दोस्तों पेड़ लगाते आखिरकार ऐसा क्या सीन हुआ कि पीएम मोदी का अति भयंकर मजाक बन गया और इतना मजाक बना कि पीएम मोदी को जिनकी गारंटी की मिसाल देते हैं बीजेपी के नेता उन पीएम मोदी को अपनी पोस्ट डिलीट करनी पड़ती है मजाक से बचने के लिए लेकिन तब तक तो रायता फैल चुका था और ऐसा रायता फैला कि जिन पीएम मोदी को हाल फिलहाल सेशल्स की सरकार ने द्वीपीय देश सेशर्स की सरकार ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर पर्यावरण के लिए काम करने को लेकर अवार्ड दिया था।
उनका पर्यावरण वाला ज्ञान, खेतीबाड़ी वाला ज्ञान, पेड़-पौधे वाला ज्ञान पूरी तरह एक्सपोज हो गया और इतना एक्सपोज हुआ कि विपक्षी नेताओं ने मजाक उड़ाने की हद कर दी। उसके बाद पीएम मोदी ने पोस्ट डिलीट कर दी। पूरी कहानी सिलसिलेवार तरीके से आपको बताते हैं। पीएम मोदी राजस्थान में रिफाइनरी का उद्घाटन करने गए थे। वहां पर वो पेड़ लगाते हैं और इस पेड़ को लेकर पीएम मोदी क्या बोलते हैं बयान भी आपको सुनाएंगे और तमाम विपक्षी नेताओं का रिएक्शन भी आपको दिखाएंगे कि राजस्थान से लेकर दिल्ली तक क्यों मजाक बन गया है ये आप देखिए।
यहां आप देख रहे हैं कि केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी भी मौजूद हैं। राजस्थान के मुख्यमंत्री रिफाइनरी से जुड़े बड़े अधिकारी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां वृक्षारोपण किया है। और बालोत्रा जो साल 2023 में पीएम मोदी ने बालोतरा में वृक्षारोपण किया और पीएम मोदी ने लगाया पीपल का पेड़। उसके बाद क्या बोलते हैं अपने बयान में? पीएम मोदी क्या कहते हैं पीपल के पेड़ को? जरा सुनिए। साथियों, आज विकास परियोजनाओं के लोकार्पण शिलान्यास के साथ ही मुझे यहां एक पैड मां के नाम खेजड़ी का पौधा लगाने का सौभाग्य भी मिला।
मैं जानता हूं कि राजस्थान में खेजड़ी का कितना महत्व है। बढ़ते रेगिस्तान को रोकने में इसकी बहुत सार्थक भूमिका रही। इसलिए यह वृक्षारोपण हमारी कार्य संस्कृति का उदाहरण भी है। तो पीपल का पेड़ लगाने के बाद पीएम मोदी भाषण में बोलते हैं कि मैंने खेजड़ी का पौधा लगाया और बार-बार इस बात को दोहराया कि खेजड़ी का क्या महत्व होता है ।
राजस्थान में वह मैं जानता हूं। इसीलिए मैंने खेजड़ी का पौधा लगाया है। खेजड़ी को कहीं जाट ही कहा जाता है। और खेजड़ी की तस्वीर आप देख सकते हैं स्क्रीन पर। यह होती है खेजड़ी। वहीं पीएम मोदी ने कौन सा पौधा लगाया? पीएम मोदी की तस्वीर भी आप देख सकते हैं। तो पीपल का पेड़ लगाया पीएम मोदी ने। पीपल का पेड़ कोई ऐसा पेड़ भी नहीं है जिसे आम जनता जानती ना हो। गांव देहात में जो लोग रहते हैं और पीएम मोदी की तरह जो पहाड़ों में रहकर आए हैं, तपस्या करके आए हैं, उन्हें तो पक्का पता होना चाहिए।
लेकिन पीएम मोदी पीपल के पेड़ को बार-बार खेजड़ी का पौधा बताते हैं। बार-बार पीपल को खेजड़ी का पौधा बताना इस बात को दिखाता है कि पीएम मोदी को शायद ज्ञान ही नहीं है। अब इसे लेकर मजाक बन गया क्योंकि पीएम मोदी ने अपने भाषण में जो बात बोली वो बात पर भी पोस्ट कर दी। तो राजस्थान से लेकर दिल्ली तक मजाक बन गया। तस्वीर आप देख सकते हैं। यह पीएम मोदी ने तस्वीरें शेयर की अपने एक्स अकाउंट पर यानी Twitter पर और लिखा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रयास हम सभी का दायित्व है।
