क्या 8 जून 2020 की वो रात सच में सिर्फ एक हादसा थी [संगीत] या उसके पीछे कोई ऐसा राज छुपा था जिसे दबाने की पूरी कोशिश की गई? आखिर दिशा और सुशांत के केस में कौन सा बड़ा सुराग हाथ लग गया है? 14वीं मंजिल से गिरकर जान गवाने वाली उस लड़की के चेहरे की एक भी हड्डी क्यों नहीं टूटी? और 6 साल की खामोशी के बाद 2026 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने ऐसा क्या देख लिया जिसने [संगीत] पूरे मामले को फिर से हिला कर रख दिया? दोस्तों चलिए आज सुशांत और दिशा के इस पूरे मामले को गहराई से समझते हैं और जानते हैं कि आखिर 2026 में ऐसा क्या हुआ जिसने इस ठंडी पड़ चुकी फाइल में फिर से आग लगा दी और हाई कोर्ट को इतना बड़ा आदेश देना पड़ा। पटना में जन्मे सुशांत सिंह राजपूत की कहानी किसी फिल्मी हीरो से कम नहीं थी। पढ़ाई में हमेशा बल रहने वाले सुशांत का दिमाग सिर्फ कैमरे के सामने एक्टिंग तक सीमित नहीं था। बल्कि वो एस्ट्रोफिजिक्स और ब्रह्मांड के रहस्यों में गहरी दिलचस्पी रखते थे। काई पोचे से बॉलीवुड में कदम रखने वाले सुशांत ने एमएस धोनी द अनटोल्ड स्टोरी में धोनी का किरदार निभाकर वो मुकाम हासिल किया जो हर एक्टर का सपना होता है। उनकी मौत के बाद कहा गया कि सुशांत डिप्रेशन और ए्जायटी से जूझ रहे थे और कई साइकेटिस्ट से इलाज करवा रहे थे। पुलिस ने बहुत ही जल्दबाजी में उनकी मौत को डिप्रेशन का नाम दे दिया। लेकिन उनके कमरे से मिली उनके 50 सपनों की लिस्ट कुछ और ही कहानी बयां कर रही थी। जरा सोचिए जो इंसान जिनेवा की लेबोरेटरी जाने, करने टेलिस्कोप से एंड्रोमेडा गैलेक्सी को देखने और 100 गरीब बच्चों को नासा भेजने का सपना देखता हो वो जिंदगी से हार कैसे मान सकता है?
उनके सपनों में दृष्टिहीन बच्चों को कोडिंग सिखाना और 1000 पेड़ लगाना भी शामिल था। जो इंसान बाएं हाथ से क्रिकेट खेलने और हवाई जहाज उड़ाने का लाइसेंस लेने का जुनून रखता हो, उसका बिना किसी आखिरी खत के चले जाना गले से नीचे नहीं उतरता। इस चक्रव्यूह की असली शुरुआत मुंबई की भीड़भाड़ वाली गलियों में नहीं बल्कि यहां से हजारों मील दूर। अक्टूबर 2019 में यूरोप की उन खूबसूरत वादियों में हुई थी, [संगीत] जहां की हवाओं में रोमांस होना चाहिए था। लेकिन वहां एक ऐसी खौफनाक साजिश रची जा रही थी जिसने सब कुछ बदल कर रख दिया। इटली के फ्लोरेंस शहर में अपनी पार्टनर रिया चक्रवर्ती के साथ छुट्टियां बिताते हुए एक 600 साल पुराने हेरिटेज होटल में रुकना सुशांत के लिए एक यादगार पल हो सकता था। लेकिन इस होटल के कमरे की दीवारों पर कुछ पुरानी और बेहद अजीबोगरीब पेंटिंग्स लगी हुई थी। इनमें से एक पेंटिंग थी स्पेनिश चित्रकार फ्रांसिस्को गोया की मशहूर जिसमें एक देवता अपने ही वर्चस्व को बचाने के लिए खौफनाक कदम उठा रहा है। इस ट्रिप से वापस आने के बाद जो कहानी दुनिया को सुनाई गई वो यह थी कि इस पेंटिंग को देखने के बाद सुशांत का मानसिक संतुलन बिगड़ने लगा था और उन्हें अजीबोगरीब [संगीत] चीजें दिखाई देने लगी थी। रिया के मुताबिक वह इतना डर गए कि उन्हें अपना टूर बीच में ही खत्म करके वापस लौटना पड़ा। लेकिन जरा सोचिए सुशांत जैसा एक ऐसा इंसान जो क्वांटम फिजिक्स की किताबें पढ़ता हो और