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‘ओम शांति ओम’ एक फिल्म नहीं पर दिव्या भारती का वो राज है जो आज तक कोई नहीं जानता?

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5th अप्रैल 1993 मुंबई की एक घनी अंधेरी रात एक 19 साल की सुपरस्टार जो उस वक्त बॉलीवुड पर राज कर रही थी। अपनी फिफ्थ फ्लोर की विंडो से नीचे गिरती है और सिर्फ कुछ ही मिनट के अंदर पूरी फिल्म इंडस्ट्री का सुनहरा ग्लैमरस कल हमेशा के लिए काला हो जाता है। बट वेट द स्टोरी गेट्स इंटरेस्टिंग। इस ट्रेजडी के ठीक 14 साल बाद 2007 में शाहरुख खान एक ब्लॉकबस्टर फिल्म बनाते हैं। ओम शांति ओम। एक ऐसी फिल्म जहां एक बड़ी फीमेल सुपरस्टार को उसका प्रोड्यूसर पति धोखे से सेट पर आग लगाकर मार देता है। अपना रिश्ता छुपाने और साथ में कई और राज छुपाने के लिए। तो क्या यह फिल्म एक एंटरटेनमेंट मसाला मूवी थी? या फिर शाहरुख खान ने पूरे देश के सामने एक बहुत बड़े रियल लाइफ मर्डर मिस्ट्री का पर्दा उठाया था। क्या एसआरके ने ओम शांति ओम अपनी सबसे अच्छी दोस्त दिव्य भारती के लिए एक ट्रिब्यूट के रूप में बनाई थी। आज के वीडियो में हम बॉलीवुड के सबसे डार्क और चिलिंग कॉनस्परेसी थ्योरी के पीछे का सच ढूंढने की कोशिश करेंगे। सो स्टे स्टिल एंड वॉच द वीडियो टिल द वेरी एंड। 1990 के शुरुआत में एक लड़की ने पूरे बॉलीवुड को अपने ग्लैमर, अपनी एक्टिंग, अपनी इनोसेंस और अपनी स्क्रीन प्रेजेंस से हिलाकर रख दिया था। नाम था दिव्या भारती। 25th फरवरी 1974 को जन्मी दिव्या भारती ने सिर्फ 15 साल की उम्र में स्कूल छोड़ दिया ताकि वह एक्टिंग कर सकें। सिर्फ 16 साल की उम्र में उन्होंने तेलुगु सिनेमा में बॉबली राजा से डेब्यू किया जो एक मैसिव ब्लॉकबस्टर बनी और फिर 1992 में जब उन्होंने बॉलीवुड में कदम रखा तो उन्होंने वो किया जो आज तक कोई नहीं कर पाया था। सिर्फ एक सिंगल साल 1992 में दिव्या भारती ने 12 फिल्में की। उनकी एवरेज फीस उस टाइम पर ₹1 लाख से ₹15 लाख पर फिल्म थी।

