पूरा इतना मोटा लेके आते हैं साइन करने को पर उसकी कॉपी एक्टर को नहीं देते हैं। वह अपने पास रखते हैं। आप ध्यान रखिएगा कि आपके सेट पे क्या हो रहा है। क्या-क्या प्रॉब्लम्स आती है एक्टर्स को जब डील कर रहे हैं आज 16 घंटे की बात होती है शिप की। कभी पैसे के 90 डेज की बात आती है। कुछ सीनियर एक्टर ट्वीट भी करते हैं। पोस्ट भी डालते हैं। मगर एज अ सेंटर प्रेसिडेंट आपके सामने किस तरह की कंप्लेंट आती है?
यह आपने मुझे जो सवाल पूछे हैं एज एन एक्टर मैंने 40 इयर्स काम किया है, टेलीविजन भी की है, फिल्म्स भी की है। बट हमने कभी रियलाइज नहीं किया था कि इतना सीरियस और प्रॉब्लम है। सिंटा में आने के बाद एहसास हुआ कि ये प्रॉब्लम टेलीविज़ में ऑफ कोर्स बहुत ज्यादा है। फिल्मों में फिर भी कम है। है कई जगह है। और यह जो डेली अह एक्टर्स हैं जो वन डे, टू डे, थ्री डे काम करते हैं, उनको और ज्यादा दिक्कत होती है। क्योंकि जो बहुत सीनियर एक्टर्स हैं वह तो अपने कॉन्ट्रैक्ट बनवा लेते हैं। उस पे टाइमली पेमेंट्स का स्केेड्यूल लिखा होता है और अपने वर्किंग आवर्स भी लिख लेते हैं कि हम इतने ही घंटे काम करेंगे।
तो सिंटा में आने के बाद मैंने रियलाइज किया कि हमारे जो बाकी एक्टर्स हैं वो कितने हैं और कितनी उनको तकलीफ है बिकॉज़ उनको करोड़ों रुपए नहीं मिल रहे हैं। उनको पैसे भी कम मिल रहे हैं। पेमेंट्स हैव बिकम वेरी लेस। जो आई थिंक इतने साल पहले थी 8 साल 10 साल पहले आप देखिए कीमतें कितनी बढ़ गई है हर चीज की। बट पेमेंट अभी भी ऑलमोस्ट उतनी है एक्टर्स की। तो जब से मैंने मिलना शुरू किया हमारे एक्टर्स को और उनकी बातें समझी और बहुत कोशिश की कि हम बेस्ट स्यूशन क्या दे सकते हैं इसमें तो हम पहली मुलाकात मेरी हुई थी आईएनबी मिनिस्टर साहब से अश्विनी वैष्णो जी से और उनको हमने रिप्रेजेंटेशन दिया। फिर इधर मुंबई में आके हमने हमारे अह फुनकर साहब हैं।
हमारे लेबर मिनिस्टर जो महाराष्ट्र के हैं उनसे मुलाकात की। और फिर प्रिंसिपल सेक्रेटरी जो यहां की है उनसे कुंदन मैडम है उनसे बात की। फिर हमने लेबर कमिश्नर से बात की। फिर हमने लेबर मिनिस्टर से बात की। फिर हमने दिल्ली जाके मनसुख मांडविया जी से बात की। हम पिछले एक डेढ़ साल से लगातार हमारे जो एक्टर्स की पीड़ा है वो अथॉरिटीज तक पहुंचाने की कोशिश की हमने। क्योंकि एक चीज हमने रियलाइज किया।
सब लोग समझते हैं फिल्म वाले उनको क्या प्रॉब्लम है? वो तो सब चकाचौंध दुनिया है। बट द फैक्ट इज़ चकाचौंध हैं बट बहुत बहुत कम नंबर है। बहुत कम रिस्ट्रिक्टेड नंबर है। टेलीविज़ के भी टॉप स्टार्स हैं। उनको आई एम श्योर ये दिक्कत नहीं होती है। और फिल्म के भी टॉप स्टार्स हैं। बट ये जब प्रॉब्लम मुझे याद है जब हम मानवीय साहब से दिल्ली में मिले। उनको हमने पहली बार समझाया कि हमारी इंडस्ट्री में अभी प्रोड्यूसर डायरेक्टली तो किसी को कास्ट नहीं करता है। कास्टिंग डायरेक्टर्स हैं।
