40 साल बाद न्यूजीलैंड पहुंचा भारत का कोई प्रधानमंत्री किया ओरा जहां 10,000 लोगों के बीच पहुंचे मोदी। इस देश में एक भी नहीं सांप इंसानों से ज्यादा यहां रहती है भेड़े। भारत से जुड़ी है यहां की एक अजीब कहानी। मोदी के न्यूजीलैंड पहुंचते ही दिखा चौंकाने वाला नजारा।
दो तस्वीरें देखकर सब चौंके यहां क्या लेने पहुंचे हैं मोदी। अभी तक ख़स्तानियों का गढ़ ब्रिटेन और कनाडा रहे। जहां पिछले कुछ सालों से सफाई शुरू है। जस्टिन टूडो को अपनी कुर्सी भी गवानी पड़ गई। लेकिन अब न्यूजीलैंड में पिछले कुछ सालों से अलगाववादी और खालिस्तानी समर्थकों का असर दिख रहा है। पिछले 40 साल से भारत का कोई भी प्रधानमंत्री न्यूजीलैंड नहीं गया। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी 40 साल बाद क्यों पहुंचे और क्या करने पहुंचे?
में इसका असर पहले दिन दिखना शुरू हो गया है। न्यूजीलैंड के ऑकलैंड शहर की सबसे प्रसिद्ध और ऐतिहासिक इमारत स्काई टावर को मोदी के स्वागत में सजाया गया। न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने खुद ऑल इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर आकर मोदी की अगवानी की। रनवे पर बिछाए गए रेड कारपेट पर एक दूसरे को गले लगाया और भारत न्यूजीलैंड के बीच 40 साल पुरानी जो दूरियां थी उसका असर ऐसा दिखा कि कई देशों में हलचल बढ़ गई। लेकिन मोदी यहां क्यों पहुंचे और क्या लेकर आने वाले हैं ।
आपको जानना जरूरी है। न्यूजीलैंड कई वजहों से पूरी दुनिया में जाना जाता है। पहली वजह तो यही है कि इस देश में सांप नहीं मिलते हैं क्योंकि इसके दूर-दूर तक चारों तरफ सिर्फ समुद्र है। इसके साथ ही यहां कहते हैं इंसानों से ज्यादा भेड़े और जानवर हैं। यहां इंसानी आबादी करीब 55 लाख के आसपास लेकिन भेड़ों की आबादी उससे भी कई गुना ज्यादा है।
एक और खास बात है न्यूजीलैंड दुनिया के सबसे ईमानदार और कम वाले देशों में हमेशा टॉप पर रहता है। इसके साथ ही पूरी दुनिया में ये पहला ऐसा देश था जिसने सबसे पहले 1893 में महिलाओं को वोटिंग का अधिकार दिया। यहां मोदी के जाने से पहले 40 साल पहले पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी अक्टूबर 1986 में न्यूजीलैंड के ऑकलैंड और वेलिंगटन दौरे पर गए थे। उस दौरान राजीव गांधी एक खास रणनीति के तहत गए थे। उस दौरान भारत परीक्षण पर काम कर रहा था और पूरी दुनिया की नजर भारत पर थी।
इसीलिए राजीव गांधी ने न्यूजीलैंड जाकर यह भरोसा दिया कि भारत शक्ति रखते हुए भी संयम और धैर्य के साथ काम कर रहा है। नीति पर न्यूजीलैंड के तात्कालीन प्रधानमंत्री डेविड लांगे के विश्वास को जीतना भी था ताकि भारत को एक जिम्मेदार शक्ति माना जाए। इस ऐतिहासिक यात्रा से भारत को तात्कालीन और दीर्घकालिक दोनों तरह के बड़े फायदे हुए। भारत के प्रति न्यूजीलैंड का नजरिया बदला और तात्कालीन कीवी प्रधानमंत्री ने भारत की नीति के प्रति वैश्विक मंचों पर सकारात्मक रुख अपनाया। अब करीब 40 साल बाद मोदी पहुंचे। इसलिए मोदी क्या करने पहुंचे यह जानना जरूरी है। अभी तक न्यूजीलैंड के साथ भारत का व्यापार बहुत अच्छा नहीं रहा।
सिर्फ क्रिकेट तक ही सबसे ज्यादा जुड़ाव रहा। 2025 में न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टीफर लक्सन दिल्ली आए थे। इसी दौरान क्रिस्टीफर ने मोदी को न्यूजीलैंड आने के लिए आमंत्रित किया था। 40 साल बाद जब भारत का कोई पीएम न्यूजीलैंड पहुंचा तो उसका असर भी दिखा। जहां एयरपोर्ट पर खुद क्रिस्टीफर प्रोटोकॉल तोड़कर पहुंच गए और मोदी को गले लगाया। इंटरनेट पर ये तस्वीरें खूब वायरल हो रही हैं। लेकिन मोदी यहां से चार बड़ी डील करके लौटे हैं। पहली डील है।
100% भारतीय सामान टैक्स फ्री होगा। इस समझौते के तहत न्यूजीलैंड के बाजार में भारत से निर्यात होने वाले 100% सामान पर कोई सीमा शुल्क नहीं लगेगा। इससे भारत के कपड़ा, रत्न और दवा उद्योगों को सीधा फायदा होगा। इसके साथ ही विदेशी फल और उत्पाद भी सस्ते होंगे। इस डील के बाद भारत में न्यूजीलैंड से आने वाले कीवी, सेब, ऊन और लकड़ी काफी सस्ते दामों पर उपलब्ध हो सकेंगे। हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा की साझेदारी पर भी डील हुई है।
चीन के बढ़ते नौसैनिक प्रभाव को देखते हुए दोनों देशों ने इंडोपेसिफिक क्षेत्र को सुरक्षित और खुला रखने के लिए खुफिया जानकारी साझा करने और रक्षा सहयोग बढ़ाने पर डील की है।
मतलब कोई भी देश भारत के खिलाफ समुद्र में जाल बिछाएगा तो न्यूजीलैंड भारत को खुफिया जानकारी देगा और मदद करेगा। इसके साथ ही खेल और पर्यटन को बढ़ावा पर भी डील हुई है। जिसमें दोनों देशों ने क्रिकेट और रगबी जैसे खेलों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और एक्सचेंज प्रोग्राम शुरू करने की डील की है। यह डील भारत के लिए बहुत फायदेमंद होने वाली है। लेकिन इसके बाद भी मोदी के न्यूजीलैंड दौरे को लेकर विपक्ष सवाल उठा रहा है। l