1994 में एक कैसेट रिलीज हुआ जिसमें तमिल फिल्म बॉम्बे के गाने थे इसके कवर पर ऊपर छोटे साइज में इसके संगीतकार की फोटो थी यह म्यूजिक डायरेक्टर 1992 में आई अपनी पहली ही फिल्म रोजा से पूरे देश में मशहूर हो चुके थे अब बारी थी फिल्म बॉम्बे की इस फिल्म के संगीत ने भी टहलका मचा दिया यह तब इंडियन फिल्म इंडस्ट्री के सबसे कम उम्र के म्यूजिक डायरेक्टर थे उम्र सिर्फ 25 साल और नाम ए आर [संगीत] रहमान इस फिल्म के बाद मैगजीन मायापुरी में एक आर्टिकल छपा जिसका टाइटल था 25 इयर्स यंगेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर ऑफ इंडिया देश ने तब रहमान के बारे में इस मैगजीन के जरिए विस्तार से जाना एक दो साल बाद यह मैगजीन तब बंबई में रहने वाली एक संघर्षरत लड़की के हाथ लगी और उसने इस आर्टिकल के जरिए रहमान के बारे में पढ़ा यह लड़की सिंगर बनने का सपना लेकर बंबई आई थी जिसका नाम था रिचा शर्मा रहमान पर लिखे इस लेख में यह भी जिक्र था कि वह नए सिंगर्स को खूब मौके देते [संगीत] हैं रिचा शर्मा को भी एक उम्मीद जगी उन्होंने अपनी आवाज में म्यूजिक के साथ कुछ गाने गाकर उन्हें रिकॉर्ड किए और एक म्यूजिक कंपनी में काम करने वाले अपने परिचित प्यून को इसे रहमान के चेन्नई स्थित दफ्तर में कूरियर करने के लिए दे दिया विष्णु नाम के इस प्यून ने 14 अगस्त 1998 को इसे कूरियर भी कर दिया 14 अगस्त की ही रात करीब 12 बजे विष्णु भागता हुआ रिचा शर्मा के पीजी पहुंचा और उनसे बोला कि सिंगर सुखविंदर का हमारे ऑफिस में फोन आया था और उन्होंने बोला कि रिचा शर्मा के पीजी का फोन खराब है उन्हें जाकर बोलो कि तुरंत मुझसे बात करें रिचा ऑटो लेकर एक पीसीओ पहुंची और सुखविंदर को कॉल किया सुखविंदर ने कहा कि एक बहुत बड़ी फिल्म है और बहुत बड़े म्यूजिक डायरेक्टर हैं
जिसके लिए गाना रिकॉर्ड करना है क्या तुम अभी आ सकती हो रिचा ने हामी भर दी दरअसल सुखविंदर रिचा को पहले से जानते थे और उनकी एनर्जेटिक और हाई पिच आवाज से बहुत प्रभावित थे रिचा तैयार होकर रात करीब 1:00 बजे सुखविंदर के बताए पते पर पहुंची यहां वो स्टूडियो में अंदर पहुंची तो मॉनिटर पर देखा कि संगीतकार ए आर रहमान फिल्म निर्देशक सुभाष घई बैठे हुए थे और फिल्म ताल के एक गाने की रिकॉर्डिंग के लिए रिचा शर्मा का इंतजार कर रहे थे यह वाकया रिचा को किसी चमत्कार जैसा लगा सुबह ही अपने गानों का कैसेट रिकॉर्ड करके रहमान के दफ्तर भेजने के लिए दिया था लेकिन तकदीर ऐसी कि कैसेट चेन्नई पहुंचने से पहले ही इन्ह रहमान के संगीत निर्देशन में गाना रिकॉर्ड करने का मौका मिल चुका था जिस गाने को रिचा रिकॉर्ड करने वाली थी उसके बोल थे नहीं मैं समझ गई यूं तो ताल के सारे ही गाने बेहद खूबसूरत और हिट रहे लेकिन रिचा शर्मा का यह गाना भी खूब पसंद किया गया यही वह टर्निंग पॉइंट था जिसके जरिए रिचा को फिल्म इंडस्ट्री में पहचान भी मिली और उन्हें काम भी मिलने लगा धरती तरसे अ रिचा तो सालों से बस एक बड़े मौके के इंतजार में थी वह मौका उन्हें