जीवन के गहरे फलसफों को समझता हो। क्या वो महज एक पुरानी पेंटिंग को देखकर अपना दिमागी संतुलन खो सकता है या फिर यह एक बहुत बड़े खेल की शुरुआत थी। एक ऐसी स्क्रिप्ट का पहला ड्राफ्ट जिसे इसलिए लिखा जा रहा था ताकि भविष्य में होने वाली किसी भी अनहोनी का सारा दोष सुशांत की एक खराब मानसिक स्थिति पर मर दिया जाए। और दुनिया बिना कोई सवाल किए उस झूठी कहानी पर यकीन कर ले। यूरोप के उस साए से बाहर निकलते हुए समय का पहिया तेजी से घूमा और 8 जून 2020 की वो मनहूस तारीख आ गई जिसने आगे आने वाले पूरे तूफान की नींव रख दी। दरअसल उस दिन सुशांत की पूर्व सेलिब्रिटी मैनेजर दिशा सालियान की बेहद खौफनाक तरीके से मौत हो गई थी। हुआ यूं था कि मुंबई के मलाड इलाके में स्थित एक गगनचुंबी इमारत की 14वीं मंजिल पर एक पार्टी चल रही थी।
जहां उनके मंगेतर रोहन राय और कुछ करीबी दोस्त मौजूद थे। दिशा उस [संगीत] रात फोन पर यूके में बैठे अपने किसी दोस्त से बात कर रही थी। उन्होंने खुद को एक कमरे में बंद किया। करीब 20 मिनट तक बात की और फिर अचानक वो इमारत की 14वीं मंजिल जिसे कुछ पुलिस रिपोर्ट्स में 12वीं मंजिल भी बताया गया वहां से नीचे गिर गई। पुलिस मौके पर पहुंचती है और पलक झपकते ही इसे एक दुखद हादसा मानकर फाइल बंद करने की तैयारी शुरू कर देती है। लेकिन जब चश्मदीदों की बातें धीरे-धीरे सामने आने लगी तो कई ऐसे सवाल खड़े हुए जिनका जवाब किसी के पास नहीं था। सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह थी कि इस खौफनाक घटना के तुरंत बाद दिशा का मंगेतर रोहन राय नीचे नहीं आया। बल्कि काफी देर बाद वो मौके पर पहुंचा। उस 14वीं मंजिल के बंद फ्लैट में ऐसा क्या हो रहा था जिसे दुनिया की नजरों से [संगीत] छिपाने की कोशिश की जाए रे गाड़ती थी। घटना स्थल पर जो सुराग मिलने चाहिए थे वो गायब थे। और शुरुआती जांच में इतनी जल्दबाजी दिखाई गई कि हर किसी को शक होने लगा कि दाल में कुछ काला नहीं बल्कि पूरी दाल ही काली है। उसी 8 जून की रात जब मलाड में दिशा की जिंदगी खत्म हो रही थी। बांद्रा के एक आलीशान अपार्टमेंट में सुशांत को पूरी तरह से अकेला और बेबस किया जा रहा था। ठीक उसी दिन सुशांत सिंह राजपूत की जिंदगी का सबसे बड़ा सहारा उनकी पार्टनर रिया चक्रवर्ती अचानक उनका घर छोड़कर चली जाती हैं। यह कोई आम झगड़ा या रूठना मनाना नहीं था क्योंकि इसके बाद जो मैसेज भेजे गए वो किसी भी इंसान के रोंगटे खड़े कर सकते हैं। उस समय जब रिया के WhatsApp चैट्स खंगाले गए थे तो पता चल था कि रिया ने बॉलीवुड के दिग्गज फिल्म निर्माता महेश भट्ट को मैसेज किया कि वो अब आगे बढ़ चुकी हैं। भारी दिल के साथ लेकिन एक अजीब सी राहत के साथ। महेश भट्ट की तरफ से जवाब आता है कि पीछे मुड़कर मत देखो और इस बात पर रिया का यह कहना कि आपने मेरे पंखों को फिर से खोल दिया है। यह साफ दर्शाता है कि यह कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था। यह एक बहुत गहरी और सोची समझी योजना का हिस्सा था। एक ऐसे वक्त में जब दिशा सालियान की मौत की खबर से सुशांत बुरी तरह से घबराए हुए थे और उन्हें किसी अपने की सबसे ज्यादा जरूरत थी। उन्हें रिया द्वारा जानबूझकर [संगीत] पूरी तरह से अकेला छोड़ दिया गया। इस अकेलेपन और खौफ के उस दौर में 9 से 13 जून के बीच का वह समय आता है जब सुशांत चार दीवारों के बीच अपनी ही परछाई से लड़ रहे थे। उनकी रातों की नींद उड़ चुकी थी और इंटरनेट की दुनिया में वह कुछ ऐसी चीजें तलाश रहे थे जो उनकी मानसिक पीड़ा को बयान करती हैं। सुशांत इंटरनेट पर दर्द रहित तरीकों, अपने खिलाफ रची जा रही साजिशों की थ्योरी और दिशा सालियान से जुड़ी खबरों को लगातार खंगाल रहे थे। उन्हें इस बात का गहरा खौफ सता रहा था कि दिशा वाली घटना के तार कहीं जबरन उनके साथ ना जोड़ दिए जाएं और उन्हें किसी झूठे इल्जाम में फंसाकर उनका पूरा वजूद ना मिटा दिया जाए। वो घबराहट में अपनी बहन प्रियंका से बात करते हैं। दवाइयों के बारे में पूछते हैं। लेकिन अंदर ही अंदर वोट टूट रहे थे। 13 जून की वो आखिरी रात जब सुशांत ने अपनी जिंदगी के कुछ सबसे करीबी दोस्तों को फोन मिलाया तो किस्मत का खेल देखिए कि किसी ने वो फोन नहीं उठाया। अगर उस सर्द और खौफनाक रात में वो एक [संगीत] कॉल उठ जाता। अगर उस पार से किसी ने एक बार भी पूछ लिया होता कि सुशांत तुम कैसे हो, तो शायद आज बॉलीवुड का वह चमकता सितारा हमारे बीच होता। और यह कहानी कुछ और ही होती। फिर आई 14 जून 2020 की वो सुबह जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। बांद्रा के उस महंगे सी फेसिंग डुप्लेक्स में सुबह की शुरुआत बिल्कुल आम सी लग रही थी। सुशांत सुबह जल्दी उठते हैं। अपनी बहन से बात करते हैं। अपना रूटीन फॉलो करते हैं और अपने कमरे में चले जाते हैं। लेकिन कुछ घंटों बाद जब दोपहर के वक्त उस कमरे का दरवाजा खटखटाया जाता है तो अंदर से कोई आवाज नहीं आती। वक्त बीतता है, घबराहट बढ़ती है और आखिरकार एक चाबी वाले को बुलाकर उस दरवाजे का लॉक तोड़ा जाता है।
जैसे ही वह दरवाजा खुलता है, सामने का नजारा ऐसा था जिसने ना सिर्फ वहां मौजूद लोगों के बल्कि खबर सुनने वाले हर इंसान के पैरों तले जमीन खिसका दी। सुशांत जैसा दूरदर्शी इंसान जिसने अपने सपनों की एक लंबी लिस्ट बना रखी थी जिसमें हवाई जहाज उड़ाने से लेकर दृष्टिहीन बच्चों को कंप्यूटर कोडिंग सिखाने तक के अरमान दर्ज थे। वो अपनी जिंदगी की जंग हार चुका था। सबसे बड़ा रहस्य यह था कि उस पूरे कमरे में सुशांत की कोई आखिरी निशानी कोई भी आखिरी नोट नहीं मिला। एक ऐसा शख्स जो अपनी हर छोटी बड़ी बात को डायरी के पन्नों पर उतारता था। वो बिना कुछ कहे कैसे जा सकता है? कमरे की हालत और वहां बिखरे हुए सुराग एक ऐसी कहानी बयां कर रहे थे जो पुलिस की थ्योरी से बिल्कुल मेल नहीं खा रही थी। इस झोर देने वाली घटना के बाद सिस्टम की जिस तरह की लापरवाही सामने आई उसने कई बड़े सवालों को जन्म दिया। सुशांत को आनन-फानन में कूपर अस्पताल ले जाया गया। जहां रात के अंधेरे में बेहद जल्दबाजी में पोस्टमार्टम पूरा किया गया। उस रिपोर्ट में सबसे अहम चीज यानी समय का जिक्र तक नहीं था। जो किसी भी जांच का सबसे बुनियादी उसूल होता है। इन सबके बीच एक बहुत ही योजनाबद्ध तरीके से सुशांत की छवि को धूमिल करने का काम शुरू हो गया। एक झूठी कहानी फैलाई जाने लगी कि सुशांत बहुत कमजोर थे और अपनी मानसिक बीमारियों से हार गए थे। लेकिन इस पीआर मशीनरी के मुंह पर