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सोनम रघुवंशी केस: पुलिस की ये घिनौनी हरकत जानकार चौंक जाएंगे आप

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सोनम रघुवंशी की जमानत फिलहाल बरकरार रखी जाएगी। ऐसा राजा रघुवंशी केस की एक हालिया सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा। इसके पहले हाईकोर्ट ने पुलिस को अपना दिमाग इस्तेमाल ना करने की बात करते हुए भी फटकार लगाई थी। सोनम रघुवंशी आपको याद होगी। अपने पति राजा रघुवंशी के में मुख्य आरोपी हैं। इंदौर के रहने वाले राजा पत्नी सोनम के साथ मई 2025 में हनीमून के लिए मेघालय गए थे।

वहां चेरापूंजी में ही उनका हो गया था। पहले जानते हैं कि 1 साल में इस केस में अब तक क्या हुआ। 23 मई 2025 राजा रघुवंशी का । 3 जून 2025 राजा के भाई विपिन रघुवंशी ने मेघालय के सोहरा पुलिस थाने में एफआईआर लिखवाई।

राजा के की रिकवरी को लेकर। इसके बाद राजा रघुवंशी के की रिकवरी के आधार पर सेक्शन 1031 भारतीय न्याय संहिता के तहत एफआईआर दर्ज हुई। 9 जून 2025 सोनम रघुवंशी को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से अरेस्ट किया गया। 5 सितंबर 2025 जांच एजेंसी ने चार्जशीट फाइल की। 27 अप्रैल 2026 शिलंग डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने जमानत के आवेदन को मंजूरी दी।

29 जून 2026 मेघालय उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार की याचिका को खारिज कर दिया। 2 जुलाई 2026 राज्य सरकार ने बेल ऑर्डर को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। अर्जेंट सुनवाई के लिए मेंशन दिया। 3 जुलाई 2026 जब सुप्रीम कोर्ट में पहली सुनवाई हुई। कोर्ट ने जमानत पर रोक लगाने से इंकार किया। और 9 जुलाई 2026 जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की पीठ के सामने सुनवाई हुई।

कोर्ट ने संकेत दिया कि मामला बड़ी बेंच को भेजा जा सकता है। 14 जुलाई 2026 है सुनवाई की अगली तारीख। अब दो सुनवाइयों का खास जिक्र जरूरी है। पहली 27 अप्रैल 2026 शिलंग डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने गिरफ्तारी के बाद दस्तावेजीकरण जो हुआ था उसकी प्रक्रिया से जुड़ी कई गंभीर गलतियां और विसंगतियां देखी। मसलन एफआईआर दर्ज हुई थी भारतीय न्याय संहिता की धारा 103 सब सेक्शन वन के तहत यानी मर्डर के लिए। लेकिन गिरफ्तारी के आधार की जो सूचना दी गई उसमें धारा 403 वन लिखा था।

टेंपलेट में चेक बॉक्सों को टिक नहीं किया गया था। कोर्ट इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि अरेस्ट का जो बुनियादी आधार था वो प्रभावी रूप से कम्युनिकेट नहीं किया गया और स्पष्ट जानकारी की इस कमी ने कानूनी बचाव की तैयारी करने के सोनम रघुवंशी के अधिकार को नुकसान पहुंचाया। दूसरी 29 जून 2026 जब मेघालय उच्च न्यायालय ने सरकार की बेल ऑर्डर पर स्टे लगाने की अपील को खारिज कर दिया और जमानत इसलिए बरकरार रखी क्योंकि अदालत ने पाया कि पुलिस ने गिरफ्तारी के सही कारण सोनम को स्पष्ट तरीके से नहीं बताए। गिरफ्तारी के समय दिए गए दस्तावेज में कई ऐसी बातें लिखी थी।

जिनका इस मामले से कोई संबंध नहीं था। इससे अदालत को लगा कि गिरफ्तारी करने वाले अधिकारियों ने दस्तावेज तैयार करते समय ठीक से सोच समझकर काम नहीं किया। पुलिस की यह गलतियां सोनम को जमानत देने का प्रमुख आधार बनी। गुरुवार 9 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में भी केस की सुनवाई हुई। इसमें क्या हुआ? जस्टिस मनोज मिश्रा ने कहा कि पुलिस की ओर से सिर्फ कानून की धाराओं का उल्लेख कर देना काफी नहीं है। गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को यह भी बताया जाना चाहिए कि उसे किन तथ्यों और आरोपों के आधार पर गिरफ्तार किया गया है ताकि वह गिरफ्तारी की वजह को समझ सके।

सुप्रीम कोर्ट ने मेघालय सरकार को निर्देश दिया कि वह अपना लिखित पक्ष दाखिल करें। सोनम रघुवंशी को गिरफ्तारी के समय जो कागजात दिए गए थे उनकी कॉपीज भी अदालत में पेश करें। इनको देखने के बाद ही सुप्रीम कोर्ट तय करेगा कि संविधान के तहत गिरफ्तारी का कारण बताए जाने की जो अनिवार्य प्रक्रिया है उसका सही तरीके से पालन किया गया था या नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने इससे जुड़े चार पुराने फैसलों का जिक्र भी किया जिससे प्रोसीक्यूशन पक्ष को दिशा मिल सके।

साथ ही पुलिस गिरफ्तारियों के दौरान नियमों का पालन करें। इस मामले में अगली सुनवाई 14 जुलाई को होगी। इस दिन सुप्रीम कोर्ट सोनम की जमानत के खिलाफ मेघालय सरकार की अपील सुनेगी।

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