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वंदे मातरम् बयान पर शर्मिला टैगोर पर बौखलाए मुकेश खन्ना, कह दी बड़ी बात,मचा बवाल!

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राष्ट्रगीत वंदे मातरम को लेकर छिड़ी बहस जैसे थमने का नाम ही नहीं ले रही है। दिग्गज अभिनेत्री शर्मिला टैगोर के बयान के बाद इस मुद्दे पर और भी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं।

शर्मिला टैगोर ने वंदे मातरम के शुरुआती दो पदों के बाद की पंक्तियों पर आपत्ति जताई है। लेकिन उनके इस बयान पर अब चौतरफा हमला शुरू हो गया है। शक्तिमान फेम के मुकेश खन्ना से लेकर बीजेपी सांसद कंगना रनाउत और जेडीयू नेता शर्मिला टैगोर के विरोध में उतर आए हैं।वंदे मातरम और गर्माता विवाद। पहले राजनीतिक पार्टियों की बयानबाजियां शुरू हुई।

कांग्रेस बनाम बीजेपी हुआ और फिर इस विवाद में फिल्मी हस्तियां भी कूद गई। विवादों की शुरुआत हुई अभिनेत्री शर्मिला टैगोर के बयान से जिसमें उन्होंने कहा कि वंदे मातरम के पहले दो पदों के आगे गाना देश विरोधी नहीं है क्योंकि आगे के पदों में देवी दुर्गा की आराधना है जो हर धर्म के लिए स्वीकार्य नहीं हो सकती।

मेरा पॉइंट ऑफ व्यू है कि यहां पे काफी अ रिलीजन के लोग रहते हैं। मजहब के लोग रहते हैं जो एक गॉड में विश्वास करते हैं। सिंगल गॉड नॉट मेनी गॉड्स। और वंदे मातरम के जो स्टैंजा है वो वंदना करते हैं मेनी गॉड्स। आप पढ़ेंगे उसको तो आपको पता चलेगा। उसमें ऑल द गॉड्स आर मेंशंड बाय नेम। तो वो जो एक रिलीजन में विश्वास करते हैं उनके लिए मुश्किल है कहना कि वंदे काली वंदे दुर्गा वंदे मुश्किल है। तो इसीलिए अगर इंडिया में जितने रिलजन के लोग हैं उसको अगर हम इकट्ठा साथ ले चलें तो पहला टू टैंजा इज वेरी गुड। शर्मिला टैगोर के इस तर्क पर बाकी कलाकारों के भी बयान आने लगे। शर्मिला टैगोर के इस बयान का तेजी से विरोध होने लगा। शक्तिमान और भीष्म पितामह के नाम से घर-घर में मशहूर अभिनेता मुकेश खन्ना ने कहा कि हिंदू धर्म को केवल देवी देवताओं और मूर्तियों तक सीमित समझने की भूल ना करें।

स्टेटमेंट किसी और हमारी हमारी सीनियर एक्ट्रेस ने भी दे दिया है कि कि एक वर्ग जो है वो एक ही ईश्वर को मानता है वो ऐसे धर्म को नहीं मानेगा जिसके अंदर बहुत सारे ईश्वर है। अरे साहब हिंदू में बहुत सारे ईश्वर नहीं है। हिंदुओं में सिर्फ एक एक भगवान है जिसका कोई रूप नहीं है। निराकार बोलते हैं उसको। मुकेश खन्ना ने इस मामले पर कांग्रेस को भी आड़े हाथों लिया। 70 सालों से जो उन्होंने किया है उन्होंने एक वर्ग को खुश करने के लिए कि हम किसी के सामने नहीं झुकते। इसीलिए हम जो है वंदे मातरम नहीं पास करेंगे। हम जन गण मन को चलाएंगे।

मुकेश खन्ना से पहले अभिनेत्री बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने भी शर्मिला टैगोर के बयान को गलत ठहराया था। कंगना रनौत ने कहा था कि वंदे मातरम पर शर्मिला टैगोर के विचार से [संगीत] परेशान हूं। गीत को धार्मिक दृष्टिकोण से नहीं देखना चाहिए। गीत और कविता पर शर्मिला टैगोर की सोच सीमित वंदे मातरम हमारी स्वतंत्रता संग्राम की भावना है। महान गीत को धार्मिक रीति तक कैसे सीमित कर सकती हैं? बीजेपी सांसद अभिजीत गांगुली ने भी शर्मिला टैगोर के इस बयानकी कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने कहा कि सुझाव कोई भी दे सकता है। लेकिन इस तरह के फैसले करना देश विरोधी है। थिंग इज शर्मिला टैगोर कैन सजेस्ट।

एनीबडी कैन सजेस्ट। बट इफ समबडी टेक्स अ डिसिशन दैट विल नॉट सीइंग अबव बिय्ड सेकंड पैराग्राफ देन दैट्स एंटीनेशनल दैट्स लेट कम टू डिस्कशन आई वाज़ इन द लोकसभा डेज टुगेदर इन द लास्ट सेशन कांग्रेस नेवर वांटेड टू पार्टिसिपेट एनी डिस्कशन। वंदे मातरम को लेकर बढ़ा यह विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है।

शर्मिला टैगोर ने धार्मिक स्वतंत्रता का तर्क दिया और उनके इस बयान को राष्ट्रगीत का अपमान मान रहा है। अब देखना यह होगा कि इस चौतरफा घेराव के बाद क्या शर्मिला टैगोर अपने बयान पर कोई सफाई देती हैं या यह घमासान और आगे बढ़ेगा। ब्यूरो रिपोर्ट एनडीt इंडिया।

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