Cli
new tr mp news

इजराइल-ईरान यु!द्ध के बीच अमेरिका ने घुटने टेके, किसे फायदा होगा?..

Hindi Post

इजराइल ईरान वॉर की वजह से दुनिया भर में तेल के दामों में बढ़ोतरी देखने को मिली है और इसी तेल से जुड़ा एक बड़ा अपडेट अमेरिका की ओर से आ रहा है। यूएस ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेज़ेंट ने एक बयान दिया है कि अमेरिका की ओर से ईरानियन ऑयल पर जो सेंक्शन लगाए गए हैं उसे वह हटाने का प्रयास करेंगे। हमारे साथ है सचिन इस बारे में वो बात करेंगे। सबसे पहले सचिन यह बताइए कि स्कॉट बेसेंट ने क्या कहा है?


देखिए स्क्वाड बेसेंट ने एक अमेरिकी टेलीविजन चैनल को इंटरव्यू देते हुए कहा है कि हम ईरान के जो ऑयल है उस पर से टेंपरेरीली सेंक्शन हटा रहे हैं। अ मतलब उन्होंने साफ किया है कि जो ऑलरेडी समुद्र में तेल फंसा हुआ है ईरान का जो ऑलरेडी निकल चुका है सप्लाई के लिए उन पे सेंक्शन हटा रहे हैं उनको बाकी देश खरीद सकेंगे। इससे स्कॉट बेसेंट का तर्क है कि कुछ समय के लिए तेल की कीमतें कम रखने में मदद मिलेगी। उनका आकलन है कि 10 से 14 दिन तक इससे तेल की कीमतें कम से कम लेवल पर रह सकती हैं और प्राइसेस जल्दी से नहीं बढ़ेंगी। ये उनका कहना है। ये उनका तर्क है। तो सचिन ये बताइए कि आखिर अमेरिका को ऐसे स्टेटमेंट देने की नौबत क्यों आई?


अ देखिए मैं तो इस पूरी सिचुएशन को हास्यास्पद ही कहूंगा कि आपने जिसके खिलाफ जंग छेड़ी है जिससे जिसकी रिजीम को आप ट्रिपल करना चाहते हैं उस पर से पिछले 810 साल से जो सेंक्शन लगा रखा है वो आपको हटाना पड़ रहा है। अ दिक्कत ये हो गई है अमेरिका के साथ कि अब वो ईरान जंग में फंस गया है चारों तरफ से। अ एक तो रिजीम भी उस तरह से कोलैप्स नहीं कर रही है जिसको ऑपरेशन की उम्मीद थी वो हो नहीं पा रहा है। इसके रिपरक्रेशन ज्यादा हो रहे हैं कि ग्लोबल ऑयल प्राइसेस बहुत तेजी से बढ़ गई हैं।

जब युद्ध शुरू नहीं हुआ था उसके पहले जो ऑयल की कीमत थी वो $72 के करीब प्रति बैरल थी। वो आज की डेट पे ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग $106 के आसपास पहुंच गई है। और एक्सपर्ट्स ने चेताया है रिसेंट में ही कि यह प्राइसेस जल्द ही जिस हिसाब से एक्स एक्सलेशन लेडर युद्ध का बढ़ रहा है। एनर्जी फैसिलिटीज पे हमले शुरू हो गए हैं। तो ये प्राइसेस जल्द ही $200 प्रति बैरल तक चली जाएंगी।

अगर यह होता है जो कि पॉसिबिलिटी दिख रही है अगर ऐसा होता है तो ब्लड बाथ होगा पूरी ग्लोबल इकॉनमी के लिए और समस्या यह है कि अमेरिका को अभी समझ नहीं आ रहा कि इसे कंट्रोल कैसे करना है क्योंकि स्टेट ऑफ हॉर्मोस वो रोक पा नहीं रहे हैं। नाटो से मदद मांगी वो मदद करने के लिए तैयार नहीं है। ईरान झुकने को तैयार नहीं है और अभी ऐसा लग भी नहीं रहा कि उसके हमले तुरंत तो खत्म होने वाले हैं।

बल्कि इनफैक्ट क़तर में जिस तरह से उसने हमला किया वो बता दिया है कि उसके पास अभी वो रिटेलिएशन में और बहुत ज्यादा नुकसान कर सकता है। तो, सब कुछ मिलाके अब हालत यह हो गई कि जिसके खिलाफ जंग छेड़ी है, उसके खिलाफ लगाया गया 10 साल 8 साल पुराना सेंक्शन आपको हटाना पड़ रहा है और उसका ही तेल अब बिचवाना पड़ रहा है मार्केट में। तो अमेरिका के जो यह भी अनाउंसमेंट जो रिसेंट अनाउंसमेंट ऑयल को लेकर हुए हैं।

आपको नहीं लगता कि इसकी वजह से ईरान को ही उल्टे फायदा पहुंचेगा। जी बिलकुल। जब स्कॉट बेसेंट ने यह अपना आईडिया दिया रखा लोगों के सामने। तो उन्होंने ये तर्क दिया या अपना आईडिया बेचने की कोशिश इस तरह से की कि उन्होंने कहा कि हम ईरान के तेल को ईरान के खिलाफ ही इस्तेमाल कर रहे हैं। यानी कि हम ईरान के तेल का उपयोग करेंगे। ग्लोबल ऑयल प्राइसेस को मेंटेन रखेंगे जिससे हम थोड़ा और दिन तक वॉर चला पाएं।

लेकिन इसकी असलियत तो यही है कि अब वो पैसा तो ईरान के पास जाएगा। हालांकि ये फाइनेंससेस कैसे होंगे? कैसे सेंक्शन हटेंगे? ये टेंपरेरी कैसे काम करेंगे? कैसे ईरान तक पैसा जाएगा? इसकी अभी क्लेरिटी नहीं मिल पाई है। पर सीधे तौर पे फायदा ईरान को होगा। ईरान का तेल है। तो आप जिसके खिलाफ जंग छेड़ रहे हैं

और जिसको नुकसान करने की बात कर रहे हैं उसे ही फायदा पहुंचा रहे हैं। सीधे तो यही है। अब आप कुछ भी बोल के उस आईडिया को बेचे पर हकीकत तो बॉटम लाइन की यही है। तो देखते हैं भाई यह प्लान कैसे वर्कआउट करता है। अमेरिका, इजराइल, ईरान, वॉर से जुड़े जो भी अपडेट्स होंगे, हम आप तक पहुंचाते रहेंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *