हिंदी और मराठी सिनेमा की जानीमानी अभिनेत्री रीमा लागू ने अपने लंबे अभिनय करियर में मां, पत्नी, बहन, सास और कई अलग-अलग तरह के किरदार निभाकर दर्शकों के बीच अपनी खास पहचान बनाई। खासकर 1980 और 1990 के दशक के बाद फिल्मों में उनकी मां की भूमिकाएं इतनी लोकप्रिय हुई कि वह हिंदी सिनेमा की यादगार मां वाली अभिनेत्रियों में गिनी जाने लगी। लेकिन रीमा लागू को केवल मां के किरदार तक सीमित करना उनके अभिनय करियर के साथ न्याय नहीं होगा। उन्होंने मराठी रंगमंच, मराठी फिल्मों, हिंदी फिल्मों और टेलीविजन चारों क्षेत्रों में काम किया था। लेकिन आज की हमारी इस वीडियो में हम आपको रीमा लागू जी के बारे में तो बताएंगे ही। साथ ही बताएंगे उनके परिवार के बारे में, उनके पति और बच्चों के बारे में। आखिर आज वह कहां है? तो हर बार की तरह वीडियो शुरू होने से पहले आपको याद दिला दें अगर आप हमारे चैनल पर नए हैं तो चैनल को सब्सक्राइब जरूर कर लें। रीमा लागू का जन्म 21 जून 1998 को मुंबई में हुआ था। उनका जन्म नाम नयन भद्भ-भदे बताया जाता है। वह एक ऐसे परिवार से आती थी जिसका संबंध मराठी रंगमंच से था।
उनकी मां मंदाकिनी भद्भ-भदे मराठी रंगमंच की अभिनेत्री थी। अभिनय का माहौल उन्हें परिवार से ही मिला और छोटी उम्र से ही उनका रुझान कला और अभिनय की तरफ हो गया। स्कूली दिनों से ही रीमा अभिनय में रुचि लेने लगी थी। बाद में उन्होंने मराठी रंगमंच से अपने अभिनय की शुरुआत की। रंगमंच ने उन्हें अभिनय की बारीकियां सीखने का मौका दिया और यहीं से उनके लंबे करियर की नींव मजबूत हुई। रंगमंच से अभिनय की शुरुआत। फिल्मों में पहचान बनाने से पहले रीमा लागू ने मराठी थिएटर में काफी काम किया। उनका रंगमंच से जुड़ाव कई दशकों तक रहा। यही वजह थी कि उनके अभिनय में संवाद बोलने के साथ-साथ भावनाओं को व्यक्त करने की क्षमता भी दिखाई देती थी। रीमा लागू केवल कैमरे के सामने अभिनय करने वाली कलाकार नहीं थी बल्कि वह एक प्रशिक्षित रंगमंच अभिनेत्री भी थी। उनके बचपन के दोस्त और अभिनेता सचक सचिन पिलगावंकर ने उनके थिएटर के लंबे अनुभव का उल्लेख किया था।
फिल्मों की दुनिया में कदम। रीमा लागू ने मराठी और हिंदी फिल्मों में काम किया। उनके शुरुआती फिल्मी काम में मराठी फिल्म सिंहासन 1979 का नाम प्रमुखता से आता है। इसके बाद उन्होंने हिंदी सिनेमा में भी काम करना शुरू किया। फिल्म आक्रोश 1980 में भी उन्होंने अभिनय किया। इसके बाद 1981 में श्याम बेनीगल की फिल्म कलयुग में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह दौर ऐसा था जब वह धीरे-धीरे हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में अपनी जगह बना रही थी। शुरुआत में उन्हें कई तरह के किरदार मिले। बाद में उनकी पहचान मुख्य रूप से पारिवारिक और मां के किरदारों से बनी। कयामत से कयामत तक से पहचान। रीमा लागू को हिंदी फिल्मों में एक खास पहचान कयामत से कयामत तक 1988 के बाद मिली जिसमें उन्होंने अभिनेत्री जूही चावला की मां की भूमिका निभाई थी। इस फिल्म में वह उम्र में बहुत बड़ी नहीं थी। फिर भी उन्हें मां की भूमिका दी गई। उस समय जूही चावला की उम्र भी रीमा लागू से बहुत ज्यादा कम नहीं थी। इसके बावजूद रीमा ने इस भूमिका को सहज तरीके से निभाया। यहीं से हिंदी सिनेमा में उनके लिए मां के किरदार के दरवाजे तेजी से खुलने लगे। मैंने प्यार किया और सलमान खान की मां रीमा लागू के करियर की सबसे यादगार फिल्मों में मैंने प्यार किया। 1989 शामिल है। इस फिल्म में उन्होंने सलमान खान के किरदार प्रेम की मां की भूमिका निभाई थी। फिल्म बहुत बड़ी लोकप्रियता हासिल करने में सफल रही और रीमा लागू की मां वाली छवि भी दर्शकों के बीच मजबूत हो गई। उनके किरदार में केवल सख्ती नहीं थी बल्कि समझदारी, दोस्ती और भावनात्मक जुड़ाव भी दिखाई देता था। इसके बाद सलमान खान और रीमा लागू की जोड़ी को दर्शकों ने कई फिल्मों में पसंद किया।
हम आपके हैं कौन? हम साथ-साथ हैं और अन्य फिल्मों में भी दोनों ने मां-ब का रिश्ता निभाया। आशिकी साजन और दूसरी सफल फिल्में रीमा लागू ने केवल एक ही तरह की मां की भूमिका नहीं निभाई। उन्होंने अलग-अलग स्वभाव और परिस्थितियों वाली महिलाओं के किरदार निभाए। फिल्म आशिकी 1990 में उन्होंने राहुल रॉय की मां का किरदार निभाया। इस फिल्म में उनके अभिनय की तारीफ हुई। इसके बाद साजन 1991 में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी फिल्मों की सूची में हम आपके हैं कौन? 1994, कुछ-कुछ होता है 1998, हम साथ-साथ है 1999 और कल हो ना हो 2003 जैसी बेहद लोकप्रिय फिल्में शामिल हैं। वैसा किरदार जिसने दर्शकों को चौंकाया। रीमा लागू की अभिनय क्षमता का एक महत्वपूर्ण उदाहरण फिल्म वास्तव द रियलिटी 1999 है। इस फिल्म में उन्होंने संजय दत्त के किरदार की मां शांता का रोल निभाया था। यह किरदार उनकी आम फिल्मों वाली समझदार और प्यार करने वाली मां से काफी अलग था। कहानी में वह अपने अपराध की दुनिया में फंसे बेटे के सामने एक बेहद कठिन निर्णय लेने वाली मां बनती है। इस भूमिका ने साबित किया कि रीमा लागू सिर्फ हल्के-फुल्के पारिवारिक किरदारों तक सीमित अभिनेत्री नहीं थी। वो गंभीर और भावनात्मक भूमिकाओं को भी प्रभावी ढंग से निभा सकती थी। टेलीविजन पर भी बनाई खास पहचान। फिल्मों के साथ-साथ रीमा लागू ने टेलीविजन पर भी खूब काम किया। वो श्रीमान श्रीमती जैसे लोकप्रिय कॉमेडी शो का हिस्सा रही। इसके बाद उनका सबसे यादगार टीवी काम तू तू मैंम माना जाता है। इस शो में उन्होंने हास्य भूमिका के जरिए दर्शकों का मनोरंजन किया। यह उनके अभिनय के दूसरे पहलू को सामने लाने वाला काम था।
टेलीविजन में उनके काम ने यह दिखाया कि वह सिर्फ गंभीर या मां के किरदार ही नहीं कर सकती बल्कि कॉमेडी में भी उनकी टाइमिंग शानदार थी। तू तू मैंम के लिए उन्हें 2002 में इंडियन टेली अवार्ड्स में कॉमिक भूमिका के लिए पुरस्कार मिलने का उल्लेख भी मिलता है। निजी जीवन और बेटी रीमा लागू की शादी अभिनेता विवेक लागू से हुई थी। शादी के बाद उन्होंने रीमा लागू नाम से अभिनय की दुनिया में पहचान बनाई। बाद में दोनों अलग हो गए थे। वह एक मराठी अभिनेता और थिएटर कलाकार थे। रीमा और विवेक की मुलाकात एक बैंक में हुई थी और उन्होंने साल 1978 में शादी की थी। कुछ सालों बाद आपसी मनमुटाव के चलते दोनों अलग हुए यानी कि तलाकशुदा हो गई। विवेक लागू का निधन 19 जून 2025 को हुआ। रीमा और विवेक लागू की एक बेटी थी मृणमई लागू। मृणमई ने भी अभिनय और थिएटर के क्षेत्र में अपना करियर बनाया। वह थिएटर कलाकार और निर्देशक के रूप में काम कर चुकी है। मृणमय एक अभिनेत्री, थिएटर डायरेक्टर और राइटर है। उन्होंने थ्री इडियट्स और तलाश जैसी फिल्मों में अभिनय किया है तथा थैंक यू या थप्पड़ व Netflix सीरीज स्कूप में लेखन के कार्य किया है। उनका विवाह विनय से हुआ है। पति से अलग होने के बाद रीमा लागू ने एक सिंगल मदर के रूप में