एक-एक सांस के लिए तड़पता रहा मशहूर एक्टर। परिवार से दूर हॉस्पिटल के बिस्तर पर बिताए आखिरी दिन। अवार्ड फंक्शन में बिगड़ी एक्टर की हालत। टूट कर बिखर गई सुपरस्टार की बीवी। सदमे में आ गया पूरा परिवार। स्टेज पर बैठे थे पूरा हॉल तालियों से गूंज रहा था। देश का सबसे बड़ा सम्मान मिलने वाला था।
लेकिन तभी उन्हें सांस लेने में परेशानी होने लगी। पत्नी घबरा गई और देखते ही देखते जश्न का माहौल सन्नाटे में बदल गया। किसी ने नहीं सोचा था कि उस दिन के बाद बॉलीवुड का यह महान सितारा कभी अपने घर वापस नहीं लौट पाएगा। जी हां, यहां हम बात कर रहे हैं हिंदी सिनेमा के शोमैन राज कपूर की, जिनके आखिरी दिन बेहद दर्द और स्ट्रगल में बीते थे।
जिस शख्स की फिल्मों से करोड़ों लोगों के चेहरे पर मुस्कान आई, वही अपनी जिंदगी के आखिरी दिनों में एक-एक सांस के लिए जूझते रहे थे। बता दें राज कपूर लंबे समय से की बीमारी से जूझ रहे थे, लेकिन बीमारी कभी उनके काम के बीच नहीं आई।
फिल्में बनाना उनका जुनून था। अपने ड्रीम प्रोजेक्ट हिना की तैयारी के दौरान भी उन्होंने आराम करने की बजाय पहाड़ों तक जाकर काम किया। जिसके चलते उनकी तबीयत और भी ज्यादा बिगड़ गई थी। इसी बीच साल 1988 में उन्हें भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े सम्मान दादा साहेब फाल्के अवार्ड से सम्मानित किया गया था। दिल्ली में इवेंट चल रहा था। देश के राष्ट्रपति भी मौजूद थे। लेकिन सम्मान मिलने से पहले ही राज कपूर को अचानक तेज अस्थमा अटैक आ गया।
उनकी पत्नी कृष्णा राज कपूर पहले से ही ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर उनके साथ बैठी हुई थी। उन्होंने तुरंत उन्हें ऑक्सीजन दी लेकिन हालत लगातार बिगड़ती चली गई। हालत इतने गंभीर हो गए कि राष्ट्रपति ने प्रोटोकॉल तोड़ते हुए खुद उनकी सीट तक जाकर उन्हें दादा साहेब फाल्के अवार्ड सौंपा था। इसके तुरंत बाद राज कपूर को एंबुलेंस से दिल्ली के एम्स अस्पताल में ले जाया गया। लेकिन भीड़ की वजह से राज कपूर को सांस लेने में और भी ज्यादा परेशानी हो रही थी। कहा जाता है।
जब इलाज शुरू हुआ तब कुछ समय के लिए ऐसा लगा कि सब कुछ ठीक हो जाएगा। इसी दौरान साउथ सुपरस्टार कमल हासिन भी उनसे मिलने अस्पताल पहुंचे थे। दोनों के बीच थोड़ी बातचीत भी हुई थी। परिवार और दोस्तों को उम्मीद थी कि राज कपूर जल्द ठीक होकर घर लौट आएंगे। लेकिन कुछ दिनों बाद उनकी हालत फिर से बिगड़ने लगी। उन्हें निमोनिया हो गया था जिसने उनकी हालत को और भी ज्यादा गंभीर बना दिया। सांस लेना उनके लिए सबसे बड़ी लड़ाई बन गई थी।
बताया जाता है कि दर्द से परेशान होकर उन्होंने कहा था अब शायद मैं ठीक नहीं हो पाऊंगा। मुझे मरने दो। यह सुनकर उनकी पत्नी कृष्णा राज कपूर पूरी तरह टूट गई थी। उन्होंने तुरंत अपने तीनों बेटों को खबर दी। इसके बाद राज कपूर कोमा में चले गए। करीब 1 महीने तक वह अस्पताल के बिस्तर पर जिंदगी और की लड़ते रहे। लेकिन 2 जून 1988 को राज कपूर ने दुनिया को हमेशा हमेशा के लिए अलविदा कह दिया।
कहा जाता है जैसी गंभीर बीमारी के बावजूद वह सिगरेट की आदत छोड़ नहीं पाए थे। जिसने उनकी सेहत को और भी ज्यादा नुकसान पहुंचाया । लेकिन आज भी राज कपूर को उनकी शानदार फिल्मों, बेहतरीन सोच और भारतीय सिनेमा को नई पहचान देने वाले महान कलाकार के रूप में याद किया जाता है।