लड़के दे तो कोई प्रॉब्लम नहीं है। उनके लिए अलाउड है। की मगर अगर लड़की दे तो कल्चरल शौक है। शोभा नहीं देता। 22 अगस्त को पुणे में छात्रों की गूंज नाम का एक इवेंट हुआ। कांग्रेस का जनसंपर्क इवेंट। राहुल गांधी ने यहां महिलाओं की आजादी और पितृसत्ता के मुद्दे पर बात की। के स्टेटमेंट को कोट करके बोले जंतरमंतर में लड़कों ने भी दी और लड़कियों ने भी दी
बट कह रहे हैं कि देना कल्चरल शॉक लगा हमें क्योंकि लड़कियों ने दी। लड़के दे तो कोई प्रॉब्लम नहीं है। उनके लिए अलाउड है। मगर अगर लड़की दे तो कल्चरल शौक है। शोभा नहीं देता। राहुल यहां पीएम मोदी के जिस स्टेटमेंट की बात कर रहे हैं, वह जंतरमंतर पर सीजेपी प्रोटेस्ट से जुड़ा है। 23 जुलाई को प्रोटेस्ट के दौरान एक लड़की ने के खिलाफ अभद्र और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया था। सोशल मीडिया पर यह वीडियो काफी वायरल भी हुआ। उसने अपनी बात में इटली की l का भी जिक्र कर भद्दी टिप्पणी की थी। इसके बाद 29 जुलाई 2026 की शाम गौतम बुद्ध नगर के एक्सप्रेसवे थाने में लड़की के खिलाफ जीरो एफआईआर दर्ज करवाई गई।
ने वीडियो शेयर कर इस पर प्रतिक्रिया भी जाहिर की थी। जो है उसको भली-भांति समझ सकता हूं। एक कल्चरल शौक है कि हमारी बेटियां इस प्रकार की भाषा कैसे बोल सकती है? लेकिन समय है इन बच्चों को गले लगा के राह दिखाने का। यह गुमराह बच्चे हैं। उनको राह दिखाना हमारा काम है। राहुल ने के इस बयान की आलोचना की। बोले पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन के दौरान लड़के और लड़कियां दोनों ही अब शब्दों का इस्तेमाल कर रहे थे। पर लड़कियां दे तो उसे कल्चरल शौक बताया जाता है।
यहां उनका जो निशाना था वह के स्टेटमेंट पर था। इस इवेंट में राहुल ने और क्या-क्या कहा पॉइंट्स में जान लेते हैं। राहुल ने महिलाओं से अपील की कि वे अपने अधिकारों के लिए खड़ी हो और पितृसत्तात्मक सोच को तोड़ें। राहुल गांधी ने कहा कि का श्लोक शर्मनाक है जिसमें कहा गया है कि महिला बचपन में पिता, युवावस्था में पति और बुढ़ापे में बेटों के अधीन रहती है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को किसी के अधीन नहीं होना चाहिए। वे अपनी मालिक खुद हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी की बेटी, पत्नी या मां होना ही महिला का एकमात्र आइडेंटिटी उसे नहीं कहा जा सकता है।
एक महिला की आइडेंटिटी सिर्फ इतनी नहीं है। राहुल ने प्रमुख मोहन के पुराने बयान का हवाला दिया जिसमें कहा गया था कि इंडिया में होते हैं भारत में नहीं। उन्होंने मुख्यमंत्री मनोहर खट्टर के उस बयान का भी जिक्र किया जिसमें कथित तौर पर खट्टर ने कहा था कि 80% महिलाओं के कारण होते हैं। राहुल ने कहा कि यह पूरी लड़ाई इसी मानसिकता के खिलाफ है। राहुल ने समाज में महिलाओं के खिलाफ हिंसा को तीन भागों में बांटा।
शारीरिक , अवसरों से वंचित रखना और आर्थिक । इन तमाम आरोपों पर बीजेपी की भी प्रतिक्रिया आई है। महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडनवीस ने सवाल उठाए कि महिला सशक्तिकरण की बात करने वाले राहुल गांधी संसद में महिला आरक्षण बिल के खिलाफ क्यों हैं?
जहां तक राहुल गांधी का सवाल है, स्टेज पर आकर तो उन्होंने महिला अधिकारिता की बात कही। लेकिन महिलाओं को अधिकारिता देने का सबसे क्रांतिकारी कदम महिला आरक्षण बिल है। जिसको राहुल गांधी विरोध कर रहे हैं।
जिसके खिलाफ वोट कर रहे हैं। महिलाओं को अधिकार देना नहीं चाहते। मैं ऐसा मानता हूं खाने के दांत अलग हैं। दिखाने के दांत अलग है। तो भाषा संस्कृति और महिला सशक्तिकरण पर यह थी दोनों पक्षों की राय।