क्या आपने कभी सोचा है कि दुनिया के सबसे खतरनाक स्टिल्थ बम्बर यानी कि बी टू स्पिरिट को उड़ाने में आखिर कितना खर्च होता होगा? क्या इसकी 1 किलोमीटर की उड़ान किसी लग्जरी कार से भी महंगी पड़ती है और क्या सच में इसका ज्यादातर खर्च सिर्फ ईंधन पर होता है? यह असली खेल कहीं और है। आखिर क्यों इसे दुनिया के सबसे महंगे सैन्य विमानों में गिना जाता है? और इसकी तुलना में B52 स्ट्रैटोफ्ट्रेस और B1B लेंसर कितने सस्ते या महंगे हैं।
दुनिया के सबसे उन्नत और महंगे सैन्य विमानों में शामिल B2 स्पिरिट एक बार फिर चर्चा में है। इसकी ताकत जितनी जबरदस्त है उतनी ही हैरान करने वाली है इसकी उड़ान की लागत। खासतौर पर प्रति किलोमीटर खर्च जानकर कोई भी चौंक सकता है। जी हां आप भी। दरअसल बी टू स्पिरिट एक स्टिल्थ बमबर है जिसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह दुश्मन के रडार में आसानी से पकड़ में नहीं आता।
यही वजह है कि इसकी तकनीक बेहद उन्नत और महंगी है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर यह विमान उड़ान के दौरान कितना ईंधन खर्च करता है और इसकी प्रति किलोमीटर लागत कितनी बैठती है? उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक बी टू बमबर 1 घंटे में लगभग 18,000 से 22,000 किलोग्राम जेट फ्यूल खर्च करता है। इसकी औसत क्रूज स्पीड करीब 900 से 1000 कि.मी./ंटा होती है।
इस आधार पर अनुमान लगाया जाए तो यह विमान लगभग 18 से 22 कि.ग्र. ईंधन प्रति किलोमीटर खर्च करता है। अगर जेट फ्यूल की औसत कीमत 70 से ₹90 प्रति लीटर मानी जाए तो 1 कि.मी. की उड़ान में लगभग 1500 से ₹2000 का ईंधन खर्च आता है। पहली नजर में यह लागत ज्यादा नहीं लगती लेकिन असली कहानी यहीं खत्म नहीं होती। दरअसल बी टू बमबर का सबसे बड़ा खर्च सिर्फ ईंधन नहीं बल्कि उसका मेंटेनेंस और ऑपरेशन है।
इस विमान की खास स्टिल्ट कोचिंग, अत्याधुनिक सिस्टम और हाईटेक उपकरणों की देखभाल बेहद महंगी होती है। रिपोर्ट्स के अनुसार बीटो की कुल ऑपरेटिंग लागत करीब 1.3 से 1.5 यानी कि ₹1.5 लाख प्रति घंटा तक पहुंच जाती है। जो भारतीय मुद्रा में लगभग एक से 1.2 करोड़ प्रति घंटा होती है। जी हां, अगर इसे प्रति किलोमीटर के हिसाब से देखा जाए तो बी टू बमबर को उड़ाने की कुल लागत करीब ₹1 लाख या उससे भी ज्यादा प्रति किलोमीटर बैठती है।
यानी ईंधन खर्च इसकी कुल लागत का सिर्फ एक छोटा सा हिस्सा है। जबकि असली खर्च इसकी तकनीक, रखरखाव और ऑपरेशन में होता है। यही वजह है कि B2 को दुनिया के सबसे महंगे सैन्य विमानों में गिना जाता है। इसकी तुलना में B52, स्ट्रेटोफोर्ट्ट्रेस और B1B लैंसर जैसे बॉम्बर्स सस्ते माने जाते हैं। हालांकि वे स्टिल क्षमताओं में B2 जितने उन्नत नहीं होते। जानकारों का मानना है कि बी टू बमबर की असली ताकत उसकी लागत नहीं बल्कि उसकी रणनीतिक क्षमता है।
यह विमान लंबी दूरी तक बिना पकड़े गए मिशन पूरा कर सकता है जो किसी भी आधुनिक युद्ध में बेहद अहम माना जाता है। तो कुल मिलाकर बी टू स्पिरिट सिर्फ एक विमान नहीं बल्कि अत्याधुनिक तकनीक और भारी निवेश का प्रतीक है। इसकी प्रति किलोमीटर लागत भले ही चौंकाने वाली हो, लेकिन इसकी क्षमताएं इसे दुनिया के सबसे खतरनाक और प्रभावी बॉम्बर्स में शामिल करती है।