फिल्म ताल में मिल चुका था इसके बाद तो बॉलीवुड में उनकी गायकी का विधिवत सफर शुरू हो गया अपनी बुलंद और सुरीली आवाज में उन्होंने एक से बढ़कर एक हिट गाने देने शुरू कर दिए के हर फूल को अपना समझे बागवान रिचा शर्मा की असल पहचान एक असाधारण स्टेज परफॉर्मर की है मंच पर आते ही वह अपनी गायकी और सुरों के अद्भुत सामंजस्य से समा बांध देती [संगीत] है सूफी संगीत भजन गजल लोकगीत समेत वह गायकी की ज्यादातर विधाओं में पारंगत है लेकिन फिल्मी पर्दे पर रिचा के गाय दर्द भरे नगम का तो कोई जवाब ही नहीं [संगीत] रिचा ने जिन गानों को भी गाया उन्हें इस कदर डूब कर पेश किया कि उनमें किसी और सिंगर की कल्पना ही नहीं की जा सकती दीवानगी इनकी एकल है एक बेहद साधारण परिवार में जन्मी और पली बढ़ी रिचा के लिए मुंबई और यहां जगह बनाने तक का सफर बेहद दिलचस्प और संघर्ष भरा रहा है दिल्ली में जागरण झगरा आता और माता की चौकी में गाते गाते रिचा के लिए संगीत और स्टेज मानो लाइफलाइन बन गए अब मैं आपको इस बात की तस्दीक करने वाली कुछ कहानियां सुनाती हूं प्यार रहे मैं रह ना र रिचा तब मुंबई नहीं आई थी
दिल्ली और आसपास के इलाकों में जागरण और भक्ति कार्यक्रमों में परफॉर्म किया करती थी एक बार वह बीमार हो गई हालत ऐसी बिगड़ी कि अस्पताल में भर्ती कराया गया कई दिन अस्पताल में बीत गए अस्पताल के बिस्तर पर रिजा को अपने एक स्टेज शो की चिंता सता रही थी जो तीन दिन बाद ही होने वाला था अब तक इन्होंने अपनी तरफ से इसे कैंसिल नहीं किया था वह बार-बार डॉक्टर से खुद को अस्पताल से डिस्चार्ज करने की रिक्वेस्ट कर रही थी लेकिन हालत ऐसी नहीं थी कि उन्हें छुट्टी दे दी [संगीत] जाए आखिरकार वो दिन भी आ गया जब इन् शाम को उस कार्यक्रम में प्रस्तुति देनी थी और वह अस्पताल में बेड पर लेटी थी अचानक इन्होंने हाथ में लगे ड्रिप को अलग किया और अपना सामान लेकर बिना किसी को बताए अस्पताल से फरार हो गई घर जाकर मेकअप किया और परफॉर्म करने पहुंच गई घर वाले हैरान भी थे और नाराज भी बहुत समझाया गया लेकिन रिचा नहीं मानी और शो करने पहुंच गई एक दो गाना गाने के बाद इनकी तबीयत बिगड़ गई और इन्हें फिर से हॉस्पिटल में भर्ती करा पड़ा भले ही इनका अस्पताल से भागने का फैसला गलत था लेकिन अपने पेशे के प्रति जुनून और ईमानदारी ही थी जिसने रिचा को ऐसा करने पर मजबूर किया [संगीत] था इसी तरह रिचा की मां का निधन हुए दो दिन ही बीते थे उन्हें एक कार्यक्रम में परफॉर्म करने जाना था वह चाहती तो शो कैंसिल कर सकती थी मां का जाना किसी के लिए भी बहुत बड़ा सदमा होता है रिचा के लिए भी था उनकी मानसिक हालत बिल्कुल गाने की नहीं थी लेकिन पेशे के प्रति समर्पण और शो मस्ट गो ऑन के फलसफे को याद करते हुए मां के जाने का दर्द दिल में समेटे इन्होंने शो में प्रस्तुति दी
