और हमें यह भूलना नहीं चाहिए कि उस वक्त आशा भोसले अपने करियर के सबसे टफ दौर में थी। पर्सनल लाइफ में तीन बच्चों की जिम्मेदारी उनके ऊपर थी। मार्केट में अपनी ही बहन से कंपटीशन था और उन्होंने सालों लगाए अपनी ये अलग आवाज निखारने में। लेकिन उस आवाज को भी साइडलाइन किया गया।

उसे आइटम नंबर्स की आवाज बनाया गया। और यही थी उनकी जिंदगी की तीसरी ट्रैजेडी कि अच्छी सिंगर होते हुए भी उन्हें वह काम नहीं मिल पा रहा था जिसकी वह हकदार थी क्योंकि वह सारा काम उनकी सिस्टर लता जी को जा रहा था और लता जी तो थी ही बेमिसाल लेकिन एक टाइम ऐसा भी आया जब आशा वर्सेस लता हुआ फिल्म इंडस्ट्री में और यह थी उनकी जिंदगी की चौथी ट्रेजडी मार्केट वालों ने दोनों बहनों को आमने-सामने कर दिया। एक टाइम ऐसा आया कि लता मंगेशकर और आशा भोसले के बीच कंपटीशन की वजह से दूरियां इतनी ज्यादा बढ़ गई कि दोनों बहनें एक दूसरे से बात भी नहीं करती थी।हां दोनों बहनें एक दूसरे के काम पर नजर जरूर रखती थी क्योंकि दोनों के घर में कॉमन मेड आया करती थी और वो मेड इधर की बात उधर उधर की बात इधर बताती थी। किस बहन ने कौन सी फिल्म में कौन सा गाना गाया है? किसका क्या काम चल रहा है? किसका कौन सा वर्ल्ड टूअर है। म्यूजिक कंपोजर्स में भी राय बट गई थी। कुछ कंपोजर्स थे जो सिर्फ लता जी के साथ ही काम करते थे और कुछ कंपोजर्स थे जो सिर्फ आशा जी के साथ ही काम करते थे और कुछ कंपोजर्स ऐसे थे जो चार गाने लता जी से गवा देते थे और आशा जी को भी खुश करने के लिए एक या दो गाने उनसे गवा देते थे। इनफैक्ट इन दोनों बहनों की राइवलरी पर फिल्म इंडस्ट्री में एक फिल्म भी बनी जिसका नाम था सास। इंडस्ट्री में कई ऐसे किस्से हैं जिनमें कहा जाता है कि जब भी लता मंगेशकर और आशा भोसले की आवाज किसी एक गाने में होती थी तो दोनों बहनें एक दूसरे की शक्ल बिना देखे रिकॉर्डिंग करती थी। एम एक का माइक राइट हैंड साइड, दूसरी का माइक लेफ्ट हैंड साइड।दोनों एक दूसरे की तरफ पीठ करके गाने रिकॉर्ड किया करती थी। और तो और इंडस्ट्री की अगर कोई पार्टीज होती थी तो म्यूजिक कंपोजर्स लता जी की गुड बुक्स में अपना नाम दर्ज करवाने के लिए सिर्फ लता जी को ग्रीट करते। आशा जी को ग्रीट नहीं करते थे। लेकिन कहते हैं ना कि वक्त सारे घाव भर देता है। दोनों बहनों के साथ यही हुआ। जैसे-जैसे वक्त गुजरा, दोनों के बीच की जो कड़वाहट थी, वो निकली और दोनों में फिर से पहले जैसा प्यार हो गया। कहें तो आशा जी की लाइफ का यह रेयर पैच था, जो खुशियों से भरा था। उनकी बहन के साथ उनकी अच्छी बन रही थी। उनके गाने दुनिया भर में मशहूर हो रहे थे। उनके सिंगिंग स्टाइल को बहुत पसंद किया जा रहा था। एक अलग ही जॉनर उन्होंने अपने लिए क्रिएट कर दिया था और उनकी पर्सनल लाइफ भी खुशियों से भर गई थी। बच्चे बड़े हो रहे थे और उनकी जिंदगी में एक नए शख्स की एंट्री हुई आर डी बर्मन की यानी कि पंचमदा की। दिस वाज़ अराउंड 1980 जब आशा भोसले सभी तरफ से खुश थी। लेकिन यह खुशियां भी उनकी जिंदगी में ज्यादा समय नहीं टिकी। 