कास्टिंग डायरेक्टर्स के बाद आगे एक न्यू स्टेप ऐड हुआ है जो मुझे पता चला है। पिछले कुछ सालों में ही हुआ है। कोऑर्डिनेटर्स नाउ कोऑर्डिनेटर्स आई हैव स्टिल नॉट अंडरस्टुड दैट कि उनको एंप्लॉय किया जाता है। उनको रिस्पांसिबिलिटी दी जाती है। ये मुझे अभी तक नहीं समझ आई है। बट जहां तक ये बात समझ आई कि वो बहुत एक हेफ्टी अमाउंट हेफ्टी अमाउंट एक्टर से लेते हैं। सपोज एक एक्टर की 3000 दिन की पर डे की फिक्स हुई है फी व्हिच इज हार्डली एनीथिंग। बिकॉज़ याद रखिए ये जो एक्टर्स हैं जो तीन 4000 जिनको दे रहे हैं ये लोग वो पूरे महीने में चार दिन काम कर ले तो उनके लिए मतलब अच्छी बात है।
पांच दिन कर ले तो वाहवा वाली बात है। उससे ये लोग 25% 30% सुने उससे भी ज्यादा कई बार लेते हैं। और ये बातें मुझे सही नहीं लगी क्योंकि मुझे लगता है कि कई बार प्रोड्यूसर्स को शायद पता भी नहीं हो इसके बारे में। एंड प्रोड्यूसर्स ही हमारे एक्टर्स के आई वुड से उनको रोजीरोटी देने वाले हैं। उनके बेनिफेक्टर्स हैं। सो वी कैन नॉट से एनीथिंग अगेंस्ट द प्रोड्यूसर्स अदर देन आधी चीजें उनको शायद पता ही नहीं है। तो मुझे यह बात काफी हैरानगी हुई कि प्रोड्यूसर्स तो आजकल सेट पे जाते ही नहीं है। उनको पता भी नहीं क्या हो रहा है। और यह भी हमें पता चला है कि जो ईपीस भी काम करते हैं वो भी अलग से कास्टिंग कर रहे हैं। वो भी परसेंटेज ले रहे हैं तो नुकसान होता है एक्टर का। एंड हियर आई एम टॉकिंग अबाउट एक्टर्स जो मिनिमल वेजेस पे भी काम कर रहे हैं। अच्छा दूसरी बड़ी बात है 90 दिन के बाद पैसे मिलेंगे। हाउ कैन अ मैन सर्वाइव? कि आपको महीने के 15 2000 अगर मिलने भी वाले हैं और वो 90 दिन के बाद मिलेंगे।
उनके बच्चे हैं, उनकी फैमिली है, उनका रेंटल है, उनकी बिजली है, खाना पीना कितनी चीजें होती हैं। आप सोचिए कैसे वो लोग गुजारा करेंगे? तो यह लिटरली हमारा तो दिल एक्चुअली बैठ गया था ये सब जान के। तो दैट इज व्हाई हम इतनी कोशिश कर रहे थे कि हम जिस तरीके से हो सके। तीसरा इशू ये था कि शिफ्ट आवर्स पहले होता था हमारे टाइम में 8 घंटे की शिफ्ट होती थी। और 8 घंटे से 9 10 घंटे एकआध घंटा सब कर लेते थे। यू नो अंडरस्टैंडिंग में कि चलो एक घंटा डिले हो गया शूटिंग। बट जब 8 घंटे का 12 घंटे नॉर्मलाइज हो गया। फिर 12 घंटे का 14 घंटा, 16 घंटा, 18 घंटा। कुछ केसेस हमारे पास ऐसे भी आए हैं जो बोले हमने अराउंड द क्लॉक 24 घंटे शूट किया है। तो यू नो दीज़ थिंग्स आई डोंट थिंक एनी पर्सन शुड बी सब्जेक्टेड टू दैट। पैसे नहीं मिल रहे हैं। आप 24 घंटे काम कर रहे हैं।
फिर आपकी शूटिंग हो रही है। कहीं फार जगह पे नागांव इज़ बिकम अ न्यू हब फॉर शूटिंग। मीराबाई अंदर में हो रही है। तो जो मुंबई में नहीं रहते उनको शायद नहीं मालूम हो। ये लोकेशनेशंस ढाई से 3 घंटा 4 घंटा भी ट्रैफिक में कई बार होती हैं। तो आप सोचिए तीन-चार घंटे जाना तीन-चार घंटे आना कितना मुश्किल हो जाता है एक्टर के लिए। कन्वेंस तो दे नहीं रहे उनको। अच्छा उनको कन्वेंस बंद हो गई है। कब से हुई पता नहीं। हमारे टाइम में हम स्टार्स तक को जिनको अच्छा खासा पैसा मिलता था हमें भी पैसे दिए जाते थे। हम ये सोचते थे उससे हम