यहां से इतना निकाल दूंगी अभी हट जाना निकाल दूंगी या पुलिस कस्टडी में दिख रही यह महिला तहसीलदार अमिता सिंह तोमर है जो मध्य प्रदेश के शिवपुर जिले के विजयपुर में तैनात थी। पत्रकारों को इन्होंने धमकाया कि हट जाओ वरना पत्रकारिता निकाल दूंगी। तहसीलदार साहिबा की अब गिरफ्तारी हो गई है। वजह बदतमीजी नहीं है बल्कि दूसरी है। आरोप यह है कि उन्होंने बाढ़ राहत फंड में ₹.5 करोड़ का घपला किया है।
उन्हें 26 मार्च को उनके ग्वालियर वाले घर से गिरफ्तार कर लिया गया है। अमिता सिंह तोमर पहली बार 2019 में चर्चा में आई थी। उन्होंने कौन बनेगा करोड़पति में ₹50 लाख जीते थे। 2021 की बाढ़ के बाद अमिताभ सिंह तोमर पर मुआवजा बांटने से जुड़े 2 से ₹5 करोड़ के घोटाले में शामिल होने का आरोप है। क्या है मामला बताते हैं। जांच के मुताबिक अधिकारियों ने बड़ौदा तहसील के 794 प्रभावित निवासियों को एलिजिबल बेनिफिशरी के तौर पर पहचाना था।
इन्हें 2021 के बाढ़ राहत पैकेज से मुआवजा दिया जाना था। बाद में एक ऑडिट से पता चला कि पैसा प्रभावित लोगों तक पहुंचा ही नहीं। इसके बजाय कथित तौर पर 127 फर्जी बैंक खातों में भेज दिया गया। यानी मुआवजा तो दिया गया लेकिन बेनिफिशरी को नहीं बल्कि फर्जी अकाउंट में। पुलिस का दावा है कि यह हेरफेर कोई इत्तेफाक नहीं है। यह एक बड़े पैटर्न का हिस्सा था जिसमें सरकारी रिकॉर्ड और बेनिफिशरी की लिस्ट से छेड़छाड़ की गई थी।
यह मामला तब और बढ़ गया जब जांच टीम ने 100 से ज्यादा ऐसे लोगों के नाम बताए जिनमें दो दर्जन से ज्यादा पटवारी थे। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक जांच टीम ने कुछ ऐसे लेनदेन की तरफ इशारा किया है जिनका संबंध कथित तौर पर अमिता सिंह तोमर के परिवार वालों के बैंक अकाउंट से है। इसी जांच के आधार पर स्थानीय पुलिस ने धोखाधड़ी, जालसाजी यानी फर्जरी, क्रिमिनल कास्परेसी और एंटी करप्शन एक्ट के प्रोविजंस के तहत मामले दर्ज किए गए।
पुलिस ने आरोप लगाया कि सरकारी मदद बांटने में अमिता सिंह ने अपने पद का गलत इस्तेमाल किया। अमिता सिंह तोमर की एंटीिसिपेटरी बेल पिटीशन को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। इसके बाद उनकी गिरफ्तारी का रास्ता साफ हो गया। इसके तुरंत बाद प्रशासनिक कारवाई करते हुए शिवपुर के कलेक्टर अर्पित वर्मा ने गिरफ्तारी से एक दिन पहले उन्हें उनके पद से हटा दिया।
इस मामले पर जानकारी देते हुए शिवपुर के एसपी सुधीर अग्रवाल ने क्या कहा सुनिए। जैसा कि आप जानते हैं यह बाढ़ राहत का जो वितरण हुआ था पूर्व में जब जो बाढ़ आई थी उससे संबंधित एक प्रकरण था धोखाधड़ी का। इस प्रकरण की विवेचना एसडीओपी बड़ौदा द्वारा की जा रही थी। इस प्रकरण में जो है तहसीलदार को भी आरोपी बनाया गया था जो तत्कालीन तहसीलदार थे वहां पे और इनके विरुद्ध जो है
मामला जांच में विवेचना में सिद्ध पाया गया था। तो जिस पर से इनकी गिरफ्तारी के लिए पहले सूचना भी विधिवत रूप से वरिष्ठ अधिकारी जो है इनके उनको दिया गया था और ये अपने कर्तव्य से अनुपस्थित हो गई इसके बाद टीम ने इनको पता करके इनके बारे में जानकारी इकट्ठी की और ग्वालियर से इनको गिरफ्तार किया है और गिरफ्तार करने के बाद इनको न्यायालय में पेश किया गया है जो भी वैधानिक कारही होती है विवेचना के दौरान और न्यायालय द्वारा इनका गिरफ्तारी वारंट बनाए जाने से जो है शिवपुरी महिला जेल इनको दाखिल किया गया है।
अमिताभ के वकील ने यह आर्गुममेंट दिया कि उन्हें झूठे आरोपों में फंसाया गया है। उनकी भूमिका सिर्फ प्रोसेस के तहत थी। उनकी कानूनी टीम ने यह जोर देकर कहा कि बेनिफिशरी की लिस्ट और बैंक डिटेल्स पटवारियों ने तैयार किए थे। इसके बाद रेवेन्यू इंस्पेक्टर और नायब तहसीलदारों ने इसकी पुष्टि की थी। इसके बाद ही सिग्नेचर करने और आगे की कारवाही के लिए फाइलें अमिता सिंह के पास आई थी।
अमिताभ सिंह के वकील ने आगे कहा कि उन्होंने ना तो किसी लेनदेन को संभाला और ना ही उन्हें कोई सीधा फायदा मिला। शुरुआत में एफआईआर में भी उनका नाम शामिल नहीं था। उन्होंने इस बात की तरफ भी इशारा किया कि इस केस में कई सहस आरोपियों का हाथ है।
सह आरोपियों में पटवारी शामिल है। जिन पर रिकॉर्ड तैयार करने में कथित रूप में शामिल होने का आरोप है। लेकिन उन्हें पहले ही जमानत मिल चुकी है। इस खबर में फिलहाल इतना ही। आप अपनी राय कमेंट्स में बताइए