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सलमान की एक ना ने शाहरुख को नंबर 1 कैसे बना दिया?

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अगर सलमान खान ने बाजीगर कर ली होती तो। अब यह सीन दोबारा देखो। इस बार शाहरुख खान को हटा दो। सलमान शिल्पा शेट्टी के सामने खड़े हैं। शिल्पा को लगता है कि यह आदमी उनसे सच्चा प्यार करता है। सलमान उन्हें अपनी तरफ खींचते हैं। एक पल के लिए मुस्कुराते हैं और फिर धक्का दे देते हैं और नीचे शिल्पा गिर जाती हैं और पर्दे के सामने खड़ा होता है सलमान खान। यार अगर 1993 में यह सच हुआ होता तो क्या होता? पहले बता दूं कि यह मेरा कोई रैंडम इमेजिनेशन नहीं है। सच में बाजीगर मूवी शाहरुख खान से पहले सलमान खान के पास पहुंची थी। बनाने वालों ने जब यह रोल ऑफर किया सलमान को तो उन्हें कहानी भी पसंद आई थी। लेकिन हीरो अजय शर्मा का कैरेक्टर उन्हें नेगेटिव लग रहा था। उनके पिता सलीम खान ने कहानी में एक बदलाव सुझाया कि लड़के की मां को कहानी में लाओ ताकि ऑडियंस समझ सके कि यह आदमी जो कर रहा है वो क्यों कर रहा है। फिल्म बनाने वाले अब्बास मस्तान को उस वक्त आईडिया पसंद नहीं आया और सलमान ने फिल्म छोड़ दी। बाद में शाहरुख खान आए और मजेदार बात यह है कि फाइनल फिल्म में भी मां वाला एंगल भी आ गया। सलमान खुद बाद में इस किस्से को सुनते तो हंसते रहते हैं। अब वापस आते हैं कि ऐसा होता तो क्या होता? पहले बाजीगर को एसआरके के करियर से निकालकर सलमान के करियर में डाल दो। सिर्फ एक एक्टर नहीं बदलता। 90ज के दो बड़े सुपरस्टार की पूरी कहानी बदल सकती थी और इसीलिए आज मैं आपको यह बताने [संगीत] आई हूं कि सलमान ने बाजीगर क्यों छोड़ी? आज गेम उल्टा खेलते हैं। मान लो सलमान ने कहा होता कि ठीक है। मां वाला एंगल रखो या मत रखो। मैं फिल्म करता हूं। तो फिर क्या होता?

बॉलीवुड की हिस्ट्री में कुछ अगर ऐसे हैं, जिनका जवाब सिर्फ एक फिल्म नहीं बदलता बल्कि पूरी इंडस्ट्री बदल देता है। तो 1993 में अजय शर्मा, विक्की मल्होत्रा बनकर शाहरुख खान नहीं सलमान खान स्क्रीन पर आते। और तब क्या सलमान खान आज के सलमान खान होते? क्या शाहरुख खान आज के शाहरुख खान होते? और सबसे मजेदार सवाल। क्या बॉलीवुड के दो सबसे बड़े खान की पूरी पर्सनालिटी ही बदल जाती? तो आगे बढ़ाते हैं इस कहानी को। लेकिन इसके पहले आपको सबसे पहले एक काम करना है। साल 1983 में सलमान को आज वाले सलमान के तौर पर मत देखना। वो इसलिए क्योंकि आज का सलमान का नाम सुनते ही दिमाग में वांटेड दबंग टाइगर जिंदा है और सुल्तान वाला लार्जर देन लाइफ वाला आदमी आता है। लेकिन 1993 में बाजीगर के वक्त सलमान की एक अलग ही इमेज थी। वो थे मैंने प्यार किया वाले प्रेम या साजन वाला अमन एक रोमांटिक हीरो साफ चेहरा फैमिली ऑडियंस का लड़का और बाजीगर के लिए अब्बास मस्तान इसी आदमी को एक ऐसी कहानी सुना रहे हैं जिसमें हीरो प्यार करता है धोखा देता है बदला लेता है

