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नीला ड्रम केस की आरोपी मुस्कान को नहीं होगी सजा?अनामिका जैन अंबर ने की बड़ी मांग, मचा चकचार!

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मेरठ का वो खौफनाक नीला ड्रम हत्याकांड जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। जिसमें प्रेमी संग मिलकर के युवक के शव के टुकड़े-टुकड़े करने वाली मुस्कान रस्तोगी को अदालत ने मौत की सजा सुनाई। लेकिन अब इस मामले में एक नया और बेहद संवेदनशील मोड़ आ गया है। मशहूर कवि युगल डॉ. अनामिका जैन अंबर और सौरभ जैन सुमन ने अदालत से मुस्कान की फांसी टालने की भावुक अपील कर दी है।

यह पूरा मामला क्या है? जेल की सलाखों के पीछे क्या कुछ बातचीत हुई है? इस खास रिपोर्ट में देखिए। अपराध कितना भी संगीन क्यों ना हो लेकिन जब बात एक बेकसूर नवजात के भविष्य की आती है तो कानून की चौखट पर इंसानियत भी गुहार लगाने पहुंच जाती है। मौका था जैनाचार्य सौरभ सागर जी महाराज के 56वें जन्म जयंती महोत्सव का। इसी सिलसिले में देश के जानेमाने कवि युगल सौरभ जैन सुमन और डॉ. अनामिका जैन अंबर मेरठ जिला कारागार पहुंचे थे। वहां कैदियों को फल बांटने के दौरान उनका सामना एक ऐसे कैदी से हुआ जिसके नाम से कभी लोग कांप उठते थे। यानी नीला ड्रम हत्याकांड के मुख्य आरोपी मुस्कान रस्तोगी। फांसी की सजा पा चुकी मुस्कान रस्तोगी जब अनामिका जैन अंबर से मिली तो उसकी आंखों से आंसू छलक पड़े।

मुस्कान को अपनी मौत का डर तो है लेकिन उससे भी ज्यादा डर उसे अपनी उस दूध मुही बेटी के भविष्य का सता रहा है जो बिना किसी कसूर के इस दुनिया में तनहा होने वाली है। मां के इन्हीं आंसुओं ने कवि युगल के दिलों को झकझोर कर रख दिया। डॉ. अनामिका जैन अंबर ने मुस्कान की बेटी को अपने स्कूल में निशुल्क शिक्षा देने और उसकी पढ़ाई का पूरा खर्च उठाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि मां के अपराध की सजा का असर बच्ची के भविष्य पर नहीं पड़ना चाहिए।

ऐसे में जाकर के देखा उसकी आंखों में जो इस बात को लेकर के प्रायश्चित था या पछतावा था या यह कह लीजिए कि इस बात के लेकर था कि कोई ऐसा चमत्कार हो जाए कि कैसे भी करके फांसी टल जाए और अपनी बच्चियों को लेकर के वो भविष्य अपना तय कर सके। यह चीज देखने को मिली है और हम तो ईश्वर से यही प्रार्थना करते हैं कि न्याय प्रावधान भी बना रहे। लोगों में आगे इस तरह की कोई बात ना हो, ऐसे डर भी पैदा हो, इसके लिए न्याय प्रावधान भी बहुत जरूरी है और बच्चों की जिंदगी भी खराब ना हो। तो इस के बीच का जो रास्ता निकलता हो हमने आदरणीय से भी यही बातचीत हमने की है और यही हमने ईश्वर से प्रार्थना भी की और यही हम समाज से भी और यही हम न्याय प्रावधान से भी कोर्ट में भी यही बात मैं कहूंगी कि ऐसा कोई रास्ता निकले कि दोनों ही चीजें रह जाए। ऐसा भी ना हो कि भाई बदल दिया जाए फैसला और लोगों में डर खत्म हो जाए और ऐसा भी ना हो के बच्चों की जिंदगी।

डॉक्टर अनामिका जैन अंबर ने अदालत से अपील की है कि मुस्कान की बेटी के आत्मनिर्भर होने तक फांसी की सजा टालने के पहलू पर विचार किया जाए। उनका कहना है कि बच्ची का अपने पैरों पर खड़ा होना और उसका भविष्य सुरक्षित होना महत्वपूर्ण है। हालांकि फांसी की सजा पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होगा। आपको याद दिला दें कि मेरठ के इस चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में बीते 14 अक्टूबर को ही जिला अदालत ने मुस्कान रस्तोकी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को फांसी की सजा सुनाई थी। सौरभ की बेरहमी से हत्या करने के बाद उसके शव के टुकड़े कर सीमेंट से भरे नीले ड्रम में छिपा दिए गए थे।

इस क्रूरता अपराध पर कोर्ट के फैसले के बाद सौरभ की मां रेनू देवी और भाई राहुल ने न्याय पर संतोष जताया था। कानून अपना काम कर चुका है और पीड़ित परिवार को इंसाफ मिल चुका है। लेकिन अब मुस्कान की बेकसूर बेटी के पुनर्वास और उसकी पढ़ाई को लेकर कवि युगल की इस मानवीय पहल में समाज और न्यायविदों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है।

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