अपनी बेटी मृणमय की अकेले परवरिश की थी। रीमा लागू ने अपने निजी जीवन को अपेक्षाकृत निजी ही रखा और उनका अधिक ध्यान अपने अभिनय और रंगमंच के काम पर रहा। मराठी सिनेमा से रिश्ता। हालांकि हिंदी फिल्मों में मां के किरदारों ने उन्हें पूरे देश में लोकप्रिय बनाया। लेकिन रीमा लागू का मराठी रंगमंच और सिनेमा से रिश्ता हमेशा मजबूत रहा। उन्होंने कई मराठी फिल्मों और नाटकों में काम किया। अपने करियर के अंतिम वर्षों में भी उन्होंने मराठी सिनेमा में सक्रियता बनाए रखी। जाध्याना बाला साहिब 2016 में भी उन्होंने एक मां का किरदार निभाया था। इससे साफ होता है कि उनका अभिनय करियर सिर्फ बॉलीवुड तक सीमित नहीं था।
नाम और पहचान। रीमा लागू को अक्सर हिंदी फिल्मों की लोकप्रिय मां के रूप में याद किया जाता है। लेकिन उनके अभिनय की खासियत यह थी कि उन्होंने मां के किरदार को सिर्फ रोने धोने वाली महिला के रूप में नहीं निभाया। उनकी फिल्मों की कई मां आधुनिक सोच वाली अपने बच्चों से खुलकर बात करने वाली और परिस्थितियों को समझने वाली महिलाएं थी। यही वजह थी कि 1990 के दशक में उनकी स्क्रीन इमेज पारंपरिक त्याग करने वाली मां से कुछ अलग दिखाई दी। भारतीय एक्सप्रेस ने भी उनके अभिनय को हिंदी सिनेमा में मां की पारंपरिक छवि से एक अलग तरह की प्रस्तुति से जोड़ा था। अंतिम समय और निधन। रीमा लागू अपने निधन से कुछ समय पहले तक अभिनय कर रही थी। उनके अंतिम टीवी प्रोजेक्ट्स में नामकरण शामिल था। जिसमें उन्होंने दयावंती मेहता का किरदार निभाया था। उनके निधन से कुछ घंटे पहले तक वह शूटिंग कर रही थी। 17 मई 2017 की रात उन्हें सीने में दर्द की शिकायत हुई। उन्हें मुंबई के कोकिलाबेन धीरूबाई अंबानी अस्पताल ले जाया गया। इलाज के दौरान 18 मई 2017 को तड़के करीब 3:15 में उनका निधन हो गया। उनकी मृत्यु का कारण कार्डियाक अरेस्ट बताया गया। उस समय उनकी उम्र 59 वर्ष थी। उनके अचानक निधन की खबर से हिंदी और मराठी फिल्म तथा थिएटर जगत में शोक की लहर फैल गई। उनके अंतिम संस्कार में फिल्म और टीवी जगत के कई कलाकार शामिल हुए। उनकी बेटी मृणमय ने अंतिम संस्कार की रस्में निभाई। रीमा लागू का अभिनय करियर चार दशकों से अधिक समय तक फैला रहा। उन्होंने फिल्मों, टेलीविज़ और थिएटर तीनों जगह अपनी पहचान बनाई। आज भी जब 1990 के दशक की लोकप्रिय पारिवारिक फिल्मों की बात होती है तो मैंने प्यार किया आशिकी साजन हम आपके हैं कौन कुछ-कुछ होता है हम साथ-साथ हैं और वास्तव जैसी फिल्मों में उनके किरदार याद किए जाते हैं। उनकी सबसे बड़ी खासियत यह रही कि उन्होंने मां के किरदार को भी अलग-अलग रंग दिए। कहीं वह बेटे की दोस्त जैसी मां बनी, कभी परिवार को जोड़कर रखने वाली महिला और कभी ऐसी मां जिसने बेहद कठिन परिस्थितियों का सामना किया। 21 जून 1998 को जन्मी नयन भद्भदे जिन्हें दुनिया ने रीमा लागू के नाम से जाना। 18 मई 2017 को इस दुनिया से चली गई। लेकिन उनके निभाए गए किरदार आज भी हिंदी और मराठी सिनेमा के दर्शकों की यादों में मौजूद है। रीमा लागू को सिर्फ बॉलीवुड की मां कहना उनके विस्तृत अभिनय सफर को छोटा कर देता है। वह एक रंगमंच अभिनेत्री, फिल्म कलाकार, टेलीविजन अभिनेत्री और एक ऐसी कलाकार थी जिन्होंने अपने अभिनय से कई पीढ़ियों के दर्शकों के बीच जगह बनाई। यही उनकी सबसे बड़ी पहचान और विरासत है। तो दोस्तों, अभी के लिए बस इतना ही। मिलते हैं अगली वीडियो में। तब तक आप अपना ध्यान रखिए। बाय बाय।