देखिए मिडिल ईस्ट की हम बात कर रहे हैं। मिडिल ईस्ट इस वक्त भारी तबाही से जूझ रहा है। ड्रोन से हमले हो रहे हैं। सायरन बज रहे हैं और मिसाइलों की बौछार वहां पर देखने को मिल रही है। हालात ये है कि हर मिनट यहां मिसाइलें दागी जा रही हैं। अमेरिका ने सिर्फ तीन दिनों में 800 मिसाइलें दाग दी और अब यूक्रेन से मदद वो मांग रहा है। लेकिन ईरान के पास इतने हथियार कहां से आए और अब तक यह अमेरिका के सामने कैसे टिका हुआ है? यह बड़े सवाल हैं। इसके बारे में आपको दिखाते हैं हम कि क्या जानकारियां जो है वो सामने आ रही हैं। ईरान के पास आखिर कितनी ताकत है?
आखिर वो अमेरिका के सामने [संगीत] अब तक टिका हुआ कैसे?तीन दिन में अमेरिका ने ईरान पर 800 मिसाइलें दाग की। हर एक मिनट में एक मिसाइल तबाह होता मिडिल ईस्ट कहीं मिसाइलें कहीं ड्रोन कहीं धमाके मिडिल ईस्ट में इन दिनों इसी तरह का मंजर [संगीत] ईरान इजराइल अमेरिका के बीच का युद्ध कई देशों तक फैल चुका है। हाल यह है कि मिडिल ईस्ट में लगभग हर मिनट मिसाइलें गिर रही है। लगातार सायरन बज रहे हैं। और इन सबके बीच दुनिया हैरान परेशान है।
असल में यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलस्की ने 5 मार्च को एक प्रीव्यू में [संगीत] बताया कि मिडिल ईस्ट में ईरान के हमलों को रोकने के लिए केवल तीन दिनों में अमेरिका और उसके सहयोगियों [संगीत] ने 800 से ज्यादा मिसाइलें दाग डाई। अब आप सोचिए कि किस कदर मिडिल ईस्ट में मिसाइलों की बौछार हो रही [संगीत] है। जेलस्की ने इस बात पर आश्चर्य और चिंता जताई कि जितनी मिसाइलें मिडिल ईस्ट में तीन दिनों में इस्तेमाल हो गई उतनी तो यूक्रेन को 2022 में युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक नहीं मिली।
दरअसल अमेरिका ने ईरान के शाहे ड्रोन से निपटने के लिए यूक्रेन से तकनीकी विशेषज्ञता और मदद मांगी। इसी दौरान जेलस्की ने यह बात कही कि मिडिल ईस्ट में तीन दिनों में 800 [संगीत] से ज्यादा मिसाइलें दागी। अब अमेरिका ने यूक्रेन से मदद मांगी। इस पर जेलस्की ने कहा कि मिडिल ईस्ट में तीन दिनों में 800 से ज्यादा मिसाइलें दागी गई। अमेरिका ने ईरान के शाही ड्रोन से निपटने के लिए उनसे मदद मांगी हैऔर अगर उनकी सुरक्षा प्रभावित ना हो तो वो मदद करेंगे। जो यूक्रेन की मदद करते हैं वो उन लोगों को बचाने में मदद करते हैं। लेकिन इन सबके बीच ईरान आखिर अमेरिका के सामने अब तक टिका हुआ कैसे है?ईरान के पास कितनी ताकत है? अब वो जान लीजिए। 3000 से ज्यादा बैलेस्टिक मिसाइलें हैं। जिनमें फतेह एक, फतेह दो जैसी हाइपरसोनिक मिसाइलें हैं।ईरान के पास 1 लाख से 1.5 लाख तक घातक ड्रोन है। एक आंकड़ों के मुताबिक ईरान के पास लड़ाई के लिए 286 युद्धक विमान, 160 हेलीकॉप्टर और भारीभरकम ड्रोन सेना है। जिनकी असल संख्या का पता किसी को नहीं। ईरान को बहुत पहले से ही पता है कि इजराइल की मदद से अमेरिका उस पर कभी भी बहुत बड़ा हमला कर सकता है।
