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रूस के सबसे बड़े दुश्मन का नाम हैरान कर देगा, भारत भी चौंका !

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किसी का दोस्त जब पीठ पीछे गद्दारी करे तो उससे बड़ा दुश्मन कोई नहीं होता। इसी कड़ी में रूस की खुफिया एजेंसी ने पुतिन को उस देश का नाम बताया है जो दोस्त बनने का दिखावा तो कर रहा है लेकिन रूस को धोखा दे रहा है। रूसी खुफिया एजेंसी ने बताया है कि इस देश से तुरंत बचने की जरूरत है। रूस की खुफिया एजेंसी के दस्तावेज में जिस देश को रूस के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया गया है, वह देश भारत को भी नुकसान पहुंचा रहा है।

सीक्रेट डॉक्यूमेंट्स के मुताबिक रूस को सबसे बड़ा खतरा अमेरिका या पश्चिमी देशों से नहीं बल्कि चीन से है। चीन रूस के लिए अमेरिका से भी बड़ा खतरा है। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि दोस्त के भेष में दुश्मन सबसे ज्यादा खतरनाक होता है।

रूस की फेडरल सिक्योरिटी सर्विस यानी एफएसबी के एक सीक्रेट डॉक्यूमेंट में चीन के प्रति गहरा शक जाहिर किया गया है। इस सीक्रेट डॉक्यूमेंट में चीन को रूस की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया गया है। हैरानी की बात देखिए कि इस डॉक्यूमेंट में चीन को रूस की राष्ट्रीय सुरक्षा का दुश्मन तक बता दिया गया है।

बताइए दुनिया के सामने चीन रूस को भाई बोलता है। रूस के लिए किसी भी हद तक जाने की बातें करता है। लेकिन यही चीन रूस का गला काट रहा है। मज़े की बात देखिए कि कुछ लोगों ने तो यहां तक बोलना शुरू कर दिया था कि रूस से दोस्ती के मामले में चीन भारत से भी आगे निकल रहा है। यूक्रेन जंग में चीन जिस तरह से रूस का खुलकर समर्थन कर रहा है।

ऐसा समर्थन भारत क्यों नहीं कर रहा? भारत न्यूट्रल स्टैंड क्यों ले रहा है? लेकिन अब सच्चाई जानकर रूस के साथ-साथ पूरी दुनिया हैरान है। रूस की फेडरल सिक्योरिटी सर्विस के अधिकारियों का कहना है कि बीजिंग तेजी से रूस में जासूसों की भर्ती करने में लगा हुआ है। चीन की नजर रूस के उन असंतुष्ट वैज्ञानिकों पर भी है जिन्हें खरीदा जा सके ताकि चीन के हाथ रूस की संवेदनशील सैन्य तकनीक लग जाए।

न्यूयॉर्क टाइम्स के हाथ लगी इस रिपोर्ट के मुताबिक चीन के कुछ तथाकथित शिक्षाविद और बुद्धिजीवी रूस के इलाकों पर कब्जा करने के लिए आधार भी तैयार कर रहे हैं। यानी चीन रूस के इलाकों को भी हड़पना चाहता है। चीन की नजर हमेशा से आसपोस के सभी देशों की जमीनों पर रही है। चीन किसी का सगा नहीं है।

मौका पड़ने पर यह किसी को भी डस लेता है और अब नंबर रूस का है। आप शायद ना जानते हो लेकिन चीन रूस के कई क्षेत्रों को अपना बताता है। ठीक वैसे ही जैसे चीन अरुणाचल प्रदेश को अपना बताता है। कुछ समय पहले चीन की मिनिस्ट्री ऑफ नेचुरल रिसोर्सेज ने एक मांग उठाई थी कि चीन के नए मैपों में रूस की आठ जगहों के नाम रूसी भाषा में नहीं बल्कि चीनी भाषा में होने चाहिए। संदेश साफ है कि चीन रूस के आठ इलाकों को अपना बताता है।

इनमें से सबसे महत्वपूर्ण इलाका व्लादीक है। चीन ने रूस के शहर व्लादिवोस्तोक को हाई शेन वाई बोलना शुरू कर दिया है। व्लादीक रूस के पूर्व में स्थित एक पोर्ट सिटी है जो चीन से बॉर्डर साझा करती है। मजे की बात देखिए कि रूस व्लादीक से चेन्नई तक एक कॉरिडोर भी बना रहा है। ऐसे में चीन को डर है कि रूस और भारत और नजदीक आ सकते हैं। इसीलिए चीन अब रूस के व्लादी वोस्तोक को हड़पना चाहता है।

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