क्या कोई इंसान सिर्फ समोसे की वजह से मुस्लिम हो सकता है? सुनने में मजाक लगता है। लेकिन आज की यह कहानी एक ऐसे ही लड़के की है जो इस्लाम से दूर था। मुसलमानों पर बनने वाली मीम्स देखता था और फिर एक दिन मस्जिद में मिला फ्री समोसा जो उसकी पूरी जिंदगी बदल गया।
आई वाफ दिस वामिंग आई वांसद ये लड़का कहता है अगर कुछ साल पहले कोई मुझसे कहता कि मैं एक दिन मस्जिद में बैठाऊंगा। मुसलमानों के साथ नमाज पढ़ रहा होगा तो मैं कभी यकीन नहीं करता। लेकिन अल्लाह जब किसी को हिदायत देना चाहता है तो ऐसे रास्ते खोल देता है जिसका इंसान अंदाजा भी नहीं लगा सकता। इस्लाम से पहले उसकी जिंदगी बिल्कुल खाली थी। बाहर से सब नॉर्मल दिखता था। लेकिन अंदर बेचैनी थी, सुकून नहीं था। कोई मकसद नहीं था।
वह दुनिया की चीजों में खुशी ढूंढ रहा था। लेकिन जितना भागता दिल उतना खाली होता जाता। वो कैथोलिक माहौल में बड़ा हुआ था। उसे खुदा पर यकीन था। लेकिन क्रिश्चियनिटी को लेकर उसके दिल में बहुत सारे सवाल थे। वो सोचता था अगर हजरत ईसा अल सलाम अरामी भाषा बोलते थे तो बाइबल अलग-अलग भाषाओं और वर्जनंस में क्यों है? हर चर्च अलग बात क्यों करता है? और सबसे बड़ा सवाल अगर खुदा इतना बड़ा है तो वह इंसान बनकर अपने ही बनाए लोगों के हाथों क्यों मरेगा?
वो किसी मजहब का मजाक नहीं उड़ाना चाहता था। लेकिन उसके दिल में एक बात थी अगर कोई चीज सच है तो उसे सवालों से डरना नहीं चाहिए। उसी दौरान वह अमेरिका में था। तकरीबन होमलेस लाइफ। कभी वैन में सोना, कभी पार्किंग लॉट में खाना बनाना, कभी रैंडम वीडियोस बनाना। और सच कहें तो वह जिंदगी को बस मजाक में ही जी रहा था। फिर एक दिन वो TikTok स्क्रॉल कर रहा था।
तभी उसे एक मुस्लिम क्रिएटर की वीडियो मिली। वीडियो फनी थी। मुसलमानों वाले मीम्स थे और वह हंसने लगा। लेकिन फिर उसने उस क्रिएटर की और वीडियोस देखी और अचानक उसे एहसास हुआ। यह बंदा सिर्फ जोक्स नहीं कर रहा। यह इस्लाम की दावत दे रहा है। यहीं से उसकी जिंदगी बदलना शुरू हुई। उसने फैसला किया अगले 6 महीने वो हर मजहब को पढ़ेगा। इस्लाम, क्रिश्चियनिटी, जुडाइज्म, हिंदूइज़्म, बुद्धिज्म सब। 6 महीने की रिसर्च के बाद वो एक नतीजे पर पहुंचा। उसके मुताबिक इस्लाम सबसे ज्यादा क्लियर था। एक खुदा, सीधी बात, कोई कंफ्यूजन नहीं।
उसके बाद उसने धीरे-धीरे अपनी जिंदगी बदलना शुरू की। गलत चीजों से दूर रहना, अच्छी बातें करना, हराम चीजों से बचना और उसके दिल में पहली बार सुकून आने लगा। फिर उसकी जिंदगी में आया वो फेमस समोसा। एक दिन उसने अपने मुस्लिम दोस्त को बताया कि वह पिछले कई महीनों से इस्लाम को पढ़ रहा है। उसका दोस्त बहुत खुश हुआ।
उसने कहा भाई कल मस्जिद में हल्का है चलोगे लेकिन उसने मना कर दिया फिर उसके दोस्त ने एक लाइन कही वहां फ्री खाना भी मिलेगा और भाई बस यहीं से कहानी पलट गई अगले दिन वो मस्जिद पहुंच गया लेकिन इस्लाम सीखने नहीं समोसा खाने और मजेदार बात वो एक दिन नहीं पूरे पांच हफ्ते तक सिर्फ फ्री फूड के लिए मस्जिद जाता रहा लेकिन इन पांच हफ्तों में कुछ और भी हो रहा था।
मस्जिद में जो बातें होती थी उसके दिल में उतरती जा रही थी। फिर एक दिन वह अपने दोस्त के साथ कार में बैठा था। दोस्त ने पूछा इस्लाम कैसा लगता है? उसने जवाब दिया सच कहूं मुझे इस्लाम से मोहब्बत हो गई है। दोस्त ने पूछा तुम मुस्लिम क्यों नहीं बन जाते? उसने कहा अभी थोड़ा और सोच रहा हूं। फिर उसके दोस्त ने एक सवाल पूछा। इस्लाम में ऐसी कौन सी चीज है जो तुम्हें रोक रही है और वह चुप हो गया क्योंकि उसके पास कोई जवाब नहीं था। आखिर में उसने एक बहाना बनाया। उसने कहा पहले टैटू बनवा लूं फिर मुस्लिम बनूंगा।
तब उसके दोस्त ने कहा अगर तुम कल मर गए तो बस यह एक लाइन सीधे उसके दिल में लगी। उसने तुरंत कहा गाड़ी वापस मोड़ो। वो मस्जिद गया और वहीं उसने शहादा पढ़ लिया। अशद अशद इलाहा इलाहा इल्लाह अल्लाह अल्लाह व अशद अशद अन अन मुदन अबहु रसूल रसूल तकबीर अल्लाहू अकबर उस लड़के का कहना है उस दिन मेरी आंखों में आंसू थे और मुझे लगा जैसे जिंदगी का सबसे बड़ा बोझ उतर गया हो। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। उसे डर था घर वाले क्या सोचेंगे? मां क्या कहेगी? लोग कैसे रिएक्ट करेंगे? लेकिन जब उसने अपनी मां को इस्लाम के बारे में समझाया तो धीरे-धीरे उन्होंने भी इसे एक्सेप्ट कर लिया। आज वो लड़का कहता है, मैं मस्जिद समोसे के लिए गया था। लेकिन शायद अल्लाह मुझे अपने घर बुलाना चाहता था। और सच तो यह है हिदायत कैसे मिलेगी? यह कोई नहीं जानता। कभी एक वीडियो, कभी एक दोस्त और कभी एक छोटा सा समोसा इंसान की पूरी जिंदगी बदल देता है। अल्लाह जिसे चाहता है, उसे किसी ना किसी बहाने अपने करीब ले आता है। बेशक।