उनका एस्टीेटेड नेटवर्थ उन दिनों में 2 से 3 करोड़ तक पहुंच चुका था। और फिर इसी दौरान रिलीज़ होती है 1992 की मूवी दीवाना। इस फिल्म ने ना सिर्फ दिव्या भारती को टॉप एक्ट्रेस बनाया बल्कि इसने एक नए एक्टर को भी लॉन्च किया जिसका नाम था शाहरुख खान। एसआरके और दिव्या भारती के बीच एक बहुत प्यारी सी दोस्ती हो गई थी। एसआरके ने एक इंटरव्यू में बताया था कि जब वह डबिंग करके सी रॉक होटल से निकल रहे थे तब दिव्या उनके पास आई और बोली कि यू आर नॉट जस्ट एन एक्टर। यू आर एन इंस्टीट्यूशन। शाहरुख इस बात से इतने टच हुए कि उन्होंने तुरंत जाकर इंस्टिट्यूशन वर्ड का एक्साक्ट मतलब ढूंढा। उन्होंने यू आर नॉट जस्ट एन एक्टर यू आर इंस्टीट्यूशन। एंड आई वाज वैरी टच व्हेन आई से वाओ आई डिडन्ट अंडरस्टैंड इट। सो आई क्विकली वेंट एंड रेड अप द मीनिंग ऑफ़ द सेइंग एंड आई रियलाइज़ दैट दैट मेंट अ लॉट। बट जब सब कुछ परफेक्ट चल रहा था तब पीछे चल रही थी एक ऐसी शेडी कॉन्स्प्रेसी जिसने दिव्या को हमेशा के लिए खत्म कर दिया। शोला और शबनम की शूटिंग के दौरान एक्टर गोविंदा के जरिए दिव्या की मुलाकात हुई। एक यंग प्रोड्यूसर साजिद नाडियरवाला से दोनों में जितनी जल्दी दोस्ती हुई उतनी ही जल्दी प्यार भी हो गया और फिर 10th मई 1992 को सिर्फ 18 साल की उम्र में दिव्या ने साजिद से एक प्राइवेट सीक्रेटिव इस्लामिक निकाह कर लिया जिसके बाद दिव्या इस्लाम में कन्वर्ट हो गई और उन्होंने अपना नाम बदल कर रखा सना नाडियाटड वाला लेकिन इस शादी को बिल्कुल सीक्रेट रखा गया था क्योंकि दिव्या के मैनेजर्स को डर था कि अगर शादी की खबर बाहर आई उनका करियर तबाह हो जाएगा दिव्या कुछ टाइम तक अपने पेरेंट्स के घर ही रहती थी और साजिद से चोरी छुपे में मिलती थी। उनके पापा ओम प्रकाश भारती को इस शादी के बारे में महीनों बाद दिवाली पर पता चला था। लेकिन यहां से कहानी डार्क होती है। 1993 में मुंबई सीरियल ब्लास्ट होते हैं। उस दौर के मीडिया और अंडरग्राउंड रूमर्स के मुताबिक साजिद नाडियाडवाला के कनेक्शंस दाऊद इब्राहिम के डी गैंग से बताए जा रहे थे। एक रूमर यह भी था कि दिव्या को उन अंडरवर एक्टिविटीज और ब्लास्ट की सेंसिटिव डिटेल्स के बारे में पता चल गया था और वह साजिद के इन अंडरवर टायर्स के बिल्कुल खिलाफ थी और इस बात को लेके दोनों के बीच काफी बहस भी हुई थी। एक और वजह यह भी बताई जाती है कि दिव्या भारती प्रेग्नेंट हो गई थी। जिस वजह से नाडियाडवाला ने उन पे अबॉर्शन का प्रेशर बनाया था। एंड देन कम्स द फेटल नाइट।