आज बालोतरा के पचपद्रा में एक पेड़ मां के नाम अभियान में खेजड़ी का पौधा लगाने का सौभाग्य मिला। यह तस्वीर आप देख सकते हैं। यह पीपल का पेड़ आपको दिखाई दे रहा है। यानी पीएम मोदी ने अपने भाषण में जो बात बोली उसे एक्स Twitter पर भी पोस्ट कर दिया गया। शुरुआत में मुझे लगा था कि यार एक्स पर तो हो सकता है टीम से गलती हो गई हो क्योंकि एक्स पीएम मोदी खुद तो चलाते नहीं होंगे तो हो सकता है टीम से मिस्टेक हो गई हो ।
लेकिन भाषण में जब पीएम मोदी ने बार-बार इस बात को दोहराया तो वहां पर भी गलती की दो गुंजाइश होती है या तो पीएम मोदी को ज्ञान नहीं है या सामने जो टीपी लगा है टैली प्र्टर जो लगा है उसमें गलत लिख दिया गया तो स्क्रिप्ट लिखने वाले ने गलती कर दी लेकिन पीएम मोदी को अगर ज्ञान होता तो खुद पौधा लगाकर आए थे खुद पेड़ लगाकर कर आए थे। तो जब खुद अपनी आंखों से देख लिया तो वहां पर पीएम मोदी खेजड़ी की बजाय पीपल बोल सकते थे। तो यह पूरा मामला दिखाता है कि खुद पीएम मोदी को भी खेजड़ी और पीपल के बीच का फर्क पता नहीं है।
खेजड़ी कोई ऐसा पौधा या पेड़ भी नहीं है जिसे आम जनता ना जानती हो। कहीं पर जा कहा जाता है, कहीं पर खेजड़ी कहा जाता है। कहीं कोई और नाम दिया जाता है। राजस्थान में, रेगिस्तानी इलाकों में और पहाड़ों में खूब पाई जाती है। गुजरात में भी खूब पाई जाती है। तो पीएम मोदी को तो पक्का पता होना चाहिए और वह तो तपस्या करके आए हैं। इसे लेकर विपक्षी नेता तंज कसते हैं। मजाक बनाते हैं। जब पीएम मोदी ने एक्स पर यह पोस्ट किया। मजाक बनने के बाद इस पोस्ट को डिलीट भी कर दिया गया।
लेकिन उससे पहले रायता फैल चुका था। हनुमान बेनीवाल कहते हैं। मैं प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी से पूछना चाहता हूं कि आज आप राजस्थान के पचपदरा आए वृक्षारोपण भी किया। क्या आपकी सरकार ने खेजड़ी की नई किस्म का आविष्कार किया है? या फिर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने पीपल को खेजड़ी बताकर आपसे पौधारोपण करवा दिया। यानी पीएम मोदी के साथ-साथ भजन लाल शर्मा का भी मजाक उड़ाते हैं हनुमान बेनीवाल।
वहीं इस पूरे मामले को लेकर जो राजस्थान में नेता विपक्ष है टीकाराम झुली वो क्या कहते हैं? पहले लोकसभा चुनाव में बाड़मेर के उंडू कश्मीर लोक देवता बाबा रामदेव जी का जन्म स्थान को सीधे जम्मू कश्मीर पहुंचा दिया और आज पचपद्रा में साक्षात पीपल लगाकर उसे खेजड़ी बता दिया। तस्वीर गवाह है कि महामानव की पीआर टीम को राजस्थान के भूगोल और संस्कृति की कतई समझ नहीं है। खैर गलती टीम की भी नहीं है। जैसा झूठ ऊपर परोसा जा रहा है वैसे ही यहां की पर्ची सरकार भी दिल्ली को मिसगाइड कर रही है कि राजस्थान में बहुत जोरदार काम हो रहा है। जबकि जमीनी सच्चाई में खेजड़ी और पीपल जैसा ही अंतर है। इसके बाद पप्पू यादव क्या कहते हैं?
