राज कपूर बचपन से ही अभिनय और रंगमंच के दीवाने थे। पढ़ाई में भी वह अच्छे थे, खासकर अंग्रेजी में, लेकिन गणित और लैटिन उनके लिए मुश्किल साबित हुए।
आखिरकार वह मैट्रिक की परीक्षा पास नहीं कर सके।परीक्षा के बाद राज कपूर ने पिता पृथ्वीराज कपूर से खुलकर कहा कि अगर वह पढ़ाई जारी भी रखते हैं तो डिग्री लेने के बाद फिर नौकरी के लिए उन्हीं के पास आएंगे।
उनका मन फिल्मों में काम करने का था। पृथ्वीराज कपूर ने बेटे की बात सुनी और उन्हें रोकने के बजाय एक अनोखी परीक्षा लेने का फैसला किया।उन्होंने राज कपूर को करीब 300 रुपये दिए और कहा कि पहले परिवार के रिश्तेदारों से मिलने अलग-अलग जगहों की यात्रा करके आओ। लौटने के बाद भी अगर फिल्मों में जाने का फैसला कायम रहे, तो वह उनकी मदद करेंगे।
राज कपूर यात्रा से लौटे तो उनका इरादा बिल्कुल नहीं बदला था। तब पृथ्वीराज कपूर ने उन्हें फिल्मों में काम शुरू करने का रास्ता दिखाया, लेकिन एक शर्त रखी-उन्हें बेटे के रूप में कोई विशेष सुविधा नहीं मिलेगी।यहीं से राज कपूर के संघर्ष की असली शुरुआत हुई और आगे चलकर वही लड़का हिंदी सिनेमा का महान ‘शोमैन’ बना।