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जिस सिंगर के गानों पर पूरी दुनिया झूमी उसी को इंडस्ट्री ने भुला दिया!

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जापान से लेके रशिया [संगीत] ऑस्ट्रेलिया से लेके अमेरिका क्या आई है मोहब्बत [हंसी] रंग आई हैम 80 और 90 के दशक में एक ऐसी आवाज ने भारतीय संगीत की दुनिया में कदम रखा हटा ले [संगीत] मेरा जिसने प्लेबैक सिंगिंग की परिभाषा ही बदल दी इश्क दी गली [संगीत] इश्क एक ऐसी आवाज जिसमें पारंपरिक सुरों से ज्यादा वेस्टर्न तड़का था और झिझक की जगह बेबाकी वो आवाज जिसे हिंदुस्तान की पहली पॉप दीवा कहा गया जिसका एक म्यूजिक एल्बम इतना बड़ा हिट हुआ कि उस दौर की सबसे बड़ी-बड़ी फिल्मों की कमाई ही पीछे छूट गई। अन गोरा [संगीत] हो या काला चांदी नहीं सोना नहीं कोई हीरा मेड इन इंडिया एक गाना नहीं एक आंदोलन था लेकिन क्या आप जानते हैं

जिस सिंगर की आवाज पर करोड़ों लोग झूमते थे उसी को एक ब्लॉकबस्टर गाने के लिए मामूली क्लर्क की सैलरी से भी कम पैसे दिए गए मान ले मेरा कहना दम पे दम क्या आप यकीन करेंगे कि करियर के पीक पर इस सिंगर ने इंडस्ट्री के सबसे बड़े संगीतकार पर गंभीर आरोप लगाकर एंड स्पिरिट पूरी फिल्म इंडस्ट्री को हिला दिया था तिका जरा जरा है रोशनी दोस्तों आज हम बात कर रहे हैं इंडियन पॉप की क्वीन अलीसा चिनॉय की 18 मार्च 1965 गुजरात के अहमदाबाद शहर में एक गुजराती परिवार में एक बच्ची का जन्म हुआ। घर में उसका नाम रखा गया सुजाता। यह कोई साधारण परिवार नहीं था। इस घर की सुबह भी शुरू होती थी सुरों से और रातें भी रियाज की आवाजों के बीच खत्म होती थी। यहां संगीत शौक नहीं विरासत था। इनके पिता मधुकर चिनोय एक प्रशिक्षित शास्त्री गायक थे।

राग बंदिश और अलाप इनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा थे। घर में अक्सर संगीत की महफिलें सजती थी। जहां सुरों पर चर्चा होती थी। भाई इनकी मां पियानो बजाने में निपुण थी। पश्चिमी संगीत की धुनें भी घर की हवा में घुली रहती थी। यानी एक तरफ हिंदुस्तानी शास्त्री संगीत की गहराई और दूसरी तरफ वेस्टर्न मेलोडी की आधुनिक रंग। शायद यही संगम आगे चलकर अलीसा की पहचान बना। बचपन से ही सुजाता के भीतर संगीत के प्रति अलग ही लगाव दिखाई देता था। वह सिर्फ गुनगुनाती नहीं थी बल्कि सुरों को समझने की कोशिश करती थी। कम लोग ही जानते होंगे कि आगे चलकर उन्होंने महान शास्त्री गायक पंडित जसराज से बाकायदा तालीम ली थी। यानी जिस सिंगर को दुनिया ने पॉप और डिस्को की आवाज के रूप में जाना उसकी जड़े शास्त्री संगीत की मजबूत नीव पर टिकी थी।

लेकिन सुजाता सिर्फ पारंपरिक रास्ते पर चलने वाली कलाकार नहीं थी। उनके भीतर कुछ अलग तरह की बेचैनी थी। [संगीत] भीड़ का हिस्सा बनने के बजाय अपनी अलग पहचान बनाने का सपना था। और शायद इसी सपने ने उन्हें आगे चलकर उन्हें सुजाता से अलीसा चिनॉय बना दिया। 1985 में पहला एल्बम बूम बूम आया। वो दौर नाजिया हसन का था। लेकिन अली [संगीत] ईशा की आवाज में अलग खनक थी। एल्बम हिट रहा और इसी ने बप्पी लहरी का ध्यान उनकी ओर खींचा। टार्जन माय टार्जन और फिल्मी सफर शुरू हो गया। टार्जन माय टार्जन। फिर 1987 में डांस डांस ऐसे [संगीत] मुझे मेरा मिस्टर इंडिया जलवा इंसाफ कांटे नहीं कटते श्रीदेवी का एक नीली साड़ी वाला यह आइकॉनिक सीन [संगीत] और पीछे अलीसा चिनोए की जादुई आवाज कोई नहीं है बस हो साथ कहने की तुमसे जो इस गाने ने साबित कर दिया कि वह सिर्फ डिस्को सिंगर नहीं बल्कि भावनाओं को आवाज देने वाली कलाकार मेरा कहना [संगीत] दम पे दम जा 90ज का दशक शुरू होते ही अलीसा चिनोय की आवाज एक अलग ऊंचाई पर पहुंच चुकी थी।