और एक सच्चा कलाकार होने का फर्ज निभाया [संगीत] कोईए अगर आवाज में असर है तो यकीनन कामयाबी मिलनी तय होती है तभी तो फरीदाबाद के एक सामान्य परिवार की बेटी देश ही नहीं दुनिया के तमाम देशों में लोगों को अपनी आवाज से मंत्र मुग्ध करने में कामयाब रही मर्ज सा नाल होरी धार्मिक आयोजनों में गाने वाली रिचा ने कैसे फरीदाबाद से मायानगरी मुंबई तक का सफर करके कामयाबी हासिल की एक जागरण में रिचा की गायकी सुनकर किस डायरेक्टर ने उन्हें अपनी फिल्म में प्लेबैक सिंगर के तौर पर मौका देने का ऐलान कर दिया था जानेंगे इस पेशकश में आगे बेज किस्मत प ये [संगीत] बिल फिल्म मैदान के गाने मिर्जा की रिकॉर्डिंग के वक्त इस फिल्म के डायरेक्टर से रिचा शर्मा ने ए आर रहमान को उन्हीं के सामने क्यों कहा कि इस आदमी ने मेरी जिंदगी खराब कर दी बताऊंगी आगे विस्तार से जिंदगी में कोई कभी आर साथ ही बात होगी कि फिल्म फना के एक गाने की रिकॉर्डिंग के लिए रिचा क्यों ऐसे कपड़े पहनकर और गेटअप लेकर स्टूडियो पहुंची कि श्याम बेनेगल और ए आर रहमान समेत वहां मौजूद हर कोई उन्हें देखकर दंग रह गया भैया सया शोहरत कामयाबी और पैसा सब कुछ हासिल कर चुकी रिचा शर्मा को आज भी एक बात का बहुत अफसोस और मलाल है कौन सी है वो वजह जिसके चलते इस बेहद टैलेंटेड सिंगर का करियर अब फिल्मों से लगभग खत्म हो गया क्या उनका करियर बॉलीवुड की घटिया राजनीति की भेंट छड़ गया या फिर इसकी कोई और वजह है अगले जन्म मोहे बिटिया ना की और अंत में बात होगी कि क्या वाकई रिचा शर्मा ने अब तक शादी नहीं की है या फिर उन्होंने किसी खास वजह से अब तक अपनी शादी की बात छुपा कर रखी है इन सारी बातों पर विस्तार से आने से पहले जान लेते रिचा के सिंगर बनने की कहानी अब तेरे सारे ही गम है मेरे अब रिचा शर्मा का ताल्लुक मूल रूप से उत्तर प्रदेश के कासगंज से है इनके पिता पंडित दयाशंकर शर्मा रोजी रोटी की तलाश में सालों पहले दिल्ली आए और लोगों के यहां पूजा पाठ धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराने का काम करते थे बाद में उन्होंने अपनी पत्नी को भी दिल्ली बुला लिया और फरीदाबाद में शिफ्ट हो गए
पंडित दयाशंकर की दो संतानें हुई पहले बेटे बिट्टू का जन्म हुआ जबकि बाद में 29 अगस्त 1974 को रिचा शर्मा की पैदाइश हुई बिना ही टट गए ह मिले बिना ही छुट गए रिचा के पिता अच्छे कथावाचक थे मंत्रोच्चार और भजन भी बहुत अच्छा गाते थे रोज सुबह भोर में 45 बजे वह सभी को जगा देते और पूजा आरती में शामिल करते पिता की भजन आरती सुनते सुनते रिचा ने भी गुनगुनाना शुरू कर दिया और यही आगे चलकर उनके सिंगर बनने की वजह भी बन [संगीत] गया रिचा की स्कूलिंग फरीदाबाद में ही चल रही थी वह थोड़ी बड़ी हुई तो पिता के साथ धार्मिक आयोजनों में जाने लगी रिचा की उम्र तब आ साल रही होगी वह पिता के साथ एक धार्मिक आयोजन में गई थी उनके कहने पर वहां इन्होंने लोगों को एक भजन गाकर सुनाया लोगों की खूब तारीफें और वाहवाही मिली और इनाम में ₹ भी जिसे रिचा ने आज तक खर्च नहीं किए हैं वो कहती हैं कि जीवन का यह पहला इनाम भी था और मेरी पहली कमाई भी जिसे मैं जिंदगी भर खर्च नहीं करूंगी जो अब किए हो दाता ऐसा ना कीज खैर 