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अचानक 200 मीटर पीछे हटा समुद्र फिर जो हुआ उसने सबको हिला दिया।

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शुरुआत एक बड़ी खबर से करेंगे। दरअसल फिलीपींस में 7.8 तीव्रता वाले भूकंप से समंदर में आईलैंड बना है। सारगारी प्रांत में 200 मीटर समुद्री जमीन बाहर आई है। कोस्टल अपलिफ्ट से बदला धरती का भूगोल।

वैज्ञानिकों ने कहा यह स्थाई बदलाव है। जहां चलती थी नावें वहां अब लोग पैदल चल रहे हैं। यह बड़ी खबर आपको बता दें कि आपने कभी यह सोचा है कि जिस समंदर को अथा गहराई से इंसान कांपता है वो समंदर रातोंरात गायब हो जाए।

जी हां, फिलीपींस के मिडााना नावों में कुदरत का ऐसा भयानक और डरावना चमत्कार हुआ जिसने विज्ञान जगत के होश उड़ा दिए। बीती 8 जून को आए 7.8 तीव्रता के महाभूकंप ने केवल धरती को नहीं हिलाया बल्कि प्रशांत महासागर के नीचे सो रहे एक भयानक दानों को जगा दिया। सारंगानी प्रायद्वीप से जो तस्वीरें आ रही हैं उन्हें देखकर आप सब की रूह कांप जाएगी। समंदर का पानी अचानक सैकड़ों मीटर पीछे हट गया और पाताल में छिपी समुद्री चट्टाने अचानक बाहर आ गई। गांव वाले दहशत में हैं।

चीख पुकार मच गई। लोगों को लग रहा है किसी अलंकारी सुनामी की आहट है। लेकिन वैज्ञानिकों ने जो खुलासा किया वो इससे भी ज्यादा डरावना है। यह कोई सुनामी नहीं बल्कि पृथ्वी की चमड़ी का उखड़ना है। इसे विज्ञान की भाषा में कोस्टल अपलिफ्ट कहते हैं। यानी [संगीत] समंदर के तट का अचानक ऊपर उठ जाना। पांगियान मरीन सेंचुरी की जो नावें कल तक पानी की लहरों में गोते लगा रही थी।

आज उनके नीचे 200 मीटर सूखी जमीन है। समुद्री जीव तड़प-तड़प कर दम तोड़ चुके हैं। पृथ्वी की ऊपरी परत शांत नहीं है।इससे नीचे तैर रही विनाशकारी टैक्टिक प्लेट्स मिडनाबों के नीचे समंदर में थ्रस्ट फौ्ट एक्टिव हो गया है। जब विशालकाय चट्टानेआपस में टकराई तो भयानक दबाव के कारण एक चट्टान दूसरी चट्टान के ऊपर चढ़ गई।

नतीजा समंदर का तल उफन कर हवा में आ गया। सोचिए जो जमीन लाखों सालों से समंदर के हजारों टन पानी के नीचे दबी थी। उसे पृथ्वी ने एक [संगीत] झटके में बाहर फेंक दिया। वैज्ञानिक कह रहे हैं कि यह बदलाव अब हमेशा के लिए हो गया है।

यानी वो समंदर अब कभी वापस नहीं आएगा। लेकिन डर इस बात का है कि अगर थ्रस्टफ्ट की ये हलचल आगे बढ़ी तो प्रशांत महासागर के इस रिंग ऑफ फायर वाले [संगीत] इलाके में इससे बड़े महाभूकंप आ सकते हैं। कुदरत अब चेतावनी दे रही है और कुदरत के आगे इंसान बेबस है। तो ये दो तस्वीरें आप सब की टीम स्क्रीन पर। भूकंप के बाद कैसे समंदर से आइलैंड निकला वो तस्वीर हम आपको लगातार दिखा रहे हैं और यह बहुत बड़ा भौगोलिक बदलाव इसे कहा जाएगा।

भूकंप की तीव्रता बहुत ज्यादा थी जिसके चलते दो टैक्टॉनिक प्लेटें आपस में टकराई और नतीजतन यह हुआ कि एक टेक्टॉनिक प्लेट एक दूसरे के ऊपर चढ़ गई जिससे यह बहुत बड़ी भौगोलिक बदलाव जो है वह देखने को मिला। जुड़े हुए हैं। भूव वैज्ञानिक हैं।

