विज्ञान जाथा से परेशान होकर अंबालाल पटेल ने बारिश की आगही करने से किया माना।अहमदाबाद: गुजरात में मौसम की भविष्यवाणियों और अनुमानों के लिए सुर्खियों में रहने वाले अंबालाल पटेल ने संन्यास का ऐलान किया है।
उन्होंने राज्य में ‘विज्ञान जाथा’ की तरफ से बारिश की भविष्यवाणी करने वालों के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग के बार यह फैसला लिया है। सौराष्ट्र की चर्चित संस्था ने अंबालाल पटेल की अनुमानों के गलत साबित होने पर निंदा की थी। संस्था ने कहा था कि करोड़ों रुपये के बीज बर्बाद होने के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। भविष्यवाणी करने वालों पर भरोसा करना खुद अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारने जैसा है।
संस्था ने कहा था कि भविष्यवाणी करने वालों के पास वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित कोई उपकरण नहीं है।उनकी भविष्यवाणियां गलत साबित हुई हैं। अब अंबालाल पटेल ने भविष्यवाणी नहीं करने का ऐलान किया है।
दरसअल, अन नीनो से प्रभावित दक्षिण-पश्चिम मॉनसून से गुजरात को बारिश नहीं मिली है। राज्य की 60 तहसीलों में बारिश नहीं होने पर किसान बर्बादी की कगार पर खड़े हैं। विज्ञान जाथा संस्था के प्रमुख जयंत पांड्या ने कहा था कि बारिश के पूर्वानुमान ने जुलाई के मध्य तक की सभी भविष्यवाणियों को गलत साबित कर दिया है।
पांड्या ने कहा है कि मौसम की भविष्यवाणी आईएमडी के पूर्वानुमान में होती है। उसके पास सैटेलाइट हैं। वैज्ञानिक निष्कर्ष होता है। खुद की आलोचना होने पर बाबा वेंगा की तरफ उभरे अंबालाल पटेल ने दुखी मन से संन्यास का ऐलान कर दिया है। अंबालाल पटेल के पूर्वानुमान को मीडिया में काफी जगह मिलती थी। इसके चलते अंबालाल पटेल पूरे गुजरात के बेहद लोकप्रिय हो गए थे।
गुजरात में बारिश की भविष्यवाणी के लिए मशहूर अंबालाल पटेल ने एक अहम घोषणा की है और कहा है कि वे फिलहाल बारिश के बारे में कोई भविष्यवाणी नहीं करेंगे। उनकी इस घोषणा के बाद पूरे राज्य में चर्चा का माहौल बन गया है। अंबालाल पटेल बरसों से अपने पारंपरिक तरीके और वैदिक ज्ञान के आधार पर मौसम की भविष्यवाणी करते आ रहे हैं, जिससे लोगों में हमेशा उत्सुकता बनी रहती है। उन्होंने आगे कहा कि ‘विज्ञान जाथा’ की ओर से लगाए गए आरोपों से उन्हें दुख पहुंचा है। उनके मुताबिक, ऐसे आरोप न सिर्फ उन पर व्यक्तिगत रूप से लगाए गए हैं, बल्कि ये पारंपरिक वैदिक ज्ञान और हमारे ऋषियों के ज्ञान पर भी चोट हैं। उन्होंने कहा कि सदियों से चली आ रही पारंपरिक ज्ञान प्रणाली पर सवाल उठाना सही नहीं है। वे किसी भी तरह के विवाद में नहीं पड़ना चाहते हैं।