1994 में आशा भोसले ने अपने लव ऑफ लाइफ पंचमदा को खो दिया और यह उनकी जिंदगी की एक और बड़ी ट्रेजडी थी। पंचमदा के साथ आशा भोसले एक बेहतरीन म्यूजिक बना रही थी। पंचमदा के साथ उनकी ट्यूनिंग भी बहुत अच्छी थी। इंडस्ट्री में शानदार काम हो रहा था।

आशा भोसले की जिंदगी भी अच्छी बीत रही थी। लेकिन अचानक से भगवान ने पंचमदा को अपने पास बुला लिया। आशा की जिंदगी एक बार फिर से खाली हो गई। आशा जी की पर्सनल लाइफ में एक बार फिर से सूनापन आ गया। इस ट्रेजडी को भी आशा भोसले ने वैसे ही हैंडल किया जैसे उन्होंने बाकी ट्रेजडीज को हैंडल किया। उन्होंने बहुत काम किया।अपने बच्चों में मन लगाना शुरू किया। लेकिन तभी उनकी बेटी वर्षा की जिंदगी एक टफ दौर से गुजर रही थी। वर्षा ने अपने बेस्ट फ्रेंड को खो दिया था और उसकी वजह से वह बुरी तरह डिप्रेशन में चली गई थी। कई बार ऐसा हुआ जब वर्षा ने सुसाइड करने की कोशिश की। आशा भोसले वर्ल्ड टुवर्स कर रही थी। वह काम कर रही थी लेकिन उन्हें अपनी बेटी वर्षा की हमेशा चिंता सताए रखती थी कि कहीं वर्षा कोई कदम उठा ना ले। और यह डर उनका सच हुआ ईयर 2012 में जब सिंगापुर में आशा भोसले अपने बेटे आनंद के साथ एक कॉन्सर्ट करने गई थी और उनके मुंबई के घर से उन्हें वहां कॉल आता है। उन्हें बताया जाता है कि उनकी बेटी वर्षा ने आत्महत्या कर दी है। आशा भोसले के ऊपर उस दिन दुखों का पहाड़ गिर गया था। एक मां के लिए सबसे टफ बात यह होती है कि अपने सामने अपनी बेटी की मौत देखना। आशा भोसले यह खबर सुनते ही बेहोश हो गई। उनके बेटे आनंद ने उन्हें संभाला। उन्हें भारत लाया गया और उन्होंने दिल पर पत्थर रख के अपनी बेटी को यह अंतिम विदाई दी। ट्रेजडीज का सिलसिला यहीं खत्म नहीं हुआ। बेटी के जाने के दुख को आशा भोसले ने भुलाया ही था कि 2015 में उन्हें एक और बुरी खबर मिली कि उनके बड़े बेटे हेमंत की की वजह से हो गई। जब इतने कम समय में अपने दिल के दो टुकड़ों को आशा भोसले जी ने खो दिया तो उनकी हिम्मत नहीं हुई कि वह माइक हाथ में उठा ले और गाना गा ले। उन्होंने फोन पर लोगों से बात करना बंद कर दिया था। घर से निकलना बंद कर दिया था और गाना भी बंद कर दिया था। तब आशा भोसले के ब्रदर हृदयनाथ भोसले ने उन्हें जिंदगी की कड़वी सच्चाई से रूबरू करवाया। उन्होंने आशा भोसले को यह नहीं कहा कि यह दुख है यह टल जाएगा या तुम्हारे साथ ऐसा हुआ। यह बदकिस्मती थी। यह सॉफ्ट बातें उन्होंने नहीं की। उन्हें हार्ड हिटिंग सच्चाई बताई और कहा कि शायद यह कर्म तुम लिखवा कर आई हो।