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तरबूज नहीं… 25 लाख रुपए की वजह से अब्दुल्ला परिवार ने दी जान

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क्या एक तरबूज किसी हंसते हिलते परिवार को खत्म कर सकता है? के नाम पर मुंबई के पायाधनी में ऐसा सनसनीखेज खुलासा हुआ जिसने पुलिस के भी होश उड़ा दिए हैं। 26 अप्रैल की वो रात एक ही परिवार के चार लोग और सुबह होते-होतेचारों की । पहले लगा कि तरबूज में था। लेकिन अब इस केस में एक ऐसा मिस्ट्री गवाह और का एंगल आया है जिसने जांच की दिशा ही बदल दी है। क्या अब्दुल्ला डोकारिया की गवाही उनकी और उनके परिवार की की वजह बनी? मुंबई का भीड़भाड़ वाला इलाका पाए धुनी तारीख 25 अप्रैल 40 साल के अब्दुल्ला डोकाडिया के घर पर मेहमान आए थे। बिरयानी की दावत हुई।

हंसीज़ाक हुआ। रात करीब 10:30 बजे मेहमान चले गए। घर में बचे अब्दुल्लाह, उनकी पत्नी नसीम और दो बेटियां आयशा और जैनब। रात के करीब 1:30 बज रहे थे जब परिवार ने सोने से पहले एक तरबूज काट कर खाया। किसी को अंदाजा नहीं था कि यह उनकी आखिरी रात होगी। सुबह 5:30 बजे अचानक चीख पुकार मचती है। चारों को तेज उल्टी औरदस्त शुरू होते हैं। आननफानन में उन्हें जेज अस्पताल ले जाया जाता है। लेकिन मौत का तांडव ऐसा था कि देखते ही देखते कुछ ही घंटों के अंदर एक-एक कर चारों ने दम तोड़ दिया। पुलिस ने इसे अचानक यानी एडीआर माना। शक की सुई गई उस तरबूज पर जिसे खाकर अब्दुल्ला ने मरने से पहलेबयान दिया था।

मामला तब उलझ गया जब फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन एफजी की रिपोर्ट आई। लोग डरे हुए थे। बाजार से तरबूज गायब हो गए। लेकिन एफडीए ने साफ कर दिया कि तरबूज में कोई मिलावट कोई आर्टिफिशियल रंग या केमिकल नहीं था। घर से मिले 11 सैंपल्स। चाहे वो बिरयानीहो, चिकन हो या फ्रिज का पानी सब क्लीन पाए गए। तो सवाल यही है कि परिवार के चारों लोगों की आखिर कैसे हुई? जब हुआ तो डॉक्टरों के रोंगटे खड़े हो गए। मृतकों के शरीर के अंदरूनी अंग, दिमाग, दिल [संगीत] और आते असामान्य रूप से हरे पड़ चुके थे। मेडिकल एक्सपर्ट्स कह रहे हैं कि यह सामान्य फूड पोइजनिंग नहीं है। यह इशारा था कि किसी बेहद खतरनाक और घातक जहर की ओर। और सबसे चौंकाने वाला खुलासा अब्दुल्ला [संगीत] के शरीर में मारफिन के अंश मिले। एक ऐसी दवा जो बिना डॉक्टर के पर्चे के नहीं मिलती।

सवाल उठा कि क्या परिवार को [संगीत] धीमा जहर दिया जा रहा था या फिर उस रात कुछ ऐसा हुआ जो सीसीटीवी की नजरों से दूर था। अभी पुलिस मारफिन की गु्थी सुलझा ही रही थी कि जोगेश्वरी से आई एक महिला के बयान पुलिस के कान खड़े कर दिए। इस केस में अब सुसाइड की ब आने लगी है। महिला ने दावा किया है कि अब्दुल्ला की मौत कोई इत्तेफाक [संगीत] नहीं बल्कि एक सोची समझी साजिश हो सकती है। मामला साल 2019 का है। एक बिल्डर और एक महिला के बीच ₹25 लाख के नकद लेनदेन का विवाद था। इस पूरे मामले में अब्दुल्ला डोकाडिया ही वो शख्स थे जिन्होंने बिल्डर तक पैसे पहुंचाए थे।

वो इस केस के मुख्य गवाह थे। साल 2026 में यानी इसी साल कोर्ट में उनकी गवाही होनी थी। अब्दुल्ला ने वादा किया था कि वो अदालत में सच बताएंगे। सवाल यह कि क्या 25लाख के उस पुराने विवाद को दबाने के लिए पूरे परिवार को रास्ते से हटा दिया गया। महिला ने पुलिस को चार्जशीट और एफआईआर की कॉपी सौंपते हुए दावा किया कि इस एंगल से जांच की जाए क्योंकि अब्दुल्ला की गवाही बिल्डर को जेल पहुंचा सकती थी।

अब मुंबई पुलिस के सामने आई इस गवाह ने केस को और ज्यादा पेचीदा बना दिया। क्योंकि अगर जहर था तो वो तरबूज में क्यों नहीं मिला? क्या ज़हर देने का तरीका कुछ और था और वो हरा रंग के का संकेत है।

फिलहाल पुलिस कलीना फॉरेंसिक लैब की रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। डिजिटल साक्षी कॉल टेल्स और बिल्डर के साथ अब्दुल्ला के संबंधोंको खंगाला जा रहा है। क्या यह एक परफेक्ट है जिसे का रूप दिया गया? पायधुनी का यह मामला अब महज एक हादसा नहीं रहा। यह एक ऐसी पहेली बन चुका है जिसमें पैसे, पावर और का त्रिकोण नजर आ रहा है। क्या उन दो मासूम बच्चियों और उनके माता-पिता को इंसाफ मिलेगा या फिर फाइलों के ढेर में यह राज भी दफन हो जाएगा?

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