और सबसे शॉकिंग बात एक लड़की को छत से नीचे फेंक देता है आज हमें यह सीन नॉर्मल लगता है लेकिन हम बाजीगर देख चुके हैं 1993 में सोचो आपने मैंने प्यार किया में सलमान को भाग्यश्री से कहते हुए देखा कि दोस्ती में नो प्यार नो सॉरी नो थैंक यू की और कुछ साल बाद सलमान खान शिल्पा शेट्टी को टेरेस पर ले जाते हैं और धक्का दे देते हैं। भाई पूरा थिएटर प्रेम चिल्ला देता और यही पहला बड़ा बदलाव होता। अगर सलमान बाजीगर करते तो उनकी सबसे बड़ी इमेज शायद बनने से पहले ही टूट जाती। प्रेम वाली इमेज और यही वो दौर था जब सलमान का नाम धीरे-धीरे उस सॉफ्ट रोमांटिक हीरो से जुड़ रहा था जिसे फैमिली ऑडियंस पसंद करती थी। आगे हम आपके हैं कौन आई और फिर हम साथ-साथ हैं। सूरज बजातिया के सिनेमा में सलमान सिर्फ हीरो नहीं रहे वो बल्कि लगभग आइडियल हिंदी फिल्म फैमिली बॉय बन गए। अब सोचो हम आपके हैं कौन में वही प्रेम माधुरी को देखकर मुस्कुरा रहा है। और ऑडियंस के दिमाग के एक हिस्से में शिल्पा शेट्टी टेरेस से नीचे जा रही है। थोड़ा मुश्किल है ना? मैं यह नहीं कह रही कि हम आपके हैं कौन फ्लॉप हो जाती। बिल्कुल नहीं। वो फिल्म बहुत कल्चरल फिनोमिना थी। लेकिन सलमान की इमेज का रास्ता जरूर बदल सकता था।

क्योंकि बाजीगर कोई छोटी-मोटी ग्रे फिल्म नहीं थी। वो ऐसी फिल्म थी जिसमें लीड एक्टर ने बॉलीवुड के उस पुराने रूल को तोड़ा कि हीरो अगर हीरो जैसा नहीं होना चाहिए तो। और सलमान अगर वो रूल तोड़ते तो शायद 90ज का सलमान बिल्कुल अलग एक्टर बनता। हो सकता है कि प्रोड्यूसर कहते कि यह लड़का डार्क रोल अच्छे करता है। फिर रोमांटिक फिल्म्स के साथ थ्रिलर आते, एंटी हीरो रोल्स आते और शायद विलंस के करीब जाने वाले कैरेक्टर्स आते। मतलब जिस सलमान को हम 90ज में प्रेम के रूप में जानते थे उसकी जगह हमें ऐसा सलमान मिलता जिसकी इमेज ज्यादा अनप्रिडिक्टेबल होती और यहीं पर शाहरुख खान की सोचो उनके साथ क्या होता। क्योंकि सलमान के बाजीगर करने का सबसे बड़ा असर सलमान पर नहीं शाहरुख पर पड़ता है। बाजीगर शाहरुख खान के करियर की उन शुरुआती फिल्मों में से थी जिसने साफ कर दिया कि यह लड़का बाकी हीरो जैसा नहीं है और ना ही उनके जैसा बनना आया है। उस वक्त दूसरे एस्टैब्लिश एक्टर नेगेटिव लीड को रिस्की मानते थे। अनिल कपूर ने सब्जेक्ट को रिस्की मानकर मना किया। अब्बास मस्तान ने [संगीत] सलमान को अप्रोच किया। लेकिन सलीम खान को लगा कि उनके करियर के उस स्टेज पर ऐसा रोल थोड़ा जल्दी है। फिर शाहरुख खान को कहानी सुनाई गई। मस्तान के मुताबिक नरेशन खत्म होते ही शाहरुख उठे। डायरेक्टर को हग किया और बेसिकली कहा, “मैं करता हूं।” जिस रोल को सलमान ने कहा, “यह मेरे लिए बहुत ज्यादा नेगेटिव है। उसी रोल को शाहरुख खान ने बेसिकली कहा, “यही तो करना चाहिए” [संगीत] और फिर उस रिस्क ने उन्हें बेस्ट एक्टर का अवार्ड दिलाया। और यही शाहरुख खान के शुरुआती वेपन बन गए। दूसरे एक्टर जिस रोल को करने से डरते थे एसआरके उसी में घुसते थे। बाजीगर फिर डर और फिर अंजाम। मतलब शाहरुख खान की शुरुआती पहचान चॉकलेट बॉय रोमांस से नहीं [संगीत] बनी। पहले ऑडियंस ने देखा यह आदमी स्क्रीन पर डेंजरस भी हो सकता है। फिर रोमांस आया और शायद इसी वजह से बाद में राहुल और राज इतने ज्यादा सरदार लगे क्योंकि ऑडियंस जानती थी कि पहले इस मुस्कुराते चेहरे के पीछे कुछ और भी हो सकता है। अब बाजीगर को निकाल दो। एसआरके के पास डर भी है, अंजाम भी है। इसलिए यह कहना गलत होगा कि उनका करियर खत्म हो रहा था। लेकिन बाजीगर ने एक बहुत इंपॉर्टेंट काम किया। उसने शाहरुख खान को सिर्फ अटेंशन नहीं उन्हें बेस्ट एक्टर का फिल्मफेयर अवार्ड भी मिला और 1993 की सबसे बड़ी कमर्शियल सक्सेस भी रही।