11 साल की उम्र आते आते रिचा दिल्ली और आसपास के इलाकों में होने वाले झगरा आता माता की चौकी और अन्य धार्मिक आयोजनों में पेशेवर तौर पर कार्यक्रम देने लगी थी आए दिन कार्यक्रमों में प्रस्तुति देने के चलते रिचा की पढ़ाई कहीं पीछे छूटती जा रही थी उन्होंने पिता से पढ़ाई छोड़ म्यूजिक पर फोकस करने की इच्छा जताई पिता ने समझाया कि संगीत के साथ कम से कम ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई बहुत जरूरी है एक दो साल दोनों को साथ लेकर चलो और संगीत में कुछ अच्छा नहीं हो पाया तो फिर से पढ़ाई शुरू कर देना दसवीं पा पास करने के बाद रिचा ने अपने पिता से दिल्ली स्थित गंधर्व विद्यालय में दाखिला लेकर संगीत सीखने की इच्छा जताई पिता ने एक शर्त के साथ इजाजत दे दी वह शर्त यह थी कि इनके भाई बिट्टू भी इनके साथ संगीत सीखने जाएंगे ताकि रिचा को फरीदाबाद से दिल्ली आने जाने में सुरक्षा और सहूलियत मिले साथ ही भाई बिट्टू भी संगीत की शिक्षा ले सकेंगे इस तरह भाई बहन ने इस विद्यालय में दाखिला लिया और रिचा ने फ ईयर में टॉप भी किया गंधर्व विद्यालय में संगीत सिखाने वाले सूफी बावरा नाम के गुरु से रिचा ने आगे भी पेशेवर प्रशिक्षण लिया था मुझे साजन के घर जाना है मुझे साजन के घर रिचा एक पेशेवर डिवोशनल सिंगर के तौर पर दिल्ली और इसके आसपास के शहरों में काफी नाम बना चुकी थी और इन्हें अन्य शहरों में भी कार्यक्रम देने के लिए बुलाया जाने लगा था ऐसे ही एक कार्यक्रम में प्रस्तुति देने के लिए साल 1994 में रिचा को बॉलीवुड के प्रसिद्ध निर्माता निर्देशक रहे सावन कुमार टाक के घर मुंबई बुलाया गया था इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आशा भोसले उदित नारायण लक्ष्मीकांत प्यारेलाल आदेश श्रीवास्तव समेत बॉलीवुड के तमाम लोग पहुंचे थे कई अन्य सिंगर्स के परफॉर्म करने के बाद जब रिचा ने दो भजन गाए तो हर कोई आवाज सुनकर इनकी गायकी का मुरीद हो गया कार्यक्रम के बाद आशा भोसले ने इन्हें खूब आशीर्वाद दिया जबकि सावन कुमार ने तो अपनी अगली फिल्म में रिचा से गवाने का वादा भी कर लिया सावन कुमार के वादे के चलते ही हिंदी सिनेमा में प्लेबैक सिंगर का सपना लिए रिचा
मुंबई आ गई और फिल्मों में गायकी के मौके तलाशने लगी वादे के मुताबिक सावन कुमार ने अपनी अगली फिल्म सलमा पे दिल आ गया में रिचा से एक गाना गवाया यह फिल्म 1997 में रिलीज हुई थी ऐसी मेह है ये ज पीती जाएगी सावंत कुमार की फिल्म में ब्रेक मिलने के बाद रिचा मुंबई में ही रहने लगी थी लेकिन कई फिल्मों में गाने के लिए ऑडिशन देने के बाद भी रिचा को आगे मौके नहीं मिल रहे थे इसलिए इन्होंने दिल्ली में जागरण और भक्ति कार्यक्रमों में गाना जारी रखा कई बार तो इन्हें ऐसा लगता कि फिल्मों में करियर की राह इतनी आसान नहीं है जब वो निराश होती तो अपने पिता से बात करती और वो इनका हौसला अफजाई [संगीत] करते हिंदी सिनेमा में प्लेबैक सिंगर के तौर पर करियर बनाने के लिए रिचा ने बहुत संघर्ष किया और इन्हें खूब