तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर सियासी ड्रामा लगातार बढ़ता जा रहा है। चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद थलापति विजय अभी तक मुख्यमंत्री की कुर्सी तक नहीं पहुंच पाए हैं। वजह सिर्फ एक है बहुमत का आंकड़ा। विजय के पास सरकार बनाने के लिए जरूरी 118 विधायक नहीं है और यही कमी उन्हें दूसरी बार भी भारी पड़ गई।
थलापति विजय एक बार फिर राजभवन पहुंचे थे। उन्हें उम्मीद थी कि सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते सरकार बनाने का मौका मिल जाएगा। लेकिन राज्यपाल ने साफ शब्दों में कह दिया कि पहले 118 विधायकों का समर्थन दिखाइए। उसके बाद ही आगे की प्रक्रिया होगी। असल में टीवी ने चुनाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए 108 सीटें जीती। लेकिन बहुमत के लिए अभी भी 10 विधायक कम पड़ रहे हैं।
यही 10 सीटें अब तमिलनाडु की राजनीति का सबसे बड़ा गेम बन चुकी है। सूत्रों के मुताबिक राज्यपाल नहीं चाहते कि जल्दबाजी में ऐसी सरकार बने जो कुछ दिनों बाद गिर जाए। इसलिए उन्होंने विजय से साफ कहा है कि पहले लिखित समर्थन लेकर आइए तभी शपथ ग्रहण की बात आगे बढ़ेगी।
दिलचस्प बात यह है कि यह दूसरा मौका है जब विजय को राजभवन से निराश होकर लौटना पड़ा है। पहली बार भी बहुमत ना होने की वजह से उन्हें इंतजार करने को कहा गया था और अब दूसरी मुलाकात में भी तस्वीर नहीं बदली। इधर सत्ता की इस लड़ाई में दूसरे दल भी एक्टिव हो गए हैं। एआईएडीएम के प्रमुख ई पलानी स्वामी यानी ईपीएस ने भी राज्यपाल से मिलने का समय मांगा है। वहीं वीसी के प्रमुख थोल थिरुमाव बलवन ने डीएमके चीफ एमके स्टालिन से मुलाकात की है। अब सबकी नजर वीसीके के अगले कदम पर टिकी हुई है।
अगर वीसीके टीवी को समर्थन देती है तो विजय की राह आसान हो सकती है। हालांकि अभी तक पार्टी ने खुलकर अपना फैसला नहीं बताया है। दूसरी तरफ डीएमके ने भी संकेत दिए हैं कि अगर वीसी के टीवी के साथ जाती है तो वह उसे रोकने की कोशिश नहीं करेगी।
उधर सीपीआई ने राज्यपाल के फैसले पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि संविधान के मुताबिक सबसे बड़ी पार्टी को पहले शपथ दिलानी जानी चाहिए और बहुमत का टेस्ट विधानसभा में होना चाहिए। राजभवन में नहीं। सीपीआई ने सुप्रीम कोर्ट के एसआर मुंबई फैसले का भी हवाला दिया है। इस बीच एआईएडीएम के खेमे में भी हलचल तेज हो गई है। खबर है कि पार्टी के कई विधायक पुुडुचेरी में रुके हुए हैं और लगातार मीटिंग्स चल रही है।
सूत्रों के मुताबिक कुछ विधायक टीवी को समर्थन देने के बदले बड़ी हिस्सेदारी चाहते थे। लेकिन ईपीएस इसके लिए तैयार नहीं हुए। अब कुछ विधायक दूसरी संभावनाएं भी तलाश रहे हैं। यानी तमिलनाडु की राजनीति में हर पल समीकरण बदल रहे हैं और सत्ता की तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है क्या थलापति विजय वो 10 विधायक जुटा पाएंगे जिनकी वजह से मुख्यमंत्री की कुर्सी उनसे दूर खड़ी है या फिर तमिलनाडु में कोई नया सियासी खेल शुरू होने वाला है।