यानी एसआरके ने रिस्क लिया। ऑडियंस ने रिवॉर्ड दिया। अब अगर यह रिवॉर्ड सलमान खान को मिलता यहीं से मजा शुरू हो जाता। इमेजिन करो 1993 के बाद हेडलाइन सलमान की। मैंने प्यार किया वाला लड़का विलेन बन गया। सलमान का शॉकिंग ट्रांसफॉर्मेशन रोमांटिक हीरो ने ऑडियंस को डरा दिया। और दूसरी तरफ शाहरुख खान को अपनी पहली एक ऐसी फिल्म का इंतजार करना पड़ता, ऐसी जीत का इंतजार करना पड़ता जो शायद बाजीगर ने उन्हें [संगीत] दिलाई। हो सकता है कि डर भी वही काम करती। हो सकता है यश चोपड़ा के साथ उनका रिश्ता और भी इंपॉर्टेंट हो जाता। हो सकता है कुछ भी ना बदलता, लेकिन एक चीज जरूर बदलती। शाहरुख खान की कहानी का पहला बड़ा चैप्टर सलमान के नाम हो जाता और फिर 1985 आता दिल वाले दुल्हनिया ले जाएंगे। अब यहां गेम पलट जाता। मान लो एसआरके को डीडीएलजे मिलती ही और फिल्म वैसे ही बड़ी बनती। तो क्या एसआरके रोमांटिक किंग बन जाते? और सलमान सलमान के पास बाजीगर की डेंजरस इमेज भी होती। हम आपके हैं कौन का प्रेम यानी 90ज में जिस वर्सटालिटी की कहानी हम शाहरुख की सुनाते हैं कि बाजीगर वाला आदमी राज बन गया वो शायद सलमान के पास होती। सोचो कितना अजीब अल्टरनेट बॉलीवुड होता। आज हम कहते हैं यार सलमान की रेंज देखो। दूसरी तरफ शिल्पा को बिल्डिंग से फेंक दिया। दूसरी तरफ माधुरी के साथ दीदी तेरा देवर है दीवाना कर लिया और शायद सलमान का करियर भी अलग डिसीजन लेने लगता क्योंकि सक्सेस एक्टर को सिर्फ हिट नहीं देती। सक्सेस बताती है कि ऑडियंस उसे किस रूप में एक्सेप्ट कर रही है।