अब वो सिर्फ एक डिस्को सिंगर नहीं रही बल्कि एक बड़े म्यूजिक डायरेक्टर की पसंद बन चुकी थी। [संगीत] फिल्म त्रिदेव का रात भर जाम आएगा रात भर जाम से [संगीत] जाम टकराएगा जब से हो या फिर विजय पथ का रुक रुक कर रुक रुक रुक [संगीत] अरे बाबा रुक ओ माय डार्लिंग गिव मी अ लुक रुक रुक रुक अलीशा की आवाज में एक ऐसा आत्मविश्वास था जो उस दौर की दूसरी आवाजों से अलग सुनाई देता था। रुक-रुक कर अरे बाबा रुक यह गाना सिर्फ चारबस्टर नहीं था बल्कि यह 90ज की युवा पीढ़ी का डांस एंथम बन गया। शादी ब्याह स्कूल फंक्शन स्टेज शो जहां भी डांस होता वहां अलीसा की आवाज जरूर गूंजती। इसी दौर में सेक्सीी सेक्सीी जैसा बोल्ड गाना आया। नीली नीली आंखें मेरी मैं क्या करूं? तुझे [संगीत] बोले जिसने समाज और सेंसर बोर्ड दोनों को चौंका दिया। गाने के बोल बदले गए लेकिन अलीसा की बिंदास आवाज ने उसे यादगार बना दिया। उनकी खासियत यही थी कि वह गाना गाने को सिर्फ गाती नहीं थी बल्कि [संगीत] उसे एक स्टाइल देती थी। 90ज के दशक में जब ज्यादातर प्लेबैक सिंगिंग पारंपरिक अंदाज में हो रही थी। अलीसा ने अपने वेस्टर्न टेक्सचर, ग्लैमर और एटीट्यूड जोड़ दिया। दीवानी हुई [संगीत] मैं तेरी। यही वजह थी कि 90ज के मध्य तक वह सिर्फ फिल्मों की सिंगर नहीं रही बल्कि एक ट्रेंड बन चुकी थी। नया गाना उनके नाम के साथ एक अलग एक्साइटमेंट लेकर आता था। लेकिन जिंदगी तेजी से यह चमक बढ़ रही थी। उतनी ही तेजी से उनकी जिंदगी में एक ऐसा मोड़ आने वाला था। हिट्स की बारिश को अचानक रोक देने वाला था। साल 2018 में देश में मी टू मूवमेंट की लहर चल रही थी।

सोशल मीडिया पर एक के बाद एक महिलाएं अपने अनुभव को साझा कर रही थी और अचानक वही नाम फिर सुर्खियों में आ गया। अनू मलिक। सिंगर श्वेता पंडित ने खुलकर आरोप लगाया कि जब वह महज 15 साल की थी तब उनके साथ गलत व्यवहार किया गया। सोना महापात्रा ने भी गंभीर आरोप लगाए। पूरा देश सन रह गया। लेकिन अलीसा चिनो के लिए यह नया नहीं था। यह वही कहानी थी जो वह 23 साल पहले कह चुकी थी। 1995 में जब अलीशा ने आवाज उठाई थी तब ना Twitter था ना Instagram ना कोई डिजिटल सपोर्ट सिस्टम। तब सिर्फ अखबार थे और इंडस्ट्री की चुप्पी। उस दौर में किसी बड़े संगीतकार पर आरोप लगाना मतलब था अपने करियर पर खुद ताला लगा देना और वही हुआ। उन्हें झगड़ालू पब्लिसिटी सीकर और यहां तक कि मेंटली अनस्टेबल तक कहा गया। कई लोगों ने उनका साथ नहीं दिया। कई प्रोड्यूसर दूर हो गए। काम धीरे-धीरे खत्म हो गया। लेकिन 2018 में हालात बदल चुके थे। जब नई पीढ़ी सिंगर्स ने वही आरोप दोहराए तो लोगों को समझ आया कि अलीसा झूठ नहीं बोल रही थी। अलीसा ने एक इंटरव्यू में कहा जो कुछ आज लिखा और बोला जा रहा है वह सब सच है। मैं उन महिलाओं के साथ खड़ी हूं जिन्होंने आखिरकार हिम्मत दिखाई। उन्होंने यह भी कहा कि इंडस्ट्री में शक्ति संतुलन पुरुषों के पक्ष में रहा है और महिलाओं को अक्सर चुप रहने की सलाह दी जाती थी। इस बार फर्क यह था कि सोशल मीडिया का साथ था। लोगों की आवाज थी और सपोर्ट सिस्टम था। जनता के भारी विरोध के बाद अनु मलिक को इंडियन आइडल के जज पद से हटाना पड़ा। लेकिन यह जीत 23 साल देर से आई।