धक्के भी खाने पड़े अब इससे जुड़ी एक कहानी सुनाती हूं एक फिल्म में नई फीमेल सिंगर की तलाश थी फिल्म के डायरेक्टर ऑडिशन ले रहे थे भारी भीड़ थी रिचा भी गई और आठ घंटे का लंबा इंतजार किया रात के 9:00 बज गए लेकिन इंतजार खत्म नहीं हुआ अचानक इन्होंने देखा कि सबको अगले दिन आने के लिए कहा जा रहा है और वह डायरेक्टर दफ्तर से बाहर निकल रहे हैं रिजा उनके पीछे पीछे जाने लगी और रिक्वेस्ट किया कि सर मेरी आवाज एक बार सुन लीजिए मुझे कल दिल्ली जाना है मैं नहीं आ पाऊंगी बार-बार गुजारिश करने के बाद भी जब वह नहीं माने तो रिचा का स्वाभिमान जाग उठा गुस्से से लाल डबडबा आंखों से रिचा ने तब उस रेक्टर से कहा कि सर माफ करना आज आप मुझे समय नहीं दे रहे हैं ऐसा भी वक्त आएगा जब आप मुझसे गवाना चाहेंगे और मैं कहूंगी कि आपके लिए मेरे पास समय नहीं इतना कहकर वह पीछे मुड़ी और चली गई वक्त का पहिया घूमा और रिचा की बात सच साबित हुई रिचा जब कामयाब सिंगर बन गई तो उस डायरेक्टर ने इनसे अपनी फिल्म में गाने की रिक्वेस्ट की लेकिन इन्होंने इंकार कर दिया यह बात रिचा ने अपने एक इंटरव्यू में बताई थी रिचा ने उस डायरेक्टर के नाम का खुलासा तो नहीं किया लेकिन अपने अपमान का बदला जरूर ले लिया हमरा नबरी सासू पहली फिल्म में गाने के बाद 4 साल तक रिचा को किसी भी फिल्म में मौका नहीं मिला था और जब अगली फिल्म यानी ताल रिलीज हुई तो इनका करियर चमक उठा इनका गाना देश और विदेश में धूम मचा रहा था लेकिन बेटी की कामयाबी देखने के लिए वह पिता अब इस दुनिया में मौजूद नहीं थे जिन्होंने रिचा को ना सिर्फ एक सिंगर बनाया बल्कि हर परिस्थिति में उन्हें आगे बढ़ने के लिए समय-समय पर प्रेरित किया साल 1998 में इनके पिता की मौत हो चुकी थी रिचा को आज भी इस बात का अफसोस है कि काश उनके पिता बेटी की कामयाबी देख पाते फिल्म ताल में रिचा के गाय गाने नीम समझ गई गाने की कामयाबी ने इनके करियर को पंख लगा दिए पूरी इंडस्ट्री में यह बात फैल गई कि एक फीमेल सिंगर है जो बहुत ही हाई नोट में गाती है इसके बाद इन्हें ऊंचे अलापों वाले ज्यादातर गाने ऑफर होने लगे इस समय तक रिचा ऐसी स्थिति में नहीं थी कि वह किसी भी गाने को मना कर पाती लेकिन लंबे वक्त तक एक ही तरह के गाने मिलने के चलते वोह टाइपकास्ट हो गई लेकिन आगे चलकर इन्होंने इस इमेज को तोड़ा और तमाम फिल्मों में एक से बढ़कर एक हिट गाने गाए 1999 में फिल्म तरकीब में गाया उनका गाना दुपट्टे का पल्लू जबरदस्त हिट [प्रशंसा] रहा है इसके बाद तो रिचा ने तमाम फिल्मों में हिट गानों की झड़ी लगा दी इसमें लज्जा फिल्म का मुझे साजन के घर जाना है हेराफेरी का तुन तुनक तुन जुबैदा का सैया छोड़ो मोरी बैया साथिया का छलका छलका कांटे का माही वे खाकी का मेरे मौला यह सब वो गाने रहे जिसने रिचा को इंडस्ट्री की टॉप सिंगर्स में में शुमार कर दिया