अगर बाजीगर सलमान के साथ हिट होती तो सलमान को बहुत जल्दी पता चल जाता कि ऑडियंस उन्हें सिर्फ क्लीन रोमांटिक हीरो नहीं देखना चाहती। वो डार्क सलमान को भी एक्सेप्ट कर सकती है और शायद फिर उन्हें अपनी एक्शन इमेज बनाने के लिए 2009 के वांटेड तक का इंतजार नहीं करना पड़ता। हो सकता है कि 90ज में ही वो रोमांटिक हीरो प्लस एंटी एक्शन हीरो प्लस एक्शन हीरो का कॉम्बिनेशन बन जाते। लेकिन एक प्रॉब्लम अभी भी है और शायद इसी प्रॉब्लम को सलीम खान सबसे पहले देख रहे थे। क्या ऑडियंस उस वक्त सलीम को सीमा को मारने के बाद एक्सेप्ट करती? शाहरुख के लिए यह फायदा था क्योंकि उनकी इमेज अभी पूरे तरीके से बनी नहीं थी। वो इंडस्ट्री में अभी नए आए थे। ऑडियंस कहती थी कि यह अच्छा है अच्छा कर सकता है लेकिन वर्सटालिटी है। इस बात में अभी प्रूफ होना बाकी था। लेकिन सलमान ने पहले ही मैंने प्यार किया के बाद घर-घर में एक खास इमेज बना ली थी। और जब ऑडियंस किसी एक्टर से प्यार करने लगती है तो वही प्यार कभी-कभी एक जेल भी बन जाता है। आप उससे बाहर निकलोगे तो लोग नाराज हो सकते हैं और शायद संभव है कि सलमान की बाजीगर ज्यादा शॉकिंग होती। लेकिन जरूरी नहीं कि ज्यादा सक्सेसफुल होती और यहां एक मजेदार पॉसिबिलिटी है। क्या सलमान वाला बाजीगर उतना रूथलेस भी होता। क्योंकि सलमान और सलीम का ऑब्जेक्शन ही यही था कि कैरेक्टर बहुत ज्यादा नेगेटिव है। सलीम खान ने मदर एंगल सजेस्ट किया ताकि उसके रिवेंज को एक इमोशनल जस्टिफिकेशन मिले। सलमान ने बाद में बताया कि मेकर्स ने पहले इसे क्लीशे कहकर मना किया लेकिन बाद में फिल्म में ये एंगल शामिल किया। तो अगर सलमान फिल्म करते तो शायद स्क्रिप्ट पहले ही सॉफ्ट हो जाती और शायद विक्की से लोग ज्यादा सिंपैथी करते और शायद उनके क्राइम के बाद उनके दर्द पर और ज्यादा जोर होता। शायद सलमान का बाजीगर एक रिवेंज हीरो की कहानी बन जाता। जबकि एसआरके का बाजीगर इतना याद इसलिए भी हो रहा है क्योंकि ऑडियंस उसके साथ अनकंफर्टेबल थी। आप जानते हो आदमी गलत करता है फिर भी आप उसकी कहानी देख रहे हो। वो हीरो भी है और नहीं भी है। और एसआरके की आंखों में उस वक्त नर्वसनेस स्लाइटली अनचेंज्ड एनर्जी थी। उसने उस कैरेक्टर को और ज्यादा डेंजरस बना दिया। सलमान की स्क्रीन एनर्जी अलग थी। उसमें फिजिकल कॉन्फिडेंस ज्यादा था। तो उनका विक्की शायद ज्यादा पावरफुल लगता। एसआरके का विक्की कई जगह अनप्रिडिक्टेबल लगता है। सलमान वाला विक्की शायद शिकारी लगता और दोनों में बहुत बड़ा फर्क है। लेकिन इस अल्टरनेट हिस्ट्री का सबसे फनी हिस्सा अभी बाकी है। सलमान ने सालों बाद बाजीगर छोड़ने पर एक ऐसी लाइन कही जो शायद पूरी कहानी खत्म कर देता है। उन्होंने कहा कि उन्हें कोई रिग्रेट नहीं है। अगर वह बाजीगर कर लेते तो शाहरुख खान के पास मन्नत कैसे होता। अब ऑब्वियसली यह सलमान का मजाक था। ऐसा नहीं है कि एक फिल्म ने मन्नत खरीदवा दिया। लेकिन इस जोक के अंदर एक बहुत इंटरेस्टिंग सच छुपा हुआ है। बॉलीवुड में कई बार आपको सबसे अच्छा करियर डिसीजन वो नहीं होता जो आप लेते हो बल्कि वो होता है जो आप दूसरों के लिए छोड़ देते हो। सलमान ने बाजीगर छोड़ एसआरके ने पकड़ ली और शायद यही दोनों [संगीत] एक्टर्स की पर्सनालिटी के बारे में कुछ बताता है। सलमान उस वक्त ऑलरेडी सक्सेसफुल थे। उनके पास खोने के लिए एक इमेज थी। शाहरुख के पास खोने के लिए कुछ खास था नहीं। इसीलिए जगह सलमान रुक गए और आगे जाकर शाहरुख कूद गए और नीचे गिरने की जगह एक स्टार बन गए।