चलो ड्राइवर को दे देते हैं। उसका एक्स्ट्रा हो जाएगा। सो वी यूज्ड टू लुक एट इज़ नॉट एज आवर कन्वीनियंस। तो ड्राइवर को दे रहे हैं पैसा। उस टाइम पे शायद 4500 600 था। अभी कुछ भी नहीं दे रहे फॉर एक्टर्स हु आर नॉट इवन अर्निंग दैट काइंड ऑफ़ मनी। उनके पास अपनी ट्रांसपोर्ट भी नहीं है। कई बार रात को 1:00 बजे 1:30 बजे 2:00 बजे पैकअप होता है। तो वो अपने घर कैसे वापस जाएंगे? और ज्यादातर ये होता है फिर उनको अगले दिन फिर से 7 8:00 बजे बुलाया जाता है मॉर्निंग शिफ्ट पे। सो यू नो इट्स अ वेरी स्केरी सिचुएशन। तो बहुत हमें इच्छा है कि जितना हम कर सके अपने मेंबर्स के लिए। सो द गुड पार्ट इज कि अभी पहली बार जहां तक मैं जानती हूं ऑडियो विजुअल वर्कर को एक कैटेगरी गिना गया है।
क्योंकि जब पहली बार मैं प्रिंसिपल सेक्रेटरी मैडम से मिलने गई थी हम एक डेढ़ घंटा बात करते रही तो वो बोली आप लोगों को मैं किस कैटेगरी में डालूं क्योंकि लेबर में एंप्लयर एंड एंप्लई का रिलेशनशिप इस्टैब्लिश करना जरूरी है। पर आप लोगों की तो का एंप्लयर तो चेंज करता रहता है। एक दिन ये एंप्लयर है, कल वो एंप्लयर है, परसों वो एंप्लॉयर है। तो ये कैसे इस्टैब्लिश करें? फिर उन्होंने बहुत कोशिश की कि शॉप एंड इस्टैब्लिशमेंट में हम आपको डालें। हम आपको गिग वर्कर में डालें। हम आपको किस में सो यू नो दे ट्राइड देयर बेस्ट टू हेल्प अस एंड पुट अस इन अ कैटेगरी जो हमारी प्रॉब्लम सॉल्व हो सके। फिर वी वर लकी कि न्यू लेबर कोर्ट्स जब हमारी गवर्नमेंट ने निकाले उसमें ऑडियो विजुअल वर्कर के लिए कैटेगरी रिकॉग्नाइज की गई। सो वी वर सो हैप्पी कि हमारी इतनी मेहनत और 10 चक्कर इधर से उधर का कुछ तो फायदा हुआ और ऑडियो विजुअल कैटेगरी में अब कुछ प्रावधान रखे हैं और फिर भी उन्होंने काफी कोशिश की है समझने की कि हमारे सी हर इंडस्ट्री की दिक्कतें अलग होती हैं। जैसे हमें जो जनरल ये मतलब प्रिंसिपल सेक्रेटरी मैडम और उनके एडिशनल सेक्रेटरी और वेरियस कमिश्नर्स जो हैं उन्होंने हमें समझाया कि आप एक इंडस्ट्री है। हमारे पास थाउजेंड्स ऑफ इंडस्ट्रीज कम टू अस।
दे सेड आप बिल्डर्स तो चलो बड़े लोग हैं। फिर हो सकता है क्या बोलते हैं? प्लंबर्स की हो सकती है। दे सेड बाबर्स तक की लेबर यूनियन है जो हमारे पास आती है। सो दे हैव टू लुक आफ्टर एव्री यूनियन और सबके प्रॉब्लम्स अलग है। हमारी इंडस्ट्री के जो प्रॉब्लम्स हैं वी हैव टाइम एंड अगेन गॉन टू देम टू एक्सप्लेन दोज़ प्रॉब्लम्स। और अभी रिसेंटली अबाउट अ वीक 10 डेज एगो वाज़ आवर लास्ट मीटिंग एट द कामगार भवन जो लेबर कमिश्नर का ऑफिस है। वहां पे सारे कमिश्नर्स भी थे और प्रिंसिपल सेक्रेटरी मैडम भी थी। उन्होंने बहुत ध्यान से हमारे प्रॉब्लम सुने और उन्होंने बोला ये जो आप कोऑर्डिनेटर्स बोल रहे हैं ना ये तो और किसी फील्ड में है ही नहीं। तो आपकी ये जो प्रॉब्लम है हमें अलग से इसको एड्रेस भी करना पड़ेगा। तो हमें किसी को रिस्पांसिबल रखना पड़ेगा पेमेंट के लिए क्योंकि हमारे नीरज जी ज्यादातर एक्टर्स को कैसे काम मिलता है?
