क्या प्रेमानंद महाराज के शिष्य को गया था? क्या उस रात रसिक दुलारी के साथ बर्बरता की गई थी? क्या इसे छत से नहीं कहकर कहा जाए? सवाल है कि प्रेमानंद महाराज के उस अशुस के साथ आखिर उस रात हुआ क्या था जो उनके साथ साए की तरह रहा करता था? और सवाल यह भी कि क्या उसका पार्ट सच में गायब था?
वृंदावन का वो स्थान जहां राष्ट्रपति से लेकर बड़े गायक, मंत्री, नौकरशाह, क्रिकेटर और कॉमेडियन सब कुछ पहुंचे। जिन प्रेमानंद महाराज से मिलकर दुखे से दुखे इंसान शांत महसूस करता हो उनके श्य मानसिक तौर पर इतना बीमार हो सकता है। लोगों को यह हजम नहीं हो रहा। और पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने इस रहस्य को और गहरा कर दिया। तो । टाइम कथा के आज के इस एपिसोड में वृंदावन में हुई एक संदिग्ध की वृंदावन राधा कृष्ण की भक्ति में लीन रहने वाले यह पावन भूमि पर जो यह मौत हुई है, उसे लेकर आज की पूरी कहानी। जहां देश ही नहीं दुनिया भर से लोग मानसिक शांति की तलाश में आते हैं।
संत प्रेमानंद महाराज का आश्रम केली कोच भक्ति और साधना का ऐसा केंद्र माना जाता है जहां बड़े-बड़े दिक्कत सिर झुकाया करते हैं। लेकिन इसी पावन धरा पर बारा घाट इलाके में स्थित चार मंजिला गुरु कृपा कुंज बिल्डिंग से शुक्रवार की सुबह एक ऐसी खबर निकल कर सामने आई जिसने पूरे भक्ति जगत को हिला कर दिया। यह बिल्डिंग प्रेमानंद महाराज की ट्रस्ट की है। जहां 50 से ज्यादा शिष्य और सेवादार रहते हैं।
सुबह के करीब 11:00 बजे का वक्त था। 25 साल का एक नौजवान शिष्य जिसका नाम रसिक दुलारी शरण था। उस चार मंजिला इमारत की छत पर जाता है। कुछ देर बाद वहां से नीचे और फिर मौत। आधे घंटे तक वो से लथपत बताया जा रहा था। जमीन पर तड़पता हुआ भी रहा। मौत से पहले। जब दूसरे सेवादारों की नजर पड़ी तो आनन-फानन में उसे सर्वोदय अस्पताल ले जाया गया। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उसे घोषित कर दिया। जब पुलिस अस्पताल से मिली सूचना की बाद घटना स्थल पर पहुंची और रसिक दुलारी शरण के कमरे का दरवाजा खोला गया तो जो कुछ अंदर था उस नजारे को देखकर फॉरेंसिक टीम के भी होश उड़ जाते हैं।
कमरे के अंदर खून के छींटे थे और सबसे चौंकाने वाली बात कमरे में बिजली से चलने वाला एक मशीन भी मिला जिस पर ताजा खून लगा हुआ था। शुरुआती आशंका है कि सूत्रों से जो छनकर आई वो खबरों ने रोंगटे खड़े कर दिए। कहा गया कि अपनी जान देने से एक दिन पहले रसिक ने इसी ग्राइंडर से अपने पार्ट को चोट पहुंचाई थी या फिर उसे काटने की कोशिश की। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या कोई इंसान खुद अपने साथ इतनी बर्बरता कर सकता है? क्या किसी ने उसके साथ यह भयानक बर्बरता तो नहीं की थी? पुलिस का दावा है कि उनके हाथ एक सीसीटीवी फुटेज तक लगा है जिसमें रसिक चौथी मंजिल से खुद की जान देने की तैयारी कर रहा था। लेकिन आखिर उन्होंने खुद अपनी जान क्यों दी या फिर उन्हें ऐसा करने पर मजबूर किया गया। जैसे-जैसे तफतीश आगे बढ़ती है, डॉक्टरों के पैनल द्वारा तैयार की गई पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने इस पूरे मामले में खौफनाक मोड़ ला दिया। यह महज ऊंचाई से गिरने का साधारण मामला नहीं दिख रहा था।
डॉक्टरों की रिपोर्ट के मुताबिक 26 सितंबर को हुए पोस्टमार्टम में जो कुछ सच बाहर सामने आया उसने हर किसी को सन करके रख दिया। नंबर एक सिर पर 14 टांके मृतक के सिर पर एक गहरा घाव पाया गया जिसे पहले ही सिला जा चुका था और उस पर 14 टांके लगे थे। निजी अंग पर बर्बरता है। रिपोर्ट में दर्ज है कि रस्सी के प्राइवेट पार्ट के मूल हिस्से पर सिला हुआ घाव था जिस पर पांच टांके लगे थे। यहां तक कि रिपोर्ट में निजी अंग के शरीर से अलग किए जाने का भी कहीं-कहीं जिक्र है। अंदरूनी चोटें और हेयर लाइन फ्रैक्चर सिर के पीछे ऑक्सिपिटल रीजन में फ्रैक्चर और अंदरूनी रक्त स्राव यानी हेमाटोमा ये पाया गया।
