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Strait Of Hormouz में ईरान की टोल वसूली शुरू, देने होंगे इतने करोड़..

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मिडिल ईस्ट में जारी जंग के 21वें दिन समुद्री मोर्चे से एक ऐसी खबर सामने आई जो दुनिया के लिए एक साथ राहत भी है और चिंता का संकेत भी है। वैश्विक तेल आपूर्ति की धुरी माने जाने वाले हुरमो जलडमरू मध्य को लेकर ईरान ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। पूरी तरह नाकेबंदी करने के बजाय अब ईरान ने सिलेक्टिक ब्लॉकेट का रास्ता अपनाया है। जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को आंशिक राहत मिल सकती है। ईरान की सैन्य इकाई इस्लामिक रिवॉशनरी गार्ड कॉर्ब्स अब नए वेटिंग और रजिस्ट्रेशन सिस्टम पर काम कर रही है

इस सिस्टम के तहत केवल उन्हीं जहाजों को हुरमोज से गुजरने की अनुमति दी जाएगी जो ईरान की मंजूरी प्राप्त करेंगे। यानी यह महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग अब पूरी तरह खुला नहीं बल्कि एक कंट्रोल जोन बन चुका है। यह बदलाव ऐसे समय में आया जब अमेरिका और इजराइल के साथ बढ़ते तनाव ने समुद्री व्यापार को बुरी तरह प्रभावित किया है। पिछले तीन हफ्तों में हुरमुच के जरिए होने वाला व्यापार लगभग 95% तक गिर चुका है।

जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट गहराने लगा था। ऐसे में ईरान द्वारा पेश किया गया सेफ शिपिंग कॉरिडोर एक राहत के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि यह राहत सीमित है। यह कॉरिडोर ईरान की समुद्री सीमा के अंदर से गुजरता है और इसका इस्तेमाल सिर्फ उन्हीं जहाजों को मिलेगा जो पहले से मंजूरी लेकर चलते हैं। जहाजों को अपनी पूरी जानकारी मालिक कारगो और गंतव्य पहला ही साझा करनी होगी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत, चीन, पाकिस्तान, इराक और मलेशिया जैसे देश सीधे तैरान से संपर्क में हैं ताकि उनके जहाज सुरक्षित रास्ता पा सके। इसी बीच एक चौंकाने वाला दावा भी सामने आया है। एक टैंकर ऑपरेटर ने सुरक्षित गुजरने के लिए करीब $20 लाख डॉलर तक भुगतान किया है। हालांकि ज्यादातर मामलों में कूटनीतिक स्तर पर अनुमति मिल रही है। लेकिन यह संकेत देता है कि यह सिस्टम आर्थिक और राजनीतिक दबाव का नया हथियार भी बन सकता है।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास आरागक्षी ने साफ कहा है कि यह रास्ता दोस्तों के लिए खुला और दुश्मनों के लिए बंद है। यही बात इस पूरी रणनीति को जाल बनाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि जहाजों को अक्सर अपना एआईएस सिस्टम बंद करके या पहचान छिपा कर निकलना पड़ रहा है जिससे सुरक्षा जोखिम बढ़ जाते हैं। कुल मिलाकर ईरान की यह नई रणनीति जंग के बीच एक संतुलन बनाने की कोशिश है जहां वह पूरी नाकेबंदी से बचते हुए वैश्विक दबाव को कम करना चाहता है।

लेकिन साथ ही अपने प्रभाव और कंट्रोल को भी बनाए रखना चाहता है। दुनिया के लिए यह राज जरूर है, लेकिन इसके साथ जुड़ा जोखिम अभी भी उतना ही बड़ा है। जरा यह नक्शा देखिए। एक तरफ है होमस जलडम मध्य और दूसरी ओर है लाल सागर से होते हुए बाब अलमंडे। एक के तट पर बसा है ईरान तो दूसरे के तट पर यमन। होरमस को फिलहाल ईरान ने बंद रखा है और जिसे वह चाहे उसी जहाज को गुजरने दे रहा है।

लेकिन अब संकट मंडराने लगे हैं लाल सागर के बंद होने के भी। जी हां, होर्मूस की तरह लाल सागर और बाब अलमंडे भी तेल और दूसरे व्यापार का एक महत्वपूर्ण मार्ग है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है जहां से पूरी दुनिया एक भीषण महायुद्ध और वैश्विक आर्थिक मंदी की आहट सुन रही है। पिछले कई दिनों से ईरान पर अमेरिका और इसराइल के साझा हमले जारी हैं जिसके जवाब में ईरान ने ना केवल अपनी पूरी सैन्य शक्ति झोंक दी है बल्कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होमस जलडमरू मध्य को भी बंद कर दिया है।

इस बीच यमन केती विद्रोहियों के युद्ध में सीधे कूदने की धमकी ने पूरी दुनिया की सांसे रोक दी है। 28 फरवरी को शुरू हुए अमेरिका और इसराइल के संयुक्त सैन्य अभियान ऑपरेशन एपिक फ्यूरी ने ईरान के बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है। इसरली वायुसेना के स्टील्स विमानों और अमेरिकी नौसेना के मिसाइलों ने तेहरान, इसहान और नताज स्थित ईरान के परमाणु केंद्रों और मिसाइल गोदामों को निशाना बनाया है।

इन हमलों में ईरान के शीर्ष नेतृत्व को भारी नुकसान हुआ है। लेकिन दूसरी ओर ईरान ने ऐसी जवाबी कार्रवाई की है जिससे पूरा मिडिल ईस्ट इस वक्त डर के साए में जी रहा है। ईरान ने इसराइल को तो निशाना बनाया ही लेकिन साथ ही साथ अपने पड़ोसी देश जहां अमेरिका के सैन्य बेस मौजूद हैं उन्हें भी जबरदस्त मिसाइलों से दहला दिया। ईरान ने जवाबी कारवाई करते हुए इसराइल के तेल अमीबीव और हाइफा जैसे शहरों पर सैकड़ों हाइपरसोनिक मिसाइलें दागी।