सर बहुत चौंकाने वाली तस्वीरें हैं। जो पहली बार देखेगा वो इसे अजूबा कहेगा। वो इसे कोई बड़ी शक्ति कहेगा। लेकिन आप भू वैज्ञानिक के तौर पर इस तस्वीर को कैसे देखते हैं? पूरे डिटेल में और बहुत सामान्य भाषा में हमारे दर्शकों को समझाइएगा।

इसमें कोई शक की बात नहीं है कि जब भी ऐसी कोई घटना होती है तो वह इतने लार्ज स्केल पर होती है कि वह बहुत ही भयावह हो देखने में बहुत भयानक लगने लगता है और जिसको आप अपने जीवन काल में हमेशा पानी से ढका हुआ या या उसका उल्टा देखते आए हो और अचानक उसका उल्टा हो जाए तो फिर और भी वो दृश्य भयानक हो जाता है। लेकिन इसको बहुत सिंपलीफाई करने के लिए या इसको एक और तरीके से बताने के लिए मैं आपको बताना चाहूंगा कि जब 2004 में सुमाता अंडमान में अर्थक्वेक आया था जिसमें बहुत बड़ी सुनामी भी आई थी तो आपको याद होगा कि जो हमारा निकोबार का इलाका है वो कम से कम 3 मीटर नीचे धस गया था और जो जो नॉर्थ अंडमान का इलाका था वो कम से कम एक मीटर ऊपर उठ गया था तो आप सोचिए कि वहां पे जहां जो जो ग्रेट निकोबार का इलाका था वो कम से कम 3 मीटर नीचे चला गया था। इवन जो पोर्ट ब्लेयर था वो वो 1 मीटर नीचे चला गया था।

तो जितनी भी जमीन थी आप आपको याद अगर आप उसके बाद गए होंगे उसमें पोर्ट ब्लेयर में तो आपने देखा होगा कुछ इलाके ऐसे हैं जहां पर कभी पानी नहीं भरता था लेकिन अब वहां पर पानी भरा रहता है। तो ये एक प्रक्रिया जो है ये प्लेट टेक्टोनिक्स की एक प्रक्रिया है जिसके तहत ये अर्थेक आते हैं। ये जितनी भी आप चाहे हिमालय को देख लें चाहे अंडमान निकोबार को देख लें। किसी भी जो भी टोपोग्राफी आपको दिखाई देती है वो सब उस प्लेट टेक्टोनिक प्रोसेस का एक आउटकम है। उसका एक नतीजा है। उसका एक परिणाम है। और वो प्लेट टेक्टोनिक्स लार्जली जो है वो अर्थक्वेक की वजह से वो जो टोपोग्राफी बनती है उसमें सबसे बड़ा कंट्रीब्यूशन भूकंपों का होता है।

तो तो भूकंप या प्लेट टेक्टोनिक्स ही यह जितनी भी आप सुंदर माउंटेन चेन देख लो या आइलैंड बेल्ट देख लो वो सब कुछ वही पैदा करते हैं। उन्हीं की वजह से होती है। बस वो एक लार्ज स्केल प्रोसेस है जिसको कि आप अक्सर अनदेखा कर जाते हैं। लेकिन जब वही चीज आपकी आंखों के सामने होती है। चाहे वो फिलीपींस अर्थक्वेक के दौरान हो चाहे वो 2400 मात्र अंडमान अर्थक्वेक के दौरान हो तब आपको अचानक तब आपको बहुत भयाव लगता है वो हम यानी कि विनीत जी ये कहा जा सकता है कि लंबा समय लगता है ऐसी तस्वीरों को देखने के लिए आपको लंबे वक्त तक इंतजार करना पड़ेगा और कई बार ऐसा भी होता है कि एक इंसान का सामान्य जीवनकाल जो है वह ऐसी तस्वीरों को देख नहीं पाता है।