फटी हुई बाई तरफ की पांचवी से आठवीं तक की पसलियां जो है वो टूटी हुई थी। बाया फेफड़ा पूरी तरीके से फट चुका था और छाती के अंदर भारी मात्रा में खून जमा था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने साफ कर दिया कि अत्यधिक खून बहने के कारण रसिक की मौत हुई। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि मौत से 24 घंटे पहले ही शरीर पर सिलाई के टांके लगे थे तो उनका इलाज आश्रम के भीतर किस हालात में कराया जा रहा था? पोस्टमार्टम हाउस के बाहर रसिक दुलारी शरण की बूढ़ी मां लौंग बाई और उनकी बहनों का रो-रो कर बुरा हाल है। एमपी के जबलपुर से भागते-भागते वृंदावन पहुंचे परिवार का दर्द जब छलका तो आश्रम की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए। रसिक की बहनोई सोनू पटेल ने जो कुछ बातें बताई वह बेहद परेशान करने वाली है। सोनू पटेल के मुताबिक हादसे के बाद जब से शुक्रवार शाम 5:00 बजे आश्रम पहुंचे तो उन्हें बैठाकर रखा गया था रात के 9:00 बज गए।
लेकिन परिजनों को ना तो रसिक से मिलने दिया गया और ना ही सही जानकारी दी गई। उन्हें सीधे आश्रम बुला लिया गया। अस्पताल जाने से भी रोका गया। रसिक की मां लौंग बाय ने बिलखते हुए कहा कि 2 साल पहले बेटे से आखिरी बार बातचीत हुई थी। हम पहले भी मिलने आए थे लेकिन हमें मिलने नहीं दिया जाता। भगवान दोषियों के खिलाफ कारवाई करेंगे। परिवार का आरोप है कि जब से रसिक ने दीक्षा ली थी, आश्रम वाले परिवार को उससे मिलने तक नहीं देते थे। घंटों बैठाकर वापस लौटा दिया करते थे। अब सवाल यह है कि आखिर कौन था यह 25 साल का नौजवान? मूल रूप से जबलपुर का रहने वाले दीपक लोधी दो साल पहले सब कुछ छोड़कर वृंदावन आ चुके थे। उन्होंने प्रेमानंद जी महाराज से दीक्षा ली और अपना नाम बदलकर रसिक दुलारी शरण रख लिया। वो प्रेमानंद महाराज के साए की तरह रहा करते थे। अक्सर उनकी अपेक्षा और उनके वीडियोस जब भी प्रेमानंद महाराज के आते थे तो वह दिखाई देते थे।
दीपक धार्मिक प्रवृत्ति के लड़के थे। उन्होंने 3000 कि.मी. की कठिन नर्मदा परिक्रमा भी पूरी कर रखी थी। वे बिजली का काम अच्छी तरह से जानते थे। इसलिए आश्रम में उसे बिजली मेंटेनेंस की सेवा भी सौंपी गई थी। करीब 3 महीने पहले ही उन्होंने गुरु कृपा कुंज की चौथी मंजिल पर रहने के लिए कमरा भी उन्हें दिया गया था। जो लड़का नर्मदा परिक्रमा जैसी कठिन साधना कर चुका हो, जो भक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ रहा हो, वह अचानक खुद से अपनी जान देने की कोशिश क्यों करेगा? और वह भी इतनी दर्दनाक स्थिति में। मामले की संवेदनशीलता और शरीर पर मिले निशानों को देखते हुए पुलिस और फॉरेंसिक टीमों ने कई अहम कदम उठाए हैं। सीडीआर और मोबाइल जांच। रसिक का मोबाइल फोन कब्जे में लेकर फॉरेंसिक एक्सपर्ट के पास भेजा गया है।
पुलिस चैट, कॉल डिटेल्स और रिकॉर्ड को आखिरी बातचीत तक खंगाल रही है। देरी से सूचना देने पर भी सवाल हो रहे हैं। जब रसिक छत से गिरा और अस्पताल ले जाया गया तो पुलिस को सूचना खुद आश्रम ने क्यों नहीं दी? अस्पताल प्रबंधन की तरफ से पुलिस को खबर भेजी गई थी। पुलिस फिलहाल जो है वह मोबाइल डाटा, फॉरेंसिक लैब की रिपोर्ट और सीसीटीवी फुटेज का इंतजार कर रही है। वृंदावन की उस पावन भूमि पर जहां हर रोज लाखों लोग शांति और मोक्ष की आस में आते हैं। वहां एक 25 साल के साधक की ऐसी संदिग्ध मौत, कई गहरे जख्म और अनसुलझसे छ सवाल जो है वो छोड़कर गई है। क्या रसिक दुलारी शरण वाकई किसी गहरे अवसाद में था या फिर गुरु कृपाकिंच के इस बंद कमरे के अंदर कोई साजिश को अंजाम दिया गया जिसे दबाने की कोशिश की जा रही हो। क्या यह फिर उसे उसकी की गई? और सबसे बड़ा सवाल उस खूनी ग्राइंडर और सिलाए गए जख्मों के पीछे की असली हकीकत क्या है? पुलिस फिलहाल तफ्तीश कर रही है। परिजन न्याय की गुहार लगा रहे हैं और हर कोई जो है वो