तुम शापित हो कि तुम्हारी जिंदगी में यह सारी ट्रेजडीज भी होगी। लेकिन उनके साथ ही तुम्हें जो गाना गाने की ड्यूटी दी गई है, भगवान ने जो तुम्हें कला दी है, उसे भी तुम्हें करते रहना होगा। आशा भोसले ने एक इंटरव्यू में बताया था कि मेरे भाई ने मुझसे कहा कि तुम भगवान के दरबार में एक गंधर्व की तरह हो। वह गंधर्व जिसे श्राप देकर भेजा गया है तो तुम्हें यह दुख भोगना ही होगा। लेकिन इसके बावजूद तुम्हें इस दुख के बारे में ना कहीं बात करनी है ना कहीं यह दुख दिखाना है। क्योंकि जो हर समय रोता रहता है उससे लोग दूर भागते हैं। कौन तुम्हारे साथ रोज-रोज़ रोने बैठेगा। तुम दुख को अपने अंदर रखो और बाहर हंसी और खुशियां बिखेरो। अपने भाई की यही बात आशा भोसले ने मानी और उन्होंने एक बार फिर से माइक पकड़ा और फिर से उन्होंने गाना गाना शुरू किया। वरना आशा भोसले ऑलरेडी म्यूजिक छोड़ चुकी थी।

गुजरते वक्त ने और इन ट्रेजडीज ने आशा भोसले जी को बहुत स्ट्रांग हार्टेड बना दिया था।लेकिन उनका दिल एक बार फिर से तब टूट गया जब उन्होंने अपनी मां समान दीदी लता दीदी को खो दिया। लता मंगेशकर जी के जाने का तो पूरे देश को दुख था। तो समझ सकते हैं कि उनके परिवार वालों पर क्या गुजरी होगी और स्पेशली आशा भोसले पर जिन्हें उंगली पकड़ कर लता मंगेशकर ने संगीत सिखाया और म्यूजिक के गलियारों में वेलकम किया। इस इंसिडेंट ने एक बार फिर से आशा भोसले को तोड़ दिया था। हालांकि इस वक्त तक वो इतनी मैच्योर तो हो चुकी थी कि उन्हें पता था जो आया है दुनिया में उसे जाना ही होगा और उनकी लाइफ में तो ऐसा सीन हो गया था कि लोग आते कम थे लेकिन जा ज्यादा रहे थे और इस चीज से उन्होंने समझौता कर लिया था। दुख को अपने अंदर रखती आशा जी और हमेशा खुशियां बिखेरी। यह खुशियां उनके गानों में, उनकी आवाज में झलकती और लता जी से आशा जी का जुड़ाव तो यही दिखता है कि लता मंगेशकर और आशा भोसले जी की उम्र में 4 साल का फर्क था और दोनों की भी 4 साल के गैप में हुई। लता जी 2022 में गई और आशा जी 2026 में गई। लता जी की जिस दिन हुई थी उस दिन संडे था और आशा जी की भी संडे के दिन ही हुई। हां, यह जरूर है कि आशा जी ने जीते जी बहुत पेन देखा, बहुत दर्द देखा, लेकिन उन्हें तुरंत आ गई। ऐसा नहीं हुआ कि उन्हें लंबी सफरिंग देखनी पड़ी या वो बेड रिडन हुई। उनकी तबीयत बिगड़ी और उसके बाद उनकी डेथ हो गई। एक अच्छी उम्र उन्होंने देखी।92 इयर्स वह पूरे करके गई थी और अपने पीछे एक बहुत बड़ी ग्रैंड लिगसी उन्होंने छोड़ी है। उन्होंने अपनी जो सिंगिंग स्टाइल बनाई है उसे आने वाली जनरेशन के कई सिंगर्स फॉलो करेंगे और उस पर अपना बड़ा करियर बनाने की कोशिश करेंगे। लता जी आशा जी को दोनों को याद रखा जाता है। दोनों की सक्सेस के बारे में बात होती है। लेकिन आशा जी की सक्सेस स्पेशल बहुत है। इसलिए क्योंकि उनकी पर्सनल लाइफ में इतनी बड़ी ट्रैजेडीस थी उसके बावजूद उन्होंने यह सक्सेसफुल करियर बनाया।

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