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रेलवे ने बता दिया, किस राज्य के लोग सबसे ज्यादा… तौलिया-चादर चुराते हैं!

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रेलवे के एसी कोच में यात्रा करने वाले कुछ लोग अपने टिकट का पैसा केवल यात्रा करके वसूल नहीं करते हैं। एसी का हवा तो खाते ही हैं।

साथ में चादर है पार कर लिए। टॉवल है पार कर लिए। कोई देख तो नहीं रहा टीटीवीटी। कंबल है बैग में शर्ट से पार। मतलब एसी कोच में सफर करने वाले कुछ यात्रियों की एक आदत अब भारतीय रेलवे पर 100 करोड़ से ज्यादा का बोझ बन चुकी है।

पिछले 4 साल में लाखों तौलियां, चादरें, कंबल, तकिए सब ट्रेन से पार हो रहे हैं। एक आरटीआई से एक किसी ने आरटीआई लगाई और उसकी जानकारी जो सामने आई है उसके अनुसार हर दिन हजारों लीनन आइटम चोरी हो रहे हैं। रेलवे ने अपने आंकड़ों में बताया है कि किस राज्य और किस जोन के मुसाफिर सबसे ज्यादा चोरी करते हैं। दरअसल ट्रेन में सीट मिलते ही चादर, कंबल और तौलिया इस्तेमाल करना आपका अधिकार है। लेकिन सफर खत्म होने के बाद इन्हें अपने बैग में रखना रेलवे के लिए सबसे बड़ी सिरदर्द बन चुका है। मतलब भारतीय रेलवे आपकी सेवा में और आप इतना मेवा खा रहे हैं, इतना मेवा खा रहे हैं कि भारतीय रेलवे परेशान है भाई।

इतना इतना बड़ा कहिए तो नुकसान। जनवरी 2022 से मई 2026 के बीच एसी कोच से 1 करोड़ 27 लाख से ज्यादा के सामान गायब हुए। आरटीआई से मिले आंकड़ों के मुताबिक इन चोरियों ने रेलवे को 104 करोड़ 51 लाख से ज्यादा का नुकसान पहुंचाया है। मतलब आपके लिए तो ठीक है चादर उड़ा लिए हैं, तकिया उड़ा लिए लेकिन समझ रहे हैं 104 करोड़ का नुकसान भारतीय रेलवे को हुआ है।

आंकड़ों की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि चोरी होने वाली चीजों में सबसे ऊपर फेस टॉवल है। मतलब दिया गया कि हाथ मुंह पोछिए। इसलिए थोड़ी है कि बैग में ठूस लीजिए। छोटा सा होता है तो खट से वह मोड़ के आ भी जाता है बैग में। 4 साल में 4654000 तौललिए गायब हुए हैं ट्रेन से। इसके बाद 413000 चादर 2359000 तकिए के कवर तकिया के कवर मतलब क्या यार करीब 13 लाख कंबल 2 76000 तकिया चोरी हो गए।

रेलवे अधिकारियों के मुताबिक देश भर में हर रात करीब 8 लाख एसी यात्री लिनन बेड रोल का इस्तेमाल करते हैं। अनुमान है कि लगभग प्रति हजार व्यक्तियों में एक यात्री सफर खत्म होने पर कोई ना कोई आइटम अपने साथ उड़ा ले जाता है। यही छोटी-छोटी चोरियां मिलकर हर साल करोड़ों रुपए का नुकसान पहुंचा रही है। रेलवे का कहना है कि इस नुकसान की भरपाई के लिए अतिरिक्त लीन खरीदना पड़ता है और इसका बोझ आखिरकार आम यात्रियों पर ही पड़ता है।

मतलब ये सब जो टिकट-विकट का पैसा बढ़ता है। ट्रेनें कई बार थोड़ी देरी से भी चल जाती है। आप कितने बम बम हो जाते हैं। लेकिन कभी यह भी सोचिए कि आपकी चोरी से रेलवे को कितना नुकसान हो रहा है। ये सब रेलवे कहां से भाई भरपाई करेगा? आपसे और हमसे करेगा ना। आरटीआई के मुताबिक सबसे ज्यादा चोरी बीकानेर, जोधपुर, जयपुर, रांची, दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद, सोनपुर, दानापुर और बिलासपुर मंडलों में दर्ज हुई।

माने इधर वाले यात्री जो हैं ज्यादा माल गायब कर रहे हैं। हम सबकी बात नहीं कर रहे हैं। लेकिन कुछ लोगों की वजह से ये सारे मंडल देखे जो हमने अभी नाम गिनाए आपको ये बदनाम हो गए। हालांकि दिल्ली मंडल ने इस ट्रेंड को बदलते हुए चोरी की घटनाओं में करीब 79% की कमी दर्ज की है। वहीं दक्षिण रेलवे के तिरुचिलापल्ली और पलक्कर मंडल ऐसे रहे जहां इस अवधि में लीनन चोरी का कोई मामला सामने नहीं आया। वाया साउथ वाले बड़े ईमानदार निकले। रेल मंत्रालय ने इस पूरे मामले को गंभीर चिंता का विषय बताया है। रेलवे का कहना है कि चोरी रोकने के लिए निगरानी बढ़ाई जा रही है और दोषियों पर कारवाई होगी। अधिकारियों का दावा है कि अब तक कर्मचारियों की मिलीभगत का कोई सबूत नहीं मिला है।

सवाल यही है कि यात्रियों की सुविधा के लिए दिया गया सामान अगर यादगार बनकर घर पहुंचता रहेगा तो इसकी कीमत आखिरकार पूरे देश के यात्रियों को ही चुकानी पड़ेगी। मतलब चादर ले जाके आप रेलवे का गायब करके उसे आप रात में ओढ़ के सो लीजिएगा। तकिया ले जाकर अपने घर पर रख लीजिएगा। आपका तो ठीक है भाई। लेकिन आपकी इस चोरी से आम आदमी की जेब पर जो

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