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करियर के पिक पर अनुराधा जी ने बॉलीवुड छोड़ दिया? सच्चाई आपके होश उड़ा देगी

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अपने करियर की पीक पर क्यों ये फैसला लिया कि मैं सिर्फ टी सीरीज गाऊं लेकिन मुझे फिल्म इंडस्ट्री से ना गाने नहीं मिले देन आई वेंट टू दक्षिणेश्वर और ऐसा मुझे आज आशीर्वाद देना मुझे नंबर वन कर दो फिर मैं अपने हाथ से छोडूंगी कैसे गुलशन जी मिले आपको फिर आपने टी सीरीज के साथ अपने करियर के पीक पर हां क्यों ये फैसला लिया कि मैं सिर्फ टी सीरीज गाऊंगी क्योंकि बहुत सारे लोग ये मानते हैं एक बार पे नहीं पीक पे नहीं लिया था हां पीक पर मैंने नहीं लिया था एक डिसीजन। ओके आई विल टेल यू कि आफ्टर आफ्टर तू मेरा जानो है। उसके बाद देयर वाज़ अ ल क्योंकि बहुत सारे सुपरस्टार सुपरस्टार फिल्म्स काफी बन रही थी। तो उसमें हार्डली गुंजाइश थी गानों की। तो उस वक्त मैं गई थी दक्षिणेश्वर और वहां पे आई वास ट्राइंग कि दो कंपनीज के पास मैं गई थी कॉरिडोर एंड एचएबी कि मुझे भजन का एक एल्बम करना है तो उन्होंने कहा कि नहीं हमने रिसर्च किया है कि आपका भजन का कोई मार्केट नहीं है एंड आई डिडंट वांट टू सिंग गीत और ऐसे यू नो जिंदगी भर अफसोस कर रहे होंगे वो दोनों लोग पता नहीं तो देन आई वेंट टू दक्षिणेश्वर और वहां पे मुझे मुझे वहां के पंडित जी ने बोला कि अनुराधा एक मां के लिए कुछ गाना गाओ। एंड इट वास 12 इयर्स दैट आई हैड बीन इन द इंडस्ट्री एंड आई डिड नॉट नो अ सिंगल भजन।

आई डिड नो ऐसा हुआ कैसे? कि गाने गाने में एक हाथ तो भजन होता ना तो आई जस्ट टियर स्टार्टेड कमिंग आउट एंड ऐसे मॉम मेरे से यह ऐसे कैसे गलती हुई? एंड देन आई टोल्ड हर आई सेड कि मुझे फिल्म इंडस्ट्री का इतना मोह नहीं है। ओके कि फिल्म इंडस्ट्री फिल्म इंडस्ट्री मुझे मोह नहीं है। लेकिन मुझे फिल्म इंडस्ट्री से ना नहीं गाने नहीं मिले। फिर थोड़ी देर गाए फिर नहीं मिले करके आई डोंट वांट टू क्विट द फिल्म इंडस्ट्री लाइक दैट। मुझे नंबर वन कर दो। नंबर वन कर दो। फिर मैं अपने हाथ से छोडूंगी। हां आई विल लीव इट और फिर ये आपसे मांगा हां और मैंने कहा कि ऐसा मुझे आज आशीर्वाद देना कि जो भजन में गाने गाने लगूंगी ना वो मेरा हर मंदिर हर भगवान के साथ मेरा गला और मेरा फेस लगा देना दिस टाइम आई डिड नॉट इवन नो हु टी सीरीज इज। यह मैंने बोला था कि मैं मैं खुद छोड़ दूंगी। मुझे कोई चार्ज नहीं। मुझे कोई लालच नहीं है फिल्म इंडस्ट्री का। उसका भी रीजन बताती हूं। तो लेकिन वो जो आपके एक महीने की बच्ची वाली घटना हुई थी। नहीं नहीं नहीं दैट वास मच लेटर। तो मैंने कहा कि मैं मुझे बिल्कुल लालच नहीं है