साथ ही खारी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भी आत्मघाती ड्रोंस ने कहर बरपाया। इस युद्ध में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब यमन की होती विद्रोहियों ने आधिकारिक बयान जारी कर ईरान के समर्थन में मोर्चा खोल दिया। ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान पर हमले तुरंत नहीं रोके गए तो वे लाल सागर और रणनीतिक बाब अलमंडेब जलडमरू मध्य को पूरी तरह से बंद कर देंगे। हुतियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि वे लाल सागर से गुजरने वाले हर उस जहाज को निशाना बनाएंगे जो अमेरिका, इसराइल या उनके समर्थकों से जुड़ा होगा।

उनके पास मौजूद आधुनिक ईरानी एंटीशिप मिसाइलें और पानी के नीचे चलने वाले ड्रोंस जिन्हें यूवीस भी कहते हैं इस खतरे को वास्तविक और विनाशकारी बना रहे हैं। दुनिया के लिए सबसे डरावनी स्थिति इन दो समुद्री रास्तों यानी होमोस और लाल सागर का एक साथ बंद होना है। होरमोस से दुनिया का लगभग 20% और लाल सागर से 12% तेल गुजरता है। इन रास्तों के बंद होने का मतलब है कि दुनिया का 1/3 तेल बाजार से गायब हो जाएगा।

आज कच्चे तेल की कीमतें $130 प्रति बैरल के पार जा रही हैं जो आगे आने वाले समय में और ज्यादा बढ़ सकती हैं। लाल सागर स्वेज नहर का प्रवेश द्वार है और अगर यह बंद होता है तो इससे चीन, भारत और दक्षिण पूर्व एशिया से यूरोप जाने वाला सारा व्यापार ठप हो सकता है। हूतियों की धमकी ने वाशिंगटन और ब्रल्स में हड़कंप मचा दिया है। अगर हूं लाल सागर को ब्लॉक करते हैं तो अमेरिका को यमन में जमीनी कारवाई करनी पड़ सकती है

जो एक लंबे और खूनी युद्ध की शुरुआत होगी। दूसरी ओर रूस और चीन ने इस स्थिति के लिए अमेरिका की एकतर नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है। पश्चिमी एशिया में फिलहाल कूटनीतिक रास्ते बंद नजर आ रहे हैं और सैन्य कारवाई तेज होती जा रही है। अगर होती विद्रोहियों ने अपनी धमकी को अमली जामा पहनाया तो दुनिया को एक ऐसी आर्थिक सुनामी का सामना करना पड़ेगा जिसे संभालना किसी भी देश के लिए मुमकिन नहीं होगा।

अमेरिका और इसराइल ने ईरान पर हमला किया यह सोचकर कि ईरान घुटनों पर आ जाएगा लेकिन हुआ इसके ठीक उल्टा ईरान ने जवाबी कारवाई की और इस कारवाई में जख्म मिल रहे हैं उसके पड़ोसी देशों को वह पड़ोसी देश जो अमेरिका को अपनी ढाल समझते थे हाल ही में क़तर के गैस प्लांट पर हुए ईरानी हमलों ने क़तर की एलएजी निर्यात क्षमता को बुरी तरह से प्रभावित किया है। इस हमले के कारण क़तर की 17% एलएनजी निर्यात क्षमता तबाह हो गई है।

जिससे उत्पादन अगले 5 वर्षों तक ठप रहने की आशंका है। देश की सबसे बड़ी सरकारी कंपनी क़तर एनर्जी के सीईओ साद अलकाबी के अनुसार इन हमलों से सालाना लगभग 20 बिलियन अमेरिकी डॉलर का नुकसान होने का अनुमान है। इस नुकसान ने यूरोप और एशिया भर में वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए सीधा और गंभीर खतरा पैदा कर दिया है। यह हमला खाड़ी देशों के तेल और गैस संयंत्रों पर हमलों की एक अभूतपूर्व श्रृंखला का हिस्सा है।

ईरान ने यह कदम तब उठाया जब इसराइल ने उसके गैस बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया था। हमलों में क़तर की प्रमुख गैस सुविधाओं को सटीक रूप से निशाना बनाया गया। कतर की 14 एलएजी ट्रेनों में से दो पूरी तरह से प्रभावित हुई हैं। इसकी दो गैस और लिक्विड सुविधाओं में से एक को निशाना बनाया गया है। अलकाबी ने स्पष्ट किया कि बुनियादी ढांचे को हुए इस भारी नुकसान के मरम्मत करने और प्रतिवर्ष 12.8 मिलियन टन एलएनजी क्षमता को फिर से बहाल करने के लिए कम से कम 3 से 5 साल का समय लगेगा।

साद अलकाबी ने हमले के समय और इसके स्रोत पर गहरी निराशा और अविश्वास व्यक्त किया है। उन्होंने इस हमले के क्षेत्रीय नेहतार्थों की ओर इशारा करते हुए कहा कि मैंने अपने सबसे बुरे सपनों में भी यह नहीं सोचा था कि क़तर और इस इलाके पर इस तरह का हमला होगा। यानी कि अमेरिका ने जब ईरान पर हमला किया तो इसकी सबसे बड़ी कीमत चुकाई क़तर और साथ ही साथ ईरान के पड़ोसी देशों ने। देखना यह होगा कि यह युद्ध और किस ओर रुख करता है।

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