अप्रैल 5 1993 रात के लगभग 9:00 बजे तुलसी बिल्डिंग्स वसोवा मुंबई के फिफ्थ फ्लोर पर दिव्या के अपार्टमेंट में उस रात उनके ड्रेस डिजाइनर नीता लोला उनके हस्बैंड डॉक्टर श्याम लुल्ला जो एक साइकेटिस्ट थे और दिव्या की बचपन की मेड जो उनके साथ रही थी अमृता कुमारी प्रेजेंट थे। अब कहा जाता है कि दिव्या ने थोड़ी रम पी रखी थी और वह बहुत हाई स्पिरिट्स में थी। मेड अमृता किचन में स्नैक्स बना रही थी और दिव्या खिड़की के पास खड़े जोर-जोर से बातें कर रही थी। अपार्टमेंट में कोई बालकनी नहीं थी। वहां सिर्फ एक खिड़की थी जिसके नीचे लगभग 12 इंच की एक पतली कंक्रीट लेज थी। दिव्या उस खिड़की के बाहर निकलकर उस नैरो लेज पर खड़ी हो गई। जब उनका बैलेंस बिगड़ा तो उन्होंने पीछे मुड़कर खिड़की का फ्रेम पकड़ने की कोशिश की। पर तब तक बहुत देर हो चुकी थी। शी स्लिप्ड एंड प्लंज्ड फाइव स्टोरीज डाउन ऑन द कंक्रीट कोर्टार्ड। कूपर हॉस्पिटल पहुंचने से पहले ही उनकी डेथ हो गई। उनका स्कल पूरी तरह फ्रैक्चर हो चुका था और हैवी इंटरनल ब्लीडिंग हुई थी। पुलिस ने इस केस को 1998 में ऑफिशियली एक्सीडेंटल डेथ घोषित करके क्लोज कर दिया। लेकिन क्या यह सच में एक्सीडेंट था? यहां पर आते हैं कुछ ऐसे सवाल जिन्होंने लोगों को आज तक हैरान करके रखा हुआ है। दिव्या की मौत के ठीक 30 दिन बाद उनकी सबसे क्लोज मेड अमृता कुमारी की एक मैसिव हार्ट अटैक से मौत हो गई। अमृता एक्यूट डिप्रेशन में चली गई थी और पुलिस उससे ढंग से इंटेरोगेट भी नहीं कर पाई थी। निदा लुला और उनके हस्बैंड जो उस रूम में थे उन्होंने इस डेथ पर हमेशा एक अजीब सी चुप्पी साध रखी है। किसी रिपोर्ट में कहा जाता है कि साजिद उस रात वहां नहीं थे। बट बहुत सारी रिपोर्ट्स का मानना है कि साजिद उस टाइम वहीं थे। तो जब उस रात नाडियरवाला वहीं थे तो क्या यह उन्होंने अपने राज छुपाने के लिए और किसी के हाथों यह करवाया या अपने ही हाथ गंदे किए? बिकॉज़ लेट्स बी रियल। जहां ऑलरेडी तीन-चार लोग प्रेजेंट हैं, वह बहुत नशे में किसी अपनी दोस्त को बिना सपोर्ट वाली खिड़की पर क्यों खड़ा होने देंगे? फिर नाडिया वाला का दिव्या के जाने के बाद उन्हें अपनी वाइफ की पहचान देना। आई थिंक इट वाज़ अ कैलकुलेटिव पीआर मूव। और अगर रूमर्स थे अगर इतने स्ट्रांग रूमर्स थे नाडिया वाला अंडरवर्ड कनेक्शन के तो उन्हें इन्वेस्टिगेट क्यों नहीं किया गया? अब बात करते हैं सबसे बड़े ट्विस्ट की। शाहरुख खान जो दिव्या भारती के कोस्टार रह चुके थे। उन्होंने 2007 में अपनी प्रोडक्शन हाउस रेड चिल्लीज़ एंटरटेनमेंट के अंदर ओम शांति ओम प्रोड्यूस की। बट जब आप इस फिल्म के सटल क्लूज़ को देखते हो तो आपको लगता है कि देयर इज मोर टू द स्टोरी। लेट्स लुक एट द पैरेलल। दिव्या भारती का फुल रियल नेम क्या था? दिव्या ओम प्रकाश भारती। और ओम शांति ओम में शाहरुख खान के कैरेक्टर की फर्स्ट लाइफ नेम क्या था? ओम प्रकाश मखीजा। फिल्म में लीड हीरोइन दीपिका पादुकोण एक बहुत बड़े फिल्म प्रोड्यूसर अर्जुन रामपाल से सीक्रेट मैरिज करते हैं।

रियल लाइफ में भी दिव्या भारती ने साजिद नाडियावाला से सीक्रेट मैरिज की थी। मूवी में जब एसआरके अर्जुन रामपाल को फंसाने के लिए डुप्लीकेट एक्ट्रेस लिख के आते हैं तो उसका नाम होता है संध्या। और रियल लाइफ में जब दिव्या भारती ने साजिद से सीक्रेट शादी की थी तो उस शादी की सबसे बड़ी गवाह और उनकी क्लोज फ्रेंड थी उनकी हेयर ड्रेसर संध्या। फिल्म में मुकेश मेहरा शांतिप्रिया को इसलिए मारता है क्योंकि वह प्रेग्नेंट हो जाती है और उनका सीक्रेट बाहर आने वाला होता है। रियल लाइफ में भी जब दिव्या भारती की डेथ हुई तब टेबल और मीडिया में बहुत स्ट्रांग रूमर्स थे कि दिव्या प्रेग्नेंट थी और उनके पति ने उन पर प्रेगनेंसी अवॉर्ड करने का प्रेशर बना रखा था। मूवी में ओम प्रकाश की डेथ के बाद ओम कपूर बॉलीवुड का सबसे बड़ा सुपरस्टार बनता है। रियल लाइफ में भी दिव्या भारती की डेथ के बाद ही शाहरुख खान का करियर अचानक से स्काई रॉकेट हुआ था। और उन्होंने किंग खान का खिताब हासिल किया था। क्या यह सच में सिर्फ कोइंसिडेंसेस हैं? या फिर शाहरुख खान इस फिल्म के जरिए नाडियाडवाला को एक वार्निंग दे रहे थे। अब ऐसा नहीं है कि इन सारी कॉनंस्परेसीज का कभी कोई सामने से काउंटर नहीं आया। क्योंकि सुनने में यह थ्योरी बहुत चिलिंग लगती है। लेकिन जब बॉलीवुड की रियल लाइफ इंडस्ट्री डायनामिक्स को देखते हैं तो एक्सपोज और ट्रिब्यूट वाली थ्योरी थोड़ी सी ना कोलैप्स हो जाती है। क्योंकि जिस साल ओम शांति ओम रिलीज हुई यानी 2007 में उसी साल एक ब्लॉकबस्टर मूवी आई थी हे बेबी। इस फिल्म को डायरेक्ट किया था फरा खान के सगे भाई साजिद खान ने और इस फिल्म के प्रोड्यूसर थे साजिद नाडियाडवाला। तो अगर शाहरुख खान साजिद को एक्सपोज़ करना ही चाहते थे तो उन्होंने उसी साल साजिद नाडियाडवाला की फिल्म हे बेबी में मस्त कलंदर गाने में कैमियो क्यों किया और वाज़ ही बैलेंसिंग इट आउट या फिर उन्होंने यह फरा खान के लिए क्या वी डोंट नो फरा खान ने खुद हे बेबी को कोरियोग्राफ किया है और वो साजिद नाडियारवाला की बहुत अच्छी दोस्त हैं। रक्षाबंधन के अराउंड जब मीडिया ने रूमर्स फैलाए कि एसआरके और साजिद नाडियारवाला के बीच फाइट चल रही है।