सबसे करारा तमाचा सुशांत की सबसे पुरानी और करीबी दोस्त अंकिता लोखंडे ने चढ़ा। अंकिता ने दुनिया के सामने आकर डंके की चोट पर कहा कि सुशांत ऐसा इंसान था ही नहीं जो मुश्किलों के सामने घुटने टेक दे। वो एक खुशमिजाज और फाइटर इंसान था जो गिर कर उठना जानता था। जिसके पास अपनी जिंदगी के हर 5 साल की एक पूरी योजना होती थी। अंकिता का यह बयान इस बात का सबसे बड़ा सबूत था कि दुनिया के सामने जो कहानी परोसी जा रही है वह सच से कोसों दूर है और इसके पीछे एक बहुत बड़ा खेल खेला जा रहा है। यह खेल सिर्फ भावनाओं और मानसिक स्थिति का नहीं था बल्कि इसके पीछे करोड़ों रुपयों का एक ऐसा जाल बिछा था जिसने बॉलीवुड के सबसे काले सच को बेनकाब कर दिया।
जब जांच एजेंसियों ने पैसों के लेनदेन को खंगालना शुरू किया तो पता चला कि सुशांत की गाढ़ी कमाई का करीब 15 करोड़ का एक बहुत बड़ा हिस्सा उन जगहों पर जा रहा था जिनका सुशांत से कोई वास्ता ही नहीं था और जब रिया और उनके करीबियों के मोबाइल फोंस के डिलीट किए गए WhatsApp मैसेजेस वापस लाए गए तो जो सच एनसीबी के सामने आया उसने पूरी इंडस्ट्री को हिला दिया। यह सच था उन प्रतिबंधित और नशीली चीजों का जिनका इस्तेमाल करके सुशांत को एक गहरी नींद और बेसुधी के जाल में फंसाया जा रहा था। महंगे और गैरकानूनी नशीले पदार्थों की खरीदफरोख्त हो रही थी और ऐसा लग रहा था कि सुशांत को जानबूझकर इन चीजों का आदि बनाया जा रहा था ताकि उनका अपने ही जीवन, अपने पैसों और अपने संपर्कों पर से पूरी तरह नियंत्रण खत्म हो जाए। एक ऐसा चक्रव्यूह तैयार किया गया था जिसमें फंसाकर उनकी हर सांस पर किसी और का हुक्म चल रहा था। जब इन सारे राज पर से पर्दा उठने लगा और सच्चाई की मांग तेज हुई तो सिस्टम का सबसे खौफनाक और घिनौना चेहरा सामने आया। जब बिहार पुलिस के एक ईमानदार और तेजतर्रार आईपीएस अफसर विनय तिवारी सच्चाई की तह तक जाने के लिए मुंबई में कदम रखते हैं तो उन्हें कोविड नियमों का बहाना बनाकर रातोंरात बीएमसी द्वारा क्वारेंटाइन कर दिया जाता है। एक सरकारी अधिकारी को उसकी ड्यूटी करने से रोकने का ऐसा दुस्साहस पहले कभी नहीं देखा गया था। यह साफ इशारा था कि कोई बहुत बड़ी और अदृश्य ताकत है जो नहीं चाहती कि इस मामले की एक भी फाइल दोबारा खुले। सालों के लंबे और थका देने वाले इंतजार के बाद जब 2025 में एक रिपोर्ट सामने आई जिसमें हर तरह की साजिश को नकारते हुए मामले को बंद करने की बात कही गई तो ऐसा लगा जैसे इंसाफ की आखिरी उम्मीद भी टूट गई है। लेकिन कहते हैं ना कि सच को कितनी भी गहराई में क्यों ना दफना दो वो अपना रास्ता खोज ही लेता है। ठीक 1 साल बाद 2026 में कहानी में एक ऐसा मोड़ आया जिसने न्यायपालिका की चौखट पर एक नया भूचाल ला दिया। दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान ने जब हार ना मानते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया तो अदालत ने उस पुरानी पुलिस जांच की धज्जियां उड़ा दी। अदालत ने वो सारे सवाल पूछ लिए जो जनता सालों से पूछ रही थी कि आखिर दिशा के मामले में सुराग कहां गए? वो फुर्ती कहां गई? जब बॉम्बे हाईकोर्ट ने यही फाइलें खोली तो अदालत ने साफ कहा कि पुलिस की जांच जवाब देने से ज्यादा सवाल छोड़ गई। कोर्ट ने नोट किया कि स्पॉट पंचनामा करीब 9 घंटे बाद हुआ। अडीआर रात 3:07 पर दर्ज हुई जबकि पिता अस्पताल बाद में पहुंचे और फिर भी बयान पहले से दर्ज दिखे।