लेकिन अब आखिर इसका उल्टा गेम करके [संगीत] देखो। अगर सलमान ने बाजीगर कर ली होती जरूरी नहीं कि शाहरुख खान सुपरस्टार ना बनते। डर था कभी हां कभी ना थी और डीडीएलजे आने वाली थी। टैलेंट और भूख दोनों चीजें मौजूद थी और जरूरी नहीं कि सलमान का करियर आज ज्यादा बड़ा होता। हो सकता है कि बाजीगर उनकी प्रेम वाली इमेज को नुकसान पहुंचाती। बजातिया वाली इमेज से ऑडियंस ने उन्हें मासूमियत से एक्सेप्ट किया था। हो सकता है कि बाजीगर हिट होती सलमान 90ज में एक डाकर जोन की तरफ निकल जाते या फिर मजेदार पॉसिबिलिटी हो सकती है दोनों सुपरस्टार फिर भी वहीं होते जहां आज है। बस रास्ते बदल जाते। सलमान पहले एंटी हीरो बनते और बाद में प्रेम शाहरुख पहले डर से अटेंशन लेते और फिर राज बनते। लेकिन एक चीज जरूर बदल जाती।

आज हम बाजीगर का वो टेरेस [संगीत] वाला सीन देखते हैं तो वहां शाहरुख खान नहीं होते। सलमान धीरे-धीरे शिल्पा शेट्टी की तरफ बढ़ते बैकग्राउंड में एक टेंशन म्यूजिक बज रहा होता। सलमान मुस्कुराते शिल्पा को लगता कि वो उनसे प्यार करते हैं और फिर धक्का दे देते। और 30 साल बाद हम YouTube पर इससे उल्टा वीडियो बना रहे होते। अगर शाहरुख खान ने सलमान वाली बाजीगर कर ली होती तो। यही बॉलीवुड है यार। यहां कभी-कभी एक एक्टर की ना दूसरे एक्टर की पूरी पहचान बना देता है। और बाजीगर के मामले में शायद इससे परफेक्ट लाइन कोई हो ही नहीं सकती। हार कर जीतने वाले को बाजीगर कहते हैं। इस कहानी में सलमान ने फिल्म हारकर भी कुछ नहीं खोया और शाहरुख ने किसी और की छोड़ी हुई फिल्म उठाकर ऐसा दांव खेला जिससे उनके करियर की दिशा बदल गई। अब तुम बताओ 1993 में शाहरुख की जगह सलमान होते तो फिल्म ज्यादा बड़ी होती या छोटी होती या बस अलग होती। और सबसे इंपॉर्टेंट क्या सलमान का प्रेम भी उतना ही प्यारा लगता? कमेंट में जरूर बताना।

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