क्योंकि सास भी कभी बहू थी कि बा और डॉन फिल्म का खूंखार [संगीत] विलन वरदान दोनों की लव स्टोरी जितनी अनोखी थी उससे कहीं ज्यादा हैरान करने वाला था कि क्या कोई मरने के [संगीत] 7 साल बाद तक फिल्में साइन कर सकता है आप कहेंगे नहीं लेकिन बॉलीवुड के महान एक्टर ओम शिवपुरी ने यह [संगीत] कारनामा कर दिखाया था। 1990 में उनका निधन हुआ और 1997 तक उनकी फिल्में रिलीज होती रहीं। आखिर कैसे मुमकिन [संगीत] हुआ यह चमत्कार?
चलिए जानते हैं आज के इस एपिसोड में। भारतीय सिनेमा [संगीत] और रंगमंच थिएटर के दिग्गज अभिनेता ओम शिवपुरी का जीवन संघर्ष, कला और एक बेहद खूबसूरत प्रेम कहानी का [संगीत] संगम रहा है। हिंदी फिल्मों में खलनायक और चरित्र कलाकार के रूप में अपनी अमिट छाप छोड़ने वाले ओम शिवपुरी का जन्म 14 जुलाई 1938 को [संगीत] पंजाब पटियाला में हुआ था। ओम शिवपुरी ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान और पंजाब के रेडियो स्टेशनों जैसे जयपुर और जालंधर में काम करके की। अभिनय के प्रति जुनूनी होने के कारण उन्होंने दिल्ली के मशहूर [संगीत] नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में दाखिला लिया। ओम शिवपुरी की प्रेम कहानी उनकी पत्नी [संगीत] सुधा शिवपुरी टीवी सीरियल क्योंकि सास भी कभी बहू थी कि प्रसिद्ध बा के साथ बेहद दिलचस्प रही। दोनों की मुलाकात [संगीत] ऑल इंडिया रेडियो में काम करने के दौरान हुई थी।
सुधा जी की आर्थिक स्थिति अच्छी ना होने के कारण वे पढ़ाई छोड़ना चाहती थी। लेकिन ओम शिवपुरी ने उन्हें प्रोत्साहित किया और [संगीत] उनका ग्रेजुएशन पूरा करवाया। जब ओम एनएसडी चले गए तो उन्होंने सुधा जी से कहा कि उन्हें पारिवारिक जिम्मेदारियां [संगीत] निभाने तक थोड़ा इंतजार करना होगा। जब सुधा जी के घरवाले उनके लिए रिश्ते ढूंढने लगे तो ओम शिवपुरी ने उन्हें भी एनएसडी दिल्ली बुला लिया ताकि [संगीत] दोनों साथ रहकर काम सीख सकें और शादी का दबाव टल सके। जब दिल्ली में एक रिश्ता सुधा [संगीत] जी को देखने पहुंचा तो उन्होंने मना कर दिया।
आखिरकार 1968 में दोनों ने शादी कर ली। 1971 में फिल्म आषाढ़ [संगीत] का एक दिन से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत करने के बाद ओम शिवपुरी 1974 में मुंबई शिफ्ट हो गए। दो दशकों के करियर में उन्होंने 175 से अधिक फिल्मों में काम [संगीत] किया। प्रमुख फिल्में शोले, डॉन, वर्धन का किरदार, कोशिश, आंधी, द बर्निंग ट्रेन, इंसाफ [संगीत] का तराजू और नमक हराम। अपनी भारी और रूबीली आवाज के कारण वे 70 और 80 के दशक के लगभग हर बड़ी फिल्म में विलेन या सीनियर पुलिस अधिकारी स्लैश जज की भूमिका में नजर आते थे। ओम शिवपुरी और सुधा शिवपुरी के दो बच्चे हैं।
बेटी रथू शिवपुरी, फिल्म आंखें फेम [संगीत] अभिनेत्री और बेटा विनीत। 15 अक्टूबर 1990 को महज 52 वर्ष की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से ओम शिवपुरी [संगीत] का असमय निधन हो गया। उनकी मौत के बाद भी उनकी कई फिल्में सिनेमाघरों में रिलीज होती रहीं। कई फिल्मों की शूटिंग ओम शिवपुरी अपने जीते जी पूरी कर चुके थे। लेकिन उनकी डबिंग बाकी थी। मेकर्स ने उनके [संगीत] जैसे ही भारी आवाज वाले डबिंग आर्टिस्ट की मदद से उनके किरदारों को आवाज दी। हिंदी सिनेमा में बहुत कम ऐसे कलाकार हुए हैं [संगीत] जिनकी मौजूदगी उनके जाने के इतने सालों बाद तक सिल्वर स्क्रीन पर महसूस की गई। राजेश खन्ना के साथ 31 [संगीत] से अधिक फिल्में और अमिताभ बच्चन के साथ डॉन, वरदान जैसे यादगार रोल करने वाले ओम शिवपुरी का यह रिकॉर्ड उनकी [संगीत] जबरदस्त मांग और व्यस्तता को दर्शाता