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11 दिन में ही विजय की सरकार पर लगे बड़े संगीन आरोप।

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तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री जोसेफ विजय की सरकार पर 11 दिन के अंदर ही का आरोप लग गया है। आरोप है कि एक खास ठेकेदार को फायदा पहुंचाने के लिए सुबह 9:00 बजे टेंडर जारी हुआ और 3:00 बजे टेंडर के लिए एप्लीकेशन को क्लोज कर दिया गया। यानी बोली लगाने वालों को सिर्फ 6 घंटे का वक्त मिला।

आरोप है कि बाकी लोग इस टेंडर के लिए अप्लाई ना कर दे और मनपसंद ठेकेदार को ठेका मिल जाए इसलिए टेंडर के लिए इतने कम घंटों की विंडो दी गई।

₹16,83,000 के जिस टेंडर को लेकर विवाद हो रहा है, वो टेंडर आखिर है क्या? और इस विवाद के बाद मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने क्या एक्शन लिया है वह भी आपको बताते हैं। तमिलनाडु की मुख्य विपक्षी दल डीएमके के प्रदेश उपाध्यक्ष अमूथरासन ने टीवी के पर टेंडर को लेकर का आरोप लगाया है। यह विवाद 19 मई को ग्रामीण विकास विभाग की ओर से जारी किए गए एक टेंडर से जुड़ा हुआ है।

कांचीपुरम जिले में 300 लीटर की क्षमता वाली एक ऊंची पानी की टंकी बनाने के लिए टेंडर निकाला गया। ₹16,83,000 के इस टेंडर का एडवर्टाइजमेंट सुबह 9:00 बजे पब्लिश किया गया वेबसाइट पर और बोलियां जमा करने की जो अंतिम समय सीमा थी वो उसी दिन दोपहर 3:00 बजे की तय की गई थी। यानी बोली लगाने के लिए इच्छुक जो लोग हैं वो सिर्फ और सिर्फ 6 घंटे के अंदर वो है वो टेंडर के लिए अप्लाई कर सकते थे। टेंडर के मुताबिक ये बोलियां 19 मई को ही शाम को 4:00 बजे खोली जानी थी। यानी 3:00 बजे तक का टाइम था और 4:00 बजे वह टेंडर अलॉट भी हो जाना था। इसी बीच ग्रामीण विकास मंत्रालय के इस टेंडर का जो डिटेल है वह सोशल मीडिया पर वायरल हुआ।

लोग सवाल उठाने लगे। स्क्रीनशॉट शेयर किए गए जिसके बाद मुख्यमंत्री जोसेफ विजय को निशाने पर लिया जाने लगा। टेंडर की टाइमिंग को लेकर ट्रांसपेरेंसी की कमी के आरोप लगे। जिसके बाद मुख्यमंत्री जोसेफ विजय की सरकार ने इस टेंडर को रद्द कर दिया। डीएमके के प्रदेश उपाध्यक्ष अमुथरासन ने टेंडर की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह सब किसी खास कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि किसी भी कंपनी के लिए 6 घंटे के भीतर डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट यानी डीपीआर जो है वो करना मुश्किल काम है और छोटी कंपनियां इतने कम समय में सभी जरूरी जो औपचारिकताएं हैं उन्हें कैसे पूरा कर सकती है? यह प्रशासनिक तेजी नहीं है। यह पहले से सोची समझी ठेका राजनीति है।

इस मुद्दे पर मंत्री एन आनंद को निशाने पर लेते हुए विपक्ष ने सवाल पूछा कि नई सरकार की सत्ता संभालने के तुरंत बाद इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई गई? ऐसा लग रहा है कि टेंडर की शर्तें सिर्फ एक कंपनी को फायदा पहुंचाने के हिसाब से ही बनाई गई थी।

विपक्ष ने इस टेंडर प्रक्रिया को तमिलनाडु ट्रांसपेरेंसी इन टेंडर एक्ट का उल्लंघन बताया। टीवी के सरकार के विरोधी कह रहे हैं कि सरकार ने अभी ठीक से काम भी करना शुरू नहीं किया है और उससे पहले ही सार्वजनिक ठेकों में ट्रांसपेरेंसी से समझौता कर लिया। विपक्ष और सोशल मीडिया पर उठे सवालों के बीच 19 मई को जारी टेंडर को 20 मई को रद्द कर दिया गया। इसके साथ ही कांचीपुरम की पूर्व ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर यानी बीडीओ के शांति जो कि अभी वर्तमान में वालजाबाद पंचायत यूनियन में तैनात हैं। इसके अलावा कांचीपुरम पंचायत यूनियन की असिस्टेंट इंजीनियर कायल विजयी को निलंबित कर दिया गया है। निलंबन का यह आदेश डीआरडीए कांचीपुरम की प्रोजेक्ट डायरेक्टर की के आरती की ओर से जारी किया गया है। टेंडर पर करप्शन के आरोपों को इसलिए भी हवा मिली क्योंकि जिन ग्रामीण विकास और पंचायत राज मंत्री और टीबीके के जो महासचिव हैं।

एन आनंद उन्होंने इस विभाग में ठीक एक दिन पहले ही मंत्री पद संभाला था और उसके अगले ही दिन टेंडर में करप्शन का आरोप लग गया। अब भले ही टेंडर रद्द हो गया है लेकिन मुख्यमंत्री जोसेफ विजय की सरकार के जो सफेद शर्ट है उस पे करप्शन की छींटें कहीं ना कहीं तो पड़ ही गई हैं।

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