क्योंकि जब उन्होंने पहली बार आवाज उठाई थी तब उन्हें अपनी कीमत चुकानी पड़ी थी। अपने करियर से और शायद यही वजह है कि अलीशा चिनोए सिर्फ एक पॉप सिंगर नहीं बल्कि एक ऐसी महिला बन गई जिसने उस दौर में सच बोलने की हिम्मत दिखाई जब सच बोलना सबसे बड़ा जोखिम था। 1995 में बिदु के साथ एल्बम मेड इन इंडिया मिलिन सोमन वाला वीडियो अलीिशा का शाही अंदाज 50 लाख से ज्यादा कॉपियां बिकी। ये प्यार [संगीत] दिल सिर्फ एल्बम नहीं था इंडियन पॉप की घोषणा थी अलीशा बन गई क्वीन ऑफ इंडिपॉप साल 2005 में फिल्म बंटी बबली स्क्रीन पर थे अमिताभ बच्चन अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय और पीछे अलीशा चिनोय की आवाज कजरारे कजरारे चैन वैन सब उजड़ा [संगीत] जालिम नजर हटा यह गाना रिलीज होते ही सदी का सबसे बड़ा आइटम नंबर बन गया। [संगीत] सदियों से लेकर क्लब तक, शादियों से लेकर क्लब तक, रेडियो से लेकर टीवी चैनलों तक हर जगह सिर्फ कजरारे बज रहा था। इस गाने ने फिल्म को नई ऊंचाई दी। अलीसा को मिला फिल्म फेयर अवार्ड फॉर बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर। लेकिन इस चमक के पीछे एक चुभने वाली सच्चाई छिपी थी। 15,000 का चेक रिपोर्ट्स के मुताबिक जिन गानों ने करोड़ों का कारोबार किया, जिन जिस गाने ने टिकट खिड़की पर लंबी कतारें लगवा दी, उसी गाने के लिए अलीशा को फीस के तौर पर मिला सिर्फ ₹15,000 का चेक। जी हां, सिर्फ ₹15,000। जब अलीशा के पास यह चेक पहुंचा, लगा शायद कोई गलती हुई है। उन्होंने चेक वापस भेज दिया। सोचा इतनी बड़ी फिल्म, इतना बड़ा गाना, यह रकम तो मजाक है। लेकिन कुछ दिनों बाद वही चेक दोबारा उनके पास आ गया। अब यह सिर्फ पैसों का मामला नहीं था। यह इज्जत का सवाल था। अलीशा ने एक इंटरव्यू में कहा था कि उन्हें इस बात से गहरा धक्का लगा था। उन्हें महसूस हुआ कि सिंगर को सिर्फ आवाज समझा जाता है।

उनकी मेहनत और योगदान को उतना महत्व नहीं दिया जाता जितना स्क्रीन पर दिखने वाले चेहरों को रोया जाता है। मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। बताया जाता है कि अगर कोई कॉन्सर्ट में कजरारे गाना गाना चाहता है तो उस गाने की रॉयल्टी प्रोडक्शन हाउस को दी जाती है। लेकिन सिंगर यानी अलीसा चुनो को उसमें कुछ नहीं मिलता। इससे अलीसा और भी आहत हुई। उनका मानना था कि अगर गाना उनकी आवाज से हिट हुआ है तो सिंगर का भी बराबर का हक होना चाहिए। उन्होंने यहां तक कहा कि कजरारे मेरी आवाज की वजह से सुपरहिट है। स्क्रीन पर जो दिख रहा है वह तो सिर्फ लिप्सिंग है। यह बयान इंडस्ट्री में भूचाल ले आया। कुछ लोगों ने इसे ओवर रिएक्शन कहा। कुछ ने इसे हिम्मत लेकिन इस घटना ने अलीसा को अंदर तक तोड़ दिया और यही उन्होंने फैसला लिया। फिल्मों में गाना उनके लिए प्राथमिकता नहीं रहेगा। क्या कजरारे सिर्फ एक आइटम सॉन्ग था या वह ऐसा मोड़ था जिसने अलीसा को बॉलीवुड से और दूर कर दिया क्योंकि कभी-कभी सबसे बड़ी तालियां भी सबसे गहरी चुप्पी की शुरुआत होती हैं। चुनाव लाइमलाइट से दूर है। लेकिन उनकी आवाज आज भी 80 और 90 के दशक की यादों में गूंजती है। उन्होंने समझौता नहीं किया। अपनी शर्तों पर जिया। शायद यही वजह थी कि वह सिर्फ एक सिंगर नहीं एक दौर की पहचान बन गई। क्या इंडस्ट्री ने अलीशा चिनो के साथ सही किया? अपनी राय कमेंट में बताएं और चैनल को सब्सक्राइब करें। धन्यवाद।

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