पप्पू यादव कहते हैं देखिए हिंदू और सनातन के स्वयंभू चैंपियन पीपल और खेजड़ी के पौधा में फर्क नहीं कर पाते। गिरिराज जी राहुल जी पर तो अशोभनीय टिप्पणी करते हो। अपने नेता को पीपल के पौधे की पहचान कराओ। वैसे कैसे हिंदू जो पीपल को ना पहचानते? तो हिंदू धर्म में पीपल की पूजा की जाती है और पीएम मोदी नहीं पहचान पाए तो पप्पू यादव सवाल उठा रहे हैं। बीजेपी वाले अंदाज में ही जवाब दे रहे हैं। लक्ष्मण गोदारा क्या कहते हैं? जिनको पीपल और खेजड़ी में अंतर नहीं पता वह राजस्थान में खेजड़ी संरक्षण कानून बनाएंगे क्या? इसके बाद यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष उदयभानु चिप कहते हैं हमारे गुरु घंटाल अक्सर इतिहास और भूगोल की कॉलर पकड़ लिया करते हैं। लेकिन आज इनके ह्थे वनस्पति विज्ञान चढ़ गया। एक खास वनस्पति का दिमाग पर ऐसा रंग चढ़ा कि गुरु घंटाल ने पीपल का नाम ही खेजड़ी रख दिया है।
खबरदार अगर किसी ने इनको बैल बुद्धि कहा तो इसके बाद उदयभानुची कहते हैं कई साल जंगल में बिताने और भारतीय संस्कृति की रक्षा के दावे करने वाले मोगली जी पीपल के पौधे को खेजड़ी बता रहे हैं। यह आग भी ऊपर से नीचे तक फर्जी है। इसके दस्तावेज फर्जी, इसके दावे फर्जी, इसकी डिग्री फर्जी, इसका विकास मॉडल फर्जी। जो कहानियां बेचता आया है देश को वह सब की सब फर्जी। टोपीबाज शब्द इसके आगे पानी भरता है। तो उदयभानु चिप सवाल उठाते हैं कि जब तपस्या की है पहाड़ों में, वन में तो पीपल और खेजड़ी का अंतर तो पता होना चाहिए था।
वहीं इस पूरे मामले को लेकर हरीश चौधरी कहते हैं जो अपनी संस्कृति और परंपराओं में पूजनीय पीपल तथा खेजड़ी के वृक्षों की सही पहचान तक नहीं कर पा रहे। वह संस्कृति की रक्षा के बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं। थार की जनता दिखावे और वास्तविक समझ का फर्क अच्छी तरह समझ रही है। प्रधानमंत्री जी क्या यह पौधा आपकी नजर में खेजड़ी है? पीएम मोदी से सवाल किया जाता है। तमाम विपक्षी नेता सवाल करते हैं। उसके बाद क्या होता है? जब सोशल मीडिया पर भयंकर मजाक बनता है, कांग्रेस सहित विपक्षी दल के नेता, प्रवक्ता सब मजाक उड़ाते हैं, तो इस पोस्ट को डिलीट कर दिया जाता है। लेकिन यह पूरा मामला बीजेपी के उन नेताओं को भी जवाब है जो अक्सर राहुल गांधी का मजाक उड़ाते हैं कि राहुल गांधी को गेहूं की खेती और चने की खेती का फर्क नहीं पता है। पहचान नहीं पाएंगे कौन सा गेहूं का पौधा है और कौन सा चने का पौधा है।
तो पीएम मोदी को तो पहचानना चाहिए था। पूरे आत्मविश्वास के साथ खेजड़ी का पौधा बता रहे हैं जो इस बात को दिखाता है कि टेलीप्रटर कितना कॉन्फिडेंस दे देता है। जबकि हकीकत कुछ और नजर आती है।