सबसे ज्यादा सेंसिटिव क्षेत्र कौन-कौन से हैं इन परिस्थितियों को लेकर जहां पर ऐसी संभावनाएं बहुत हैं इस पूरे विश्व के अंदर अगर पूरे विश्व के मानचित्र को हम देखें तो आपने एक शब्द बोला था रिंग ऑफ फायर की बात की थी आपने तो हमारे हिसाब से जो जो अर्थ साइंटिस्ट लोग हैं वो लोग कहते हैं कि जो रिंग ऑफ फायर है वो चारों तरफ एक उसको हम पेसिफिक प्लेट के प्रशांत महासागर जिसे कहते हैं या पेसिफिक प्लेट कहते हैं उसके चारों तरफ सबडक्शन जोन है। यानी कि वो इलाके हैं जहां पर की दो प्लेट लगातार टकरा रही है उसके चारों तरफ तो वो और वहीं पर ही सबसे बड़े-बड़े भूकंप जो आते हैं चाहे वो 2011 का तो अर्थक्वेक हो जापान अर्थक्वेक हो या फिलीपींस अर्थक्वेक हो ये सब वहीं पे ही आते हैं और और पहले भी चाहे वो चिल्ले का अर्थक्वेक हो सबसे बड़ा 9.5 मैगट्यूड का अर्थक्वेक हो जो 1964 में आया था तो तो ये सारे बड़े-बड़े भूकंप वहीं पे ही आते हैं और इसके अलावा जो भूकंप जो सबसे बड़े-बड़े आते हैं वो जैसे एक अल्पाइड हिमालयन बेल्ट है जिसको कि जो कि जिसकी हिमालय जिसका पार्ट है या जो जो अंडमान निकोबार है वो भी उसी का पार्ट है तो ये सारे इलाके हैं जहां पर कि ये बड़े-बड़े भूकंप आते हैं और ये सब इलाके हैं जहां पर कि ये इस तरह की तस्वीरें आपको देखने को अक्सर मिल जाएंगी।

अगर आपका जीवनकाल हजारों साल का हो या मिलियंस ऑफ इयर्स का हो जिसमें कि आप इस स्लो प्रोसेस को देख सकें तब आपको यह प्रक्रियाएं देखने को मिलेंग। हम धीरे जी एक बार दर्शकों को हमारे ये भी बताइएगा कि जो पहाड़ों का निर्माण होता है क्योंकि हर शख्स ने पर्वतीय श्रंखलाओं को अपने जीवन काल में जरूर देखा होगा। पहाड़ों का निर्माण क्या इन्हीं टेक्टेनिक प्लेटों के आपस में टकराने और एक दूसरे के ऊपर चढ़ने से जो उचाव पैदा होता है वही पहाड़ों का निर्माण करता है? जी हां पहाड़ों का निर्माण तीन तरीके मेन उसमें शामिल होते हैं।

एक तो है अर्थक्वेक प्रोसेस जो कि जो आप देख रहे हैं अभी जिसकी वजह से टोपग्राफी बनती है या बिगड़ती है। दूसरा है जो जो भी और जियोलॉजिकल प्रोसेस होते हैं जिसमें कि जैसे चाहे एक प्लेट दूसरी जो नीचे जाती है और वो टूट जाती है तो अचानक वो उठ जाता है तो उस तरह की प्रक्रिया से भी जो है वो लेकिन वो प्रक्रिया जो है बहुत ही स्लो प्रक्रिया होती है। उसकी वजह से ही माउंटेन बिल्डिंग होती है। और तीसरा तीसरी प्रक्रिया है जो जो आपके सरफेस प्रोसेस यानी कि आपका जो मानसून जो है या जो आपकी हवाएं हैं या जो टेंपरेचर का ऊपर नीचे होना है वो सब भी मटेरियल को इरोड करने में मटेरियल को नीचे लाने में सहायक होती है जिसकी वजह से भी अपलिफ्ट होती है।