सीसीटीवी में पुलिसकर्मी इमारत के आसपास उस समय भी दिखे जब आधिकारिक तौर पर घटना दर्ज होने से पहले की घड़ी चल रही थी। अदालत ने पूछा कि वह पुलिसकर्मी कौन थे? वहां क्या कर रहे थे? और अधियार में उनका जिक्र क्यों नहीं था? यह बातें सोशल मीडिया की थ्योरी नहीं थी। यह सितंबर 2026 के आदेश में दर्ज अदालती टिप्पणियां थी। फॉरेंसिक वाला हिस्सा सबसे ज्यादा चर्चा में रहा क्योंकि अदालत ने खुद लिखा कि इतनी ऊंचाई से मुंह के बल गिरने के बावजूद चेहरे की हड्डियां ना टूटना और सिर्फ ठुडी पर छोटी चोट दिखना जांच का विषय है। गवाहों ने खून निकलने की बात कही। लेकिन पुलिस ने जगह पर खून ना मिलने की बात कही। पुलिस ने कहा बारिश आने की वजह से वहां खून नहीं मिला। लेकिन अदालत ने कहा बारिश बाद में हुई। कपड़ों और सैंपल पर खून कम मिलना। लैब ने भी उठाया। फोन और लैपटॉप 8 दिन बाद दोस्त के पास से जब्त हुए। यह सारी बातें कोर्ट ने इसलिए गिनाई ताकि यह साफ हो सके कि एडीआर वाली सीमित जांच काफी नहीं थी। कोर्ट ने किसी को दोषी नहीं ठहराया। कोर्ट ने सिर्फ इतना कहा कि संदेह के यह बिंदु एफआईआर और पूरी जांच मांगते हैं। अदालत ने उस पुरानी फाइल को कूड़ेदान में डालते हुए सीबीआई को एक नई और निष्पक्ष जांच के आदेश दे दिए। यह फैसला सिर्फ दिशा सालियान की जीत नहीं था बल्कि यह उस हर इंसान की उम्मीद थी जो यह जानता है कि जिस तंत्र ने मालाड के उस दिशा सालियान मामले में इतनी बड़ी लापरवाही बरती ठीक उसी तंत्र ने 6 दिन बाद बांद्रा के सुशांत सिंह राजपूत मामले को भी संभाला था| जब एक मामले में इतना बड़ा झोल साबित हो सकता है
तो दूसरे मामले को अंतिम सत्य कैसे माना जा सकता है| यह फैसला इस बात की गवाही दे रहा था कि 2020 में जो भी हुआ था [नाक से की जाने वाली आवाज़] वो वो एक बहुत बड़े षड्यंत्र का हिस्सा था जिसकी मोहरे आज भी बेनकाब होने बाकी हैं। यह पूरी दास्तान केवल सुशांत और दिशा जैसी दो नौजवान और सपनों से भरी जिंदगियों के दुखद अंत की नहीं है। यह एक ऐसे खोखले तंत्र का पर्दाफाश है जहां कोई आम आदमी अगर अपनी मेहनत और लगन से शोहरत के उस मुकाम पर पहुंच जाए जो सिर्फ कुछ गिने-चुने लोगों की जागीर मानी जाती है तो उसे कितनी भयानक कीमत चुकानी पड़ती है। सुशांत जो किसी बड़े फिल्मी खानदान से नहीं थे, जिन्होंने इंजीनियरिंग की किताबें छोड़कर एक नए शहर में अपने दम पर अपनी पहचान बनाई, उन्हें इस गहरी और अंधेरी दुनिया ने कभी अपना नहीं माना। उनके वो 50 सपने आज भी उस बंद डायरी में इंसाफ का इंतजार कर रहे हैं। जिस सुशांत ने हमेशा तारों की बातें की, वो आज खुद एक तारा बन चुके हैं। लेकिन उनकी चमक आज भी उन लोगों की आंखों में चुबती है जिन्होंने उनके खिलाफ साजिशें रची थी। यह लड़ाई तब तक खत्म नहीं हो सकती जब तक सुशांत और दिशा के यह सारे अनसुलझे सवाल अपने जवाब नहीं पा लेते। अब वक्त आ गया है कि इस वीडियो को देखने वाला हर इंसान अपनी आवाज उठाए। कमेंट्स में उस इंसाफ की मांग को जिंदा रखें और इस कहानी को रुकने ना दें।