और इनकी चर्चा एक बेहद वर्सटाइल और टैलेंटेड सिंगर के तौर पर होने लगी का पानी 1999 में ताल फिल्म में गवाने के बाद साल 2001 में एक दिन संगीतकार ए आर रहमान का रिचा शर्मा के पास फोन आया उन्होंने पूछा कि क्या आप ठुमरी गा सकती हैं रिचा ने कहा कि हां बिल्कुल इसके बाद रहमान ने मुंबई के स्टूडियो का पता बताते हुए रिचा को उसी दिन रिकॉर्डिंग के लिए रात 11 बजे आने को कह दिया अब सवाल था कि रिचा ने हां तो कर दी थी लेकिन इन्होंने कभी ठुमरी गाई ही नहीं थी सारा काम छोड़ इन्होंने गिरिजा देवी समेत कई प्रसिद्ध लोकगीत गायिकाओं की ठुमरी सुन डाली कई घंटे ठुमरी सुनने के बाद रिचा को यकीन हो गया कि अब वह इसे गा लेंगी इतना ही नहीं गाने में फील लाने के लिए इन्होंने ठुमरी के मिजाज के मुताबिक ना सिर्फ घाघरा चोली और ज्वेलरी पहनी बल्कि उसी के हिसाब से मेकअप करके रात को रिकॉर्डिंग स्टूडियो पहुंच गई वहां पहुंची तो फिल्म के डायरेक्टर श्याम बेनेगल और रहमान सहित सब हैरान रह गए तब रिजा ने बताया कि गाने में फील लाने के लिए उन्होंने ऐसा किया और वाकई इस ठुमरी को इन्होंने कुछ इस तरह गाया कि वो एक अमर गीत बन गया यह ठुमरी थी जुबैदा फिल्म की जिसके बोल हैं सैया छोड़ो मोरी [संगीत] बैया छोड़ो मोरी बैया सया रिचा ने शाहरुख खान स्टारर कई फिल्मों में कुछ बेहतरीन गीत गाए हैं फिल्म कल हो ना हो कि टाइटल ट्रैक का सैड वर्जन हो या फिर ओम शांति ओम का जग सुना सुना लागे साथ ही माय नेम इज खान में रिचा के गाय सजदा को कौन भूल सकता है यह यकीनन उनके गाए कुछ सबसे खूबसूरत गीतों में से एक है जाए ये जहां छूट जाए संग प्यार जुबैदा के बाद संगीतकार रहमान ने रिचा को अगला मौका साल 2003 में आई फिल्म साथिया में दिया और इनसे मशहूर गीत छलका छलका गवाया था रिचा दर्द भरे गीतों की बेजोड़ गायिका के तौर पर देखी जाती है संगीतकार आदेश श्रीवास्तव ने इनसे कुछ ऐसे दर्द भरे नगमे गवाए जिनको सुनकर यकीनन कई बार आंखों से आंसू निकल आते हैं तो कभी रिचा की आवाज में दर्द भरे गीतों से मानो कलेजा छलनी हो जाता है फिल्म बागवा में आदेश ने रिचा से ऐसा ही एक गीत गवाया था के हर फूल को अपना समझे बागवा आदेश श्रीवास्तव के ही संगीत निर्देशन में रिचा ने बॉलीवुड का सबसे लंबा गीत गाने का रिकॉर्ड बनाया था साल 2006 में आई फिल्म बाबुल का विदाई सॉन्ग 15 मिनट लंबा था आदेश का अद्भुत संगीत और रिचा की ला देने वाली इस आवाज को सुनकर पत्थर दिल भी पिघल जाता है रिकॉर्डिंग के वक्त खुद आदेश श्रीवास्तव रिचा की गायकी सुनकर रो पड़े थे यह गाना 15 मिनट लंबा रिकॉर्ड किया गया था लेकिन इसका न मिनट ही फिल्म में शामिल किया गया था आप भी
सुनिए बाबुल मोरा नहर छूटल [संगीत] जाए रिचा की अद्भुत गायकी ही थी कि 2006 में आई फिल्म उमराव जान का गाना अगले जन्म मोहे बिटिया ना की जो आज भी सुनकर आंखें नम हो जाती हैं आंसू के गहने हैं और दुख की है डोली पारंपरिक गीत हो या फिर आइटम नंबर दर्द भरे गीत रहे हो या फिर रोमांटिक सॉन्ग रिचा की गायकी ने हर अंदाज के गीतों को कामयाब और लोकप्रिय बनाया साल 2007 में फिल्मकार संजय लीला भंसाली ने रिचा शर्मा से अपनी फिल्म