पश्चिम बंगाल के दक्षिणेश्वर रेलवे स्टेशन पर आज सुबह एक बड़ा हादसा होते-होते बच गया। स्टेशन पर रोज की तरह सैकड़ों यात्रियों की भीड़ थी। प्लेटफार्म पर ट्रेन खड़ी थी और लोग अपनी-अपनी मंजिल पर जाने की तैयारी में थे। लेकिन तभी कुछ ही सेकंड्स में पूरे स्टेशन पर चीख पुकार और अफरातफरी मच गई।
अचानक डाउन लाइन पर लगा ओवरहेड इक्विपमेंट यानी बिजली का तार टूट कर नीचे आ गिरा। तार गिरते ही एक जोरदार धमाके जैसी आवाज हुई और चारों तरफ तेज निकलने लगी। ट्रेन के अंदर और प्लेटफार्म पर मौजूद यात्रियों को लगा कि कोई बड़ी अनहोनी हो गई है। उठती देख लोग अपनी जान बचाने के लिए बदहवास होकर इधर-उधर भागने लगे।
डरावनी बात यह थी कि जिस वक्त यह तार टूटा उस समय ट्रेन के अंदर भी भारी संख्या में यात्री सवार थे। लेकिन इस बड़े खतरे के बीच राहत की सबसे बड़ी खबर यह रही कि यह इस घटना में किसी भी यात्री को कोई चोट नहीं आई और एक बड़ा हादसा होने से टल गया।
रेलवे जानकारों के मुताबिक ट्रेन के डिब्बे की धातु से बनी बनावट और फैराडो केज सुरक्षा तकनीक की वजह से बिजली का खतरनाक झटकायात्रियों तक नहीं पहुंचा और सारा विद्युत प्रवाह सुरक्षित रूप से जमीन में समा गया। यही वजह रही कि ट्रेन के अंदर मौजूद सभी यात्री पूरी तरह सुरक्षित रहे। घटना की खबर मिलते ही रेलवे के महकमा तुरंत अलर्ट हो गया। सुरक्षा के मद्देनजर डाउन लाइन की बिजली आपूर्ति को फौरन रोक दिया गया।
इसके बाद रेलवे की तकनीकी टीम औजारों के साथ मौके पर पहुंची और क्षतिग्रस्त ओवरहेड लाइन की मरम्मत का काम स्तर पर शुरू किया गया। बिजली काटे जाने के कारण कुछ देर के लिए डाउन लाइन पर ट्रेनें की आजावाही पूरी तरह ठप हो गई। कई ट्रेनों को बीच में रास्ते में ही रोकना पड़ा तो कुछ बेहद धीमी रफ्तार से चलाई गई।
हालांकि रेलवे कर्मचारियों की मुस्तैदी के कारण कुछ ही देर में स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया और मरम्मत के बाद ट्रेनें का परिचय फिर से सामान्य कर दिया गया। फिलहाल रेलवे प्रशासन ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं।
इस बात का पता लगाया जा रहा है कि आखिर इतना हाई टेंशन तार अचानक कैसे टूट गया। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद सख्त कदम उठाया जाएगा ताकि भविष्य में किसी भी स्टेशन पर यात्रियों की सुरक्षा से ऐसा खिलवाड़ दोबारा ना हो।