और इसीलिए जानकार मानते हैं कि ईरान पिछले 20 साल से युद्ध की तैयारी में उतरा हुआ था।उसे अंदाजा था कि कभी भी कुछ ऐसा हो सकता है और इसीलिए माना जा रहा है कि उसके बहुत से हथियार अभी भी अदृश्य है और उन्हीं की भनक पर अमेरिका जगह-जगह बीटू बमबर से हमला कर रहा है ताकि उनकी ताकत घटाई जा सके। शायद अपनी 20 साल वाली उसी तैयारी के दम पर ही ईरान के पास वो आत्मविश्वास है जिसके दम पर वो अभी भी मैदान में डटा हुआ है। ब्यूरो रिपोर्ट एनडीt इंडिया कहते हैं कि युद्ध में दुश्मन को [संगीत] हराने के लिए कभी-कभी दुश्मन के हथियारों का सहारा लेना पड़ सकता है। लेकिन महायुद्ध के फज़ टू के आगाज से ठीक पहले सुपर पावर अमेरिका ने एक ऐसामास्टर [संगीत] स्ट्रोक खेला जिसने तेहरान के होश उड़ा दिए। ईरान अपने ड्रोन और मिसाइल पावर पर नाज़ करता है। खासकर उसका घातक और किफायती शाह 126 ड्रोन वो कामी काज़ ड्रोन है जिसने यूक्रेन से लेकर खाड़ी तक अपनी तबाही का मंजर दिखाया था और अब महायुद्ध में दिख भी रहा [संगीत] है। ईरान के इसी ड्रोन पर चौंकाने वाली खबर सामने आई है। पता चला कि अमेरिका ने तेहरान के शिकारी की काट [संगीत] ढूंढ ली है और वो भी उसकी हूबहू कॉपी बनाकर। तो क्या तेहरान की ताकत नहीं पहचान पाया अमेरिका?क्या ईरान के ड्रोन पावर को लेकर ट्रंप को अंधेरे में रखा गया?क्या तहरान की प्लेबुक में फंस गया अमेरिका?क्या अब ईरान का ड्रोन कॉपी कर रहा अमेरिका?जब 30 लाख के ड्रोन को मार गिराने के लिए अमेरिका को
334 करोड़ की मिसाइल दागनी पड़े और उसमें भी इंटरसेप्ट होने की कोई गारंटी ना हो।जब ईरान के ड्रोन बाबर को देखकर वाशिंगटन से लेकर पेंटागन तक अमेरिकी जनरलों का माथा चकरा जाए तो समझ लीजिए कि ईरान युद्ध के पहले चरण में अमेरिका और इजराइल से आगे निकलता दिख रहा है। और अब ऐसा लगता है कि अमेरिका और इजराइल दोनों को दोबारा अपनी वॉर स्ट्रेटजी पर काम करना होगा क्योंकि ईरान किसी के रोके रुक नहीं रहा। अचानक जमीन फाड़कर मिसाइल निकलती है और इजराइल से लेकर खाड़ी मुल्कों के सैन्यवेज की सांसे ऊपर नीचे होने लगती है। अमेरिका का एयरक्राफ्ट कैरियर अब्राहम लिंकन जो ईरान की सीमा के 340 कि.मी.नजदीक तक आ चुका था। उस पर हमने नेवी ड्रोन से हमला किया था और अब यह युद्धपोत एक बार फिर ईरानी सीमा से 1000 कि.मी. दूर खिसक गया है। जॉइंट एयर कमांड ने अमेरिकी विमानों को भी इंटरसेप्ट किया। हमारी फोर्सेस ने अमेरिका की टेमहॉक और जसम सीरीज की मिसाइलों को भी टारगेट किया। मोमिनीन युद्ध में तबाही को लेकर सबके अपने दावे। अमेरिका दावा करता है कि उसने ईरान का एयर डिफेंस और 24 नेवी जहाजों को खत्म कर दिया। बाद में संख्या 30 बताई। अमेरिका दावा करता है