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पानी में लाशों के बीच से जिंदा निकला जफर अली, 14 साल का हिम्मतवाला

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[संगीत] [संगीत] मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित बर्गी डैम में गुरुवार की शाम एक दर्दनाक हादसा हुआ। तेज आंधी और तूफान की चपेट में आने से मध्य प्रदेश पर्यटन निगम का मैकल सुता क्रूज बीच मजधार में ही पलट गया। इस हादसे में अब तक नौ लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं। जबकि 22 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है। प्रशासन के मुताबिक क्रूज पर 29 लोग सवार थे। लेकिन प्रत्यक्षदर्शियों के दावों ने हड़कंप मचा दिया है कि बिना टिकट के भी कई लोग सवार थे। जिसके चलते लापता लोगों की सही संख्या अभी तक स्पष्ट नहीं है। गुरुवार शाम करीब 6:00 बजे जब पर्यटक क्रूज पर सवार होकर नर्मदा

के बैक वाटर का लुत्फ उठा रहे थे, तभी अचानक मौसम ने करवट ली। करीब 60 से 70 किमी/ घंटे की रफ्तार से चली धूल भरी आंधी और अचानक उठे तूफान ने लहरों को विकराल बना दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार क्रूज लहरों के बीच हिचकोले खाने लगा और देखते ही देखते पलट गया। पानी के बीच चीख पुकार मच गई और लोग पानी की गहराई में समा गए तो कुछ लोगों ने अपनी जान बचाने के लिए घंटों तक लहरों से संघर्ष किया। 14 साल के जफर ने दी मौत को मात। इस भीषण त्रासदी के बीच जबलपुर के हनुमान ताल निवासी 14 वर्षीय जफर की कहानी चमत्कार से कम नहीं है। जफर अपने माता-पिता और भाई-बहनों के साथ पिकनिक मनाने आया था। जैसे ही क्रूज पलटा, चारों ओर अफरातफरी मच गई। जफर ने हौसला नहीं खोया और उफंती लहरों के बीच तैरना शुरू कर दिया। मौत को करीब से देखते हुए इस बच्चे ने हिम्मत दिखाई और काफी दूर तक तैर कर किनारे की ओर आया। जहां उसे सुरक्षित बचा लिया गया। जफर ने बताया

कि हादसे के वक्त लाइफ जैकेट पहनने का मौका तक नहीं मिला और पानी इतनी तेजी से क्रूज के अंदर भरा कि संभलने का वक्त तक नहीं मिला। जफर जबलपुर के हनुमान ताल इलाके का रहने वाला है और वह अपने परिवार के साथ पिकनिक मनाने बर्गी डैम आया था। हादसे के वक्त जफर के साथ उसके माता-पिता और भाई-बहन भी क्रूज पर सवार थे। लेकिन जफर ने क्रूज पलटने के बाद खुद तैर कर अपनी जान बचाई। रिपोर्ट्स के मुताबिक उसके परिवार के कुछ अन्य सदस्य भी सुरक्षित बचा लिए गए। हालांकि प्रशासन ने अभी सभी के नामों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। जैसे ही घटना हुई वैसे ही हादसे की खबर मिलते ही स्थानीय प्रशासन और गोताखोर मौके पर पहुंचे लेकिन अंधेरा और खराब मौसम बाधा बने रहे। शुक्रवार सुबह से ही रेस्क्यू ऑपरेशन में तेजी आई और अब भारतीय सेना ने मोर्चा संभाल लिया है। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें आधुनिक उपकरणों और हाइड्रोलिक कन के साथ डूबे हुए क्रूज को बाहर निकालने और लापता शवों को खोजने में जुटी हैं। जबलपुर कलेक्टर और एसपी खुद मौके पर मौजूद रहकर स्थिति की निगरानी कर रहे हैं।

इस हादसे ने सरकारी दामों और सुरक्षा इंतजामातों की पोल खोल कर रख दी है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब मौसम विभाग ने पहले से ही तेज आंधी और बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया था तो क्रूज़ को पानी में जाने की अनुमति क्यों दी गई? इसके अलावा जीवित बचे यात्रियों ने आरोप लगाया कि क्रूज पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई। लाइफ जैकेट या तो पर्याप्त नहीं था या फिर यात्रियों को उन्हें पहनने के लिए प्रोत्साहित नहीं किया गया। फिलहाल मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। सरकार ने मृतकों के परिजनों को ₹44 लाख की आर्थिक सहायता और घायलों के मुफ्त इलाज की घोषणा की है। साथ ही घटना की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच में जो भी कोई दोषी पाया जाएगा चाहे वह क्रूज ऑपरेटर हो या पर्यटन विभाग का कर्मचारी उस पर कड़ी कारवाई की जाएगी। फिलहाल 14 वर्ष के जफर की कहानी चारों ओर चर्चा का विषय बनी हुई है। इस घटना पर जो भी अपडेट होगा वो अपडेट लाइव हिंदुस्तान आप तक जरूर पहुंचाएगा। अभी जिस तरह से एनडीआरएफ ने अभी प्रयास किया है। दो बॉडी निकाली हैं। लेकिन अभी अंतिम रूप से कहना कठिन है कि अभी अंदर और कितने लोग हैं। आप देख ही रहे हैं।

प्रयास जारी हैं। थोड़ी देर में स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। हम सभी तो प्रार्थना ही कर सकते हैं कि यह दुखित करने वाली घटनाओं की निरंतरता यह रुक जाए। लेकिन एक बार या तो क्रूज सीधा हो या फिर क्रूज के अंदर जाने की स्थिति ऐसी बने कि पूरे तौर पर परीक्षण करके एनडीआरएफ ये बता सके कि अंदर अभी लोग कितने हैं। सर अभी जो शव निकला है उसमें देखा गया है कि लाइफ जैकेट उन्होंने पहनी हुई थी। बावजूद इसके लाइफ जैकेट पहनी हुई थी। पहले भी कुछ शव जो मिले उन्होंने भी लाइफ जैकेट पहनी हुई थी। लेकिन क्योंकि जब यह क्रूज पलटा तो ऐसा माना जाता है कि वह उसके अंदर ही रह गए और बाहर नहीं निकल पाए। केबिन में फंसे रह गए और जो नीचे का कैबिन था जिसके अंदर वो थे उससे वो बाहर नहीं निकल पाए। प्रारंभिक रूप से भी ऐसा लगता है। तो एक बार यह पूरा हो जाने के बाद रेस्क्यू पूरा होने के बाद फिर बाकी की स्थितियां स्पष्ट होंगी कि क्या-क्या कारण थे कि लाइफ जैकेट पहनने के बाद भी लोग नहीं बच पाए तो क्या कारण थे। [संगीत]

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