और आई पर नंबर वन बनाना और फिर देन आई विल शिफ्ट टू डिवोशनल डिवोशनल। मैं तुम्हारा मैक्सिमम काम मेरा मेरे से करवा लेना। हर मंदिर में मेरा गला मतलब मेरी आवाज गूंजनी चाहिए वगैरह ये सभी तो उसके बाद टी सीरीज में मेरा आई जॉइ टी सीरीज कैसे गुलशन जी मिले आपको फिर नहीं नहीं गुलशन जी के फादर मिले अच्छा उन्होंने मुझे बुलाया था एज अ चीफ गेस्ट अजीत कड़कड़े जी का एक दत्ताची पालखी नाम का एक एल्बम का रिकॉर्डिंग था तो उसमें मुझे बुलाया तो उसके पहले मैं शेखर कल्याण है ना शेखर सेन कल्याण सिंह तो उनको मिली तो मैंने उनको बोला कि उन्होंने बोला मुझे कि दीदी हम एक गजल का एल्बम करते हैं। मैंने कहा गजल वगैरह बाद में करेंगे। मुझे ना माता पे कुछ करना है। तो बोली माता पे क्या करेंगे? मैंने कहा कुछ भी जो उनको सबसे प्रिय है। तो उन्होंने कहा कि तो वो तो सप्तशती है। तो मैंने कहा सप्तशति पर वो बहुत बड़ी है। तो मैंने कहा नहीं एक एल्बम में जितनी आ सके उतना ही हम रिकॉर्ड करेंगे। उन्होंने कहा ठीक है मैं देखता हूं। तो वी गॉट द डेट उस दिन और फिर अगली मतलब प्रीवियस नाइट आई वेंट टू देयर फंक्शन। तो बाबूजी मिले तो बाबूजी बोले कि आप हमारे लिए भी कुछ करिए रिकॉर्ड। तो मैंने कहा मैं कल कर रही हूं सप्तशति आप लीजिए। तो बोले सप्तशती नहीं चाहिए। हमारे पास बहुत है। मैंने कहा नहीं ये अलग है। क्यों? कहा आई डोंट नो। आई सेड ये अलग है। एंड देन आई हैड डिसाइडेड मैं

पैसे लेके गई थी कि इसको रिकॉर्ड करना है। मां के लिए कुछ करना है। तो वो मैं लेके गई थी। और नेक्स्ट डे पहला श्लोक किया दरवाजा खुला तो दैट मैन वास स्टैंडिंग कि बाबूजी ने पैसे भेजे। गुलशन कुमार जी नहीं बाबूजी ने। बाबूजी मतलब गुलशन जी के पिताजी तो उन्होंने कहा कोई बात नहीं ये भी ले लेते हैं। दैट इज द स्टार्टिंग ऑफ माय एंट्री इन द टी सीरीज। उसके बाद फिर मैंने तुलसी भजन किए, मीरा भजन किए। ये सब की। उसके बाद फिर ये चैप्टर आया कि एक नया एल्बम हम करके देखते हैं। गुलशन जी से कब मिले पहली बार आप इस बीच में? इस बीच में नहीं मेरे ख्याल में एक छ महीने बाद आपका क्या इंप्रेशन था गोलचंद जी को ले पहली बार क्योंकि लोग लोग उन्हें मार्केटिंग जीनियस कहते हैं लोग कहते हैं कि जिससे मैंने कैसे चोरी होती थी वो खुद ही अपना सेल करवा देते थे कि हां बहुत सारी उनकी स्ट्रेटजीस मैंने सुनी वो तो कमाल वो तो कमाल मतलब ऐसा इंसान मैंने देखा नहीं ऐसा इंसान होगा नहीं तो ही ही वाज़ मतलब इतने वर्कलिक थे ना मतलब ही अदर देन वर्क ही कुड नॉट थिंक एनीथिंग एक तो निसीम भक्त थे और शिव जी की पूजा करते वक्त भी उनका वो माइंड चलता था वो कैसेट कैसेट कैसेट कैसेट कैसेट वही चल रहा था उनका तो व्हाट ही डड इज़ जब लाल दुपट्टा ये हुआ तो उनको हाथ में मतलब उन्होंने कहा कि हमारा तो वैसे वैष्णो मां की कृपा से तो वैसे ही बिकते हैं। तो मैंने कहा वैसे ही बिकते हैं। उनकी आशीर्वाद है ना तो उसमें अच्छा डाल के बेचिए ना। है ना तो नया डालें तो बोले अब कौन बनाएगा तो फिर ये जब उनको मिला तो ही वास वै हैप्पी फिर आपने कॉन्ट्रैक्ट कब किया उनके साथ मैंने अनसाइड कॉन्ट्रैक्ट अनसाइन कॉन्ट्रैक्ट मेरा कभी बिना कहे टी सीरीज से कॉन्ट्रैक्ट हां तो उनको जो दिया तो उसे प्रमोट करने के लिए मैंने अपनी आंखों से देखा है कि ही कॉल्ड

