आ शुभेंदु अधिकारी ईश्वर नाम में शपथ करते छ जे क्या आप जानते हैं कि बंगाल की राजनीति का सबसे बड़ा पावर शिफ्ट आज हकीकत बन चुका है। कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आज अमित शाह की मौजूदगी में वो हुआ जिसकी कल्पना कुछ साल पहले तक नामुमकिन थी।
शुभेंदु अधिकारी जिन्होंने ममता बनर्जी के 15 साल पुराने अभैेद दुर्ग को ढहा दिया। अब पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री के तौर पर कमान संभाल रहे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस नेता के एक इशारे पर बंगाल की सियासत हिल जाती है उनकी निजी जिंदगी और बैंक बैलेंस की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। चलिए जानते हैं बंगाल के इस नए अधिकारी के बारे में वो बातें जो शायद ही आपने सुनी होंगी।
नमस्कार, मेरा नाम है अनुष गुप्ता और आप देख रहे हैं एनडीt इंडिया। शुभेंदु अधिकारी का सियासत से रिश्ता नया नहीं है बल्कि यह उनके खून में है। 15 दिसंबर 1970 को पूर्व मोदिनीपुर के काथी में जन्मे शुभेंदु के पिता शिशिर अधिकारी बंगाल की राजनीति के वो दिग्गज स्तंभ हैं जिन्होंने केंद्र में मंत्री के तौर पर अपनी धाक जमाई थी। शुभेंदु ने अपनी पढ़ाई का में ही पूरी की और साल 2006 में पहली बार विधायक बनकर अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत की। तब से लेकर आज तक चाहे वो नंदीग्राम का ऐतिहासिक आंदोलन हो या फिर 2021 और 2026 के चुनावी दंगल शुभेंदु ने हमेशा खुद को जमीन का नेता साबित किया है। अब बात करते हैं उस सच की जिसने सबको हैरान कर दिया है।
अक्सर हम बड़े नेताओं को लग्जरी लाइफस्ट में देखते हैं। लेकिन शुभेंदु अधिकारी की कहानी बिल्कुल अलग है। आप जानकर दंग रह जाएंगे कि करोड़ों की राजनीति करने वाले शुभेंदु के पास आज भी ₹1 करोड़ की संपत्ति नहीं है। ताजा हलफनामे के मुताबिक उनकी कुल नेटवर्थ करीब ₹85.87 लाख है और दिलचस्प बात यह है कि बंगाल के होने वाले सीएम के पास अपनी कोई निजी कार या सोने चांदी के गहने तक नहीं है।
उनकी यह सादगी आज के दौर के राजनेताओं के लिए एक बड़ी मिसाल है। जहां वो सिर्फ कुछ छोटे फ्लैट्स और कृषि भूमि के मालिक हैं। शुभेंदु की जिंदगी का सबसे बड़ा सवाल जो अक्सर पूछा जाता है, वह है उनकी वैवाहिक स्थिति। 55 साल के शुभेंदु अधिकारी आज भी अविवाहित हैं। जब उनसे इसके पीछे की वजह पूछी जाती है तो उनके करीबियों का कहना है कि उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी बंगाल की मिट्टी और यहां की जनता की सेवा के लिए समर्पित कर दी है। उनके लिए उनका परिवार अब बंगाल के करोड़ों लोग ही हैं। अब जब वह मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे हैं तो उनके सामने भ्रष्टाचार मुक्त बंगाल और युवाओं को रोजगार देने जैसी बड़ी चुनौतियां हैं। क्या शुभेंदु अपनी इस सादगी और संकल्प से बंगाल की तस्वीर बदल पाएंगे?