तो एसआरके ने खुद नाडियरवाला को एक वार्म क्लेरिफाइंग मैसेज भेजा था। फरा खान ने तब भी यह कहा था कि दिस इज ऑल रबिश रूमर्स एंड देयर इज नो ब्लड बिटवीन अस। एंड आल्सो ओम शांति ओम का प्लॉट किसी रियल लाइफ क्राइम केस से नहीं बल्कि सुभाष गाय के आइकॉनिक फिल्म कर्ज और विमल रॉय की मधुमती से डायरेक्ट इंस्पायर्ड था। आल्सो कहा जाता है कि शांतिप्रिया का कैरेक्टर किसी एक एक्ट्रेस से इंस्पायर्ड नहीं था। बल्कि 70ज की ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी और रेखा पे बेस्ड एक अमेलगमेशन था और दीपिका को भी इस मूवी में उनके रेट्रो लुक्स की वजह से ही कास्ट किया गया था। जबकि उनकी एडिक्शन खराब थी और उनकी वॉइस को डब किया गया था। पूरी कहानी बताने के बाद तुम अपना फाइनल वर्डिक्ट बना सकते हो। लेकिन मुझे डेफिनेटली यह लगता है एसआरके कुक्ड साजिद नाडियावाला विद ओम शांति हो। क्योंकि सबसे बड़ी बात यह है कि एसआरके ने डायरेक्टली कभी साजिद नाडियरवाला के साथ या उसके बैनर के अंडर आज तक कोई काम नहीं किया। क्या शाहरुख खान ने साजिद नाडियावाला को टारगेट करने के लिए फिल्म बनाई थी?

तो आई डोंट थिंक सो। लेकिन वो शायद लोगों को दिव्या की एक क्लियर पिक्चर देना चाहते थे या उनको एक थैंक्स या ट्रिब्यूट देना चाहते थे क्योंकि शी हैड सो मच टू ओन फॉर बॉलीवुड एक बहुत ही क्लोजली नेट सर्कल है। जहां सब एक दूसरे की मदद करते रहते हैं। कोई डायरेक्टली उंगली नहीं उठाता एक दूसरे पे। बट यह एक बात बिल्कुल सच है कि ओम शांति ओम सबकॉन्शियस लेवल पर कॉन्शियस लेवल पर। बॉलीवुड की उन सभी लॉस्ट एक्ट्रेस के लिए एक बेहद सुंदर और सैड ट्रिब्यूट है जिन्होंने बहुत ही कम उम्र में अपनी जान गवाई है। चाहे वो दिव्या भारती हो, बेमी हो या जिया खान। शांतिप्रिया के थ्रू फरा खान और शाहरुख खान ने उनके डेथ को एक सिनेमैटिक जस्टिस दिया। जो रियल लाइफ में तो पहले भी नहीं मिल पाता था, आज भी नहीं मिलता और आगे भी बहुत मुश्किल है। एक ऐसी डेथ जो उन्हें हमेशा के लिए एक एक्सटिंग लैंप बना गई। मतलब व्हाट डू यू गाइस थिंक कि क्या यह सारे पैरेलल सच हैं या जस्ट कोइंसिडेंस यार एसआरके ने यह सब कॉन्शियस लेवल पे डिसाइड करा है लाइक शेयर सब्सक्राइब कर लेना मिलते हैं अगले ऐसे किसी वीडियो में तब तक के लिए पीस

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