अमेरिका इजराइल ईरान वॉर के बीच ईरान ने एक व्यक्ति जिसका नाम कुरू की वानी था उसे फांसी दे दी है। कुरुश के ऊपर आरोप था कि वह इजराइल के लिए जासूसी करता था। ईरानी मीडिया मिजान के मुताबिक कुरू को 18 मार्च की सुबह ईरान के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद फांसी दे दी गई है। मिजान ऑनलाइन वेबसाइट ने लिखा है चाइनीस शासन का एक जासूस जो देश के एक संवेदनशील स्थानों की तस्वीरें और जानकारी मोसाद के अधिकारियों को दे रहा था
उसे आज सुबह फांसी दे दी गई है। यहां मोसाद का संबंध इजराइल की खुफिया एजेंसी से है। कुरुश पर यह भी आरोप था कि वह मोसाद के एजेंट से मिलता था। हालांकि कुरू की गिरफ्तारी हाल के जंग की वजह से नहीं हुई थी। उसकी गिरफ्तारी जून 2025 में हुई थी। जून में इजराइल और ईरान के बीच 12 दिन का युद्ध हुआ था। यानी कि 13 जून से 24 जून तक जिसमें ईरान के लगभग 1100 लोगों की मौत हो गई थी।
उसी युद्ध के दौरान कुरू को युद्ध के चौथे दिन ईरान के साबोज बालोक एरिया से गिरफ्तार किया गया था। उसके बाद कुरू के खिलाफ जांच शुरू हुई जिसमें यह दावा किया गया कि उसके पास पैसे, गाड़ियां और जासूसी में इस्तेमाल किए जाने वाले मॉडर्न इक्विपमेंट्स मिले थे। यह भी दावा किया गया कि जासूसी करने के लिए कुरू की भर्ती ऑनलाइन की गई थी और इजराइल समेत छह यूरोपीय देशों में जासूसी की ट्रेनिंग दी गई थी।
पर इन सारे सबूतों को ईरान के अथॉरिटीज की ओर से पब्लिक नहीं किया गया है। इजराइल और ईरान के बीच में लंबे समय से शैडो वॉर चल रहा था। पर अब वॉर खुलकर सबके सामने आ गया है। पिछले कुछ सालों में ईरान कई ऐसे लोगों को फांसी दे चुका है जिन पर मुसाद से जुड़े होने का या उसकी मदद करने का आरोप है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 7 जनवरी 2026 तक ईरान ने जून में हुए इजराइल के साथ युद्ध के बाद 12 लोगों को फांसी दे चुका है।
इन सारे लोगों के ऊपर एक ही आरोप था इजराइल के लिए जासूसी करना। ईरान में जासूसी के मामले में पहले भी फांसी होती थी, लेकिन हाल में हुए युद्धों की वजह से फांसी के मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिली है। ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट न्यूज़ एजेंसी जो कि एक मानवाधिकार संगठन है ने ईरान को लेकर एक एनुअल रिपोर्ट जारी किया है।
उस रिपोर्ट में यह बताया गया है कि ईरान में साल 2025 में 2063 लोगों को फांसी दी गई है। 2024 के मुकाबले ईरान में फांसी की दर में 119% की बढ़ोतरी हुई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान में अभी भी कम से कम एक दर्जन लोग फांसी की सजा का सामना कर सकते हैं.