कभी राजीव गांधी और अमिताभ बच्चन की दोस्ती इतनी गहरी थी कि दोनों के परिवारों के रिश्ते भी बेहद आत्मीय माने जाते थे। लेकिन राजनीति में आए बदलावों के साथ दोनों के संबंधों में खटास की खबरें सामने आने लगीं।
अमिताभ बच्चन 1984 में राजीव गांधी के आग्रह पर इलाहाबाद से लोकसभा चुनाव जीतकर सांसद बने थे। लेकिन 1987 में बोफोर्स विवाद के दौरान उनका नाम भी चर्चा में आया। अमिताभ ने इन आरोपों से इनकार किया और बाद में उनके खिलाफ कोई दोष सिद्ध नहीं हुआ। इसके बावजूद उन्होंने राजनीति से इस्तीफा दे दिया।
1989 में विश्वनाथ प्रताप सिंह प्रधानमंत्री बने और राजीव गांधी विपक्ष के नेता बन गए। इसी दौर की एक घटना का उल्लेख पत्रकार और पूर्व सांसद संतोष भारतीय ने अपनी किताब ‘वी.पी. सिंह, चंद्रशेखर, सोनिया गांधी और मैं’ में किया है।
किताब के मुताबिक, एक दिन अमिताभ बच्चन राजीव गांधी से मिलने 10 जनपथ पहुंचे। दोनों की करीब दस मिनट मुलाकात हुई और अमिताभ के चले जाने के बाद राजीव गांधी ने कथित तौर पर कहा- “.”इस कथन का मतलब क्या था, इसका राजीव गांधी ने कोई सार्वजनिक स्पष्टीकरण नहीं दिया।
किताब में इसे दोनों के बीच बढ़ती राजनीतिक और व्यक्तिगत दूरी के संदर्भ में रखा गया है। इसलिए यह कहना कि राजीव ने निश्चित रूप से इसी वजह से अमिताभ को ” कहा, उपलब्ध स्रोतों से साबित नहीं होता।