लाखों लोगों की भीड़, सड़कों पर जनसैलाब और फिर अचानक आसमान में उड़ता हेलीकॉप्टर। आखिर ऐसा क्या हुआ कि खामेन का ताबूत सड़क से सीधे हेलीकॉप्टर तक पहुंच गया। यही सवाल पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना हुआ है। दरअसल ईरान के दिवंगत सरोची नेता आयतुल्ला अली खामिनेई की अंतिम यात्रा तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला धार्मिक परिसर से शुरू हुई।
दो दिन तक अंतिम दर्शन के बाद उनका जनाजा राजधानी तेहरान की सड़कों से करीब 12 घंटे तक निकाला गया। ताबूत को एक विशेष ट्रक पर रखा गया था जिसके चारों ओर लाखों लोग उमड़ पड़े थे। लोग फूल बरसा रहे थे। दुआएं कर रहे थे और अंतिम दर्शन के लिए सड़क के दोनों ओर भीड़ खड़ी थी। भीड़ इतनी ज्यादा थी कि कई जगह जुलूस की रफ्तार बेहद धीमी पड़ गई और सुरक्षा एजेंसियों के लिए व्यवस्था संभालना चुनौती बन गया।
इसके बाद जनाजा तेहरान के मेहराबाद एयरपोर्ट पहुंचा। यहां से ताबूत को हेलीकॉप्टर के जरिए पवित्र शहर कौम ले जाया गया। जहां धार्मिक सम्मान के साथ श्रद्धांजलि दी गई। इसके बाद अंतिम यात्रा इराक के पवित्र शहर नजफ और कर्बला तक पहुंची। आखिर में पार्थिव शरीर को वापस ईरान लाकर उनके पैतृक शहर मशहद में सुपुर्द खाक किया जाना तय किया गया। हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल किसी रहस्य की वजह से नहीं बल्कि अभूतपूर्व भीड़, सुरक्षा व्यवस्था और तय कार्यक्रम के अनुसार अगले पड़ाव तक ताबूत को सुरक्षित पहुंचाने के लिए किया गया था।
ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक पूरी अंतिम यात्रा कई शहरों और धार्मिक स्थलों से होकर गुजरी। इस दौरान लाखों लोगों की मौजूदगी ने इसे हाल के वर्षों की सबसे बड़ी अंतिम यात्राओं में शामिल कर दिया। सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब, आसमान में उड़ता हेलीकॉप्टर और गम में डूबा पूरा माहौल। इन तस्वीरों ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। ताजा अपडेट्स और बड़ी खबरों के लिए बने रह पत्रिका के साथ। मैं हूं आपके साथ कृपा शंकर शर्मा। देश दुनिया की ताजा खबरें और वीडियोस के लिए अभी डाउनलोड करें पत्रिका ऐप। हां।