[संगीत] कहते हैं आपदा जब दरवाजा खटखटाती है तो इंसान की असल पहचान सामने आती है। जबलपुर के बरगे डैम में उस शाम पानी सिर्फ उफन नहीं रहा था। वो चीख रहा था और उसी शोर में कुछ आवाजें [संगीत] मदद के लिए टूट सा रही थी। डगमगाते क्रूज पर खड़े लोग मौत को अपनी आंखों के सामने देख रहे थे। तभी बिना किसी पहचान के,
बिना किसी डर के एक 22 साल का लड़का शेख रमजान मौत के उस समंदर में कूद पड़ा। उस पल उसने नाम, धर्म और अपनी जान सब कुछ पीछे छोड़ दिया। उस दिन नर्मदा का पानी शांत नहीं था। वो बेकाबू था जैसे किसी अनहोनी का संकेत दे रहा हो। देखते ही देखते खुशियों से भरा एक क्रूज हादसे का शिकार हो गया। लोग जो कि कुछ देर पहले हंस रहे थे, सेल्फी ले रहे थे, वीडियोस बना रहे थे, रील्स बना रहे थे। अब मदद के लिए चिल्ला रहे हैं। कोई हाथ हिला रहा है तो कोई आखिरी बार अपने अपनों को पुकार रहा है। हवा में डर था चींट पुकार मातम का माहौल।
इसी खौफनाक मंजर के बीच खड़ा था रमजान। एक साधारण वेल्डर जो कि पश्चिम बंगाल से रोजी रोटी के लिए जबलपुर आया लेकिन उस दिन वो सिर्फ मजदूर नहीं था वो था उम्मीद का इकलौता सितारा। उसने बताया कि जैसे ही उसने आवाजें सुनी, वह बिना सोचे दौड़ पड़ा। सामने का दृश्य किसी बुरे सपने से कम नहीं था। नाव आधी डूब चुकी थी। लोग पानी में छटपटा रहे थे। पर रमजान के कदम डगमगाए नहीं। उसने ऊंचे टीले से छलांग लगा दी। सीधे उस पानी में जहां हर लहर मौत का पैगाम लेकर उठ रही थी। एक बार फिर दूसरी बार और फिर बार-बार। उसने एक-एक करके सात लोगों को बाहर निकाला। सांसे थम रही थी लेकिन हिम्मत नहीं। रमजान अकेला नहीं था।
उसके साथ थे भोला रेगवार और अन्य कई दूसरे मजदूर बिहार, यूपी और बंगाल से आए। यह अवतार, यह मसीहा जो कि लोगों को अब नई जिंदगी दे रहे थे जो रोजाना मेहनत करते हैं जिनके नाम शायद कोई जानता भी नहीं। लेकिन उस रात वही लोग किसी के लिए भगवान बन गए। किसी के लिए अवतार तो किसी के लिए फरिश्ता बनकर आए। रस्सियां, टायर, ट्यूब जो कुछ मिला उसी से उन्होंने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया। मौत का तांडव जारी था। लेकिन यह गुमनाम नायक लगातार लड़ रहे थे। करीब 17-1 लोगों को उन्होंने जिंदा बाहर निकाला। कई घंटों तक बिना रुके, बिना थके पानी में गहरा पहरा दिया और लगातार इस रेस्क्यू ऑपरेशन को तेजी से अपनी हर एक हिम्मत से, अपनी हर एक कोशिश से बनाए रखा और कह सकते हैं आप एक ऐसी मिसाल पेश की जिसको लेकर आज हर कोई इन्हें सलाम कर रहा है। पानी गहरा था, अंधेरा बढ़ रहा था लेकिन उनका जज्बा उससे भी गहरा था। हालांकि हर कहानी का एक दर्दनाक हिस्सा भी होता है। चार महिलाओं को इस सब पूरे हादसे में बचाया ना जा सका। उनके शव जब बाहर निकाले गए तो हर आंखें नम थी। रमजान कहते हैं जब कोई डूब रहा होता है तो सबसे पहले उसे बचाना चाहिए।
इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नहीं। यह सिर्फ एक वाक्या नहीं उस दिन की सबसे बड़ी सच्चाई थी जो कि आज आप सुन रहे हैं तालियां बजा रहे हैं सलाम कर रहे हैं। आज जब देश में अक्सर हिंदू मुस्लिम के नाम पर बहस होती है, दीवारें खड़ी की जाती है तब बर्गी डैम की यह घटना एक आईना है, एक सबूत है, एक मिसाल है जो कि सदियों तक याद रखी [संगीत] जानी चाहिए। यहां किसी ने किसी का धर्म नहीं पूछा ना यह देखा कि कौन क्या पहन कर आया है। कौन किस अपने फरिश्ते का, किस भगवान का, किस ऊपर वाले का जिक्र कर रहा है। बस यहां देखा गया कि सामने एक इंसान है जो कि मदद की भीख मांग रहा है और उसे बचाने के लिए यह मजदूर यह रमजान दौड़ पड़ा। एक तरफ हम खबरों में नफरत की आवाजें सुनते हैं तो दूसरी तरफ ऐसे [संगीत] लोग हैं जो कि चुपचाप इंसानियत की मिसाल बन जाते हैं।
रमजान [संगीत] और उसके साथियों ने हमें याद दिलाया कि असली पहचान नाम या मजहब में नहीं बल्कि दिल की होती है। बर्गी डैम का हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं थी। यह एक कहानी है डर की, दर्द की लेकिन उससे भी कहीं ज्यादा उम्मीदों की। यह कहानी बताती है कि जब हालात सबसे बुरे होते हैं तब भी इंसानियत जिंदा रहती है और शायद यह सबसे बड़ी सच्चाई है आपदा में फरिश्ते आसमान से नहीं उतरते वो हमारे बीच ही होते हैं बस पहचानने की देर होती है। बहरहाल रमजान को लेकर आपकी क्या राय है? कमेंट बॉक्स आपके लिए है। अपनी टिप्पणी वहां जरूर कीजिएगा। मेरा नाम है मुकुंद। आप बने रहिए वन इंडिया के साथ। शुक्रिया। [संगीत] सब्सक्राइब टू वन इंडिया एंड नेवर मिस एन अपडेट। डाउनलोड [संगीत] द वन इंडिया ऐप नाउ।