रात को 10 10:30 बजे फोन आता है। कहते हैं तुम कल फ्री हो? हां बोलेंगे हां हम फ्री हैं। अच्छा तुम यहां पहुंच जाना। एक अपना काला कोट ले आना या एक वाइट शर्ट ले आना या जो रोल है या एक कुर्ता ले आना। आपको पंडित करना है या आपको एक लॉयर बनना है तो ये ले आना। एक दिन का काम है। उनको पता भी नहीं किसकी शूटिंग है। सो वो बोलते हैं अच्छा हम पहुंच जाएंगे। तुम 7:00 बजे आ जाना वहां पे। अब कौन प्रोड्यूसर है? पैसे वो WhatsApp पे बोल देते हैं। ये बजट है इतना परसेंटेज होगा जो भी है वो बात करके। दे रीच देयर। दो सिनेरियोस होते हैं। एक तो शूटिंग हो रही है और पैसे उनको नहीं मिल रहे हैं उसके बाद। बट कोऑर्डिनेटर ने बोला है मेरा कट तो तुम पहले दो भाई। मैंने आपको काम दे दिया। तो ये सुना है कि कई कोऑर्डिनेटर्स पहले मांग लेते हैं पैसे और दूसरी चीज ये है कि उनको अपने प्रोड्यूसर के साथ कोई कॉन्ट्रैक्ट बनाने का टाइम ही नहीं मिलता है। अब रात को उनको 10 11:00 बजे बोला है कल आप आ जाना वहां पे। तो कौन प्रोड्यूसर है यही नहीं जब पता है प्रोडक्शन का नाम नहीं पता है तो वो पहुंच जाते हैं काम के लिए। बट देयर इज़ नो रिटन कॉन्ट्रैक्ट। नथिंग कि जो लीगल उनको हम मदद कर सकें। जब हमारे पास एक्टर्स आते हैं।
तो हम बोलते हैं आपके पास कुछ लिखत में है। बोले नहीं हमारे पास कोई कॉन्ट्रैक्ट नाम की तो चीज है ही नहीं। तो एक सिंटा की ये भी बहुत पुरानी डिमांड ये है कि आप एक सिंपल सा वन पेज कॉन्ट्रैक्ट बनाइए कि ये एक्टर आया है। उसने इतने बजे काम किया है। और इतनी उसकी रिमुनरेशन है। उसमें और कोई कंडीशंस नहीं होंगी। हां। पर हमने इनफैक्ट एक सिंटा डायरी बहुत साल हमारे आने से पहले एक सिंटा डायरी करके निकाली गई थी। उसमें एक सिस्टम था कि आप जिस शूटिंग पे जाते हैं आप टाइम इन लिख दीजिए वहां पे और टाइम आउट लिख दीजिए और जो वहां के प्रोडक्शन कंट्रोलर है या ईपी है उनसे आप साइन ले लीजिए। वो भी नहीं करा पाते हमारे एक्टर्स क्योंकि वो नहीं करते हैं कई बार। सो दीज़ थिंग्स आर रियल रियल चैलेंजेस। आपसे मैं ये पूछना चाहूंगा एक बार दीपिका वाल ने इस विषय उठाया था मदर उनको फिल्म से निकाल दिया गया उसप कोई ऐसी कारवाई सेंटर की तरफ से कोई एक्शन आप लोगों ने सोचा या कोई कनेक्ट हुआ तो उसप ऐसा सी हम सुमोटो अपने आप इस तरह के एक्शन नहीं ले सकते हैं अनलेस आर्टिस्ट इनवॉल्व्स अस राइट हमारे सिंटा मेंबर्स हमें इनवॉल्व करें जो एक्टर्स हमारे पास आते हैं हम उनका जितना हो सके बेस्ट सशनढूंढते हैं।