तो ये तीन मेन प्रक्रियाएं होती हैं जिसकी वजह से कोई भी टोपोग्राफी बनती है बिगड़ती है। हम अपने दर्शकों को दिखा रहे हो और मैं बोलूंगा भी अपनी टीम से कि इन तस्वीरों को लगातार चेंज भी करते रहें। इन तस्वीरों के बीच यह भी समझना बहुत जरूरी हो जाता है कि फिलीपींस में क्या भौगोलिक परिस्थितियां या फिर उसका जो एलोकेशन फिलीपींस का है वहां पर ऐसी संभावनाएं आने वाले वक्त में भविष्य में कितनी ज्यादा है। देखिए ये जो इलाका है पूरा का पूरा इलाका जिसको रिंग ऑफ फायर कहते हैं वो बिल्कुल भूकंप प्रभावित इलाका है। जिस तरह की हमारा हिमालय जो है भूकंप प्रभावित है तो वहां पर भूकंप लगातार आते रहते हैं और वहां पर भूकंप ऐसा तो नहीं है कि भूकंपों की भूकंप की संख्या बढ़ गई है या घट गई है।

उस कम से कम बड़े-बड़े भूकंप भूकंपों के बारे में तो ये निश्चित है। तो जो खतरा है भूकंप का वो लगातार वहां पर बना हुआ है। चाहे वो रिंग ऑफ फायर कहे चाहे वो हिमालय कहे। अब बस समस्या यह हो गई है आने वाले टाइम में कि जो हमारी जो संवेदनशीलता है वह बढ़ गई है। यानी कि जिस अगर भूकंप आए तो उसकी वजह से नुकसान हमारा बढ़ गया है। क्योंकि हम लोग जो एक बेसिक प्रिकॉशंस है उनका ध्यान नहीं रखते हैं। तो वो एक समस्या बढ़ गई है। लेकिन जो भूकंप की भूकंपों की संख्या है वो अभी भी कम से कम बड़े-बड़े भूकंपों की संख्या वो अभी भी उतनी है। जो खतरा है वैसा का वैसा ही है। लेकिन हमारी संवेदनशीलता बढ़ गई। ऐसे भूकंपों के बाद अमूमन देखा जाता है इन क्षेत्रों में कि सुनामी आने का खतरा जो है वो बहुत बढ़ जाता है। समुद्र की लहरें जो है वो बहुत ऊपर ऊपर उठने लगती हैं। आने का कारण क्या है इन भूकंपों के बाद इतने बड़े पैमाने पर और सुनामी कितनी मतलब उसकी लहरें सर कितनी ऊपर तक हो सकती है? इसका जो सुनामी जब भी कोई भूकंप किसी भी ओशन के इलाके में आएगा और उसकी वजह से उसके जो जो समुद्र का तल है यानी कि नीचे की समुद्र के पानी के नीचे की जमीन है अगर वो ऊपर नीचे शिफ्ट होगी तो उसकी वजह से हमेशा सुनामी आएगी। जितना बड़ा भूकंप होगा उतनी ही बड़ी सुनामी आएगी।

नंबर वन नंबर टू आने का जो यानी कि मेन कॉज तो यही है कि अर्थक्वेक जो है भूकंपों की वजह से सुनामी मेनली आती है। इसके अलावा अगर समुद्र के नीचे कोई लैंडस्लाइड हो जाए भूस्खलन हो जाए तब भी सुनामी आ सकती है। इसके अलावा अगर कोई जिसकी जिसकी प्रोबेबिलिटी बहुत कम है कि कोई मटेरइड हिट कर दे उल्का कोई हिट कर दे समुद्र को तब भी आ सकती है। या इसके अलावा जैसे आपको याद होगा एक पीछे नॉर्वे के आसपास उस इलाके में कहीं पे एक बड़ी आई थी। हालांकि उसका कोई नुकसान नहीं हुआ लेकिन उसका बाद में लोगों को पता लगा कि अच्छा वहां पर एक सुनामी आई थी क्योंकि कुछ भूस्खलन या उस तरह की कोई घटना हुई थी। तो तो ये जितनी भी जितनी भी चीजें हैं उसकी वजह से आती है। उसका उसका साइज कितना हो सकता है?

ये भूकंप के भूकंप कितना बड़ा है और उसमें जो जो समुद्र तल की गहराई है उसका क्या वेरिएशन है उस पर डिपेंड करता है। यानी कि इनका दोनों का समावेश सर लौटेंगे आपके पास एक और अहम खबर अपने दर्शकों को बता दें। दरअसल जापान के 2011 के भूकंप को लेकर वैज्ञानिकों का सनसनीखेज खुलासा सामने आया।

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