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राहुल गांधी को जबरन उठाते वक्त गुम हुआ मोबाइल कहां से मिला?

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एक प्रदर्शन और हुआ राहुल गांधी की अगुवाई में प्रधानमंत्री के आवास के बाहर मल्लिकार्जुन खड़गे के जन्मदिन के दिन तो उसकी योजना कैसे बनी कि उसकी भनक सुरक्षा बलों को नहीं लग सकी और सीधे राहुल गांधी की अगुवाई में सांसद पहुंच गए और फिर दूसरी पार्टियों के सांसद भी वहां पहुंचने लगे और बैठ ही गए। उसकी भनक सिर्फ तीन ही लोग को थी। प्रियंका गांधी, राहुल गांधी और केसी वेणुगोपाल और खरगे के आवास पर पहुंचे। खरग साहब के साथ ये चर्चा हुई कि ये प्रपोजल दिया गया और तब जो सांसद वहां पे सोचे थे कि अच्छा खरगे साहब का जन्मदिन तो नहीं मना रहे फिर भी बुला रहे हैं और उनको बोला गया था। अब कई लोग सोचे चलिए सुबह तो विष ही करनी है नहीं जाते हैं तो वो बाद में भागते भागते प्रधानमंत्री आवास पे पहुंचे क्योंकि उनको लगा जन्मदिन तो विष ही कर लिया दोबारा काहे बुला रहे हैं जब बना नहीं रहे केक काट नहीं रहे हैं तो काहे बुला रहे और सुबहेरे कोई लोग नहीं जान रहे थे

खरगे साहब से मेरी खुद बात हुई थी तो खरगे साहब मुझे बोले सुबह के वक्त मैंने कहा सर साल सालगिरह मुबारक हो आपको तो वो बोले कि मौतमी हम तो इस बारी जन्मदिन नहीं मना रहे हालांकि हम सोचे कि आंसर हमें मालूम है कर लिए। हम पूछ लिए उनसे कि सर क्यों नहीं मना रहे? कहते जो छात्रों के साथ हुआ उनका नजरिया था और उनका उनकी बातें उन्होंने कहा कि छात्रों के साथ जो हुआ है इसके वजह से हम जन्मदिन नहीं मना रहे। फिर हमें आज पता लगा कि यार जन्मदिन नहीं मना रहे और उसके बाद भी सबको बुला रहे हैं। और उसके बाद वही हुआ। हम आप ये सोचिए कि हमें भी खबर नहीं थी। हम गाड़ी इतनी आननफानन में चला के वहां पे जो भी गाड़ी मिली अपनी गाड़ी चला के पहुंचे हैं। जब पहला विजुअल जो आया वो भी बाय डिफॉल्ट आया। जैसे एजेंसी वाले ऐसे फाटक पर खड़े रहते हैं कुलदीप वो फाटक पर खड़े थे एक एजेंसी वाला करगे जी के घर के बाहर और देखा राहुल गांधी बाहर आ रहे तो उनको लगा घर जा रहे होंगे लेकिन ऐसे राहुल गांधी बाहर आए और राहुल गांधी चलने लगे प्रधानमंत्री के आवास की तरफ तब वो विजुअल वो सोचे कि चलो कोई विश करने आया होगा तो कवर कर लेते हैं जो एजेंसी में जो पार्टी कवर करते हैं उनको भी खबर नहीं थी वो तो सिर्फ कैमरा वाले थे वहां पर मौजूद तो वो एक दो एजेंसी पकड़े फिर हम लोग भी भागे और सारे सांसद भी भागे तो यह योजना जो है

अब बहुत कोर ग्रुप है जो सारी दो ही चार लोग को पता रहता है हवा तो बाकी दलों को भी नहीं थी ना सुप्रिया 16 को थी अखिलेश यादव को नहीं थी 6:00 बज गया या कितना बज गया जब राहुल गांधी दो तीन एक दो घंटे बैठ गए थे तो उसके बाद अखिलेश जी के वहां लगातार अखिलेश यादव को लगातार तीन चार फोन गए कि आ जाइए आ जाइए कल वाले प्रदर्शन में यानी कि जो गांधी स्मृति वाला है उसमें भी अखिलेश यादव आपको नजर नहीं आए क्यों नहीं नजर वो चले गए लखनऊ तब फोन आया कि यहां गांधी स्मृति जाना है तो अखिलेश बोल हम तो लखनऊ पहुंच गए तब फिर वो राजीव राय और बाकी एक दो लोग को और प्रतिनिधित्व करते हुए समाजवादी पार्टी का राहुल के घर सुनहरी बाग भेजे तो ये पूरी योजना बड़ी सरप्राइज एक फ्लैश प्रोटेस्ट टाइप का था। वरना क्योंकि पुलिस ये लोग जान रहे हैं

