आज से ठीक 38 साल पहले, 22 अगस्त 1988 को एक फिल्म रिलीज हुई थी ….‘बीवी हो तो ऐसी’ फिल्म के एक किरदार के लिए निर्देशक जे.के. बिहारी एक नए लड़के की तलाश में थे। ऑडिशन का पहला दिन आया… लेकिन हैरानी की बात ये थी कि कोई भी लड़का ऑडिशन देने नहीं पहुंचा। फिर निर्देशक ने गुस्से मे आकर फैसला किया की “अब जो भी सबसे पहले मेरे ऑफिस आएगा… उसे ही ये रोल दे देंगे।” और फिर …कुछ ही देर बाद एक नौजवान उनके ऑफिस पहुंचा।
नाम था…सलमान खान। शायद उस दिन निर्देशक को भी नहीं पता था कि उनके ऑफिस में आया ये नया लड़का आने वाले समय में हिंदी सिनेमा के सबसे बड़े सितारों में से एक बनने वाला है।सलमान खान को अपनी पहली फिल्म मिल गई। लेकिन शायद उस वक्त किसी को अंदाजा नहीं था कि यह साधारण-सी मुलाकात भारतीय सिनेमा के इतिहास की एक बड़ी कहानी की शुरुआत है। बताया जाता है कि फिल्म में सलमान के अपोजिट पहले जूही चावला को लेने की बात थी, लेकिन बाद में रेनू आर्या को कास्ट किया गया। सलमान को लगा कि जूही ने
एक नए कलाकार के साथ काम करने से मना कर दिया था और इसी वजह से दोनों के बीच लंबे समय तक मनमुटाव रहा।‘बीवी हो तो ऐसी’ फिल्म रिलीज हुई फिल्म देखने के बाद लगा…फिल्म में सलमान की आवाज उनकी अपनी आवाज नहीं थी। उनके संवाद किसी दूसरे डबिंग आर्टिस्ट से डब करवाए गए थे। फिल्म देखने के बाद सलमान भी अपनी शुरुआत से खुश नहीं थे। इसलिये उन्होंने अपने पिता से दोबारा लॉन्च करने के लिए फिल्म बनाने की गुजारिश की।लेकिन पिता का जवाब था…“इंदौर से मुंबई आने के बाद मैंने कभी घोड़े पर पैसे नहीं लगाए,
फिर गधे पर कैसे पैसे लगा सकता हूं।” एक बेटे के लिए ये शब्द शायद बहुत कड़वे रहे होंगे…लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। अगले ही साल, 1989 में ‘मैंने प्यार किया’ आई। और इस बार सलमान ने अपनी खुद की आवाज में अभिनय किया।दिलचस्प बात ये भी है कि सलमान खुद इस फिल्म को लेकर इतने आश्वस्त नहीं थे कि उन्होंने निर्देशक सूरज बड़जात्या को फोन करके कहा था कि फिल्म में उनके पिता राजकुमार बड़जात्या के बहुत पैसे लगे हैं और उन्हें डर है कि कहीं उनकी वजह से ये पैसे डूब न जाएं। लेकिन जब फिल्म रिलीज हुई…
तो सलमान की सारी गलतफहमियां टूट गईं। जिस लड़के के डेब्यू को शायद कोई बड़ी शुरुआत नहीं मान रहा था, वही कुछ ही समय बाद प्रेम बनकर करोड़ों दिलों में बस चुका था। और शायद यही बॉलीवुड की सबसे खूबसूरत सच्चाई है…कभी-कभी शुरुआत छोटी होती है…कहानी साधारण होती है…लेकिन किस्मत उस कहानी को इतिहास बना देती है। आज जब सलमान खान का नाम सुनते ही एक पूरा दौर आंखों के सामने आ जाता है, तो उनकी पहली फिल्म की ये कहानी और भी खास लगती है। सलमान खान सिर्फ एक अभिनेता नहीं, बल्कि हिंदी सिनेमा के सबसे बड़े सुपरस्टार्स में से एक हैं। और शायद किस्मत का सबसे खूबसूरत खेल यही है…जिसे दुनिया पहली फिल्म में पहचान नहीं पाई…वही आगे चलकर पूरी दुनिया के लिए ‘सलमान खान’ बन गया।