जितने ये पायरेसी करने वाले लोग होते हैं ना जो ब्रिजेस पे वगैरह बैठते हैं वगैरह वो सब होता है ना सबको बुलाया टी सीरीज के ऑफिस में अबाउट 30-40 लोग और बोला भैया ये लो पैरेसी करो परसी करो ऊपर अच्छा क्या मैं और सुशील जी बोले सर आप ये क्या कर रहे हैं तो बोले तुम चुप रहो मुझे पता है क्या कर रहा हूं बोले ये जितना पहुंचा सकते हैं हम नहीं पहुंचा सकते तुम फ्री में पाइरेसी करो देन ही एक्सप्लेन कि यह पॉपुलर करेंगे तो हमारा बिकना शुरू होगा दैट वास ह वे एंड सी आज टी सीरीज कहां है आज यस बॉलीवुड म्यूजिक इंडस्ट्री में एक तरफा डोमिनेंस है यस यस कोई आसपास कंपटीशन नहीं है हाउ यू सी भूषण कैसा रिश्ता आपका भूषण कुमार से है भूषण से कम मैंने काम किया है बिकॉज़ आफ्टर गुलशन जी पास्ड अवे देन आई स्टार्टेड डूइंग माय ओन प्रोग्राम्स वगैरह बिकॉज़ बेसिकली विज़न अलग है ना गुलशन जी का और भूषण का विज़न अलग है। इसके टाइम को सूटेबल ही इसको विज़न होगा। ऐसा है। गुलशन जी की डेथ ने क्या बदला था आपकी लाइफ में? क्योंकि उस घटना ने पूरे देश को हिला दिया। मैं समीर जी के साथ बैठा था। समीर जी ने कहा कि म्यूजिक वाज़ नेवर द सेम। म्यूजिक वाज़ नेवर द सेम। आज का भी जो है इट्स गुड बट इट्स नॉट सेम। सेम मतलब यू कांट कंपेयर इट वि दैट। मे बी टाइम्स के हिसाब से होगा या व्हाट एवर हम लोग अभी भी 90 के म्यूजिक की बात करते हैं। वहां पे भी 90ज के ही गाते हैं। हां ये बात सही है।

हां इंडियन आइडल में तो 90 ही गाते हैं। हां फिर अंताक्षणी में 90ज ही चलते हैं। फिर और रिकक्रिएट भी सब 90ज ही हो रहे हैं। फिर अच्छा मुझे बताइए कि जितने भी सिंगर्स दे वेरी गुड सिंगर्स अपनेप फील्ड में मतलब फिल्म्स में वगैरह इतना सुपर सक्सेस मिलने के बाद भी एवरीबडी इस कमिंग इनू भजन भजंस भजंस मतलब एक आई कैन अंडरस्टैंड कि एक जिसको एक यू नो आफ्टर सर्टन स्टैंड नहीं मिली तो भजन की तरफ आए नो आप देखो मींस वो जहां जो चले ऐसा हम जिस वक्त वी वर सिंगिंग इट वास नॉट लाइक दैट इट वास एक कंसंट्रेटेड एफर्ट था उस घटना ने मैम हिंदुस्तान ने बहुत कुछ बदला नहीं मुझे नहीं याद है कि कभी एलपी ने किसी और का गाना चलाया इसलिए चलो हम वो गाना करते आई नेवर रिमेंबर दैट ईच वन वास नोन फॉर ह ओन इंडिविजुअलिटी 1997 में मुझे लगता है बॉलीवुड म्यूजिक का बहुत गंदा साल था वो। बहुत सारी चीजें उस साल घटनाएं हुई क्योंकि सिर्फ एक घटना नहीं थी वो। टिप्स के मालिक जेल गए। गुलशन जी नहीं रहे। नदीम को बाहर जाना पड़ा। समीर जी के पिताजी अनजान जी की डेथ हुई थी। अनम्यूज इन इन वन लाइन अनम्यूजिकल लोगों ने म्यूजिक को हाथ में लेना चाहा।

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