कि पुलिस कहीं आगे बढ़ने नहीं देती। तो उसका सक्सेस तो इसी बात से होगा। पिटिकल सक्सेस जो इतना छाए रहे और टीवी पर चलते रहे और भाषण भी उनका चला और इतना लंबा जो खिचा टाइमलाइन पार्टी सोचती होगी कि कितना खींच सकते हैं क्योंकि उसमें सरप्राइज एलिमेंट था। अगर पहले ही पुलिस को पता होता तो खरगे जी के घर के बाहर ही नहीं जाने देते। तर साहब के घर के बाहर ही रोक देते राहुल गांधी तो और आपको बताओ उसमें राहुल गांधी का फोन भी खो गया। राहुल गांधी को जब सब लोग उठाए नहीं ये तो पता है कि जूता खो गया तस्वीरों से फोन खो गया। आप बता रही ये तो हम कहानी आपको बता रहे हैं। जूतक हो गया वो तो तस्वीर से पता है और ये आप ही को बता रहे किसी को शायद पता भी ना हो कि राहुल गांधी का फोन जो है जब उनको उठाया गया तो वो तो ऐसे लग रहा है कि अकीडो कर रहे हैं वहां पे पूरा अडो की मुद्रा में पूरी मार्शल आर्ट्स की डिफेंस की मुद्रा में आप जब मैट पे लेटते हैं वो इसी तरह से लेटते हैं कि आपको कोई उठा ना पाए। आपका कोई हाथ ना आप देखिए उनका हाथ इस तरीके से है। इस तरीके से हाथ है।

मतलब कि कोई आपका हाथ ऐसे रहेगा तो आपको खींचना आसान है। पैर भी जकड़े हुए बैठे हैं। तो वो डिफेंसिव पहुंचते हुए भी मार्शल आर्ट्स के ऐसा लग रहा था जमीन पे मैट पे आप कीडो कर रहे हैं। और जुडो में ऐसे ही होता है। हम जुडो करते हैं। तो आपको दूसरी चीज मैं बता रही हूं कि जब उनको उठाया गया और बस पे भरा गया राहुल गांधी को तो राहुल गांधी का फोन बम हो गया। और राहुल गांधी का फोन तो आप जान रहे हैं। बहुत इंपॉर्टेंट कांटेक्ट है उनका फोन। अक्सर रैलियों में भी राहुल गांधी अपना फोन देख रहे होते हैं। कई बारी वो बोलते हैं राहुल नेता बोलते हैं राहुल गांधी कुछ मैसेज ही कर रहे हैं। हमसे बात ही नहीं किए। अरे वो फोन गुम हो गया। राहुल गांधी बस में बैठ गए। उनका फोन उनके साथ नहीं। फिर उसके बाद बस पूरा फेरी लगाती रही। फेरी लगाती रही। तब बोला गया भैया पता लगाओ राहुल गांधी का फोन कहां है और फिर किसी से बात ना हो पाए उसके बावजूद भी प्रियंका गांधी जो अलग बस में थी किसी तरह से पता लगा ली कि कौन है राहुल गांधी के साथ उस बस में तीन चार लोग थे उसमें कार्यकर्ता थे और एक और जो राहुल गांधी के साथ रहते हैं वही थे वही सब लोग थे तो उनको फोन करके फिर राहुल गांधी से बात हुई उस वक्त जब दोनों को डिटेन करा के सड़कों में घुमाया जा रहा था। अलग-अलग बातों में प्रियंका गांधी ने पूछा राहुल गांधी से कि आप ठीक-ठाक है कि नहीं है? तो ये थी और फोन भी मिला नहीं। फिर राहुल गांधी का फोन नहीं मिला। बाद में मिला जाके तुगलक रोड थाने से। शायद उनको उठाते वक्त वो फोन गिर गया वही। उसके बाद वो पहुंच गया तुगलक रोड थाने जहां से उनका फोन रिकवर है। [संगीत]

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