अभी आज हमारे काफी वेल नोन एक्टर हैं। ही इज़ क्वाइट अ सीनियर एक्टर वेल नोन। उनकी पेमेंट कुछ 2530 लाख पेमेंट अटकी हुई है। और जहां हमें पता चला जिस दिन वो 24 तारीख को उनसे बात हुई थी। टिकट वगैरह कितने बजे की है जाने की है। एंड द नहीं 23 को बात हुई थी। 24 को ही वास सपोज टू लीव। और नाम बताना चाहेंगे? नहीं, आई थिंक वह उसकी इट इज़ हज़ प्राइवेट स्टोरी। एंड ही वाज़ टोल्ड दैट ही डज़ंट नीड टू कम एंड ही इज़ बीइंग रिप्लेस्ड। रिप्लेस विदाउट अ एनओसी।
दैट इज़ आवर डिमांड। कि आप एक्टर को रिप्लेस कर रहे हैं पर नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट तो लीजिए एक्टर से। और क्यों निकाल रहे हैं? रीज़न तो दीजिए। आपकी एक दिन पहले तक बात हुई है कि आप इतने बजे जाना है, यह फ्लाइट है, सब बातें हो गई हैं। और एज यूजुअल एक्टर्स के पास कॉन्ट्रैक्ट होते नहीं है। क्योंकि मैंने भी तीन चार सीरीज किए हैं। मैंने ओटीटी भी किया है। वो पूरा इतना मोटा लेके आते हैं साइन करने को। पर उसकी कॉपी एक्टर को नहीं देते हैं। वो अपने पास रखते हैं।
आपने ये सरकार से मिलके, मंत्रालय में मिलके सब जो कोशिश आप कर रहे हैं इट इज़ वेरी गुड फॉर एक्टर। मगर विद इन इंडस्ट्री कभी कोशिश नहीं कि प्रोड्यूसर बॉडी से बात करके या वो एक रास्ता निकाले जो सीनियर को इतनी दिक्कत नहीं आती जैसा आप बोल भी रहे हैं जो जूनियर एक्टर हैं जो अपनी लड़ाई नहीं लड़ते दो दिन का काम करते हैं उनको ये प्रॉब्लम ना फेस करनी पड़े तो वही तो हम आपको बोल रहे हैं दो ढाई साल से हम यही कर रहे हैं। हमने प्रोड्यूसर्स इंपा से भी मीटिंग की है। हमने वेस्टर्न इंडिया उनसे भी बात की है विपा से और हम आईएफटीपी से भी मतलब मजीटिया जी से हमने अलग से बात की है। एक जॉइंट मीटिंग नहीं की है। हम हर तरफ से कोशिश कर रहे हैं।
बिकॉज़ जब तक प्रोड्यूसर सी वी डोंट वांट टू मेक लाइफ डिफिकल्ट फॉर प्रोड्यूसर बिकॉज़ ही इज आवर सोर्स ऑफ़ इनकम फॉर आवर एक्टर्स। सो हम उनको नहीं कह रहे बट मुझे लगता है इतने इन बिटवीन लोग आते हैं कि कई बार प्रोड्यूसर को पता ही नहीं है ये सब हो रहा है। ही इज बिजी विद द लार्जर पिक्चर राइट डे टू डे उनको एक्सप्लॉयटेशन किधर हो रही है कई बार उनको भी नहीं पता है सो आई वुड से कि रिस्पांसिबिलिटी जो आदमी लेता हैज़ टू बी द प्रोड्यूसर ही शुड नो कि क्या हो रहा है अंडर हिज़ मुझे तो हैरानी हो रही है जैसे