एक्टर शेखर सुमन अपने बेटे अध्ययन सुमन के साथ संजय लीला भंसाली की मोस्ट अवेटेड सीरीज हिरा मंडी में दिखाई देने वाले हैं सीरीज को लेकर शेखर सुमन काफी एक्साइटेड है एबीपी न्यूज से खास बातचीत में शेखर सुमन अपने बड़े बेटे आयुष सुमन को लेकर भावुक हो गए आयुष अब इस दुनिया में नहीं है जिन्हें याद करते हुए शेखर ने बताया कैसे आयुष को खोना उनकी जिंदगी की एक बड़ी ट्रेजेडी थी एक अभी आपने जिक्र किया अल्का मैम का तो हम अक्सर सुन भी थे जो ये वक्त रहा इस दौरान आपको अध्ययन को भी संभालना था उनको काम नहीं मिल रहा था
कहीं ना कहीं वो भी परेशान होंगे आप खुद बेटे की वजह से पर उनको संभालना अल्का मैम को संभालना कितना मुश्किल रहा पत्नी को संभालना कितना मुश्किल ज्यादा इमोशनल थी देखिए अक्सर ऐसा होता है कि पत्नी घर को संभालती है और क्योंकि औरतों में ज्यादा ताकत होती है मर्दों से मर्द टूट जाता है मुझे मालूम है कि जब आयुष कि बुरी खबर हमें जब मिली 1979 और अब चक मेरे बाबूजी बहुत बड़े डॉक्टर थे और उनकी गोद में बैठा था तो उन्होंने ऐसा फील किया कि उसका पेट थोड़ा बड़ा है तो उन्होंने कहा कि भाई इसका लिवर थोड़ा सा बड़ा नजर आ रहा है इनलार्ज लिवर है
इसको बंबई जाकर चेकअप जरूर करवाना चेकअप हुआ तो पता नहीं चला कि वो लिवर इनलार्ज क्यों हुआ तो उसकी गंभीरता का भी हमें एहसास नहीं हुआ क्योंकि हम सपने में भी नहीं सोच सकते थे कि वह बाद में जब उसका डायग्नोसिस नहीं हो रहा था बाबजी ने कहा कि इसका टूडी एकको कराओ हार्ट काने हार्ट का हार्ट का क्यों कर बो जो कह रहा हूं करो और टडी और यह पहली दफा मैं किसी को बता रहा हूं और वो टूडी हार्ट का एकको का जब रिपोर्ट आए नतीजा आया तो उसमें कुछ ऐसा लिखा था जो डॉक्टर ने मेरी तरफ ऐसी निगाहों से देखा कि वह निहायत मजबूर है यह बताने के लिए उसमें क्या है मैं घर आया वह रिपोर्ट लेकर बाबू जी ने बोला पढ़ के बताओ क्या है उसमें तो उसमें लिखा था लेफ्ट वेंट्रिकुलर ईएम एफ एंडो मायो कार्डियो फाइब्रो लसिस मैंने जब वो पढ़ के सुनाया उधर से बिल्कुल खामोशी छा गई एक दो मिनट तो कोई आवाज ही नहीं तो मैंने कहा बाबू जी बाबूजी आप सुन रहे हैं.
मैं क्या कह रहा हूं और मुझे एहसास नहीं था कि ईएमएफ क्या होता है र उसके बाद जब मैं कार्डियोलॉजिस्ट के पास जिस दिन गया हूं यह रिपोर्ट लेकर और वह मंजर मुझे अभी तक याद है वह शब्द मुझे अभी तक याद है उन्होने कहा आई एम रियली सॉरी शेखर यह सुनने के बाद मेरी आंखों के के सामने बिल्कुल अंधेरा छा गया बिल्कुल सन्नाटा कानों में कोई आवाज आनी बंद हो गई वह क्या कह रहे थे उसके बाद और रोते-रोते मैंने फिर उनसे पूछा डॉक्टर साहब हाउ लॉन्ग तो उन्होंने कहा मैक्सिमम एट मंथ्स मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई ऐसा लगा पूरी दुनिया ध्वंस हो गई आसमान टूट के सर प गिर गया मुझे लगा मैं हार्ट अटैक से मर जाऊंगा बहुत रोया बहुत रोया के सामने उने कहा आप संभालिए अपने आप मैं जब दरवाजे से बाहर आया मुझे कुछ कहने की जरूरत नहीं पड़ी हल्का देख के रोने लगी कि मैं कोई बहुत बुरी खबर लेकर बाहर आया हूं कोई मस्जिद गुरुद्वारा कोई संत फकीर कोई ऐसा नहीं होगा कोई मेडिसिन अल्टरनेटिव मेडिसिन होमियोपैथी अल्टरनेटिव मेडिसिन में मैगनेट थेरेपी यह थेरेपी वो थेरेपी होम्योपैथी जिसने जो कहा जहां जाना था .
सब जगह गया अमेरिका उसको लंदन लेकर गया वहां सिलिया ओकले नाम की एक डॉक्टर थी जो इसकी स्पेशलिस्ट थी अब आपको बता दूं कि ईएमएफ एक ऐसी बीमारी है जो अरबों में एक को होती है अरबों में हिंदुस्तान में शायद इसके तीन या चार केसेस होंगे कुल जहां तक मैं जानता हूं और यह कोस्टल एरिया में ज्यादा होते हैं केरला साइड यहां वहां और साउथ अफ्रीका में य होते हैं य हार्ट जो है वोह फाइब्रोस कर जाता है यानी उसमें जो पावर ऑफ इलास्टिसिटी है व खत्म हो जाती इससे हार्ट ब्लड पंप नहीं कर पाता और इसका कोई इलाज नहीं कोई इलाज अभी तक नहीं उसका एक ही इलाज हार्ट ट्रांसप्लांट समझ सकते हैं हमारी मजबूरी हमारी लाचारी हम कितने निराश हुए कि एक बे पिताजी इतने बड़े डॉक्टर जिन्होंने करोड़ों लोगों की जान बचाई.
वो अपने पोते की जान नहीं बचा पा रहे व शड हिम टू द बेस्ट ऑफ डॉक्टर्स इन द वर्ल्ड जो हो सकता था मैंने कहा हर मंदिर पर जाकर सर पटका बस यह है कि ईश्वर की कृपा से वह आठ महीने नहीं वो 4 साल तक रहा आज तक शायद कभी ऐसा नहीं हुआ होगा य बहुत कम हुआ होगा हम इस कगार पर आ गए जहां अब लक्षण नजर आने लगे उसके कि अब ज्यादा वक्त नहीं है और उसकी वह हालत हमसे देखी नहीं गई सवी वुमन बनी थी हल्का इस बात पे कि व पहली शायद मां होंगी जिन्होंने यह प्रार्थना की कि अब मेरे बच्चे को उठा लो मुझे इसका दुख अब नहीं देखा जाता और वह दृश्य आंखों के सामने से जाता ही नहीं जब वह बर्फ की सिल्ली प लेटा था और इससे बड़ी ट्रेजेडी इससे बड़ा दुख पिता और माता के लिए क्या है.. जब वह अपने बच्चे को जब उनको कंधा देना पड़े हमने सोचा था आने वाले वक्त में चकि वक्त घाव भर देता है