सांवरिया में एक ठुमरी गवाई साथ ही उन्होंने अपनी फिल्म पद्मावत में एक होली गीत गाने का भी मौका दिया थाड़ तोख महादव करीब एक दशक तक उनका करियर बेहद अच्छा चला साल 2011 तक व अमूमन हर साल आठ से नौ फिल्मों में गाती थी लेकिन अचानक उनके करियर का ग्राफ नीचे की ओर लुड़क लगा 2012 के बाद से से उन्हें सिर्फ एक या दो फिल्मों में ही गाने के मौके मिल रहे हैं इसकी कई वजहें रही एक तो रिचा जिस तरह के गीत गाने के लिए जानी जाती हैं वैसे गाने अब शायद ही बनते हैं यही वजह है कि अलीशा चिनॉय जसपिंदर नरूला और रिचा शर्मा जैसे सिंगर्स की डिमांड ना के बराबर है जबकि एक दौर में इनका जलवा देखते ही बनता था इसके अलावा फिल्मी दुनिया की राजनीति साजिशें और नए सिंगर्स की एंट्री ने भी इस गायिका के लिए राहे मुश्किल कर दी की मजबूरिया रिचा ने अपने करियर के तमाम बेहतरीन गीत आदेश श्रीवास्तव और ए आर रहमान के संगीत निर्देशन में दिया है साल 2024 में रिचा ने आखिरी बार रहमान के साथ फिल्म मैदान में काम किया था इसमें इन्होंने एक गाना गाया था अपने एक इंटरव्यू में रिचा ने इस गाने की की रिकॉर्डिंग के वक्त का एक किस्सा बताया था दरअसल इस फिल्म के गाने मिर्जा की रिकॉर्डिंग के समय रहमान ने रिचा से एक लाइन को थोड़ा ऊंचे अलाप में गाने को कहा तब रिचा ने रहमान की ओर इशारा करते हुए फिल्म के डायरेक्टर अमित शर्मा से मजाक में कहा कि इस आदमी ने ऊंचा गवाह गवा कर मेरी जिंदगी खराब कर दी है रहमान ने हिंदी और रिचा के मजाक को ठीक से नहीं समझा और नाराज होकर
अमित शर्मा की तरफ देखते हुए इसका मतलब जानना चाहा तब अमित ने रिजा की बातों का सही मतलब रहमान को समझाया घर आया मेरा मिर्जा घर आया मेरार रिजा की गायकी का अगर सही स्तर देखना हो तो इनके कुछ एल्बम सुनिए यार नू सजदा कर दी पिया और विंड्स ऑफ राजस्थान जैसे एल्बम्स में इनकी गायकी देखते ही बनती है रिचा आज भी भक्ति कार्यक्रमों के अलावा दुनिया भर में अपने कंसर्ट करती है साल 2014 में कनाडा के ओठवा जज फेस्टिवल में इन्होंने अपने देश को रिप्रेजेंट किया था 34 साल पुराने इस फेस्टिवल में प्रस्तुति देने वाली वो पहली इंडियन सिंगर रही जहां रिचा ने मार्टिन और बॉबी मैक फेरिन जैसे नामचीन कलाकारों के साथ परफॉर्म किया [संगीत] था जानकारी के मुताबिक रिचा ने अब तक शादी नहीं की है इसकी क्या वजह है बताना मुश्किल है लेकिन वह अपने भाई और भाभी के पास अक्सर फरीदाबाद आती हैं अपने कंसर्ट के अलावा वह टीवी पर आने वाले कई सिंगिंग रियलिटी शो में जज के तौर पर भी देखी जाती हैं वह सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव रहती हैं हम उम्मीद करते हैं कि आने वाले समय में इस काबिल सिंगर को इनके टैलेंट के हिसाब से काम जरूर मिलेगा जिससे चाहने वालों को इनसे कुछ नया सुनने को मिल सके रिचा की सेहतमंद और लंबी उम्र की कामना करते हुए मैं आरज अंतरा आपसे विदा लेती हूं कार्यक्रम पसंद आया हो तो चैनल को सब्सक्राइब करिएगा आपसे फिर होगी मुलाकात नमस्कार